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लोरि‍यों में कभी नहीं होते पि‍ता पि‍ता होते हैं अाधी रात को नींद में डूबे बच्‍चों के सर पर मीठी थपकि‍यों मेंकौर-कौर भोजन में नहीं होता पि‍‍‍‍ता के हाथों का स्‍वादपि‍ता जुटे होते हैंथाली के व्‍यंजनों की जुगाड़ मेंपि‍ता कि‍स्‍से नहीं सुनाते मगर ताड़ लेते हैंकि‍स ओर च...
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  June 18, 2017, 8:44 pm
अब शाम का रंग बदलने लगा थ्‍ाा। सूरज के आसपास नारंगी रंग फैला था। एक के बाद एक पहाड़ दूर तक नजर आ रहे थे। लोगों का ध्‍यान सब तरफ से हटकर सूरज की ओर था। आसमान साफ था, सो हम आराम से देख पा रहे थे कि‍ कैसे सूरज के आसपास लालि‍मा बढ़ती जा रही है और गहरे होते आसमान में सूरज कि‍तना ख...
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  June 6, 2017, 12:44 pm
बचपन से सुना है नेतरहाट के बारे में। एक तो वहां का सूर्योदय और सूर्यास्‍त, दूसरा नेतरहाट वि‍द्यालय, जो अपने शि‍क्षा के कारण बेहद प्रसि‍द्ध है। बि‍हार बोर्ड की परीक्षाओं में माना जाता था कि‍ प्रथम दस तक का स्‍थान नेतरहाट आवासीय वि‍द्यालय के बच्‍चे ही प्राप्‍त करते थे...
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  June 4, 2017, 8:30 pm
मेरा मन कभ्‍ाी-कभ्‍ाी बन जाता है हाईकोर्टआसपास की समस्‍यादि‍ल के अलग-अलग खानों मेंरखा हुआ दर्दचीत्‍कार उठता है तोस्‍वत: संज्ञान लेता है मनआदेश देता है दि‍माग कोकि‍दि‍ल के उस कोने में अति‍क्रमण हैत्‍वरि‍त कार्रवाई करस्‍थि‍ति‍ नि‍यंत्रण में लाई जाएयदि‍होता रहे ऐस...
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  May 31, 2017, 3:43 pm
वो इस क़दर मुझमें उतर गया दि‍ल बना एक कमरा और वो रौशनी सा भर गया तस्‍वीर...भीमताल की ...
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  May 31, 2017, 3:02 pm
मि‍लन की तीसरी कि‍स्‍त.... अब हम दोनों खूब जोर से हंस पड़े। अपनी कल्‍पना की उड़ान पर तुम मुग्‍ध दि‍खे और मैं तुम पर। हंसी थमने पर वेटर को बुलाकर तुमने कुछ स्‍नैक्‍स का आर्डर दि‍या और अपने बगल से एक पैकेट उठाकर मेरी ओर बढ़ाया। वह एक खूबसूरत रैपर से लि‍पटा गि‍फ्ट पैक था। मै...
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  May 29, 2017, 4:31 pm
मि‍लन की दूसरी कि‍स्‍त...........................................नि‍गाहें मि‍लीं ...वो मेरी तरफ़ मुस्‍कराता हुआ बढ़ा। कदमों की तेजी देखकर लगा कि‍ अभी गले लगा लेगा मुझको। मगर नहीं....पास आकर कदम थमे उसके। उसने हाथ भी नहीं मि‍लाया। बस एक आत्‍मीय पहचान उभरी और उसने मेरे हाथों से बैग ले लि‍या। क...
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  May 25, 2017, 1:35 pm
मि‍लन की पहली कि‍स्‍त .................................. सारा दि‍न दि‍ल धकधक करता रहा, जैसे सीने पर ही ट्रेन चल रही हो कोई। 24 घंटे का सफ़र 24 बरस का हो गया हो जैसे।कई ख्‍याल, कई कल्‍पनाएं और ढेर सारा डर.... आाखि‍र पहली बार तो मि‍ल रही थी उससे। बस मंजि‍ल पर पहुंचने को थी। बेसब्री मेरे चेहरे से झलक र...
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  May 21, 2017, 9:38 pm
अज़ब सा है जादू,जो मुझपे है छायातुम्हे सोच के दिल मेरा मुस्करायामेरे अश्क कहते हैं मेरी कहानीके संगदिल सनम को निभाना न आयाखिलौना समझके मेरे दिल से खेलाभरा जी जो उसका मुझे छोड़ आयाके फ़ितरत में उसकी वफ़ा ही नही थीतभी साथ उसने न मेरा निभायाफिरा हर गली में,वो बनके दीवानाहुआ ...
