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ऋषभ उवाच

यह महान दृश्य है...@01मार्च,2019भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को अंतत: पाकिस्तान ने विधिवत भारत को सौंप दिया। भारत भर में दीवाली का हर्ष छा गया। वह क्षण अत्यंत रोमांचकारी और गौरवपूर्ण था जब भारतमाता के इस सपूत ने मातृभूमि की सीमा में वापस प्रवेश किया। उस ऐ...
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  March 4, 2019, 8:48 am
साहित्य : सुधारात्मक दृष्टिकोण-ऋषभदेव शर्मा एवं पूर्णिमा शर्मासाहित्य की भारतीय अवधारणा ‘सहित’ अर्थात सामाजिकता, सामूहिकता और लोकमंगल के साथ जुड़ी हुई है। साहित्य के प्रयोजनों की चर्चा करते हुए यहाँ ‘शिवेतर’ की ‘क्षति’ का भी  बलपूर्वक आख्यान किया गया है। समाज क...
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  December 31, 2018, 1:31 am
सं. बिश्नोई, मिलन (2018), किन्नर विमर्श : साहित्य और समाज, कानपुर : विद्या भूमिका उत्तर आधुनिक विमर्श का दौर आने पर हिंदी साहित्य सृजन और समीक्षा के क्षेत्र में परिधि का केंद्र की ओर सरकने का जो क्रम शुरू हुआ था, उसके काफी अच्छे परिणाम निकले हैं। कल तक जो समुदाय और मुद्दे स...
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Tag :पुस्तक
  December 29, 2018, 10:06 pm
भक्तिकाल में सगुणमार्गीय कवियों का एक वर्ग रामभक्ति काव्यधारा के रूप में माना जाता है। इसमें सगुण भक्ति के आलंबन के रूप में विष्णु के अवतार राम की प्रतिष्ठा है। यहाँ ‘राम’ का अर्थ परब्रह्म या ऐसी परम शक्ति है जिसमें सभी देवता रमण करें। बाद में यह ‘दशरथपुत्र राम’ का व...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 4:38 pm
सगुणमार्गीय भक्तिकाव्य में कृष्ण को आराध्य मानने वाले कवियों ने कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा का विकास किया। भारतीय संस्कृति में कृष्ण का व्यक्तित्व अत्यंत विलक्षण माना जाता है। ऋग्वेद, उपनिषद, महाभारत तथा हरिवंश, विष्णु, भागवत, ब्रह्मवैवर्त आदि पुराणों में उपलब्धता क...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 4:34 pm
निर्गुण काव्यधारा के “जिन कवियों ने प्रेम द्वारा ईश्वर की प्राप्ति पर बल दिया, वे प्रेममार्गी अथवा सूफी कवि कहलाए। जायसी, मंझन, कुतुबन, उस्मान आदि इस धारा के प्रतिनिधि कवि हैं। इन कवियों की सभी रचनाएँ (पद्मावत, मृगावती, मधुमालती, चित्रावली) भारतीय प्रेम गाथाओं की कथाव...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 4:12 pm
भक्तिकाल को ‘हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता है। इस काव्य की दो मुख्य धाराएँ हैं – एक निर्गुण काव्य धारा, दो – सगुण काव्य धारा। इनके भी प्रवृत्तिगत दो-दो भेद हैं। निर्गुण धारा के अंतर्गत (1) निर्गुण संत काव्य (ज्ञानाश्रयी शाखा) तथा (2) प्रेमाख्यानक काव्य (प्रेमाश्रय...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 3:52 pm
भक्तिकाल : पृष्ठभूमि : सांस्कृतिक परिस्थिति सांस्कृतिक दृष्टि से भक्तिकालीन वातावरण में हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का आमना-सामना, विरोध और समन्वय घटित हुआ। मध्यकालीन हिंदू संस्कृति में लोक और शास्त्र सम्मत अलग-अलग जीवनधाराएँ विद्यमान थीं, जिनके द्वारा साहिष्...
