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रूप-अरूप

बेसबब आवाराआख़िर कब तक फिरोगेहुई शाम जोघर को ही लौटोगे !जागी रातों कीतन्हाइयों का हिसाबअब किसे देनाहै किससे लेना ?दिल की रखोअपने ही दिल मेंकह गये तो देखनाफिर एक बार फँसोगे !इतनी सी बात पे जो गयेउसे आवाज क्यों देनाकर लो किसी से भी मोहब्बतउसमें मुझको ही ढूँढा करोगे...।...
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  August 9, 2019, 10:56 am
तुम भूल गए कल की बातेंया याद अभी कुछ बाक़ी है !!पथरा गए एहसास सभीया प्यार अभी कुछ बाक़ी है !!जो कहना है, कह दो मुझसेयह रात अभी कुछ बाक़ी है!!वीरान हुआ दिल का उपवनपर राग अभी कुछ बाक़ी है!!...
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  July 27, 2019, 10:42 pm
बोसीदा मकान की दरारों सेकोई तो अंदर आएगाचढ़ने दो सूरज को फलक पर औरज़रा और .........
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  July 25, 2019, 9:14 pm
“ उजड़े दयार मेंखिलने लगे हैं अबफूल भीतेरे जाने के बाद,अब तीरगी की बात कौन करे !”‘ज़िंदगी’जी भर कर तन्हा कर दे मुझेवादा है..तुझसे मोहब्बत करती रहूँगी ।...
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  July 19, 2019, 12:40 pm
टुकड़ों में नींदमुट्ठी भर यादकुछ अधूरी सी बातऔर बेहिसाब एकांतचलो कर लूं आजयादों की जुगालीकिजिंदगी में हर दरवाजाआगे की ओर नहीं खुलता.......
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  July 14, 2019, 5:52 pm
ढलती शाम टिमटिमाती यादेंथमी ज़िंदगी ...
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  July 6, 2019, 11:08 pm
जाते हुएएक झलक देखी थी ....जैसे नींद में डूबा आदमीउठे, और बारिश की पीठ देखे .......
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  July 2, 2019, 12:38 pm
जाते-जातेकहीं ठहर जाते होजैसेपत्तियों में छुपी बारिश की कांपती कोई बूँददूर किसीघर के कोने मेंबजती कोई पहचानी सी धुनयादों की कतरनों मेंझिलमिलाता हैबार-बार एक चेहराजाते-जातेरुक जाने सेकितना कुछ ठहर जाता है .......
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  July 1, 2019, 12:33 pm
कि‍तनी बार कहा था उसने...नहीं जी पाऊंगा तुम बि‍न... कि‍ तुम बि‍न जीवन मौत बराबर है। मैंने भी कही थी यह बात..उसके सैकड़ों बार के जवाब में एक बार तो जरूर...मगर जी रहे हैं न..बेशर्मों की तरह ...यह अलग बात है कि‍ जीने के लि‍ए रोज साधन जुटाने पड़ रहे हैं। कभी प्रार्थना, कभी दवा तो कभी ख...
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  June 10, 2019, 1:26 pm
सोचा था एक दि‍न मुट्ठि‍यों में कसकर रख लूंगी 'प्रेम' नि‍कल भागा ऊंगलि‍यों की दरार से रेत, पानी, हवा की तरह ...
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  June 6, 2019, 9:29 pm
“इतने सालों में कभी याद नहीं आयी?”“हर रोज़”“मिलने का सोचा एक बार भी ?”“हज़ारों बार”“फिर....?”“ फिर ......कैसे आता तुम तक?निरंतर भटकाव और उदासी...इसका अपना ही मज़ा है ...” फीकी मुस्कान थी होठों पर।टहनियों में उलझी शाम थोड़ी और गहरी हो गई। ...
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  June 2, 2019, 1:54 pm
“है गिरफ़्त में अब ख़िजाँ, कुछ याद नहीं उनकोमैं बैचेन फ़लक ज़ाकिर, वो जाके नहीं आते....”...
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  April 8, 2019, 9:36 pm
महाकाल के दर्शन के लि‍ए उज्‍जैन हम अक्‍सर जाते हैं। क्‍या आपको मालूम है कि‍ इस नगरी में महादेव के 84 मंदि‍र हैं। इस श्रृखंला में 38वें नंबर पर आता है कुसुमेश्‍वर महादेव का मंदि‍र। पि‍छले दि‍नों जब हम उज्‍जैन की यात्रा पर थे, तो महाकाल के दर्शन के बाद आसपास के सभी प्रसि‍...
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  March 4, 2019, 5:36 pm
साथ छूट रहा ...हाथ छूट रहा ...’है’ से ‘था’ की ओर सफ़र कर रहा हमारा रिश्ता। कभी नहीं चाहा था ऐसा हो,  मगर होनी पर किसका वश है?तुम्हारी आवाज़ गूँजती है इर्द-गिर्द..... कहीं से भी चलकर कोई बात आती है और लगता है, तुम बोल रहे हो मेरे आसपास कहीं। कितना अजीब है न यह कि कोई पंक्ति ..कोई बात...
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  February 25, 2019, 4:50 pm
कह पाती उस तरह तो आज भी कहती मगरन तुम रहे उस क़ाबिल औरन मैं रही अब वैसी मासूम.......
