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मन पाए विश्राम जहाँ

एक नगमा जिन्दगी का एक दरिया या समन्दर बह रहा जो प्रीत बनकर, बाँध मत बाँधें तटों पर उमग जाये छलछलाकर ! एक प्यारी सी हँसी भी कैद है जो कन्दरा में, कसमसाती खुदबुदाती बिखर जाएगी जहाँ में ! एक नगमा जिन्दगी का शायराना इक फसाना, दिलोबगिया में दबा जो बीज महके बन तराना ! एक ...
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Tag :जिंदगी
  March 28, 2018, 3:09 pm
भीतर एक स्वप्न पलता है आहिस्ता से धरो कदम तुम हौले-हौले से ही डोलो, कंप न जाये कोमल है वह वाणी को भी पहले तोलो ! कुम्हला जाता लघु पीड़ा से हर संशय बोझिल कर जाता, भृकुटी पर सलवट छोटी सी उसका आँचल सिकुड़ा जाता ! सह ना पाए मिथ्या कण भर सच के धागों का तन उसका,   मुरझायेगा ...
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Tag :ख्वाब
  March 17, 2018, 3:41 pm
किसने खिलकर किये इशारे पी पी कह कर कौन पुकारे किसे खोजते नयन तुम्हारे, अंतर सरस तान बन गूँजा किसने खिलकर किये इशारे ! हल्का-हल्का सा स्पंदन है सूक्ष्म, गहन उर का कम्पन है, जाने कौन उसे पढ़ लेता चुप हो कहती जो धड़कन है ! मधुर रागिनी सा जो बिखरा रस में पगा स्वाद मिश्री का...
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Tag :तान
  March 15, 2018, 12:07 pm
उम्मीद  उम्मीद है कि दुनिया एक दिन यही कहेगी  इंसानियत सिखाये भारत की परम भूमि  कश्मीर के जवां फिर भारत के साथ होंगे  जन्नत बनेगा फिर से अमनोहवा बहेगी  दिलों में बनी जो दूरी घाव की पीर ताजी पुरनम हुईं जो आँखें फिर झूम के हँसेंगी   केसर गुलाब महकें अंतर में ख्वाब...
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Tag :कश्मीर
  March 13, 2018, 12:19 pm
महिला दिवस पर कभी जो भ्रमण करती थी सावित्री की तरह  देश-देश योग्य वर की तलाश में गार्गी की तरह गढ़ीं वेद ऋचाएं विवश कर दी गयी अवगुंठन में रहने को  उड़ा करती थी जो खुले युद्ध क्षेत्र में   शेरनी की तरह रथ की लगाम थामे अबला की उपाधि दे चुप करा दी गयीं अन्याय सहते हुए जब ...
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Tag :अबला
  March 7, 2018, 3:37 pm
गीत उपजते अधरों से यूँ रंग बिखेरे जाने किसने उपवन सारा महक रहा है, लाल, गुलाबी, नीले, पीले कुसुमों से दिल बहक रहा है ! एक सुवास नशीली छायी मस्त हुआ है आलम सारा, रँगी हुई है सारी धरती होली का है अजब नजारा ! फगुनाई भर पवन बह रही उड़ा रही है पराग गुलाल, सेमल झूमी, महुआ टपका ...
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Tag :फागुन
  February 28, 2018, 3:28 pm
राग अनंत हृदय ने गाया मन राही घर लौट गया है  पा संदेसा इक अनजाना, नयन टिके हैं श्वास थमी सी एक पाहुना आने वाला ! रुकी दौड़ तलाश हुई पूर्ण आनन देख लिया है किसका, निकला अपना.. पहचाना सा जाने कैसे बिछड़ गया था ! कदर न जानी जान पराया व्यर्थ दर्द के दामन थामे, एक ख़ुशी भीतर प...
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Tag :दर्द
  February 24, 2018, 11:23 am
फागुन झोली भरे आ रहा सुनो ! गान पंछी मिल गाते मदिर पवन डोला करती है, फागुन झोली भरे आ रहा कुदरत खिल इंगित करती है ! सुर्ख पलाश गुलाबी कंचन बौराये से आम्र कुञ्ज हैं, कलरव निशदिन गूँजा करता फूलों पर तितली के दल हैं ! टूटा मौन शिशिर का जैसे एक रागिनी सी हर उर में, मदमाता ...
