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तिरछी नजरिया

भारत क्या है? इस प्रश्न पर विवादों का कोई अंत नहीं है। एक वर्ग है जो भारत को यूरोप की तरह अनेक संस्कृतियों का एक बेमेल समुच्च्य मानता है। उनके मत से यदि अंग्रेजों ने इस देश पर राज न किया होता तो यह देश, एक राष्ट्र न होकर पाँच-छः सौ  बिखरी हुई रियासतें होता। […]...
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Tag :विविध (General)
  June 28, 2013, 12:27 am
ऊंचे पर्वतों पर किसी गंगोत्री से जो निकले उस जलधारा का गंगा हो जाना और मिल जाना समुद्र से अंततः क्या है? नियति है? या सचेत एक निर्णय है उस जलधारा का? या यह कि पर्याय नहीं कोई गंगा हो जाने के अतिरिक्त!   वनों के एकांत में जो मिलते हैं उन असंख्य झरनों का […]...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  June 4, 2013, 9:57 pm
गर्मियों के दिन हैं, कभी ये छुट्टी के दिन हुआ करते थे। श्रीमतीजी चूँकि कॉलेज में पढ़ाती हैं अतः उन्हें गर्मियों में छुट्टियाँ मिल जाती हैं। पिछले सप्ताह वे मायके चली गयीं। उन्हें ट्रेन में बिठा कर घर लौटा और टीवी चलाया। एक शीतल पेय का विज्ञापन आ रहा था – “पेप्सी! ओह! यस, ...
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Tag :व्यंग्य (Satire)
  May 12, 2013, 12:38 pm
ज्ञानार्जन -स्वामी विवेकानंद ज्ञान के आदि स्रोत के संबंध में विविध सिद्धांत प्रतिपादित किये गये हैं। उपनिषदों में हम पढ़ते हैं कि देवताओं के संबंध में प्रथम और प्रधान ब्रह्मा जी ने शिष्यों में उस ज्ञान का प्रचार किया, जो शिष्य परंपरा द्वारा अभी तक चला आ रहा है। जैनों ...
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Tag :दर्शन (Philosophy)
  April 6, 2013, 8:00 pm
पिता और मैं  १. पिता जब सो रहे होते पेट के बल मैं उनके कंधे पर बैठ उनके घुँघराले बालों को सीधा करने का प्रयास करता २.  मैं पिता को ध्यान से देखता जब पिता दाढ़ी बनाते फिर छूकर उनके चिकने गालों को मैं उनके काम की सफलता की पुष्टि करता ३. ये वे दिन [...]...
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Tag :विविध (General)
  March 8, 2013, 3:31 pm
सौ रूपये की कॉफ़ी पीने वालों को देखकर मेरे मन में अनेक प्रश्न उठते हैं।   बाज़ार में सौ रूपये की कॉफी मिलती है यदि यह मैं मम्मी से कह दूँ तो मम्मी हँसेगी कहेगी ये भी कैसे हो सकता है भला? हिसाब लगा लेगी मम्मी तुरंत इतने का दूध, इतने की कॉफ़ी और इतने [...]...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  January 29, 2013, 11:25 pm
देश के गृह मंत्री ने आतंकवादियों के एक समूह को भगवा कहकर संबोधित किया है। इससे पहले एक गृहमंत्री ने ऐसा कहा था तब उन्हें और उनके दल को क्षमाप्रार्थना करनी पड़ी थी। इस पर अधिक कहने की आवश्यकता नहीं। हत्यारों का कैसा धर्म और कैसा रंग? पर गृह मंत्री और उनके दल को समुदाय वि...
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Tag :दर्शन (Philosophy)
  January 22, 2013, 1:11 pm
उस रात के बाद उसे क्या पता कल क्या हुआ? सुना है उस रात के बाद जब भी उसे होश आया उसने अपने साथी के बारे में ही पूछा। वह मृत्यु से लड़ रही है और समझ नहीं आता कि उसके लिए मैं भगवान से क्या प्रार्थना करूँ? वह जिये और स्वस्थ हो, पर जी [...]...
