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ऋषभ की कविताएँ

वह खोए बचपन की तलाश करता हुआ अचानक बच्चों के बीच पहुँच गया। पर यह देखकर सकते में आ गया कि बच्चे तो उससे ज़्यादा बूढ़े लगने लगे हैं।तनाव और थकान से भरे बच्चे बड़े अजनबी से लगे उसे।वे उसे पहचान भी नहीं सके।वह भी कहाँ उन्हें पहचान सका था!खिलना-खिलखिलाना वे भूल चुके थे - अभिनय ज़...
ऋषभ की कविताएँ...
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  April 19, 2017, 8:05 pm
शाम थी कैसी कि नटखट बादलों में हम घिरे थे।सब दिशाएँ खो गई थीं, भटकते यूँ ही फिरे थे।।याद हैं फिसलन भरी क्या चीड़ की वे पत्तियाँ?एक-दूजे को संभाले दूर तक जिनसे गिरे थे।।...
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  April 19, 2017, 7:44 pm
पुतलियों में तैरता जो स्वप्न का संसार था।आपका वर्चस्व था बस आपका अधिकार था।।मैं जिसे गुस्सा समझ ताज़िंदगी डरता रहा;डायरी ने राज़ खोला, आपका वह प्यार था।।...
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  April 19, 2017, 7:42 pm
अमरित की कनी ज़हर में डुबाई है।चमकती हुई तलवार निकल आई है।।यह अलौकिक रूप नज़रें बाँध लेगा;आज बिजली चाँदनी में नहाई है।।...
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  April 19, 2017, 7:41 pm
डर रहे बूढ़े सयाने, सब कहें 'हम क्या करें'?छिप गए सब कोटरों में, जान कर भी क्यों मरें??चाँदनी में बाल खोले, घूमती है प्रेतनी!और बच्चे हैं कि बाहर खेलने की ज़िद करें!...
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  April 19, 2017, 7:36 pm
झल्लाई सी सुबह, पगलाई सी शाम।क्रोध भरी दोपहर, यों ही दिवस तमाम।।प्रेत ठोकते द्वार, ले ले मेरा नाम!रात भूतनी बनी, यहाँ कहाँ विश्राम।।...
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  April 19, 2017, 7:34 pm
खेत काटकर सड़क बना दी, सभी सुखा दीं क्यारी।मथुरा का बाज़ार फैलता, ऊधो हैं व्यापारी।।कहीं तुम्हारी विजय कथा में, मेरा नाम नहीं है!ब्रज का सब कुछ हरण कर लिया, प्रभुता यही तुम्हारी।।...
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  April 19, 2017, 7:32 pm
मैंने जिनके वास्ते सब छल किए।सौ बलाएँ लीं, सदा मंगल किए।।वक़्त का क्या फेर? सत्ता क्या गई?वे मुझी को छोड़, आगे चल दिए।।...
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  April 19, 2017, 7:30 pm
हाथ में लेकर पताका शिखर पर चढ़ता रहा।आदमी अपनी सरहदें खींचकर लड़ता रहा।।भूमि जिसके नाम पर खून से लथपथ पड़ी है!सातवें आकाश पर वह बैठकर हँसता रहा।।...
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  April 19, 2017, 7:29 pm
मरता है कोई छात्र तो सियासत न कीजिए।भूखों मरे किसान तो तिजारत न कीजिए।।हैं आप बड़े बुद्धिमान, शब्दों के खिलाड़ी!लेकिन पिशाच कर्म की वकालत न कीजिए।।...
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  April 19, 2017, 7:27 pm
कल आपने बोई थीं गलियों में नफ़रतें।यों आज लहलहाई हैं घर घर में दहशतें।।नादान बालकों को वहशी बनाने वालो!खाएँगी तुमको एक दिन तुम्हारी वहशतें।।...
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  April 19, 2017, 7:26 pm
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से मधुरिम पराग झरता हैतुम्हारी निगाह से धरा का रँग निखरता है जाग उठती हैं दिशाएँ तुम्हारे आने सेतुम्हारे गाने से सूरज उड़ान भरता है...
