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!!๑۩۞۩๑अंतर्मन के भावों से๑۩۞۩๑!!

अंतर्मन के भावों सेह्रदय-अमुक परिभाषित होगाअग्न लगाते शब्दों काअर्थ कोई अभिशापित होगा ।जीवन-मृत्यु की पहेलियाँसुख-दुःख के भ्रम को सुलझाती हैकाटों में जैसे अधखिली कलियाँखिल-खिलकर मुरझाती हैं ।ह्रदय मेरा निस्पंद हुआ हैअटकी सांसें प्राणों मेंक्या हैं वो सब ...
!!๑۩۞۩๑अंतर्मन के भावों से๑۩۞۩๑!!...
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  July 30, 2016, 11:24 pm
पाँव में बेड़ियाँ जब छनकती  हैं तो बेकल हो नाच  उठते हैं मेरे सभी गम मजबूरियों की ताल पर हालातों के राग पर मैं नाचती जाती हूँ मैं नाचती जाती हूँ मैं बाहर से कुछ और अन्दर से कुछ और दिखाई जाती हूँतमाशबीन इस दुनिया में मैं ऐसे ही पेश की जाती हूँ जहाँ मेरे दर्द-ओ -जिस्म के हर रा...
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  June 23, 2013, 9:22 am
खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं सपन्न सभी जो बह चुके हैं नयन-नीर से अपने ह्रदय पर वार किये अपने ही तीर से पत्थरों में हाँ तराशा हूं खुद को बन रहा पत्थर या मैं भगवान् हूं खुद पर ही करता  मैं अभिमान हूं मैं बदलते युग का हाँ उत्थान  . हूं शोलो...
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  July 8, 2012, 11:40 am
किसी की आँखों की नमी लिख रहा हूं बेजान उन अश्कों की गमी लिख रहा हूं  खिलते नहीं हैं फूल अब इस गुलशन में अपने नाम कुछ बंजर ज़मीं लिख रहा हूं  मिलने को मिल जाये कायनात सारी    तू जो नहीं है,तेरी कमी लिख रहा हूं..... बेजान उन अश्कों की गमी लिख रहा हूं   अपने नाम कुछ बंजर ज़मीं लि...
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Tag :लिख रहा हूंcopyrihgt
  March 30, 2012, 2:16 pm
ये शब्द इन्हें ग़म तो तमाम दे देता हूं अपने पर बाद में क्यूँ सुनता नहीं उन पन्नो में दबी हुई इनकी चीखें जिसपर वक़्त ने गर्द की एक चादर चढ़ा दी है....मेरी पहचान तलाशते वो शब्द अब खुद ही कहीं धूमिल हो गए पुराने वो शब्द पन्नो में दबी जिनकी चीखें वो गर्द,वो किताबऔर वो बीता ...
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Tag :चीखते शब्द/भीगी नज़्म/कशमोकश copyright
  September 8, 2011, 10:59 pm
1.होठ यूँ खोलूं खिलता कमल लगे तुमको एक शेर जो बोलूं पूरी ग़ज़ल लगे तुमको :) 2.मेरे ख्याल रो रहे थे किसी तन्हा कोने में और भिगो रहे थे मन मेरा तभी ख्यालों को तन्हा देख शब्द कुलबुला उठे और एक गुनगुनाती नज़्म लिख बैठा मैं3.मैं तुमसे सब कुछ कह नहीं पाता लेकिन मेरे शब्दों का...
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Tag :कुछ अक्षय सा पार्ट 2 copyright
  August 18, 2011, 8:07 am
मैं टुकड़ों टुकड़ों में बना हूंकभी हालातों ने ढाला मुझेकभी मजबूरियों में पला हूंमैं टुकड़ों टुकड़ों में बना हूंबेजान जिस्म में भूख जिन्दा हैएक पकी रोटी की आस मेंमैं हर रोज़ जला हूंमैं टुकडो टुकड़ों में बना हूंमेरे फटे हाल पर हर रोज़पेबंद लगा जाता है ये वक़्तमैं इन च...
