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चिकोटी

कईसाल पहले की बात है। देश की एक आला कंपनी ने देशवासियों को कर लो दुनिया मुठ्ठी में का मंत्र दिया था। मंत्र को हमने न केवल स-हृदय स्वीकारा बल्कि स्वागत भी किया। फिर तो देश के प्रत्येक आमो-खास की मुठ्ठी में एक बे-तार का यंत्र नजर आने लगा। आलम यह था- जिस ओर निगाह दौड़ा दो, उस ओ...
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  August 14, 2017, 9:51 am
मैं सेंसेक्सऔर निफ्टी दोनों का समान प्रसंशक हूं। यह बात सही है कि मैंने जिस प्रखरता के साथ सेंसेक्स पर लिखा, उतना निफ्टी पर नहीं लिख पाया। निफ्टी पर न लिखने के पीछे किसी प्रकार का किंतु-परंतु नहीं है। पर इससे मेरा निफ्टी के प्रति स्नेह कम नहीं हो जाता। मेरा बचपन से मानन...
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  August 8, 2017, 1:16 pm
दोस्तोंकी किल्लत मुझे बचपन से कभी नहीं रही। लाइफ में एक से बढ़कर एक दोस्त बनाए। जमकर दोस्तबाजियां कीं। स्कूल-कॉलेज के दिनों की दोस्तियों ने नए मुकाम हासिल किए। मोहल्ले में मैं पतंगबाजी के लिए तो खासा बदनाम था ही, नुक्कड़ पर दोस्तों के साथ मजमा लगाने के चर्चे भी कम न थे...
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  August 6, 2017, 7:54 pm
क्याआपके घर में टमाटर है?यह प्रश्न आजकल मुझे इतना ‘असहज’ किए हुए है कि मैं रातों को सो नहीं पा रहा। निगाहें हर वक्त दरवाजे की देहरे पर टिकी रहती हैं कि कहीं कोई पड़ोसी या रिश्तेदार टमाटर मांगने न आ धमके। आलम यह है कि दफ्तर भी न के बराबर ही जा पा रहा हूं। वहां भी यही डर सतात...
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  August 4, 2017, 7:43 am
मैंबुद्धिजीवियोंकेमोहल्लेमेंरहताजरूरहूंमगरखुदबुद्धिजीविनहींहूं।उनसेहमेशादस-बीसकदमकीदूरीरखताहूं।उन्होंनेकईदफाकोशिशकीकिमैंउनकीबुद्धिजीविमंडलीमेंशामिलहोकरउनजैसाबनजाऊंलेकिनहरदफामैंनेखुदकोउनसेबचायाहीलिया।साफशब्दोंमेंउनसेकहदिया- मुझेबुद्धिजी...
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  August 3, 2017, 7:31 am
मेरीआदत है। हर रोज मैं किसी न किसी लेखक-साहित्यकार को याद कर लेता हूं। याद करने में कोई बुराई नहीं। दिल का दिल बहल जाता है। लेखक-साहित्यकार भी प्रसन्न हो लेते हैं। कि, इस भीषण डिजिटल समय में किसी ने हमें याद तो किया। यों, ईश्वर, खुदा, गॉड को तो हम 24X7 याद करते ही रहते हैं।आज स...
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  July 30, 2017, 7:52 am
तोताअब आजाद है। पूरी आजादी से अपने काम को अंजाम दे रहा है। तोते की आजादी बहुत लोगों को बेइंतहा खल रही है। रह-रहकर तमाम सवाल और आरोप तोते की आजादी पर वे लगा रहे हैं। अपने वक्त का हवाला दे रहे हैं। अपनी ईमानदारी पर सवाल खड़े करने वालों को आड़े हाथों ले रहे हैं। बयान दिए जा र...
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  July 11, 2017, 10:02 am
मेरे व्यंग्यमें ‘संस्कार’ नाम की चीज ‘न’ के बराबर है। ऐसा नहीं है कि मैंने कभी कोशिश नहीं की अपने लेखन में संस्कारों को डालने की। किंतु क्या करूं, हर बार मात खा जाता हूं। जब भी संस्कार का ताबिज पहनकर व्यंग्य लिखा, व्यंग्य न बनकर ‘सुभाषित’ टाइप बन गया। तमाम संस्कारशील व...
