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ब्राह्मण उवाच्

छान्दोग्योपनिषदछान्दोग्योपनिषद सामवेदीय उपनिषद के ताण्डय महाब्राह्मण का ही एक अंश है जिसमें ४० प्रपाठक हैं। प्रथम २५ प्रपाठक या अध्याय को पंचविश और अगले पांच को षड्विश ब्राह्मण कहते हैं । इसके साथ ८ प्रपाठक छान्दोग्योपनिषद और २ प्रपाठक मन्त्रब्राह्मण मिलाकर ४० ...
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  July 6, 2013, 9:22 am
श्रीराम षट्पदी स्तुतितरणिकुलजलतरणे तरुणतरणितेजसा विभातरणे ।कृतविदशदशमुखमुखतिमिरगणेऽन्तस्तमो नुद मे ॥ १॥शयविधृतशरशरासन निखिलखलोज्जासनप्रथितसुयशाः ।मथितहृदयान्तरालं दुष्कृतिजालं ममापनय ॥ २॥सुरुचिरमरीचिनिचयांश्चरणनखेन्दूनुदाय मम हृदये ।हृदयेश विकलता...
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  June 11, 2013, 10:31 am
संकठानामाष्टकम्आनन्दकानने देवी संकठानाम विश्रुता।वीरेश्वरोत्तरे भागे पूर्वं चन्द्रेश्वरस्य च ॥१॥शृणु नामाष्टकं तस्याः सर्वसिद्धिकरं नृणां ।संकठाप्रथमं नाम द्वितीयं विजया तथा ॥२॥तृतीयं कामदा प्रोक्तं चतुर्थं दुःखहारिणी।शर्वाणी पञ्चमं नाम षष्ठं कार्त्...
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  May 16, 2013, 9:03 am
        हनुमत्कृतसीतारामस्तोत्रम्                    ॥ध्यानम्॥मन्दाराकृति पुण्यधाम विलसत् वक्षस्थलं कोमलम्शान्तं कान्तमहेन्द्रनील रुचिराभासं सहस्राननम् ।वन्देहं रघुनन्दनं सुरपतिं कोदण्ड दीक्षागुरुंरामं सर्वजगत् सुसेवितप...
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  May 7, 2013, 8:31 am
जामदग्न्यकृतंश्रीशिवस्तोत्रं ईशत्वांस्तोतुमिच्छामिसर्वथासतोतुमक्षमम्। अक्षराक्षरबीजंचकिंवास्तौमिनिरीहकम्॥१॥नयोजनांकर्तुमीशोदेवेशंस्तौमिमूढधीः।वेदानशक्तायंस्तोतुंकस्त्वांस्तोतुमिहेश्वरः॥२॥बुद्धेर्वाग्मनसोःपारंसारात्सारंपरात्परम्।ज्ञ...
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  April 2, 2013, 10:46 am
श्रीविष्णु-महिम्नस्तोत्रम् महिम्नस्ते पारं विधिहरफणीन्द्रप्रभृतयोविदुर्नाद्यप्यज्ञश्चलमतिरहो नाथ नु कथम् ।विजानीयामद्धा नलिननयनात्मीयवचसोविशुद्ध्यै वक्ष्यामीषदपि तु तथापि स्वमतितः ॥ १॥यदाहुर्ब्रह्मैके पुरुषमितरे कर्म चपरेऽपरे बुद्धं चान्ये शिवमप...
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  March 28, 2013, 1:30 pm
श्रीरघुनाथाष्टकम्श्रीरघुनाथाष्टकम् —रामस्तोत्राणिशुनासीराधीशैरवनितलज्ञप्तीडितगुणंप्रकृत्याऽजं जातं तपनकुलचण्डांशुमपरम् ।सिते वृद्धिं ताराधिपतिमिव यन्तं निजगृहेससीतं सानन्दं प्रणत रघुनाथं सुरनुतम् ॥ १॥निहन्तारं शैवं धनुरिव इवेक्षुं नृपगणेपथि ज्याक...
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  March 5, 2013, 1:42 pm
   श्रीरामचन्द्राष्टकम्ॐ चिदाकारो धाता परमसुखदः पावनतनुर्मुनीन्द्रैर्योगीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता  ।सदा सेव्यः पूर्णो जनकतनयाङ्गः सुरगुरूरमानाथो रामो रमतु मम चित्ते तु सततम् ॥१॥ मुकुन्दो गोविन्दो जनकतनयालालितपदःपदं प्राप्ता यस्याधमक...
