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मन पाए विश्राम जहाँ

एक लघु कहानी कल रात्रि पुनः स्वप्न में उसे वही स्वर्ण कंगन दिखा, साथ ही दिखी मारिया की उदास सूरत. वह झटके से उठकर बैठ गयी. एक बार उसने ईश्वर से प्रार्थना की और मन ही मन मारिया से भी क्षमा मांगी,  “नहीं, उसे उस पर जरा भी संदेह नहीं है कि उसका कीमती आभूषण उसने चुराया है.” उसे ...
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Tag :चोरी
  April 25, 2017, 3:52 pm
चलों संवारें वसुधा मिलकर  दुनिया युद्ध की भाषा बोले  प्रीत सिखाने आया भारत,  टुकड़ों में जो बांट हँस रहे उनको याद दिलाता भारत ! एक विश्व है एक ही धरती  एक खुदा है एक ही मानव, कहीं रक्त रंजित मानवता  कहीं भूख का डसता दानव  विश्व आज दोराहे पर है  द्वेष, वैर की आग सुलगती, ...
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Tag :प्रेम
  April 24, 2017, 1:36 pm
नई कोंपलें जो फूटी हैं कोकिल के स्वर सहज उठ रहे जाने किस मस्ती में आलम, मंद, सुगन्धित पवन डोलती आने वाला किसका बालम ! गुपचुप-गुपचुप बात चल रही कुसुमों ने कुछ रंग उड़ेले, स्वर्ग कहाता था जो भू पर उस भूमि पर नफरत डोले ? कैसा विषम काल आया है लहू बहाते हैं अपनों का, जिनसे ...
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Tag :काश्मीर
  April 21, 2017, 3:26 pm
अनजाने गह्वर भीतर हैं पल-पल बदल रहा है जीवन क्षण-क्षण सरक रही हैं श्वासें, सृष्टि चक्र अविरत चलता है किन्तु न हम ये राज भुला दें ! अनजाने गह्वर भीतर हैं नहीं उजास हुआ है जिनमें, कौन कहाँ से कब प्रकटेगा भनक नहीं जिनकी ख्वाबों में ! फसल काटनी स्वयं को ही है जितने बीज गि...
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Tag :जीवन
  April 19, 2017, 10:34 am
वरदानों को भूल गया मन रिश्ता जोड़ रहा है कब से  पल-पल दे सौगातें  जीवन, निज पीड़ा में खोया पागल  वरदानों को भूल गया मन ! ठगता आया है खुद को ही  उसी राह पर कदम बढ़ाता, शूल चुभा था, दर्द सहा था  गीत वही गम के दोहराता ! एक चक्र में डोले जैसे  बिंधने की पल-पल तैयारी, सुख का बादल रह...
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Tag :गम
  April 17, 2017, 9:25 am
एक रहस्य थम जाती है कलम बंद हो जाते हैं अधर ठहर जाती हैं श्वासें भी पल भर को लिखते हुए नाम भी... उस अनाम का नजर भर कोई देख ले आकाश को या छू ले घास की नोक पर अटकी हुई ओस की बूंद झलक मिल जाती है जिसकी किसी फूल पर बैठी तितली के पंखों में या गोधूलि की बेला में घर लौटते पंछियों...
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Tag :कलम
  April 3, 2017, 3:46 pm
मिट जाने को जो तत्पर है मरना जिसने सीख लिया है उसको ही है हक जीने का, साँझ ढले जो मुरझाये, दे प्रातः उसे अवसर खिलने का ! मिट जाने को जो तत्पर है वही बना रहता इस जग में, ठोकर से जो न घबराए बना रहेगा जीवन मग में ! सच की पूजा करने वाले नहीं झूठ से बच सकते हैं, जो सुन्दरता को ...
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Tag :ठोकर
  March 28, 2017, 12:37 pm
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश (अंतिम भाग ) गेस्टहाउस के कर्मचारियों ने जो वहाँ पिछले कुछ वर्षों से रह रहे हैं कुछ रोचक बातें बतायीं. मिजोरम में संयुक्त परिवार होते हैं. परिवार के बड़े पुत्र को जायदाद नहीं मिलती, बल्कि सबसे छोटे पुत्र को परिवार का उत्तराधिकारी बनाया जाता ह...