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Tag :समाज
  December 19, 2012, 11:27 am
परदेस है रोटी परदेस है सपना परदेस है कारोबार। देस विरह है देस प्रेम है देस है बिछुड़ा यार॥   प्रेम बरसता विरह टूटता मिलते बिछुड़े यार। कम से कम एक बार बरस में जो आ जावे त्यौहार॥   आ जावे त्यौहार मिलेंगे, सारे यार दीवाली में। घरबार अपना, अपना देस, अबकी बार दीवाली में!! [...]...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  November 15, 2012, 10:33 pm
मेरे एक मित्र हैं जिन्हें ठंड के दिनों में आईसक्रीम खाना पसंद है। वे गर्मी के दिनों में आईसक्रीम खाने से ज़्यादा चाय पीना पसंद करते हैं। उनसे इस उल्टी आदत का कारण पूछने पर कहते हैं – “लोहा ही लोहे को काटता है”। पर मैं सोचता हूँ कि क्या यह हमेशा ही सही है? [...]...
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Tag :दर्शन (Philosophy)
  October 28, 2012, 8:45 pm
पाई-पाई का हिसाब ले नजर मिला सवाल कर जब राजा ही डकैत हो जो हो सके बवाल कर॥   रत्नगर्भा धरती यह जननी तेरी धरती के सारे रत्नों को चोर लिया सुजलाम-सुफलाम धरती यह जननी तेरी जल-जंगल को और फसल को चोर लिया चोर लिया फिर भी जब पेट न भरा इनका तुझसे तेरी धरती [...]...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  September 11, 2012, 11:40 pm
ज्योति जो है सूर्य में, दीप में भी है वही। सूर्य हो या दीप हो, परिचय ज्योति एक है॥ एक ग्रंथ था लिखा, ज्योति का भेद मिटाने को। एक ग्रंथ था लिखा, परिचय को मिथ्या बताने को॥ एक ‘नाम’ था दिया, कि नाम, नाम में हो विलय। एक नाम था दिया, कि नाम, नाम से [...]...
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Tag :दर्शन (Philosophy)
  August 20, 2012, 11:12 pm
परमपूज्य सेठजी! मुझे आपमें ईश्वर के दर्शन होते हैं इसीलिये परमपूज्य लिख रहा हूँ पर पता नहीं क्यों मैं आपको सेठजी ही कह रहा हूँ मुझे मालूम है आपको तो सेठजी भी कहलाना पसंद नहीं आपको तो सर, मालिक, या बॉस भी पसंद नहीं, आप चाहते हैं कि हम बुलाएँ आपको “पहले नाम” से सिर्फ [...]...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  August 4, 2012, 11:59 pm
यदि किसी उद्यान के सभी फूल एक ही रंग के हों तो भला उस उद्यान की शोभा ही क्या रह जाएगी? एकरूपता में सौंदर्य कैसा? सौंदर्य तो विविधता में ही होता है। भारतीय होने के नाते विविधता को जितना निकट से हम देखते-समझते हैं, उतना अवसर अन्य किसी देश के लोगों को शायद ही मिलता [...]...
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Tag :समाज
  July 24, 2012, 8:31 pm
क्षमावतामयं लोकः परश्चैव क्षमावतम् इह सम्मानमृच्छन्ति परत्र च शुभाम् गतिम्। - वेदव्यास क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो उसको क्या जो दंतहीन विषरहित, विनीत, सरल हो। - रामधारी सिंह दिनकर छिमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात। कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥ - ...
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Tag :दर्शन (Philosophy)
  July 17, 2012, 2:24 am
शनिवार। सप्ताहंत की छुट्टियों का पहला दिन। सावन का महीना भी। इन दिनों पुणे के आसपास पहाड़ियों पर प्रकृति की सुंदर छटा बिखरी होती है। मैने सोचा क्यों न कल रविवार को आसपास कहीं सैर पर निकला जाय। शनिवार को श्रीमती जी की छुट्टियाँ नहीं होती, अतः मैंने अपने मित्र रैक्स के ...
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Tag :Current Issues (सामयिक)
  July 14, 2012, 2:59 pm
“अगर मैंने तुम्हें ज़रा सा तीखा बोल भी दिया तो क्या नाराज़ हुआ जाता है इतनी सी बात पर? बोला भी तो अपना समझ के बोल दिया, क्या मैं तुम्हारा कोइ नहीं?” वह बहुत देर से फोन पर अपनी पत्नी या प्रेमिका से लड़ रहा था। पत्नी या प्रेमिका होने का अनुमान मैंने इसलिये लगाया [...]...