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  March 5, 2013, 1:38 pm
हिमालयकृतशिवस्तोत्रम्      ॥ हिमालय उवाच ॥त्वं ब्रह्मा सृष्टिकर्ता च त्वं विष्णु: परिपालक: ।त्वं शिव: शिवदोऽनंत: सर्वसंहारकारक: ॥ १ ॥त्वमीश्‍वरो गुणातीतो ज्योतिरूप सनातन: ।प्रकृत: प्रकृतीशश्‍च प्राकृत: प्रकृते पर: ॥ २ ॥नानारूपविधाता त्वं भक्तानां ध्यानहेत...
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  February 21, 2013, 7:46 am
सर्वसिद्धिप्रदायक श्रीगणेशकवचम् श्रृणु वक्ष्यामि कवचं, सर्व-सिद्धि-करं प्रिये !पठित्वा धारयित्वाच, मुच्यते सर्व-सङ्कटात्।।आमोदश्च शिरः पातु, प्रमोदश्च शिखोपरि।सम्मोदोभ्रू-युगे पातु, भ्रू-मध्ये तु गणाधिपः।।गण-क्रीडो नेत्र-युग्मे, नासायांगणनायकः।गण-क्रीड...
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  February 18, 2013, 9:15 am
           कल्किकृत शिवस्तोत्रम् गौरीनाथं विश्वनाथं शरण्यं भूतावासं वासुकीकण्ठभूषम्  । त्र्यक्शं पञ्चास्यादिदेवं पुराणं वन्दे सान्द्रानन्दसन्दोहदक्शम्॥॥ योगाधीशं कामनाशं करालं गङ्गासङ्गक्लिन्नमूर्धानमीशम्।  जटाजूटाटोपरिक्शिप्तभावं...
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  February 18, 2013, 9:11 am
           श्रीमहादेवाष्टकम्शिवं शान्तं शुद्धं प्रकटमकलङ्कं श्रुतिनुतं महेशानं शम्भुं सकलसुरसंसेव्यचरणम् ॥गिरीशं गौरीशं भवभयहरं निष्कलमजं महादेव वन्दे प्रणतजनतापोपशमनम् ॥१॥सदा सेव्यं भक्तैर्ह्रदि ह्रदि वसन्तंगिरिशय-मुमाकान्तं क्षान्तं करधृतपिनाक...
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  February 18, 2013, 3:00 am
                                    श्री शिवकवचम्विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशिवकवचस्तोत्रमंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि: अनुष्टप् छन्द:। श्रीसदाशिवरुद्रो देवता। ह्रीं शक्‍ति:। रं कीलकम्। श्रीं ह्री क्लीं बीजम्। श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थे शिवकवचस्तोत्रजपे विनियोग:।...
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  February 7, 2013, 3:22 pm
            श्री लक्ष्मीकवचम्शिरो मे रक्षताद् देवी, पद्मा पंकजधारिणी ।भालं पातु जगन्माता, लक्ष्मीः पद्मालया च मे ।।मुखं पायान्महा-माया, दृषौ मे भृगुकन्यका ।घ्राणं सिन्धु-सुता पायान् नेत्रे मे विष्णुवल्लभा ।।कण्ठं रक्षतु कौमारी, स्कन्धौ पातु हरिप्रिया ।हृदय...
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  February 7, 2013, 3:18 pm
               श्रीशंकराष्टकम्शीर्षजटागणभारं गरलाहारं समस्तसंहारम् ।कैलासाद्रिविहारं पारं भववारिधेरहं वन्दे ॥ १ ॥चन्द्रकलोज्ज्वलफालं कण्ठव्यालं जगत्रयीपालम् ।कृतनरमस्तकमालं कालं कालस्य मोमलं वन्दे ॥ २ ॥कोपेक्षणह...
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  January 7, 2013, 1:08 pm

परशुरामकृतंकालीस्तोत्रम्             परशुरामउवाचनम: शंकरकान्तायैसारायैतेनमोनम:।नमोदुर्गतिनाशिन्यैमायायैतेनमोनम:॥नमोनमोजगद्धायैजगत्कार्यैनमोनम:।नमोऽस्तुतेजगन्मात्रेकारणायैनमोनम:॥प्रसीदजगतांमात: सृष्टिसंहारकारिणि।त्वत्पादेशरणंयाम...
