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मन पाए विश्राम जहाँ

पुनः पुनः मिलन घटता है निकट आ सके कोई प्रियतम तभी दूर जाकर बसता है ! श्वास दूर जा नासापुट से अगले पल आकर मिलती है, आज झरी मृत हो जो कलिका पुनः रूप नया धर खिलती है ! बार–बार घट व्याकुल होकर पाहुन का रस्ता तकता है, उस प्रियजन का निशिवासर जो नयनों में छुपकर हँसता है ! ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 20, 2018, 3:03 pm
 भारत रत्न अटल जी बड़े दिवस पर जन्म लिया था अति विशाल कवि मानस पाया,  अंतर समर्पित राष्ट्र हित हो जूझ आंधियों में मुस्काया ! तेरह मास, पांच वर्षों  का सफर बड़ा ही कठिन गुजारा, किन्तु नहीं आया फिर से वह गौरवशाली समय दुबारा ! जनसंघ के संस्थापक बने बीजेपी को भी जन्म दि...
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Tag :कवि
  August 17, 2018, 10:27 am
तिरंगा नीलगगन में लहराते तिरंगे को देख याद आते हैं वे अनाम चेहरे इतिहास में जिनका कोई वर्णन नहीं इस अमर स्वतन्त्रता के वाहक जो बने ! आज आजाद हैं हम खुली हवा में श्वास लेने,  दिल का हाल कहने सुनने को ! चैन की नींद सो सकते हैं उगा सकते हैं धरा में अपनी पसंद की फसलें भ...
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Tag :कृष्ण
  August 14, 2018, 4:13 pm
अभी समर्थ हैं हाथ अभी देख सकती हैं आँखें चलो झाँके किन्हीं नयनों में उड़ेल दें भीतर की शीतलता और नेह पगी नरमाई सहला दें कोई चुभता जख्म कर दें आश्वस्त कुछ पलों के लिए ही सही बहने दें किसी अदृश्य चाहत को वरदान बनकर ! अभी सुन सकते हैं कान चलो सुनें बारिश की धुन और ...
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Tag :प्यार
  August 11, 2018, 6:49 pm
खुले आकाश सा सवाल बन के जगाये कई रातों को  जवाब बनकर एक दिन वही सुलाता है  ढूँढने में जिसे बरसों गुजारे वही हर रोज तब आकर जगाता है जिसकी चाहत में भुला दिया जग को  जग की हर बात में नजर आता है छुपा हुआ है जो हजार पर्दों में खुले आकाश सा दिपदिपाता है मांगते फिरते हैं ...
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Tag :पर्दा
  August 8, 2018, 10:50 am
राखी के कोमल धागे आया अगस्त अब दूर नहीं श्रावणी पूनम उत्सव एक अनोखा, जिस दिन मधुर प्रीत की लहर बहेगी हृदय जुड़ेंगे, बांध रेशमी तार उरों में नव उमंग, तरंग जगेगी और सजेंगे घर-घर में, दीपक-रोली के थाल देकर कुछ उपहार हथेली में, बहना की मुस...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 6, 2018, 3:16 pm
मोहन की हर अदा निराली माधव केशव कृष्ण मुरारी अनगिन नाम धरे हैं तूने, ज्योति जलाई परम प्रेम की अंतर घट थे जितने सूने ! दिया सहज प्रेम आश्वासन युग-युग में कान्हा प्रकटेगा , सुप्त चेतना दबी तमस में हर बंधन से मुक्त करेगा ! सच की आभा सुहृद बिखेरे अनुपम प्रतिमा सुन्दरत...
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Tag :बंधन
  August 3, 2018, 4:14 pm
शब्दों से ले चले मौन में माटी का तन ज्योति परम है सद्गुरु रब की याद दिलाता, है अखंड वह परम निरंजन तोषण का बादल बरसाता ! खुद को जिसने जान लिया है गीत एक ही जो गाता है, एक तत्व में स्थिति हर क्षण  अंतर प्रेम जहाँ झरता है ! शब्दों से ले चले मौन में परिधि से सदा केंद्र की ...
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Tag :ज्योति
  July 30, 2018, 1:04 pm
पावन प्रीत पुलक सावन की कितने ही अहसास अनोखे कितने बिसरे ख्वाब छिपे हैं, खोल दराजें मन की देखें अनगिन जहाँ सबाब छिपे हैं ! ऊपर-ऊपर उथला है जल कदम-कदम पर फिसलन भी है, नहीं मिला करते हैं मोती इन परतों में दलदल भी है ! थोड़ा सा खंगालें उर को जाल बिछाएं भीतर जाकर, चलें खोजन...
