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मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प

कोण नज़रों का मेरे  सदा सम  रहान्यून तो किसी को अधिक वो लगाघात की घात क्या जान पाये नहींहम महत्तम हुए न लघुत्तम कहींरेखा ह...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  March 13, 2015, 11:48 am
दिल तोड़ नहीं देनासोज़ के'सागर मेंयूँ छोड़ नहीं देनाक्या शोख़ नज़ारे हैंपूछ ज़रा दिल सेहम कौन तुम्हारे हैंहर ओर उदासी हैबोल र...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  February 1, 2015, 10:41 pm
बिन उसके मोरि रैन कटै न,जीवन का अंधियार मिटै न,उसके बिन मैं जल बिन मछरी,ए सखि साजन? ना सखि बिजुरी!लई जावै मोरा परिवार,मोहे घु...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  January 24, 2015, 8:49 pm
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएंनदी नहीं यह गंगा केवल, जीवन का आधार यही।सदियों से इस धरती पर ये,जग की &#...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  January 14, 2015, 8:21 pm
         कथा सुनो शबाब की     सवाल की जवाब की     कली खिली गुलाब की     बड़े  हसीन  ख़ाब  की              नया नया विहान था    &#...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  January 10, 2015, 1:17 pm
लरिका अक्याल मिसरा जी का, उई बड़े जतन से पालेन।खान-पान, सिच्छा-दिच्छा मा, कमी न कउनौ राखेन।होनहार लरिका उनका जब, लिख-पढ़ि क...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  January 8, 2015, 6:44 pm
महाभुजंगप्रयात सवैया छंदनशा सा हुआ है तुझे देखके यूँ,सुरापान जैसे कि मैंने किया है।बुरा काम तूने किया है सुनैना,ख़ुदार&...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  January 7, 2015, 12:19 am
प्रेम भाव और सत्य अहिंसा, नीति हमारी रही महान विश्व बन्धु है हम यह कहते,सदा चले हम ऐसा मानछेड़ा हमको किन्तु किसी ने, तो उसकी आफ़त में जानयम सम बनकर टूट पड़ें जो, ऐसे अपने वीर जवानएक पड़ोसी अपना ऐसा, जो समझो पूरा शैतानकरे सदा नापाक हरकतें, नाम धरे है पाकिस्तानसन इकहत्तर ...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  December 6, 2014, 7:45 am
एक जलहरण घनाक्षरी8-88-8पदांत लघु गुरुप्रीत है पुनीत रीत,  गाओ मीत प्रेम- गीतभीत-भाव त्याग कर, सुप्रेम वृष्टि कीजियेअंग-अंग रंग भर, मन में  उमंग भरतरंग ढंग ले नई, नवीन सृष्टि कीजियेमानकर प्रथा यथा, व्यथा कथा न हो वृथा हूँ न कुछ न था कभी, दया सुदृष्टि कीजियेचित्र है विचित...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  November 17, 2014, 7:27 pm
एक जलहरण घनाक्षरी8-88-8पदांत लघु गुरुप्रीत है पुनीत रीत,  गाओ मीत प्रेम- गीतभीत-भाव त्याग कर, सुप्रेम वृष्टि कीजियेअंग-अंग रंग भर, मन में  उमंग भरतरंग ढंग ले नई, नवीन सृष्टि कीजियेमानकर प्रथा यथा, व्यथा कथा न हो वृथा हूँ न कुछ न था कभी, दया सुदृष्टि कीजियेचित्र है विचित...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  November 17, 2014, 7:27 pm
पूजन अर्चन  वंदन है  नित भक्त  सभी अब  मात पुकारें रिद्धि व सिद्धि प्रदायक माँ करके किरपा मम द्वार पधारेंप्रेम   प्रकाश  यहाँ  बिखरे  सबके मन-मंदिर  दीपक  बारेंमानव  रक्त  पिपाषु बना  उसके अब तो  सब कर्म सुधारें                          &nb...
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  October 28, 2014, 9:57 pm
कुछ याद उन्हें भी कर लोजो लौट के घर ना आये..... जो लौट के घर ना आये...आँखों में आँसू, ज़ेहन में कितने सवाल लाया हैआज तिरंगे में लिपटा किसी का लाल आया हैराहें उसकी तकते तकते, बूढ़ी आँखें पथराई होंगीउसे सुलाने को माँ ने कभी लोरियां गाई होंगीउसकी तुतली बोली पर सब कुछ वार दिया ...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  October 10, 2014, 11:49 pm
गांठें ही गांठें हों जिसमें ऐसे बंधन देख लिएकांटे ही कांटे हों जिसमें ऐसे दामन देख लिएप्यार की दिलकश म्यानों में नफ़रत की शमशीर यहाँशिफ़ा के नाम पे ज़ख्म कुरेदे ऐसे मरहम देख लिएउन्स वफ़ा के गुलशन में खिलते फूल अज़ाबों केतेज़ाबी बारिश के मैंने ऐसे सावन देख लिएलिखा किताबों ...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  October 6, 2014, 9:03 pm
राम जहाँ हनुमान वहीं  भवसागर  तारण  हार  वही हैंराम कृपा नित पात्र वही  नित जो हनुमंत दुआर वही हैंकाय महा छवि है जिनकी शिव शंकर के अवतार वही हैंभक्त शिरोमणि राम सखा सम जीवन में करतार वही हैं...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  October 6, 2014, 8:40 pm