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Tag :मिजोरम
  March 25, 2017, 12:45 pm
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश (तीसरा भाग ) १७ मार्च २०१७-लुंगलेई आज भी सुबह मुर्गे की आवाज आने से पहले ही नींद खुल गयी. आज की सुबह भी पहले से बिलकुल अलग थी. कमरे की विशाल खिड़की से जिस पर लगे शीशे से बहर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है, पर्दे हटा दिए. अभी बाहर अँधेरा था. आकाश पर तारे ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 24, 2017, 9:45 am
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश ( दूसरा भाग ) सुबह पांच बजे से भी पहले मुर्गे की बांग सुनकर हम उठे गये. सूर्योदय होने को था, कुछ तस्वीरें उतारीं. पल-पल आकाश के बदलते हुए रंग यहाँ के हर सूर्योदय को एक आश्चर्यजनक घटना में बदल देते हैं. रंगों की अनोखी छटा दिखाई देती है. गेस्ट हॉउस के ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 23, 2017, 11:06 am
ओ रे मन ! किस उलझन में खोये रहते  किस पीड़ा को पल-पल सहते, सुनो गीत जो नभचर  गाते निशदिन  मधुर राग बहता है ! किस शून्य को भरे हो भीतर  कण-कण में अमृत बसता है, सपनों ने दिन-रात जलाया  खुली आंख ही वह मिलता है ! एक विशाल वितान सजाया   रंगमंच पर नट अनेक हैं, सुख-दुःख के झीने पर्द...
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Tag :उलझन
  March 22, 2017, 4:36 pm
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश १४ मार्च २०१७-आइजोल  सुबह पौने छह बजे हम दुलियाजान-असम से रवाना हुए थे. सवा आठ बजे फ्लाईट डिब्रूगढ़ के मोहनबारी हवाईअड्डे से चली और पौने दस बजे कोलकाता पहुंची. जहाँ तीन घंटे प्रतीक्षा करने के बाद दोपहर एक बजे स्टारलाइंस-एयर इंडिया के विमान ने आ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 22, 2017, 3:39 pm
जीवन स्वप्नों सा बहता है  आज नया  दिन  अग्नि समेटे निज दामन में  उगा गगन में अरुणिम सूरज  भर उर में सुर की कोमलता  नये राग छेड़े कोकिल ने  भीगी सी कुछ शीतलता भर  नई सुवास हवा ले आयी मंद स्वरों में गाती वसुधा   पल भर में हर दिशा गुंजाई  उड़ी अनिल संग शुष्क पत्तियां  कहीं ...
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Tag :जीवन
  March 11, 2017, 11:20 am
दिल का द्वार रहे उढ़काए  नजर चुरायी जिस क्षण तुझसे  खुद से ही हम  दूर हो गये,  तेरे दर पर झुके नहीं जो   दिल खुद से मजबूर हो गये  ! स्वप्निल नैना बोझिल सांसें   दूर खड़ी ललचाती मंजिल, कितने दांवपेंच खेले पर  सभी इरादे  चूर हो गये ! राग जगाता जग भरमाता  हर सुकून ख्वाब बन ट...
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Tag :द्वार
  March 10, 2017, 9:58 am
एक दिन एक दिन आएगा   जब सही अर्थों में समान होंगे हम  परमात्मा की ज्योति से दीप्त  मनु और शतरूपा की भांति  एक समान आवश्यक  उसे जन्माने में  पंछी के दो परों की भांति  जीवन के हर द्वंद्व की भांति  अपरिहार्य एक से  नहीं होगी कोई प्रतिद्वंद्वता  न कोई स्पर्धा  न कोई छोट...
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Tag :जीवन
  March 9, 2017, 4:13 pm
 रंग चुरा के कुछ टेसू के सुरभि भरे निज आंचल में फिर  गीत गा रही  पवन बसंती, नासापुट की खत्म प्रतीक्षा  भीगा उर फागुन  की मस्ती ! कंचन झूमा, खिला पलाश  बौराया आम्रवन सारा, आड़ू, नींबू सभी महकते  कामदेव ने किया इशारा !  एक तरफ झरते हैं पत्ते  नव कोमल पल्लव उग आते, जीवन-मृत...