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  February 21, 2019, 8:48 pm
मन के अरण्य में स्मृतियों की बंजर हथेली परसूखे- झरे पात हैंएक-एक करचुन लूँबिखरी यादों कोइस उदास मौसम मेंपतझड़ के आख़री पत्ते की तरहऔर गुनगुनाती धूप मेंधीमे-धीमेदुख से बाहर आने काकोई रास्ता देखूँकि सुना हैवसंत की ऊँगलियों मेंजादू हैवो खिलाएगा पल्लव नयाउगेगा सरसो...
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  February 15, 2019, 8:13 pm
आज फिर तेरी याद आयी...बेतरह आयी...इतनी कि सम्भाली न गयी और आँसुओं से अपना ही दामन तर हो गया।तू बिछड़ा है तो क़ुसूर मेरा है ना ..तू तो जाने कब से बता रहा था मुझे कि अब मैं रहूँ न रहूँ, तुम्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला। हर बार झगड़े के बाद मैं रूठती और फिर मान भी जाती....दरअसल दूस...
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  February 12, 2019, 9:27 pm
उम्र कुछ भी हो...आंखों में कुछ सपने सदा वैसे ही रहते हैं, जैसे बचपन में देखा हुआ आकाश का चांद या नदी में लगाई छलांग...या कुछ आदतें, जो परि‍स्‍थि‍तयों की नहीं, जी गई जि‍ंदगी की सौगात होती है।     उन्‍न्‍हतर वर्ष की उम्र में भी 'कि‍टी मेमसाहब'की आंखों में चमक कौंध जाती है लै...
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  February 11, 2019, 9:27 pm
मैं मुक्त हूँ, तुम मुक्त हो ..निकल आओइस जन्म-मृत्यु के चक्र सेलगा लो डुबकी प्रयाग में कर लो संगम स्नानले जाओ मेरी यादेंहड्डियों की तरह, राख की तरहकर दो प्रवाहितहरिद्वार मेंजोड़कर हाथ, कहनाहम दोनों मुक्त हुएये अंतिम प्रणाम है...अंतिम प्रणाम हैकहो न प्रिय !तुम सच लेकर मर...
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  February 1, 2019, 8:26 pm
बहती रही धार में...जाने कब से। कई बार कि‍नारे की तरफ जाने को सोचा भी....मगर डर लगता रहा...क्‍या पता डूब ही जाऊं....बेहतर है, बहती चलूं धार के साथ....थपेड़े बर्दाश्‍त करते-करते आदत हो गई।कभी-कभी जब सम पर होता सब कुछ तो कि‍तना सुकून मि‍लता है।लगता है इससे बड़ा सुख और कुछ नहीं। जो मि‍...
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  January 31, 2019, 8:37 pm
दर्द झेलना बहुत मुश्‍कि‍ल होता है..खासकर तब, जब यह दर्द दि‍ल को घायल करने के बाद मन से तन में उतरने लगता है.....मन और तन की तकलीफ साथ-साथ तंग करती है तो समझ नहीं आता कि‍से पहले देखूं....कि‍से शांत करूं.;क्‍या इलाज करूं....बहुत प्‍यास लगती है इन दि‍नों...जैसे पानी बेअसर हो .....तुम्‍ह...
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  January 30, 2019, 2:01 pm
आज फि‍र पूर्णिमा है....जाने इन दि‍नों चांद का मुझसे कैसा नाता हो गया है...मैं समुद्र तो नहीं....मगर चांद रातों में ज्‍वार उठता है मेरे अंदर...सब उथल-पुथल।पौष पूर्णिमा को सूर्य और चंद्रमा के संगम का दि‍न माना जाता है न...मगर मन का संगम न हो तो कुछ भी नहीं....। कल से महीना बदल जाएगा औ...
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  January 21, 2019, 9:54 pm
ज़िंदगी में ग़मशुमार करना हैएक बार फिर सेउसे प्यार करना हैवक़्त के ख़ाली लिफ़ाफ़े से अब जी नहीं बहलताफूलों की गमक सेअपनी शाम भरना हैनहीं भाता सर्दियों केउदास मौसम मेंधड़कनों का इस क़दरसर्द हो जानाकिसी की याद में फिर सेदिल बेक़रार करना हैसुन ए दिल एक बारफिर से उसे ...
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  January 10, 2019, 2:14 pm
बिछड़ने की बात पर दो बूँद आँखों से बेआवाज़ गिर जाना अब न चुभता है ना पूछना चाहता है दिल कि अबकी बरसबिछड़ जाओगे तोकैसे जी पाएँगे ...?उलझा लोगे ख़ुद कोतमाम उलझनों मेंकि सुबह से रात तकदम न लेने पाओमगर किसी शब के सन्नाटे मेंचाँद के रूबरू होगेतो देखनायाद में कैसे तड...
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  January 9, 2019, 5:47 pm
अहा....फि‍र करवट लि‍या मौसम ने....सुन रही हूं सर्द हवाओं की दस्‍तक ...शाम गुलाबी है, सि‍हरन जगाती। अब पगडंडि‍यों पर वो दौड़ती नजर आएगी...हथेलि‍यों में पारि‍जात के फूल भरे....उधर मंदि‍र के आंगन में गले में ऊनी मफलर डाले बेसब्री से कर रहा होगा वो उसका इंतजार....सर्दियां रूमा...
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  October 25, 2018, 1:09 pm
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