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Tag :उर
  July 23, 2018, 4:57 pm
अस्तित्त्व और हम अस्तित्त्व खड़े करता है प्रश्न खोजने होते हैं जिनके उत्तर हमें आगे बढ़ने के लिए.. जरूरी है परीक्षाओं से गुजरना अनसीखा मन लौटा दिया जाता है बार-बार कच्चे घड़े की तरह अग्नि में ! जीवन कदम-कदम एक मौका है खड़े रहें इस पार.. डूब जाएँ मंझधार में.. या उतर जाएँ उ...
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Tag :जीवन
  July 16, 2018, 2:12 pm
नदिया सा हर क्षण बहना है ख्वाब देखकर सच करना है  ऊपर ही ऊपर चढ़ना है,   जीवन वृहत्त कैनवास है  सुंदर सहज रंग भरना है ! साथ चल रहा कोई निशदिन  हो अर्पित उसको कहना है, इक विराट कुटुंब है दुनिया  सबसे मिलजुल कर रहना है ! ताजी-खिली रहे मन कलिका नदिया सा हर क्षण बहना है, घाट...
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Tag :जीवन
  July 12, 2018, 9:10 am
चाह जो उस की जगी तो राह कितनी भी कठिन हो दूब सी श्यामल बनेगी, चाह जो उस की जगी तो उर कली इक दिन खिलेगी ! जल रहा हर कण धरा का अनुतप्त हैं रवि रश्मियाँ, एक शीतल परस कोमल ताप हरता हर पुहुप का  ! लख नहीं पाते नयन जो किन्तु जो सब देखता है, जगी बिसरी याद जिसमें मन वही बस चेतता ...
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Tag :कोमल
  July 7, 2018, 2:49 pm
राज खुलता जिंदगी का एक उत्सव जिन्दगी का चल रहा है युग-युगों से, एक सपना बन्दगी का पल रहा है युग युगों से ! घट रहा हर पल नया कुछ किंतु कण भर भी न बदला, खोजता मन जिस हँसी को उसने न घर द्वार बदला ! झाँक लेते उर गुहा में सौंप कर हर इक तमन्ना, झलक मिलती एक बिसरी राज खुलता जिंद...
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Tag :घर
  July 4, 2018, 9:54 am
ईद के मौके पर एक इबादत इक ही अल्लाह, एक ही रब है, एको खुदाया, उसी में सब है ! अंत नहीं उसकी रहमत का करें शुक्रिया हर बरकत का, जो भी करता अर्चन उसकी क्या कहना उसकी किस्मत का ! जग का रोग लगा बंदे को ‘नाम’ दवा, कुछ और नहीं है, मंजिल वही, वही है रस्ता उसके सिवाय ठौर नहीं है ! ...
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Tag :खुदा
  June 15, 2018, 2:21 pm
सागर तपता है सागर तपता है और बनकर मेघ शीतल डोलता है संग पवन के बरस जाता है तप्त भूमि पर.. मन अंतर तपता है और बनकर करुणा अनंत डोलता हैं संग प्रेम के बरस जाता है तप्त हृदयों पर.. विचारों को सच की आग में तपाना होगा निखारना होगा भावनाओं को उस भट्टी में जहाँ सारे अशुभ जल ...
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Tag :अहंकार
  June 6, 2018, 3:09 pm
अंतर अभीप्सा आकाश शुभ्र है शुभ्र हैं हिमालय के शिखर है अग्नि पावन और पावन है मानसरोवर का जल आत्मशक्ति उठना चाहती है गगन की ओर अग्नि की भांति बढ़ना चाहती है उर्ध्व दिशा में ही बुझा देता है शिखा, मन बन जलधार ढक लेती ज्योति को बुद्धि बन दीवार उसे कभी प्रकाशित नहीं होन...
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Tag :आंच
  May 23, 2018, 2:05 pm
जीवन सरिता बहती जाती सुख-दुःख मनहर तटों के मध्य जीवन सरिता बहती जाती, नित्य नवीन रूप धरकर फिर माया के नित खेल रचाती ! बैठ नाव में चला मुसाफिर डोला करता सँग लहरों के, चल इस पार से उस पार तक जाने मंजिल कौन दिशा में ! उठें बवंडर भावनाओं के कभी विचारों के तूफान, धूमिल ...