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Tag :बसंती
  March 7, 2017, 3:43 pm
एक बीज बोया अंतर में  ऊपर कितना ही साधा हो  एक खोज भीतर चलती है,  नहीं यहाँ विश्राम किसी को  सदा वही पथ पर रखती है ! किन्तु अनोखे राहीगर हम  हर पड़ाव पर खेमे गाड़े, जैसे मिल ही गयी हो मंजिल हुए बेखबर खुद से हारे ! जाग रहा है भीतर कोई  रहे ताकता पल-पल जैसे, बाहर ही बाहर हम तक...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 6, 2017, 10:05 am
हर भारतवासी देश भक्त है  हर फूल अनोखा है बगिया में   निज रंग और गंध लुटाता हुआ अपने तरीके से  हर पंछी गाता है अपनी ही धुन में    प्यार का इजहार भी करता है  तो हर कोईअपनी तरह से  अपनी माँ को पुकारने का हर बच्चे का  निजी तरीका है  कोई नहीं कह सकता  यही एक मात्र सलीका है  ...
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Tag :फूल
  March 3, 2017, 2:09 pm
शब्द और अर्थ कहते-सुनते, लिखते-पढ़ते बीत गये युग-युग, फिर भी नये-नये ही अर्थ दे रहे शब्द रहे नित नूतन ही ! प्रेम जिसे कहते थे पहले माने उसके बदल गये अब, भक्ति नहीं अब मने मनौती मंदिर में व्यापार चले जब ! कुनबा कहते ही आँखों में दादी, नानी  लगें झलकने, किस नाम से इसे पुकारें द...
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Tag :कुनबा
  March 2, 2017, 3:48 pm
 बंटना ही जीवन है  सूर्य बांटता है अपनी ऊर्जा सृष्टि के हर कण से पुहुप  सांझा करता है  मधु और गंध हवा प्रवेश करती आयी है अनंत नासापुटों में अनंत काल से ! अस्तित्त्व लुटा रहा है बेशर्त पल-पल जितना देता है वह  उतना ही भरता जाता है न जाने  किस अदृश्य कोष से ! लुटाती है माँ अपन...
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Tag :पुहुप
  February 27, 2017, 3:35 pm
चार कदम पर ही है होली मधु टपके बौराया उपवन जाने कहाँ से रस  भरता है, गदरायीं मंजरियाँ महकें  संग समीरण के बहता है ! हुई नशीली फिजां चहकती  फगुनाई सिर चढ़ कर बोली, रंग-बिरंगी बगिया पुलके  चार कदम पर ही है होली ! नन्ही चिड़िया हरी दूब पर  नई फुनगियाँ  हर डाली पर, कोई भेज रह...
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Tag :धूप
  February 25, 2017, 10:08 am
कभी पवन का झोंका कोई नीरव दोपहरी में छन-छन किरणें वृक्ष तले सज जातीं, कभी हवा के झोंके संग इक लहराती पत्ती बिछ जाती ! मधु संचित करते कुसुमों से भंवरे, तितली अपनी धुन में, श्वेत श्याम कबूतर जब तब जाने क्या चुगते बगिया में ! कभी पवन का झोंका कोई बिखरा जाता पाटल पल्लव, मुंदन...
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Tag :कुसुम
  February 24, 2017, 1:37 pm
एक छुअन है अनजानी सी  शब्दों में कैसे ढल पाए  मधुर रागिनी तू जो गाए, होने से बनने के मध्य  गागर दूर छिटक ही जाए ! एक छुअन है अनजानी सी  प्राणों को जो सहला जाती, एक मिलन है अति अनूठा  हर लेता हर व्यथा विरह की ! मदिर चांदनी टप-टप टपके कोमलतम है उसका गात,  तके श्याम बाट राध...
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Tag :दिशी
  February 22, 2017, 3:04 pm
सीधे घर वापस ले चल दी कितने ख्वाब अधूरे मन में  कितनी  आशाएं पलती थीं,  मृत्यु ने दस्तक भी न दी  सीधे घर वापस ले चल दी ! कुछ भी न कह पाये मन की  जीवन एक अधूरी गाथा, साथ जियेंगे साथ मरेंगे  घबराहट में  भूला वादा  ! कितनी यात्रायें शेष थीं    अंतिम होगी यह  खबर किसे, जीवन भी ...
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Tag :जीवन
  February 8, 2017, 4:22 pm
स्वाद हो या रास का सा एक शीतल सा धुआं है या धुंधलका शाम का सा, एक ज्योति रक्त वर्णी एक दीपक अनदिखा सा  ! नाद अनहद गूँजता यूँ गीत अनगाया हुआ सा, सृष्टि का हो बीज जैसे हर कहीं छाया हुआ सा ! एक झोंका प्रीत का हो गंध ऐसी मदभरी सी, एक अनजाने नगर से भर संदेसे ला रही सी ! रस भरा महुआ ...
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Tag :पर्स
  February 7, 2017, 1:35 pm
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