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  December 5, 2012, 4:31 pm
श्रीबगलाप्रत्यंगिराकवचम्          शिवउवाच अधुनाऽहंप्रवक्ष्यामिबगलायाःसुदुर्लभम्।यस्यपठनमात्रेणपवनोपिस्थिरायते॥प्रत्यंगिरांतांदेवेशिश्रृणुष्वकमलानने।यस्यस्मरणमात्रेणशत्रवोविलयंगताः॥                   श्रीदेव्युवाच स्नेहो...
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  November 3, 2012, 8:56 am
            मंत्रपुष्पाञ्जलिॐयज्ञेनयज्ञमयजन्तदेवास्तानिधर्माणिप्रथमान्यासान्।तेहनाकंमहिमान: सचंत।यत्रपुर्वेसाध्या: संतिदेवा:।ॐराजाधिराजायप्रसह्यसाहिनेनमोवयंवैश्रवणायकुर्महे।समेकामान्कामकामायमह्यंकामेश्वरोवैश्रवणोददातु।कुबेरायवैश्रवणाय...
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  November 1, 2012, 8:58 am
सप्तमं कालरात्रिएकवेणीजपाकर्णपुराणानां खरास्थिता।लम्बोष्ठीकíणकाकर्णीतैलाभ्यशरीरिणी॥वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।वर्धनर्मूध्वजाकृष्णांकालरात्रिभर्यगरी॥ध्यानकरालवदनां घोरांमुक्तकेशींचतुर्भुताम्।कालरात्रिंकरालिंकादिव्यांविद्युत्मालाविभूषि...
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  October 22, 2012, 8:42 am
षष्ठं कात्यायनीचन्द्रहासोज्वलकराशार्दूलवरवाहना।कात्यायनी शुभदधादेवी दानवघातिनी॥ध्यानवन्देवांछितमनोरथार्थ चन्द्रार्घकृतशेखराम्।सिंहारूढचतुर्भुजाकात्यायनी यशस्वनीम्॥स्वर्णवर्णाआज्ञाचक्रस्थितांषष्ठम्दुर्गा त्रिनेत्राम्।वराभीतंकरांषगपदधरां...
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  October 22, 2012, 8:41 am
        सर्वसिद्धप्रदायक गणेश स्तोत्रंनमोस्तुगणनाथायसिद्धिबुद्धियुतायच।पुत्रप्रदमिदंस्तोत्रंसर्वसिद्धिप्रदायकम्।।तेसर्वेतवपूजार्थेनिरता:स्युर्वरोमत: ।भविष्यन्तिचयेपुत्रामत्कुलेगणनायक।।शरणंभवदेवेशसंततिसुदृढांकुरू।प्रपन्नजनपालायप्रणतार्तिविना...
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Tag :सर्वसिद्धिप्रदायक गणेश स्तोत्रं
  February 8, 2012, 8:53 pm
                 शिव के दो रूप हैं, सौम्य तथा रौंद्र | कलियुग में जहाँ महाशिव के सौम्य रूप की महिमा का गान करने के लिए इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है वहीँ इसे शास्त्रों में संतान प्राप्ति के लिए भी फलदाई बताया गया है जबकि प्राचीन काल में संतानप्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्...
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Tag :शिवमहिम्न: स्तोत्रं
  February 6, 2012, 2:11 pm
वाराणसी के मूर्धन्य और प्रख्यात ज्योतिष विद्वान, कर्मकांडी तथा वेदपाठी ब्राह्मण स्व. श्री वामन जी कन्हैयालाल दीक्षित अपने जीवनपर्यंत समाज तथा संस्कृत साहित्य की सेवा करते रहे |उनके पश्चात उनके सुपुत्र    श्री गणपत जी दीक्षित (गणपत काका) इस प्राचीन परंपरा को आगे बढ़...
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  February 6, 2012, 9:08 am
      श्री सीतारामचन्द्र जी के चरणों में अपने आपको सम्पूर्ण रूप से समर्पित करदे और इस भजन को गाते हुए लीन हो जाएँ । यह उनके लिए है जो संस्कृत का उच्चारण करने में असमर्थ हैं तथा श्लोको का पाठ करने में उन्हें कठिनाई होती है ।सीता राम सीता राम सीताराम कहिये जाहि विधि राखे रा...
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Tag :सीता राम भजन
  January 22, 2012, 5:54 pm
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