तन आज़ाद तो मन क्यूँ आज़ाद नहीं होताप्रेम सद्भाव जहाँ में क्यूँ बुनियाद नहीं होतादेश के सीने पे ख़ंजर चलाने वालों को अबबलिदान शहीदों का क्यूँ याद नहीं होताजाने बुलबुलें कितनीं रोज़ दम तोड़ती यहाँज़ालिम सैयाद ही क्यूँ बर्बाद नहीं होताहर तरफ़ हैं नफ़रतें, हर तरफ़ रुसवाइयांगु...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  October 6, 2014, 8:34 pm
बिना  विचारे  कीजिये, मत  कोई  भी काममस्त चित्त निज राखिये, जीवन में आरामजीवन   में   आराम,  बंसी   चैन   की  बाजैसुखी   रहे   परिवार,  मुख   मुस्कान  छाजैकहते   कवि   निर्दोष,  रहो  प्रभु  राम सहारेखोया  धन सम्मान, किया  जो बिना विचारेसोना  चा...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  October 6, 2014, 7:57 pm
इस तरह तनहा न हमें छोड़कर जाइयेसुकूं मिलता हो पहलू में तो ठहर जाइयेत'आर्रुफ़ है नया,मुलाक़ात चंद लम्हों कीधीरे-धीरे आप यूँ ही दिल में उतर जाइयेग़ज़लें भी होंगी, गीत और रुबाई भीकभी मेरी महफ़िल में भी नज़र आइयेज़िन्दगी बुलाती है तो जाइये बड़े शौक़ सेमगर दुवाएं भी मेरी साथ लेकर जाइ...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  May 24, 2014, 4:10 pm
अब देर समझिये और बस अंधेर समझियेसमझते हों तो क़िस्मत का फेर समझियेसमझ न आयेंगे ये सियासत के पेच-ओ-ख़म पीटिये तालियाँ,किसी ऊँचे शायर का शे'र समझियेआतिश हो सीनों में चाहे जितनी दफ़न यारोंभड़केगी नहीं, सीली हुई बारूद का बस ढेर समझियेअपने क़ातिल को लाते हैं ख़ुद सरताज ब...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  November 17, 2013, 11:20 am
डगर डगर तम नगर नगरघर घर, दर दर आडम्बरकर कृपाण अब धारण करयुग रचो नया, नव संवत्सरमेरे प्रियवर ओ मेरे प्रियवर....कुल काक कंठ, कुल कोकिल स्वरभयभीत फिरें कुल बन कायरउठ जाग वीर, बन नर नाहरसंधानो अरि मस्तक पर  शरमेरे प्रियवर ओ मेरे प्रियवर....बरस, मास, दिन, आठ पहरजीवन व्यर्थ यदि ...
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  September 29, 2013, 10:09 pm
मित्रों आज मातृदिवस है, वर्ष में कई प्रकार के दिवस मनाये जाते है जैसे महिला दिवस, पितृ दिवस आदि. वास्तव में इस प्रकार से दिवस मनाने की हमारी संस्कृति नहीं है, यह उधार की संस्कृति है या यूँ कहें कि संस्कृतियों के संक्रमण का प्रभाव है, यह वहाँ की संस्कृति है जहाँ लोग वर्ष भ...
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  May 13, 2013, 12:03 am
''माँ मुरादें पूरी कर दे, हलवा बाँटूंगी''मुरादें पूरी नहीं होगी तो हलवा नहीं बंटेगा.....??? माँ के लिए- प्रोत्साहन,  ऑफर या घूस की पेशकश .....???     किसी भी धर्म में जहाँ कहीं दान, ज़कात की बात कही गई है उसके साथ एक शब्द और जोड़ा गया है .... ''निःस्वार्थ''.... मतलब यह कि उसके बदले किसी चीज़ की ...
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  April 20, 2013, 10:27 pm
''माँ मुरादें पूरी कर दे, हलवा बाँटूंगी''मुरादें पूरी नहीं होगी तो हलवा नहीं बंटेगा.....??? माँ के लिए- प्रोत्साहन,  ऑफर या घूस की पेशकश .....???     किसी भी धर्म में जहाँ कहीं दान, ज़कात की बात कही गई है उसके साथ एक शब्द और जोड़ा गया है .... ''निःस्वार्थ''.... मतलब यह कि उसके बदले किसी चीज़ की ...
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  April 20, 2013, 10:27 pm
अबकी कइयौ महीना बाद गाँव गेन, आम की याक बाग है, जादा बड़ी नहीं है। स्वाचा धोवाय आई तौ लरिका-बच्चन का खाय-पियै भरे का आम होई जइहैं, औ जो ठीक-ठाक फसल होई गै तौ चार पइसौ मिलि जइहैं... द्याखा बऊर तौ ठीकै-ठाक आवा है, सोचेन लगे हाथ गोड़ाई कराय के पानिऊ लगवा देई मुला याक समस्या होई गै.....
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  April 7, 2013, 4:59 pm
स्याह रातों पे मेरी, तेरे ख़्वाबों का पहरा है रोज़ देखते हैं हम, यह ख़्वाब सुनहरा है अब मान जाइए यूँ जलवे न बिखेरिये रहम कीजिये, अभी ज़ख्म ज़रा गहरा हैदिल के टूटने की खनक, संगीत समझिए मुहौब्बत का सबक़ है ये इश्क़ का ककहरा हैअभी ज़रा रुकिए, यूँ दिल में न जाइए इक दर्द है मेरे...
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  April 2, 2013, 10:38 pm
ढम... ढम... ढम... ढम...ढम... ढम... ढम... ढम...होssssssssssssssss....ढिम-टपाक, ढिम-ढिम टपाकढिम-टपाक, ढिम-ढिम टपाकहुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रssssss....... हे हे, हे हे...... हे हे, हे हे...... हुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रsssss......ढिंग-चक... ढिंग-ढिंग चक ढिंग-चक... ढिंग-ढिंग चकह...
मीठा भी गप्प,कड़वा भी गप्प...
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  March 26, 2013, 11:03 am
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