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कथोपकथन

 केजीबीवी ओसियां का अनुभवजनवरी 31, 2017जोधपुर के प्रत्येक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV)की सभी लड़कियों को एक ड्राइंग बुक तथा एक सेट प्लास्टिक क्रेयोंस कलर के दिये गए है। इसी कड़ी के तहत कल ओसियां में था। सामग्री कक्षा के अनुसार ही वितरित की जा रही थी। यहाँ देखा जाए तो ...
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Tag :Education
  February 8, 2017, 7:17 pm
बच्चों के साथ एक नाट्यानुभव शूज शफल”एक ड्रामा तकनीक  है,इसे जितनी बार बच्चों के साथ करो इसकी उतनी ही संभावनाएं खुल कर सामने आती हैं। करना कुछ नहीं,एक वस्तु लीजिए और बच्चों या अभिनेताओं के बीच रख दीजिए। अब उस वस्तु का प्रयोग करते हुए अभिनय करना है। शर्त यह है कि वास्...
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Tag :natak
  January 28, 2017, 6:48 pm
दिनांक : 8/ 12/ 2016मैंने कक्षा में जाते ही कुछ वाहियात किस्म के सवाल पूछे,जैसे  - “आप क्या पढ़ रहे हैं?” लड़कियों का स्वाभाविक सा जवाब था,“सामाजिक ज्ञान।” मेरे हाथ क्या लगा? सवाल इसलिए व्यर्थ था चूंकि इसके पीछे कुछ जाने की इच्छा थी ही नहीं। लड़कियां अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तै...
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Tag :Creativity
  December 16, 2016, 3:28 pm
कल रात भारत और वेस्टइंडीज की टीमों के मध्य दूसरे टी-20 मुकाबले का प्रसारण आ रहा था। बेटा काव्य मेरे साथ बैठ कर देख रहा था। वेस्टइंडीज की पारी समाप्त हो हो चुकी थी। भारत ने खेलना शुरू किया था। बारिश के कारण मैच बाधित हो गया। मैंने कहा कि अब सोना चाहिए। लेकिन वह बोला कि मुझे ...
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Tag :Teaching
  August 30, 2016, 9:00 am
पिछली 29 - 30 जून 2016 को अजमेर के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की कुछ लड़कियां उनके विद्यालयों में होने वाली प्रमुख गतिविधियों की शेयरिंग व डेमोंस्ट्रेशन के लिए जयपुर आयीं थीं। इन केजीबीवी में समाज के सबसे वंचित तबके की लड़कियां पढ़ती हैं। ये लड़कियां उन दूर दराज क्षेत्र...
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Tag :theater in education
  July 4, 2016, 7:49 pm
पिछले लगभग छ: महीने अलवर रंगकर्म में बहुत महत्व के रहे हैं। इस अवधि में रंगमंच पर प्रचुरता में गतिविधियां हुई हैं। माहौल में एक जुंबिश पैदा हुई है,जिसने पिछले दस साल के सूखे में फुहार का काम किया है। इसी सिलसिले में दिनांक 7 जनवरी 2016 को कलाभारती रंगमंच पर कबीरा थियेटर की ...
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Tag :नाटक
  February 20, 2016, 10:07 pm
यह समीक्षा देर से आ रही है। इसके लिए पूर्णतः मैं स्वयं जिम्मेदार हूँ। इसके पीछे की वजह व्यस्तताएं ही हैं, जिन्हें चाहते हुए भी दूसरी प्राथमिकता पर नहीं डाला जा सका था। अभी दो दिन पहले एक मित्र ने मुझे याद दिलाया कि इस कार्यक्रम की समीक्षा अभी तक क्यों नहीं की गयी है। का...
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Tag :theater
  January 28, 2016, 6:52 pm
गए का गीत छोड़ कर नए की तलाश कर।सुर्ख पलाश महकेंगे वसंत की तलाश कर ।माज़ी तेरा श्वेत है तो श्याम भी होगा कहीं,व्यतीत के व्यामोह में न मुस्तकबिल की तलाश कर। चूल्हा जले हर सिम्त उठे रोटी की महक,बुझी हुई राख में चिंगारियां तलाश कर।कारवां में रहजनी हुक्काम ही कर जाते हैं,प्...