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  May 16, 2017, 8:35 pm
अप्रैल 2017 देश में अत्‍यधि‍क गर्मी के कारण चर्चित रहा, मगर इससे कहीं ज्‍यादा चर्चा रही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की, कि‍ राष्‍ट्रीय राजमार्ग और स्‍टेट हाईवे से 500 मीटर दूर तक नहीं होगी शराब की दुकान। जाहि‍र है इस आदेश से देश में हडकंप है। कुछ लोग वि‍रोध में हैं तो कुछ समर्थन म...
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  May 15, 2017, 9:38 pm
बरतन-बासन मलती मॉंचूल्‍हा-चौका- करती मॉंसांझ ढले फूंक-फूंक कर लकड़ी के चूल्‍हे सुलगाती मॉंसुबह बि‍स्‍तर से उठाती मॉंचाय-रोटी खि‍लाती मॉंतेल चुपड़कर बालों मेेंलाल रि‍बन से दो चोटी बनाती मॉंदोपहर पंख्‍ाा झल-झलकर पेट भर-भर खाना खि‍लाती मॉंदि‍न में जबरदस्‍‍‍‍‍‍‍ती स...
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  May 14, 2017, 2:08 pm
बरतन-बासन मलती माँचूल्‍हा-चौका- करती माँसांझ ढले फूंक-फूंक कर लकड़ी के चूल्‍हे सुलगाती माँसुबह बि‍स्‍तर से उठाती माँचाय-रोटी खि‍लाती माँतेल चुपड़कर बालों मेेंलाल रि‍बन से दो चोटी बनाती माँदोपहर पंख्‍ाा झल-झलकर पेट भर-भर खाना खि‍लाती माँदि‍न में जबरदस्‍‍‍‍‍‍‍ती स...
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  May 14, 2017, 2:08 pm
“डॉ.रागिनी नागपाल , प्रखंड अधिकारी गिरडीह” बरसात के इस मौसम में  लाल  पत्थर से बने  सरकारी कक्ष के बाहर पीतल की यह नाम पट्टिका मानो उसके भीतर बैठी अधिकारी के रुआब को रेखांकित कर रही हो,  परन्तु भीतर बैठी रागिनी अनेकों अनचाहे कामों से उद्ग्विन सी अपना सर हाथों से थ...
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  May 12, 2017, 10:02 am
जो तुम्‍हारे गम में शामि‍ल नहींउसे खुशि‍यों से भी बेदख़ल कर दि‍या करोजी लि‍या बहुतसबका एहतराम करकेमन के परि‍ंदे कोखुले आस्‍मां में छोड़ दि‍या करो...
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  May 5, 2017, 3:15 pm
घर के बाहरफिर खिला हैअमलताससूनी दोपहरघर है उदासपीले गजरेझूम रहे कंचन वृक्ष मेंसूनी देहरी कोकिसी के आने की हैआसघर के बाहरफिर खिला हैअमलतास...
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  May 3, 2017, 1:21 pm
मैं मृग्‍ायाकस्‍तूरी सी देहगंध तुम्‍हारीढूंढती फि‍रती दसों दि‍शाएंमि‍लते हो जब ख्‍वाबों में होते अलि‍ंगनबद्ध फूटती है सुगंध अपने हीतन से वि‍चरती हूं भावनाओं के वन मेंंअब तुम मोहि‍त से हो भंवरे कलि‍यां चटखती हैंदि‍वस जैसे मधुमासमैं मृगनयनीतुम कस्‍तूरीजीवन में ...
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  April 23, 2017, 6:30 pm
मैं मृग्‍ाीकस्‍तूरी सी देहगंध तुम्‍हारीढूंढती फि‍रती दसों दि‍शाएंमि‍लते हो जब ख्‍वाबों में होते अलि‍ंगनबद्ध फूटती है सुगंध अपने हीतन से वि‍चरती हूं भावनाओं के वन मेंंअब तुम मोहि‍त से हो भंवरे कलि‍यां चटखती हैंदि‍वस जैसे मधुमासमैं मृगनयनीतुम कस्‍तूरीजीवन में त...