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  July 8, 2017, 11:48 am
मुझेभी एक अलग राज्य चाहिए। राजनीति करने के लिए नहीं, साहित्य के लिए। हां, मुझे साहित्य के लिए नए राज्य की दरकार है। साहित्य के नए राज्य में मैं आपने हिसाब से चीजें बनाना व करना चाहता हूं। इस राज्य में सिर्फ और सिर्फ मेरी ही चलेगी। राज्य का ‘राजा’ मैं ही बनूंगा। अपनी पसं...
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  July 7, 2017, 10:13 am
कविपरेशान है। कुछ समझ नहीं पा रहा कि जीएसटी पर कविता कैसे लिखे? न उसे शब्द मिल पा रहे हैं। न कोई सीन क्रिएट हो पा रहा। कवि बार-बार जीएसटी के रहस्य को समझने की कोशिश कर रहा है मगर हर बार गच्चा खा जाता है। 5, 12, 18, 28 का फेर उसे समझ नहीं आ पा रहा। झुंझलाहट में कभी वो खुद को गरियाता ह...
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  July 6, 2017, 7:37 am
कई दिनोंसे जीएसटी पर अखबारों, न्यूज चैनलों पर कुछ न कुछ आ ही रहा है। कोई जीएसटी के पक्ष में दिख रहा है तो कोई विरोध में। मतलब, जितने मुंह उतनी बातें। बहती गंगा में वे लोग भी हाथ धोने में लगे हैं, जिन्हें जीएसटी का ‘जी’ भी नहीं मालूम! फिर भी, कहने या बोलने में क्या जाता है? ये ...
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  July 1, 2017, 12:11 pm
राजनीतिअपना रंग गिरगिट से भी तेज बदलती है। गिरगिट कहीं राजनीति को रंग बदलते देख ले- तो कसम से- ‘आत्महत्या’ ही कर ले। राजनीति में रहकर इसका रंग बदलने वाले नेता अपने करियर में हमेशा कामयाब होते हैं। न वे कभी हारते हैं, न किसी को जीतने देते। सीधा-साधारण आदमी अगर राजनीति मे...
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  June 29, 2017, 9:51 am
भूतमुझे बेहद पसंद हैं। बचपन से आकर्षित करते रहे हैं। भूतिया फिल्में देखना। भूतों पर आधारित किस्से-कहानियां सुनना। भूतिया जगहों पर जाना। बड़ा आनंद आता है इन सब में मुझे।अक्सर खुद को मैं इसलिए भी गरियाता हूं कि मैंने मनुष्य-रूप में जन्म क्यों लिया? भूत क्यों नहीं बना? भ...
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  June 16, 2017, 10:09 am
जितनापसंद मुझे व्यंग्य लिखना है, उतना ही क्लीवेज देखना भी। कभी-कभी तो मुझे व्यंग्य और क्लीवेज एक-दूसरे के पूरक नजर आते हैं। उत्मुक्तता और उत्तेजना दोनों में एक समान होती है। जैसे- व्यंग्यकार को व्यंग्य लिखे बिना चैन नहीं पड़ता, वैसे ही हीरोईनों को क्लीवेज दिखाए (अपवाद...
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  May 21, 2017, 7:13 am
सचपूछो तो मुझे वायरस का डर नहीं। हंसी तो मुझे इस बात पर आ रही है कि इंसान अपने ही फैलाए वायरस से खुद डर रहा है। जगह-जगह चेतावनियां देता फिर रहा है कि रेन्समवेयर वायरस से बच कर रहें। ऐसी-वैसी कोई फाइल या इ-मेल न खोलें। जरा-कुछ खतरा दिखे तो तुरंत अपना कंप्यूटर बंद कर दें। हां...
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  May 19, 2017, 7:28 am
पिछलेकई दिनों से अखबार और खबरिया चैनल ‘चिप-मय’ दिख रहे हैं। तेल के खेल में प्रयोग की जानी वाली ‘चिप’ की खबरें खोद-खोद कर छापी-दिखाई जा रही हैं। लोग कभी चिप को तो कभी तेल मालिकों को ‘कोस’ रहे हैं। चिप-कांड ने न केवल सरकार बल्कि चिप-धारकों की नींद भी हराम कर रखी है। क्या तो त...
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  May 18, 2017, 9:47 am
वोतो एंवई लोग छोड़ते रहते हैं कि इंडिया गरीब मुल्क है। जबकि ऐसा कतई नहीं है। इंडिया राजा-महाराजाओं के जमाने में भी ‘सोने की चिड़िया’ था, अब भी है। फर्क सिर्फ इतना आया है कि अभी सोने की चिड़िया को चंद बड़े लोगों ने हैक कर रखा है। पर कोई नहीं…। कभी-कभी छोटे लोग भी सोने की चि...