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Tag :New Year
  January 1, 2016, 2:20 pm
राजस्थान के पाली ज़िले के फालना में किशोरियों के आवासीय शिक्षण शिविर में अकादमिक सम्बलन हेतु आया था। चार महीने के इस शिविर में गरासिया जनजाति की पचास किशोरियाँ आवासीय रूप शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। अभी इस शिविर को शुरू हुए लगभग सप्ताह का समय हुआ था। जब मैंने शिक्षिका...
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Tag :
  October 31, 2015, 5:05 pm
यूं तो हिन्दी रंग मंच की स्थिति किसी से छुपी हुई नहीं है, फिर भी इसकी वास्तविक स्थिति को जानना उन लोगों के लिए जरूरी होता है जो हिन्दी रंगकर्म को आगे ले जाने के लिए व्यवस्थित प्रयास करना चाहते हैं। यहा सवाल दर सवाल एक प्रश्नावली तैयार की है जिससे यह जानने का प्रयास किया ...
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Tag :
  October 22, 2015, 10:17 pm
यूँ तो हर तरह का संगीत जबरदस्त अनुशासन का उदहारण है। जब कोई गान किसी पहले से तैयार म्यूजिकल म्यूजिकल ट्रैक पर करना हो तो वह और भी ज्यादा अनुशासन की मांग करता है। साजिंदों की संगत में लाइव वाद्य यंत्रों के साथ गाना गायक को शायद थोड़ी छूट देता है। वह छूट होती है फ्रेम से थो...
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Tag :
  October 12, 2015, 8:12 pm
गाय पर शायद दूसरी बार लिख रहा हूँ। एक बार तब लिखा था जब चौथी क्लास में था। या फिर आज लिख रहा हूँ। गाय पर लिखना मेरे लिए उस वक़्त भी मुश्किल था और अब भी है। तब गाय इतनी सरल थी और हमारी लेखनी बहुत ऊबड़खाबड़ "गाय के चार पैर,दो सींग होते हैं... गाय घास खाती है और हमें दूध देती..."ये चार प...
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Tag :
  October 11, 2015, 11:02 am
कल 4 अक्तूबर 2015 का दिन अलवर रंगकर्म में काफी महत्त्व का था। वह इस लिए कि अलवर में नवनिर्मित प्रताप ऑडिटोरियममें पहली बार कोई नाट्य गतिविधि संपन्न हुई। यूँ तो यह ऑडिटोरियम बने हुए लगभग दो साल का वक़्त हो गया है लेकिन रंगकर्मियों के लिए यह आज भी मरीचिका बना हुआ है। इसको बुक ...
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Tag :natak
  October 5, 2015, 4:37 pm
आज 2 अक्टूबर की तारीख है। पूरी दुनिया में इसे महात्मा गांधी जी की जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। भारत सरकार  गांधी के जन्मदिन को स्वच्छ भारत अभियान के साथ जोड़ कर मना रही है। वह इसलिए कि स्वच्छता गांधी जी के लिए एक बड़ा मूल्य था। मैं एक नाट्यकर्मी हूँ और यह सोच रहा हूँ क...
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Tag :theater in education
  October 2, 2015, 6:47 pm
नाटक पर काम करते हुए कई बार आप वो कर रहे होते हैं जो दरअसल नहीं करना चाहते। नवोन्मेष केवल चाहे हुए को करने से ही नहीं होता,कई बार अनचाहा भी रचनाशीलता के अवसर दे जाता है। अरे! माफ़ कीजियेगा,इस ज्ञान का साधारणीकरण करके मत देखिए। ऐसा केवल मेरे केस में होता है। इसका मतलब यह भी ...
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Tag :Diary
  September 26, 2015, 12:39 pm
यह नाटक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय तबीजी,अजमेर की लड़कियों के साथ नाट्य कार्यशाला के दौरान तैयार किया गया।-      (मंच पर टोली आकार गाना शुरू करती है। दो गायक पहले गाते हैं बाकी समूह उन पंक्तियों को दोहराता है।)गायक     : आइए करें तमाशा जी,आइए करें तमाशा जी। स...
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Tag :Education
  September 18, 2015, 7:16 pm
बच्चों के नाटक प्रायः प्रदर्शनधर्मी (परफॉर्मेंस ओरिएंटेड) नहीं होते हैं। वे अपने नाटक दर्शक को मद्देनज़र रख कर बनाते ही नहीं । बच्चों के नाटकीय खेलों पर तो यह बात सौ फीसदी फिट बैठती है। नाटकीय खेलों में तो दर्शक अयाचित होता ही है। वे अपने इन खेलों को आइसोलेशन में खेलते ...