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  April 19, 2017, 7:23 pm
एक पगली छोकरी।फूलों की टोकरी।।खुशबू ने कर ली उसके घर नौकरी।।...
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  April 19, 2017, 7:21 pm
दम तोड़ने से पहले सपने नीले पड़ गए थे,होंठ ऐंठ गए थे सफेद फेन उगलते-उगलते;अच्छा हुआ, नींद में ही तड़क गई थीं नसें,दम टूट गया; नींद नहीं टूटी!जल्लाद! तुम सचमुच कितने दयालु हो!! ...
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  April 19, 2017, 7:19 pm
होंठ पर थे गीत मेरे, साँस में मेरी कहानी थी।उन दिनों आपको मेरी हर अदा लगती सुहानी थी।।आज बरसों बाद अपनी समझ में यह बात आई है;आपने चाहा जिसे वह मैं न था, मेरी जवानी थी।।...
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  April 19, 2017, 7:16 pm
मौसम का हालचाल, हमसे न पूछिए।यारों की चाल-ढाल, हमसे न पूछिए।।नेता की रग में पैठ के, कुर्सी के कीट ने -क्या-क्या किया कमाल,हमसे न पूछिए।।...
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  April 19, 2017, 7:14 pm
दुश्मन के संग वास की आदत से लाचार हूँ।वर्षा के बीच प्यास की आदत से लाचार हूँ।।मैं जानता हूँ, आज फिर तुमने झूठ कहा है;पर क्या करूँ, विश्वास की आदत से लाचार हूँ।।...
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  April 19, 2017, 7:12 pm
कब कहा मैंने कि मुझको बाँह में अपनी भरो।कब कहा मैंने कि आहें याद में मेरी भरो।।यह तुम्हारा रूप पावन, दृष्टि को पावन करे;प्राण में गूँजा करे, बस, तान कुछ ऐसी भरो।...
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  April 19, 2017, 7:11 pm
फिर सुहानी भोर आई, मित्रवर, तुमको नमन।ऊर्जा की धूप छाई, मित्रवर, तुमको नमन।।यह दिवस उल्लास में, आनंद में खिलता रहे;शुभकामना संदेश लाई, मित्रवर, तुमको नमन।।...
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  April 19, 2017, 7:09 pm
संभव नहीं कि शक्ति हो औ'ज़्यादती न हो।इतना करो कि ज़्यादती को ज़्यादती कहो।।जनता के चारणो! सुनो,सत्ता के मत बनो;तुम जागते रहो कि कहीं ज़्यादती न हो।।6/4/2017...
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  April 17, 2017, 3:34 pm
छज्जे प'चोंच लड़ाते कबूतरों को देख कर;बस्ती के दारोगा ने कल बंदूक दाग दी।।सरकार के फरमान से हम इस कदर डरे;बचपन के सारे खतों को रो रो के आग दी।।6/4/2017...
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  April 17, 2017, 3:31 pm
बदज़ुबानों की सभा की, क्या सदारत कीजिए?क्यों किसी पर सच जताने, की हिमाकत कीजिए??मौन ही रहना उचित है, इस नए माहौल में;प्यार की बातें न करिए, बस सियासत कीजिए!!6/4/2017...
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  April 17, 2017, 3:27 pm
यह विषम पथ, नाथ!मैं कैसे चलूँ?अब तुम्हारे साथ मैं कैसे चलूँ?लोग हाथों में लिए पत्थर खड़े:हाथ में दे हाथ मैं कैसे चलूँ?6/4/2017...
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  April 17, 2017, 3:24 pm
प्रभुओं से सावधान औ'प्रभुता से सावधान।दंगल में जीत कर मिली सत्ता से सावधान।।सीता के घर में झाँकते धोबी कई-कई!नेता तो खैर ठीक है जनता से सावधान।।5/4/2017...
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  April 17, 2017, 3:19 pm
कीमत घटी इनसान की खैर मनाओ।इस दौर में भगवान की खैर मनाओ।जब सौंप दी अंधों को बंदूक आपने!अब आप अपनी जान की खैर मनाओ।।5/4/2017...
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  April 17, 2017, 3:15 pm
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