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Tag :मैं टुकड़ों टुकड़ों में बना हूं copyright
  August 14, 2011, 7:29 pm
पूछो उन शर्मिंदा दीवारों सेपूछो उन बेगुन्हागारों  से जहाँ रोज़ मज़बूरी हो बेआबरू जिस्म के उन तलबगारों से हर रोज़ झुकती निगाह में हर रोज़ बिकती वफ़ा में मुझे बस अँधेरा ही दिखता हर रोज़ लुटती सुबह में ....मैं रोज़ यहाँ खिड़की से झाकती हूं अपनी आज़ादी की दुआ मांगती हूं ...
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Tag :कई जिस्म और एक आह copyright
  August 9, 2011, 12:23 am
कुछ बंधन,कुछ समर्पण और जहाँ प्रेम.विश्वास ममता का मिलन होता है वहां एक परिणीता का जन्म होता है चूड़ियों की खन-खनपायलों की छन-छन और जब सोलह श्रंगार कर  कोई मुखड़ा दमकता है वहां एक परिणीता का जन्म होता है मासूम बचपन,वो लडकपन  और जब अपना अंगना बिछड़ता हैवहां एक परिणी...
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Tag :परिणीताcopyrihgt
  August 2, 2011, 10:35 pm
1.दर्द को जीने दो अभी कितना जियेगा आखिरजब तुम वापस आ जाओगे ये भी चला जायेगा लेकिन मुझे मालूम नहीं अभी इस दर्द की क्या उम्र तय की है तुमने ...2.सोचता रहता हूं वो शब्द जो तुम्हारे दर्द में ढल जाये आखिर तुम भी तोकभी ये समझोगी की मैं भी तुम्हे समझता हूं....3.शाम होते होते तुमबिख...
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Tag :कुछ अक्षय सा पार्ट 1.....copyrihgt
  July 28, 2011, 8:20 pm
1.मुझे नहीं पता मुझे क्या कहना हैमुझे ये भी नहीं पता आप क्या सुननाचाहते हैंना आपके सवाल पता है और ना ही मुझेमेरे जवाबफिर भी आपसे रू -बा -रू हूँएक बार फिर न जाने क्यूँ न जाने किसलिए2.अब वो सारा प्यार आंसुओं में बह गयाजिस प्यार मे तुम कभी डूबे थेवो लहर अब ...
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  April 22, 2011, 12:17 pm
1.मुझे नहीं पता मुझे क्या कहना हैमुझे ये भी नहीं पता आप क्या सुननाचाहते हैंना आपके सवाल पता है और ना ही मुझेमेरे जवाबफिर भी आपसे रू -बा -रू हूँएक बार फिर न जाने क्यूँ न जाने किसलिए2.अब वो सारा प्यार आंसुओं में बह गयाजिस प्यार मे तुम कभी डूबे थेवो लहर अब ...
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Tag :प्यार "एक अनसुलझी पहेली"copyrihgt
  April 22, 2011, 12:17 pm
1.आंखें भीगी पलकों में नमी सी हैन जाने क्यूँ ये लबहंसी को कम अश्को को ज्यादा चूमने लगे हैं...2.वो सफहा और मैं दोनों कोरे हैं किसी दास्ताँ के लिएसोचा एक दूसरे की तन्हाई बाँट लें..उसे इक दास्ताँ मिल जाएगी औरमुझे भूली बिसरी कुछ यादें....अब न वो सफहा कोरा है और न मैं तन्हा.....3.मौन था...
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Tag :एहसास दूरियों काcopyrihgt
  October 24, 2010, 11:30 pm
एक मर्म और मन का अल्प अँधेराकिसी कल्पना को जन्म देता हैएक ऐसी कल्पना जो अभी निर्मल-नवीन हैइस संसार से अछुती हैसमय के साथ वो कल्पना पलती रही विचारों के पालने में उसको समेट लिया अपनी गोद मेंकुछ अधूरे बिखरे पन्नो नेकिसी ने उसे अवांछित कहा तोकोई अवहेलना करके चल दिया परन...