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  October 7, 2018, 5:15 pm
भक्तिकालीन साहित्य की पृष्ठभूमि में विद्यमान समाज संक्रमण काल से गुजरने वाला समाज है। यों तो भारतीय समाज में अलग-अलग स्रोतों से आई हुई जातियाँ सम्मिलित थीं, जो इस काल से पूर्व ही सामंजस्य की प्रक्रिया को पूर्ण कर चुकी थीं; परंतु इस काल में एक ऐसी जाति का आगमन विजेता के ...
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  October 7, 2018, 5:10 pm
राजनैतिक दृष्टि से भक्तिकाल के एक छोर पर मुहम्मद तुगलक और दूसरे छोर पर शाहजहाँ की सत्ता विद्यमान है अर्थात यह काल भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण समय है जिसमें दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश से लेकर मुगलवंश तक का आधिपत्य रहा। मुहम्मद तुगलक एक सनकी परंतु निष्पक्ष शासक ...
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Tag :हिंदी
  October 7, 2018, 5:04 pm
14 वीं शताब्दी के मध्य से 17 वीं शताब्दी के मध्य तक के काल को हिंदी साहित्य के इतिहास में पूर्वमध्यकाल और भक्तिकाल कहा जाता है। इस काल का समग्र साहित्य मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की काव्यात्मक परिणति है और उस व्यापक जनजागरण के प्रेरणा सूत्र इसमें छिपे हैं, जिसने मध्यकालीन र...
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Tag :छात्रोपयोगी
  October 7, 2018, 5:00 pm
तुलसी के राम का स्वभाव अत्यंत कोमल है। उन्हें रिझाने के लिए बस एक ही योग्यता चाहिए। भक्त के हृदय में अगर सच्चा प्रेम है तो राम इतने दयालु हैं कि उसके सारे पापों और अपराधों का तुरंत शमन कर देते हैं और पापमुक्त करके अपनी शरण में ले लेते हैं। इसीलिए बाबा कहते हैं कि मेरे रा...
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Tag :
  September 22, 2018, 2:20 am
अवधेश कुमार सिन्हा (ज. 9 सितंबर, 1950) की 68वीं वर्षगाँठ पर उनकी शोधपूर्ण कृति "प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप एवं महत्व)" (2018. हैदराबाद : मिलिंद प्र.) का प्रकाशन/लोकार्पण हैदराबाद के हिंदी जगत के लिए अत्यंत हर्षकारी है।  अवधेश जी बहुज्ञ लेखक हैं। उनका वैज्ञानिक और तर्कपूर्ण ...
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Tag :जन्मदिन
  September 7, 2018, 8:03 pm
राम लोक के देवता हैं। लोकप्रिय हैं। लोक रक्षक हैं। लोकाभिराम हैं। इसलिए अयोध्या के राजमहल से बाहर निकलते ही वे स्वयं को लोक में विलीन कर देते हैं। लोक जितनी तीव्रता से अपने राम की ओर उमड़ता है, राम भी उतनी उत्कटता से लोक को अपने में समेटते हैं। तुलसी बाबा बताते हैं कि रा...
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Tag :
  July 31, 2018, 12:30 am
आजकल जिसे देखिए वही गठबंधन और समझौते की बातें करता दिखाई देता है। किसी तात्कालिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए किए जाने वाले ऐसे गठबंधन बिखर भी बहुत जल्दी जाते हैं। दरअसल किन्हीं दो व्यक्तियों या संस्थाओं का लंबे समय तक या आजीवन साथ-साथ चलना तब तक संभव नहीं जब तक उनके परस्...
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  July 31, 2018, 12:24 am
दो शब्द‘हिंदी है हम विश्व मैत्री मंच’ की स्थापना तथा ‘हिंदी की दुनिया और दुनिया में हिंदी’ का प्रकाशन एक सपने के फलीभूत होने जैसी सुखद घटनाएँ हैं. सपने को फालतू चीज न समझें, वह भी चेतना की अवस्थाओं में से एक है. सपना देखे बिना कुछ हो भी नहीं सकता. यह सृष्टि ईश्वर का और ईश्...