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Tag :विविध (General)
  July 7, 2012, 8:14 pm
इन दिनों निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” में गालियों के प्रयोग को लेकर चहुँ ओर बहस छिड़ी हुई है। इन्हीं बातों पर कुछ विचार किया। लेकिन शुरूआत एक किस्से से करता हूँ। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के प्रथम वर्ष में हमें रैगिंग का सामना करना पड़ा। मार खाने क...
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Tag :विविध (General)
  July 6, 2012, 12:11 am
नोट कोइ नहीं जला सकता!   रैक्स नोटबुक पर कोइ सूची बना रहा था। अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे जब मैं थक जाता हूँ, तब कार्यालय में थोड़ा टहल लेता हूँ। इस बहाने लोगों से राम-राम भी हो जाती है। मानव संसाधन प्रबंधन विभाग (एच.आर.) में होने के नाते यह मेरा काम है कि लोगों से [...]...
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Tag :व्यंग्य (Satire)
  June 27, 2012, 12:12 am
नीतिश कुमार की अभिलाषा और धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा   “भाई अगला पी.एम. तो सेकुलर ही होना चाहिये।”  रैक्स ने कहा। पहले तुम मुझे  इन अंग्रेज़ी शब्दों के हिन्दी अर्थ बताओ, मैंने जवाब दिया। रैक्स यानी राम कृष्ण सावंत। पुणे में मैं जिस कंपनी में कार्य करता हूँ, वहाँ मेरा सह...
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Tag :इन दिनों...These Days...
  June 24, 2012, 2:02 pm
भाषा का गणित बचपन में मुझे हिन्दी विषय से प्रेम था और गणित से नफरत क्योंकि गणित मेरी समझ में नहीं आता था   बीजगणित, ज्यामिती, समाकलन सब शत्रु थे मेरे कहानियां, कविताएं और नाटक इनसे थी मेरी मित्रता   सितंबर के हिन्दी दिवस पर लिखा था मैंने निबंध और जीता था प्रथम पुरस्कार उस...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  June 17, 2012, 10:02 pm
कहते हैं कि भारत एक उत्सव प्रिय देश है। उत्सव मनाने के अनेक तरीके हो सकते हैं। नाटक खेलना भी उत्सव मनाने का एक अच्छा तरीका है। लेकिन पिछले कुछ सालों से ऐसा लगता है कि हम उत्सव प्रिय देश से नाटक प्रिय देश में बदल गये हैं। नाटक यूँ तो मंच पर खेले जाते [...]...
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Tag :व्यंग्य (Satire)
  June 16, 2012, 1:35 am
इस लेख का पहला भाग आप यहाँ से पढ़ सकते हैं।मुझे प्रतिदिन काम पर जाने के लिये बीस कि.मी. की यात्रा शहर के एक छोर से दूसरे छोर पर करनी पड़ती है। रास्ते में अनेक चौराहों पर सिग्नल आते हैं। मेरी ही तरह सैकड़ों मध्यमवर्गीय कामकाजी लोग अपने-अपने वाहनों समेत लाल बत्ती के निशान ...
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Tag :Philosophy (दर्शन)
  June 3, 2012, 3:39 pm
अपने-अपने जीवन में हम सभी कुछ ना कुछ प्राप्त करना चाहते हैं। हम सफल होना चाहते हैं, सुखी होना चाहते हैं, प्रसिद्ध होना चाहते हैं, आदि इत्यादि। इन सबके अतिरिक्त यह भी सत्य है कि हममें से कुछ लोग ‘संतोष” पर विश्वास करते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो कि अब तक यह फैसला नहीं कर पाये ...
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Tag :Philosophy (दर्शन)
  May 22, 2012, 12:05 pm
स्मृति क्या है?   स्कूल की टाटपट्टी है जिसे बिछाने, झटकने और लपेटने की पारियाँ बंधी होती थीं।   पापा की बुलेट की टंकी है जिस पर बैठकर मैं एक्सीलरेटर घुमाता और सोचता कि गाड़ी चल रही है।   स्कूल के पास का कुँआ है जिसका पानी मीठा था और जिसमें मेरी चाक-कलम गिर गयी [...]...
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Tag :My Poems (कविताएँ)
  September 27, 2011, 9:30 pm
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