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  April 23, 2017, 6:30 pm
मन पलाश का बहकेतन दहके अमलतास का ।कर्णफूल के गाछ तलेताल भरा मधुमास का ।अधरों के स्पन्दन सेखुली आँख के स्वप्न सेकिसलय कई खिले आलिठूंठ पड़े इस जीवन मेंछाया प्रणय आभास का ।बदरा फूटा मेह सेभीगा अँचरा नेह सेहर आखर में प्यार लिखरच पतरा प्रीतालेख काकसाव जैसे दृढ बाहुपाश का ...
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  April 17, 2017, 1:12 pm
तारापीठ जाने का संयोग अकस्‍मात हो गया। देवघर जाना था तो एक दि‍न पहले नि‍कल गए कि‍ इस दि‍न तारापीठ के दर्शन कर ही आए। 31 मार्च की दोपहर रांची से नि‍कले और शाम के 8 बजे तक देवघर में। रात वहीं रूककर सुबह तारापीठ जाना था मगर नि‍कलते-नि‍कलते 11 बज ही गए। 20-25 कि‍लोमीटर दूर गए तो रास...
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  April 12, 2017, 9:13 pm
देवघर से तारापीठ जा रही थी। जब दुमका से आगे गई तो रास्‍ते में माईलस्‍टोन पर लि‍खा मि‍ला कि‍ मलूटी 55 कि‍लोमीटर। अब ये कैसे हो सकता था कि‍ उस रास्‍ते से गुजरूं और उस गांव में न जाऊं जि‍सके बारे में इतना सुन रखा है कि‍ मंदि‍रों का गांव है यह। मेरी उत्‍सुकता चरम पर और नजरें स...
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  April 7, 2017, 9:07 pm
''एला रे सारजम बाएला रे हाड़ा गुन मेंएला रे खुडा़ सांगि‍न एला रे नसो रेन में ''..................................''आओ सखुआ के फूलआओ उतर आओआाओ नई-नई कोंपलेआओ उतर आओ ''प्रकृति‍ पर्व ''सरहुल''की बधाई सभी को । दो पंक्‍ति‍यां पहले मुंडारी में, फि‍र उसका हि‍ंदी अनुवाद पढ़ें।...
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  March 30, 2017, 1:04 pm
राह भूले तो नहीं न ....ये दि‍न वही हैं चैत के ।  कुसुम के लाल-लाल नाजुक पत्‍तों और पलाश से दग्‍ध जंगल सा दग्‍ध हृदय लि‍ए मैं बैठी थी हल्‍की फुहार की आस में।  आज बार-बार याद आ रहे तुम। ऐसा नहीं कि सिर्फ़ आज की बात हो। तुम रोज याद आते हो....मगर इस चैत माह में कुछ ज्यादा। इसलिए कि ...
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  March 29, 2017, 2:34 pm
रांची से हमलोग 24 मार्च को मेदि‍नीनगर गए थे एक कार्यक्रम में भाग लेने के लि‍ए। सुबह जब वापसी होने लगी  25 को तो दस बज गए थे। धूप तेज थी मगर सोचा कि‍ राजा मेदि‍नी का कि‍ला देख ही लि‍या जाए। पूरे रास्‍ते पलाश के जंगल की खूबसूरती देख मंत्रमुग्‍ध होते आए थे। जंगल दहक रहा हो जै...
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  March 28, 2017, 1:04 pm
कभी आँगन में फ़ुदकतीकभीखाट के पायों पर आकरबैठती थी गौरैयाधान के बोरे में चोंच घुसाने कोदरवाजे की फांक से अन्दरफ़ुदक करअक्सर आ जाती थी गौरैयानहीं डरती थी वो ज़रा भीबिल्कुल पास चली आती थीइधऱ-उधर बिखरे दानों को चुगचीं-चीं कर उड़ जाती थी गौरैयाछत पर सूखने को माँ रखती थीभर- भर...
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  March 20, 2017, 2:06 pm
पढ़ी हुई क़ि‍ताब का तुम वो सफ़ा हो जो बेहद पसंद है मुझेमगर मैं बार-बार पढ़ना नहीं चाहतीइसलि‍ए बंद रखती हूंयादों की वो कि‍ताबजि‍ससे तुम्‍हारी रुपहली मुस्‍कानझांका करती है गाहे-बगाहेऔर तुम अरसे बाद बीच-बीच में बाहें पसारे चले आते हो जैसे मेरी खाति‍रवक्‍त को थाम रखा है...
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  March 18, 2017, 3:33 pm
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