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Tag :Education
  September 12, 2015, 8:56 am
(इस लघु नाटिका को जयपुर शहर के मोती कटला माध्यमिक विद्यालय की लड़कियों के साथ नाट्यकार्यशाला के लिए लिखा गया था। इसका मंचन 6 जून 2015 को बिड़ला ऑडीटोरियम में किया गया।) सूत्रधार    : नमस्कारकोरस    : आदाब, सतश्रीअकालसूत्रधार   : हमारी टीम ने एक नाटक तैयार किया है। को...
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Tag :theater
  September 3, 2015, 3:52 pm
लड़कियां स्टेज पर आती हैं। एक लड़की सामने बैठे दर्शकों जिनमें उनके अभिभावक व शिक्षिकाएं बैठे है, से मुखातिब होकर नाटक शुरू करती हैं। एक लड़की       : मैं एक लड़की हूँ और मेरा नाम है...कोरस (सब एक साथ)   : आचुकी लड़की एक       : क्या?कोरस             : हा...
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Tag :Education
  August 19, 2015, 4:17 pm
पूर्वरंग इस एकल नाटक की पृष्ठभूमि में एक दुस्वप्न है। वह बुरा सपना हमने अपने बचपन में देखा था। यह शीत-युद्ध के आखिर का दौर था। दुनिया दो धड़ों में विभाजित थी। परमाणु बमों का जखीरा इकट्ठा किया जा रहा था। हिरोशिमा-नागासाकी की कहानियाँ भी पहुँच रही थीं... कभी भी तीसरा विश्व...
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Tag :script
  August 16, 2015, 10:46 pm
कभी-कभी ऑफिस से घर जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर लेता हूँ। या फिर यह कहना चाहिए कि जब भी मौका मिले इस्तेमाल करना चाहिए। इसकी मार्फ़त आप वक़्त से जुड़े रह सकते हैं। देश-दुनिया की साफ-सच्ची तस्वीर ऐसे ही स्थानों पर दिखाई दे जाती है वर्ना इसके लिए आप मीडिया पर ...
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Tag :
  July 17, 2015, 12:31 pm
ऐसी कौनसी जगह है जहाँ से पूरा हिंदुस्तान दिखाई देता है? मैं इसके जवाब में कहूँगा भारतीय रेल में पूरा हिंदुस्तान नज़र आता है। बक़ौल गुलज़ार साहब के, "एक हिंदुस्तान में दो-दो हिंदुस्तान नज़र आते हैं।"ऐसी ही नज़र हमें भी एक दिन मिली जब रिजर्वेशन के डब्बे से टीटीई ने हमें अनारक्...
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Tag :व्यंग्य
  June 26, 2015, 8:25 am
दृश्य 1स्थान - जयपुर - चंडीगढ़ एक्सप्रेस, द्वितीय श्रेणी का डिब्बा मुख्य पात्र - 25 साल का युवक।नाम - कोई भी रख लो।कोरस - कंपार्टमेंट के 10 अन्य यात्री।युवक : देखने में विद्यार्थी लगता है। उसने अपने बैग से चिप्स का पैकेट निकाल लिया है। उसे खोलने के लिए प्लास्टिक की कन्नी क...
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Tag :
  June 15, 2015, 4:48 pm
आज सुबह की अख़बार देख रहा था तो दो ख़बरें थीं जो महत्वपूर्ण थीं। पहली खबर यह थी मैगी को लेकर उठे हुए विवाद के बारे में थी। मेरा सात साल का बेटा भी अख़बार की सुर्ख़ियों को मेरे साथ दोहरा रहा था।अचानक मैगी व दूसरे  फ़ूड प्रोडक्ट की जाँच व खतरों से सम्बंधित हैडलाइन आई तो उसने भी...
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Tag :
  May 31, 2015, 5:05 pm
मैं आज सुबह थोड़ा जल्दी स्कूल पहुँच गया था। स्कूल प्रांगण में बने मंच की सीढ़ियों पर बैठ कर समर कैम्प में आते हुए बच्चों को देख रहा था। वे अपनी-अपनी  पसंद की कक्षाओं की तरफ जा रहे थे। मैं भी नाटक सीखने आने वाले बच्चों का इंतज़ार कर रहा था। इस बार नाटक के ग्रुप में मेरे पास 21 ...
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Tag :theater in education
  May 30, 2015, 3:24 pm
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