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Tag :मंजिल
  May 19, 2018, 10:51 am
नई भोर फिर भोर हुई फिर कदम उठे फिर अंतर उल्लास जगा रस्तों पर हलचल मन के बीता पल जिसमें तमस घना फिर आशा खग ने पर तोले उर प्रीत भरी वाणी बोले लख जग भीगा अंतरमन प्राणों में नव संचार भरे कुसुमों ने फिर महकाया वन पलक झपकते कहीं खो गयी घोर निशा का हुआ अंत भीतर लेकर कुछ लक्ष...
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Tag :तमस. प्राण
  May 14, 2018, 2:56 pm
माँ जीवन की धूप में छाया बन चलती है, दुविधा के तमस में दीपक बन जलती है ! कहे बिना बूझ ले अंतर के प्रश्नों को, अंतरमन से सदा प्रीत धार बहती है ! बनकर दूर द्रष्टा बचाती हर विपद से, कदम-कदम पर फूँक हर आहट पढ़ती है ! छिपे हुए काल में भविष्य को गढ़ती है, माँ का हृदय विशाल  ...
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Tag :दीपक
  May 12, 2018, 7:53 pm
जीवन कैसे अर्थवान हो इस जीवन का मर्म सिखाने खुद को खुद से जो मिलवाये, कर प्रज्वलित अंतर उजास आत्मकुसुम अनगिनत खिलाये ! माँ बनकर जो सदा साथ है स्नेह भरा इक स्पर्श पिता का, अपनों से भी अपना प्रियजन समाधान दे हर सुख-दुःख का ! जीवन कैसे अर्थवान हो सेवा के नव द्वार खोलता,...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  May 11, 2018, 1:35 pm
बुद्ध का निर्वाण एक बार देख मृत देह हो गया था बुद्ध को वैराग्य अपार हजार मौतें नित्य देख हम बढ़ा रहे सुविधाओं के अंबार जरा-रोग ग्रस्त देहों ने उन्हें कर दिया दूर भोग-विलास से हम विंडो शॉपिंग के भी बहाने हैं ढूँढ़ते बढ़ती जा रही है दरार आज  धनी और निर्धनों के मध्य जि...
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Tag :दान
  April 30, 2018, 2:56 pm
कोई देख-देख हँसता है आँख मुँदे उसके पहले ही क्यों ना खुद से नजर मिला लें, अनदेखे, अनजाने से गढ़ भेद अलख के मोती पा लें ! कितना पाया पर उर रीता झांकें, इसकी पेंदी देखें, कहाँ जा रहा आखिर यह जग तोड़ तिलिस्म जाग कर लेखें ! बार-बार कृत-कृत्य हुआ है फिर क्यों है प्यासा का प्या...
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Tag :नजर
  April 26, 2018, 11:29 am
अनगाया गीत एक  हरेक के भीतर एक छुपी है अनकही कहानी और छुपा है एक अनगाया गीत भी एक निर्दोष, शीतल फुहार सी हँसी भी कैद किसी गहरे गह्वर में बाहर आना जो चाहती आसमान को ढक ले एक ऐसा विश्वास भी छुपा है और... प्रेम का तो एक समुन्दर है तरंगित किन्तु हरेक व्यस्त है कुछ न कुछ कर...
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Tag :गीत
  April 20, 2018, 1:14 pm
बहना भूल गया यमुना जल माधव, मुकुंद, मोहन, गिरधर नाम-नाम में छुपे प्रीत स्वर, प्रेम डोर में बाँध, विरह की परिभाषा गढ़ डाली सुंदर ! युग बीते गूँजे वंशी धुन ठहर गया है जैसे वह पल, वन-उपवन भी चित्र लिखित से बहना भूल गया यमुना जल ! अनुपम, अद्भुत एक अलोना वैकुंठ से उतर विहं...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  April 19, 2018, 3:39 pm
पल-पल सरक रहा संसार कौन यहाँ किसको ढूंढे है  किसे यहाँ किधर जाना है, खबर नहीं कण भर भी इसकी  पल भर का नहीं ठिकाना है ! जोड़-तोड़ में लगा है मनवा बुद्धि उहापोह में खोयी, हर पल कुछ पाने की हसरत  जाने किस भ्रांति में सोयी ! दिवास्वप्न निरन्तर देखे  मन ही स्वप्न निशा में गढ़ता...
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Tag :मंजिल
  April 12, 2018, 12:27 pm
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