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Tag :पुस्तक
  July 6, 2018, 10:28 pm
पुण्य तिथि 28 मई पर विशेषरहनुमा तो नहीं हो, साँप ही तो हो : पं. गोपाल प्रसाद व्यास-ऋषभ देव शर्माउन्होंने कक्षा सात की भी परीक्षा नहीं दी थी, लेकिन वे अलंकारशास्त्र, रससिद्धांत, नायिकाभेद और समस्त ललित कलाओं के विशेषज्ञ थे. उनका जन्म ब्रजमंडल के एक छोटे से गाँव में हुआ था, ...
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Tag :आलोचना
  May 28, 2018, 1:34 pm
रामकथा आधारित एनिमेशन ‘सीता सिंग्स द ब्ल्यूज़’ : एक अध्ययनऋषभदेव शर्मा और कुमार लव‘रामायण’, ‘महाभारत’ और ‘बृहत्कथा’ भारतीय वाङ्मय के ऐसे आकर-ग्रंथ हैं जिनकी कथाएँ अनेक रूपों में देसी लोकसाहित्य से लेकर विदेशी साहित्य तक में फैली हुई हैं. इनमें भी विशेष रूप से अपनी सर...
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Tag :नीना पाले. एनीमेशन
  May 25, 2018, 11:10 am
प्रवासी हिंदी कवियों की संवेदना : सरोकार के धरातल - ऋषभ देव शर्मा हिंदी कविता का फलक आज पूरी तरह से अक्षेत्रीय हो चुका है. हिंदी के साहित्य-जगत में अब कभी सूरज डूबता नहीं है. कक्षाओं में भले ही यह पढ़ाया जाता हो कि हिंदी अमुक-अमुक सीमित भू-खंड की भाषा है, परंतु उसका प्रसार ...
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Tag :आलोचना
  May 24, 2018, 4:59 pm
उपन्यास को आधुनिक युग का महाकाव्य कहा जाता है. इसका कारण यह है कि इस विधा में महाकाव्य की भाँति संपूर्ण जीवन को समेटने तथा भूत, भविष्य और वर्तमान को एक साथ संबोधित करने की महती संभावनाएँ निहित हैं. यही कारण है कि आधुनिक उपन्यास से हम यह भी अपेक्षा करते हैं कि वह समकालीन ज...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  March 21, 2018, 12:42 pm
प्रो. ऋषभदेव शर्मा के कक्षा-व्याख्यानों के आधार पर डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा द्वारा लिप्यंकिततुलनात्मक भारतीय साहित्य : अवधारणा और मूल्य - प्रो. ऋषभदेव शर्मा [1]सामान्य साहित्यतुलनात्मक साहित्य का अध्ययन करते समय तीन परस्पर निकटस्थ अवधारणाओं से टकराना पड़ता है. ये ह...
ऋषभ उवाच...
Tag :तुलनात्मक साहित्य
  March 21, 2018, 3:16 am
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ऋषभ उवाच...
Tag :
  February 27, 2018, 5:46 pm
भारतीय साहित्य के अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए हमें पहले यह जानना होगा कि भारतीय साहित्य का निजी परिप्रेक्ष्य क्या और कैसा है. आज  विश्व साहित्य के माध्यम से और विश्व में जो समाज-सांस्कृतिक और राजनैतिक परिवर्तन हो रहे हैं, उनके प्रभाव को ग्रहण करके एक...
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  February 27, 2018, 4:39 pm
 हिंदी साहित्य के विश्व परिप्रेक्ष्य को हमें हिंदी की आज की स्थिति के सापेक्ष  विवेचित करना होगा. इसमें संदेह नहीं कि आज हिंदी  का विस्तार पूरी दुनिया में है. बहुत सारे देशों में, विश्वविद्यालयों में, हिंदी पढ़ी-पढाई जाती है. हिंदी में लिखने वाले भारतीय और भारतेतर ल...
ऋषभ उवाच...
Tag :
  February 27, 2018, 4:09 pm
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