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Tag :पवन
  February 21, 2018, 9:40 am
इश्क की दास्ताँ उसने दिए थे हीरे हम कौड़ियाँ समझ के जब नींद से जगाया रहे करवटें बदलते ओढ़ा हुआ था तम का इक आवरण घना सा माना  स्वयं  को घट इक जो ज्ञान से बना था गीतों में प्रेम खोजा झाँका न दिल के भीतर दरिया कई बसे थे बहता था इक समुन्दर गहराइयों में दिल की इक रोशनी सदा...
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Tag :तम
  February 14, 2018, 8:30 pm
‘कुछ’ न होने में ही सुख है  ‘कुछ’ होने की जिद में अकड़ा फिर-फिर दुःख को कर में पकड़ा, इक उलझन में हरदम जकड़ा  क्यों न हो दिल टुकड़ा-टुकड़ा ! कुछ होकर भी देख लिया है कुछ भी जैसे नहीं किया है,   तृषित अधर सागर पिया है  दिल का दामन नहीं सिया है ! ‘कुछ’ ना होने में ही सुख है मिट ज...
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Tag :कुछ
  February 12, 2018, 2:38 pm
अनुरागी मन कैसे कहूँ उस डगर की बात चलना छोड़ दिया जिस पर अब याद नहीं कितने कंटक थे और कब फूल खिले थे  पंछी गीत गाते थे या दानव भेस बदल आते थे अब तो उड़ता है अनुरागी मन भरोसे के पंखों पर अब नहीं थकते पाँव औ'न ही ढूँढनी पड़ती है छाँव नहीं होती फिक्रें दुनिया की  उससे नजर मि...
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Tag :दुनिया
  February 9, 2018, 3:21 pm
शून्य और पूर्ण  तज देता है पात शिशिर में पेड़ ठूंठ सा खड़ा होने की ताकत रखता है  अर्पित करे निज आहुति सृष्टि महायज्ञ में नुकीली चुभन शीत की सहता है भर जाता कोमल कोंपलों औ’ नव पल्लवों से  बसंत में वही खिल उठता है त्याग देता घरबार सन्यासी स्वागत करने को हर द्वार आतुर ...
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Tag :बसंत
  February 8, 2018, 2:40 pm
कल जो चाहा आज मिला है भय खोने का, पाने का सुख मन को डाँवाडोल करेगा, अभय हृदय का, वैरागीपन पंछियों में उड़ान भरेगा ! मंजिल की है चाह जिन्हें भी कदमों को किसने रोका है, बाधाएँ भी रची स्वयं ने सिवा उसी के सब धोखा है ! कल जो चाहा आज मिला है कौन शिकायत करता खुद की, निज हाथो...
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Tag :भय
  February 1, 2018, 11:42 am
लहर उठी सहज तरंगित उच्छल ऊर्जित लहर उठी विराट सागर में, लक्ष्य नहीं है कोई जिसका गिर जाती विलीन हो पल में ! छूता कोई दृश्य गगन का कभी धरा हँसती अंतर में, निज सृष्टि शुभा देख-देख ही मुग्ध हो रहा कोई जग में ! कर वीणा तारों को झंकृत हर्षित हो निनाद उपजाता, सहज जगे जब प...
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Tag :गगन
  January 31, 2018, 11:50 am
एक अजाना मौन कहीं है कभी उत्तंग नभ को छूतीं कभी क्लांत हो तट पे सोतीं, सागर को परिभाषित करतीं  उन लहरों का स्रोत कहीं है ! कभी बुद्ध करुणानिधि बनता रावण सा भी व्यर्थ गर्जता, दुनिया जिसके बल पर चलती उस मानव का अर्थ कहीं है ! अंतर को मधु से भर जाते जोश बाजुओं में भर ...
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Tag :बुद्ध
  January 29, 2018, 3:51 pm
गणतन्त्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाओं सहित  जैसे चन्द्र चमकता नभ में भूमंडल पर देश सैकड़ों भारत की है बात निराली, जैसे चन्द्र चमकता नभ में दिपदिप भारत की फुलवारी ! जिओ और जीने दो’ का यह    मन्त्र सिखाता सारे जग को, योग शक्ति से खुद को पायें राह दिखाता हर मानव को ! प्...