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Tag :कृति एक कल्पना
  October 14, 2010, 10:45 am
ये कैसी अभिव्यक्ति है तुम्हारी,ये कैसी रचना हैनिशब्द हो मौन खड़े क्यूँ ये कैसी विडम्बना हैशब्द ने शब्द ना होकर ये कैसा रूप ले लिया हैसरस्वती को लक्ष्मी बना दिया ये कैसी वंदना है ।आज जिन पन्नो पर तुमने उम्मीदें लिखी होंगीकल उन्ही पन्नो पर लम्बी सरहदें खिची होंगीमैं य...
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Tag :शब्द जो बोलते नहीं पुकारते हैं .copyrihgt
  April 25, 2010, 10:26 am
वक़्त की इस किताब पर लिखे हैंमेरी ज़िन्दगी के कुछ हिसाबहर पन्ना वो पुरानी याद कामुझे मेरी एक नई पहचान दे जाता हैऔर फिर से लिख जाता है कुछ ऐसाजो आज मेरा वर्तमान है कल मेरा इतिहास होगाखोलो उन लम्हों से बंधे पन्नो को जिसमेयादों की दस्तक कभी सुख तो कभी दुःखब...
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Tag :वक़्त की किताबcopyrihgt
  January 28, 2010, 10:52 pm
मेरे कमरे की कुछ तस्वीरेंजो मुझे देखती रहती हैं हर पलशायद वो बताना चाहती हैं किइस कमरे में मैं अकेला नहीमेरे साथ वो भी हैं जो टंगी हैं बरसों सेइन बेरंग दीवारों परमैं नही देखता था उनकोमगर आज देखा तो जानाकि अकेलेपन में कितनी मासूमियत औरसादगी होती है॥अक्षय-मन...
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Tag :मेरे कमरे की कुछ तस्वीरें.copyrihgt
  June 28, 2009, 7:16 pm
१.उम्मीद की डोर बंधी है मेरे लहराते आँचल सेकोई झोका हवा का उसका पता पूछे गरजते बादल सेकिसी को मालूम नही वो कहाँ है कैसा है कितनादर्द है कितना इंतज़ार पूछो मेरे अश्क, मेरे काजल से ।२.सांसों को अपनी शब्दों का नाम देदोक़यामत को इस कलम की पयाम देदोतेरा क्या बिगाड़ पायेगा को...
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Tag :कुछ मुक्तकcopyrihgt
  March 21, 2009, 1:18 pm
भूख फिर जागी है उन अंधेरों मेंएक रोता अलाप लिए वो तुमसेकहना चाहती है मुझे उस आँचलका एहसास करा दो जो कभी मुझपरनही गिरा मुझे ये बतादो की मैं कौन हूं?आज मैं ख़ुद को ढूढ़ रहा हूं कभी किसी माँके आँचल में कभी इन चलती राहों में तो कभी मुझेमिली फटकार से तो कभी मुझे मिली गालियों स...
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Tag :अनाथcopyrihgt
  December 18, 2008, 12:47 pm
१बन आहुति श्रंगार करूं अपने हाथों अपनी अर्थीहालातों की चिता है और अग्नि बन जाये मज़बूरीआखरी समय है मेरा या है आखरी ये जुल्म तेरादोनों में से कुछ तो हो जीवित हूं पर हूं मरी-मरी२मान रखूं मैं उनका भी जिनसे हुई अपमानित मैंजीत कर भी हारूं पल-पल तुमसे हुई पराजित मैंकिसकी थी ...
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Tag :नारीcopyrihgt
  October 11, 2008, 12:49 pm
१.वक़्त ने जो करवट ली है जिंदगी के मोड़ो परहमने खुद अपनी पीठ रगड़ी है बेजान पड़े इन कोड़ो परउनसे कुछ कहे ना पाए जानकर भी अनजान खड़े रहे हमवो तो अपने ही थे जो नमक छिड़कते रहे जख्मी पड़े उन फोड़ो पर !!२.बेइन्तहा दर्द को भी हमने उनका प्यार समझाआंसू हुए जो आने को हम रो ना पाए हम...
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Tag :जिंदगीcopyright
  October 11, 2008, 11:54 am

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  January 1, 1970, 5:30 am
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