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  May 17, 2017, 2:25 pm
हालांकिचीते को पीते कभी देखा तो नहीं मगर एक ऐड में दिखाया गया था कि चीता भी पीता है। यों, पीने पर किसी के ‘रोक-टोक’ नहीं। इंसान हो या जानवर कभी भी, कहीं भी, कैसे भी पी सकता है। बहुत से तो पीने को अपना ‘लोकतांत्रिक अधिकार’ मानते हैं। हां, यह बात अलग है कि पीने के बाद वे खुद ‘ह...
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  May 9, 2017, 7:39 am
आजजिधर भी निगाह उठाकर देख लीजिए, सबसे अधिक चर्चे कटप्पा के बाहुबली को मारने के ही मिलेंगे। हालांकि बाहुबली-2 सिनेमा घरों तक पहुंच चुकी है। लोगों ने देख भी ली है। लोग देख भी रहे हैं। किंतु यह सवाल अब भी वहीं का वहीं है कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? लुत्फ देखिए, बाहुब...
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  May 5, 2017, 10:00 am
जब सेअखबार में खबर पढ़ी है कि फेसबुक ‘ब्रेन सेंसिंग तकनीक’ पर काम कर रहा है। मतलब, हमारा दिमाग जो सोचेगा, वही हमारी फेसबुक वॉल पर उतरता चला जाएगा। तब से मैंने दिमाग से सोचना ही बंद कर दिया है! दिमाग को खोपड़ी से अलग कर एक कोठरी में ताला-बंद कर दिया है। न सांप होगा, न लाठी टू...
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  May 4, 2017, 7:40 am
वेहार गए। बहुत ही बुरी तरह से हारे। ऐसा हारे की चारों खाने चित्त हुए पड़े हैं। ईमानदारी धरा पर धरी की धरी रह गई। न केवल टोपियां उछलीं बल्कि झाड़ू तक जब्त हो गई। ये सब उनकी आंखों के सामने होता रहा। अफसोस, न वे ईंट से ईंट ही बजा पाए न ईवीएम के कथित झूठ को जनता के सामने ला पाए। ...
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  May 3, 2017, 9:39 am
मुझेचप्पलों- विशेषकर ‘हवाई चप्पल’- से बेहद लगाव है। हवाई चप्पल न केवल मेरी जिंदगी बल्कि मेरे लेखन का भी ‘आईना’ है। एक ऐसा आईना जिसमें बैठे-ठाले मैं अपनी सूरत निहारता रहता हूं। जितना ‘सुकून’ मुझे हवाई चप्पल पहनकर मिलता है, उतना ब्रांडेड जूते पहनकर भी नहीं।हवाई चप्पल म...
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  May 2, 2017, 7:29 am
यों, दुनिया में मूर्खों की कमी नहीं। सबसे अधिक मूर्ख अब सोशल मीडिया पर ही पाए जाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर पाए जाने वाले मूर्खों की अजब ही कहानियां है। ये मूर्ख यहां या तो एक-दूसरे से लड़ते-भिड़ते रहते हैं या फिर लाइक-कमेंट की आस में ‘दुबले’ होते रहते हैं। किसी का खुद पर ...
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  April 1, 2017, 7:50 am
न केवलमेरे मोहल्ले बल्कि समूचे उत्तर प्रदेश के रोमियों पर ‘विकट संकट’ आन खड़ा हुआ है। एंटी रोमियो स्कावॉयड बन जाने से उनकी इज्जत पर ‘तगड़ा हमला’ हुआ है। बेचारे अब न खुलकर लड़कियों के स्कूल-कॉलेजों के आसपास टहलकदमी कर सकते हैं न अपनी महबूबा को बाइक पर बैठा कोचिंग छोड़...
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  March 23, 2017, 7:30 am
मुझमेंऔर शरारत में छत्तीस का आंकड़ा बचपन से रहा है। बताते हैं- जब मैं पैदा हुआ था तब गोदी में आने के बहाने मैंने नर्स को डाइरेक्ट तमाचा जड़ दिया था। बस तभी से मुझे शरारती टाइप बच्चा माना जाने लगा। बचपना गुजर जाने के बाद जवानी आ जाने पर भी मैंने अपनी शरारतों को नहीं छोड़ा...
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  March 21, 2017, 3:30 pm
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