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Tag :भारत
  January 26, 2018, 3:02 pm
आज छोटी बहन के विवाह की वर्षगांठ है, यह कविता उन सभी को समर्पित है जिनके विवाह की वर्षगांठ इस हफ्ते है. विवाह की वर्षगांठ पर शुभकामनाओं सहित  बरसों से ज्यों चल रहे, लिए हाथ में हाथ राज खोलते हैं यही, जन्म-जन्म का साथ इक दूजे का हौसला, इक दूजे का मान बन सदा दिखलाया है, द...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  January 25, 2018, 3:11 pm
सारा आकाश मिला है शब्दों के पंख मिले हैं सारा आकाश मिला है, दिल में इक विरह अनोखा रब में विश्वास मिला है ! पलकों में मोती पलते नयनों में दीप संवरते, अधरों पर गीत मिलन के राहों में रहे बिखरते ! अंतर में अभिलाषा है खिलने की शुभ आशा है, बाहर आने को आतुर बचकानी सी भाष...
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Tag :पंख
  January 23, 2018, 9:01 am
कदमों में भी राहें हैं अभी जुम्बिश भुजाओं में कदगों में भी राहें हैं, अभी है हौसला दिल में गंतव्य पर निगाहें हैं ! परम  दिन-रात रचता है जगती नित नूतन सजती, नींदों में सपन भेजे जागरण में धुनें बजतीं ! चलें, हम थाम लें दामन इसी पल को अमर कर लें, छुपा है गर्भ में जिसके उस...
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Tag :कदम
  January 12, 2018, 4:46 pm
जो कहा नहीं पर सुना गया शब्दों में ढाल न पाएँगे जो जाम पिलाये मस्ती के, कुदरत बिन बोले भर देती मृदु मौन झर रहा अम्बर से ! मदमस्त हुआ आलम सारा कुछ गमक उठी कुछ महक जगी, तितली भँवरों के झुंड बढ़े कुसुमों ने पलकें क्या खोलीं ! नयनों से कोई झाँक रहा जाने किस गहरे अन्तस् ...
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Tag :गीत
  December 19, 2017, 2:04 pm
जो कहा नहीं पर सुना गया शब्दों में ढाल न पाएँगे जो जाम पिलाये मस्ती के, कुदरत बिन बोले भर देती मृदु मौन झर रहा अम्बर से ! मदमस्त हुआ आलम सारा कुछ गमक उठी कुछ महक जगी, तितली भँवरों के झुंड बढ़े कुसुमों ने पलकें क्या खोलीं ! नयनों से कोई झाँक रहा जाने किस गहरे अन्तस् ...
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Tag :गीत
  December 19, 2017, 2:04 pm
कितनी धूप छुए बिन गुजरी कितना नीर बहा अम्बर से कितने कुसुम उगे उपवन में, बिना खिले ही दफन हो गयीं कितनी मुस्कानें अंतर में ! कितनी धूप छुए बिन गुजरी कितना गगन न आया हिस्से, मुंदे नयन रहे कर्ण अनसुने बुन सकते थे कितने किस्से ! कितने दिवस डाकिया लाया कहाँ खो गये बिन...
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Tag :गीत
  December 15, 2017, 5:27 pm
 अभी समय है नजर मिलाएं नया वर्ष आने से पहले नूतन मन का निर्माण करें, नया जोश, नव बोध भरे उर नये युग का आह्वान करें ! अभी समय है नजर मिलाएं स्वयं, स्वयं को जाँचें परखे, झाड़ सिलवटों को आंचल से नयी दृष्टि से जग को निरखे ! रंजिश नहीं हो जिस दृष्टि में नहीं भेद कुछ भले-बुर...
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Tag :दृष्टि
  November 15, 2017, 10:45 am
एक निपट आकाश सरीखा नयन खुले हों या मुँद जाएँ जीवन अमि अंतर भरता है, मन सीमा में जिसे बांधता वह उन्मुक्त सदा बहता है ! चाह उठे उठ कर खो जाये दर्पण बना अछूता रहता, एक निपट आकाश सरीखा टिका स्वयं में कुछ ना कहता ! अकथ कहानी जिसने बाँची चकित ठगा सा चुप हो जाता, जाने कितन...
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Tag :दर्पण
  November 9, 2017, 2:02 pm
एक दीप बन राह दिखाए अंतर दीप जलेगा जिस पल तोड़ तमस की कारा काली, पर्व ज्योति का सफल तभी है उर छाए अनन्त उजियाली ! एक दीप बन राह दिखाए मन जुड़ जाए परम् ज्योति से, अंधकार की रहे न  रेखा जगमग पथ पर बढ़े खुशी से ! माटी का तन करे उजाला आत्मज्योति शक्ति बन चमके, नयन दीप्त हों स्म...
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Tag :ज्योति
  October 22, 2017, 6:12 pm
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