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मन पाए विश्राम जहाँ

इन्द्रधनुष सा ही जग सारा एक दिवस, दिन की गुल्लक से कुछ अद्भुत पल चुरा लिए थे, ऋतु सुहावनी थी बसंत की मदमाती सुरभित हवा लिए ! पर्वत के ऊँचे शिखरों पर हिम के स्वर्णिम फूल खिले थे, देवदार के तरुओं पर भी आभामय कुछ छंद लिखे थे ! स्फााटिक मणि सी निर्मल शीतल जल धारा इक बहती ...
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Tag :काल
  September 29, 2018, 12:24 pm
उर से ऐसे ही बहे छंद मुक्त गगन है मुक्त पवन है मुक्त फिजायें गीत सुनातीं, मुक्त रहे मन चाह यही तो कदम-कदम पर है उलझाती ! सदा मुक्त जो कैद देह में  चाहों की जंजीरें बाँधी, नयन खुले से लगते भर हैं कहाँ नींद से नजरें जागी ! भावों की हाला पी पीकर होश गँवाए ठोकर खायी, व्य...
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Tag :नयन
  September 27, 2018, 11:36 am
अंतर्प्रवाह बहते हैं विचार... किसी सागर की तरह सागर.. जो बहता है लहरों में या भाप बनकर, जब वह आकाश में उठ जाता है संग हवाओं के ! जीवन भी बहता है घटनाओं में या फिर प्रेम भरी भावनाओं में जब मन ऊपर उठ जाता है..  यह तर्क है निरा... या आत्मा की आवाज कौन जानता है ? शब्द आते हैं ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  September 19, 2018, 9:52 am
तलाश  जाने किसकी प्रतीक्षा में सोते नहीं नयन जाने किस घड़ी की आस में जिए चले जाता है जीवन शायद वह स्वयं ही प्यास बनकर भीतर प्रकटा है अपनी ही चाहत में कोई प्राण अटका है सब होकर भी जब कुछ भी नहीं पास अपने नहीं लुभाते अब परियों के भी सपने इस जगत का सारा मायाजाल देख लिया...
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Tag :तलाश
  September 16, 2018, 1:14 pm
जलधाराओं का संगीत  नभ से गिरती हुई जल धाराएँ जिनमें छुपा है एक संगीत जाने किस लोक से आती हैं धरा को तृप्त कर माटी को कोख से नव अंकुर जगाती हैं सुंदर लगती हैं नन्ही-नन्ही बूँदें धरती पर बहती हुई छोटी छोटी नदियाँ जो वर्षा रुकते ही हो जाती हैं विलीन गगन में उठा घनों क...
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Tag :तन
  September 10, 2018, 2:57 pm
जीवन अमृत बहा जा रहा कितनी बार चुभे हैं कंटक कितनी बार स्वप्न टूटे हैं, फिर-फिर राग लगाता यह दिल कितने संग-साथ छूटे हैं ! सुख की फसल लगाने जाते किन्तु उगे हैं दुःख ही उसमें, धन के भी अम्बार लगे हों भीतर का अभाव ही झलके ! ऊपर चढ़ने की खातिर जब कर उपेक्षा छोड़ा होगा, ल...
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Tag :पुष्प
  September 7, 2018, 3:10 pm
ऐसा दीवाना है कान्हा  आँसू बनकर जो बहता है  मौन रहे पर कुछ कहता है,  किसी नाम से उसे पुकारो उपालम्भ जो सब सहता है !    हो अनजाना कोई उससे  तब भी वह रग-रग पहचाने,  इक दिन तो पथ पर आएगा  कब तक कोई करे बहाने!  जब तक उसकी ओर न देखो  नेह सँदेसे भेजा करता,  कभी हँसा कर कभी रुलाकर  ...
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Tag :कान्हा
  September 3, 2018, 12:57 pm
कृष्ण जन्म  यह तन कारागार है अहंकार है कंस पञ्च इन्द्रियाँ संतरी भीतर बंदी हंस ! बुद्धि हमारी देवकी मन-अंतर वसुदेव इन दोनों का मिलन बना आनंद का गेह ! प्रहरी सब सो गए इन्द्रियाँ हुईं उपराम हृदय बुद्धि में खो गया भीतर प्रकटे श्याम ! अविरति है कालिंदी पार है गोकुल धाम ...
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Tag :कृष्ण
  September 2, 2018, 2:08 pm
 यह बंधन तो प्रेम का बंधन है  बचपन से किशोर फिर युवा होते तन फिर भी रहे वही बच्चों वाले प्यारे से मन उन्हीं मासूम मनों के बंधन में बंधे हो तुम दोनों एक-दूसरे का सम्बल बनकर देखभाल और परख कर खूबियाँ और कमियां सहकर छोटी-बड़ी कमजोरियां संग-संग चलने का निर्णय है तुम्हा...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 31, 2018, 8:46 am
सपनीला मन शब्दों का एक जखीरा बहा चला आता है जाने कहाँ से... शब्द जो ठोस नहीं हैं कितने वायवीय पर कितने शक्तिशाली देह दिखती है मन नहीं दिखता विचार जो नहीं दिखता आज कल देह धरेगा सूक्ष्म से स्थूल की यात्रा चलती रहेगी... देह के बिना भी हम हैं शब्द क्या ये नहीं बताते ...
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Tag :मन
  August 25, 2018, 3:15 pm
पाया परस जब नेह का तेरे बिना कुछ भी नहीं तेरे सिवा कुछ भी नहीं, तू ही खिला तू ही झरा तू बन बहा नदिया कहीं ! तू लहर तू ही समुन्दर हर बूंद में समाया भी, सुर नाद बनकर गूँजता गान तू अक्षर अजर भी ! है प्रीत करुणा भावना सपना बना तू भोर में, छू पलक तू ही जगाता सुख सम भरा हर पोर म...
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Tag :जीवन
  August 23, 2018, 1:35 pm
पुनः पुनः मिलन घटता है निकट आ सके कोई प्रियतम तभी दूर जाकर बसता है ! श्वास दूर जा नासापुट से अगले पल आकर मिलती है, आज झरी मृत हो जो कलिका पुनः रूप नया धर खिलती है ! बार–बार घट व्याकुल होकर पाहुन का रस्ता तकता है, उस प्रियजन का निशिवासर जो नयनों में छुपकर हँसता है ! ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 20, 2018, 3:03 pm
 भारत रत्न अटल जी बड़े दिवस पर जन्म लिया था अति विशाल कवि मानस पाया,  अंतर समर्पित राष्ट्र हित हो जूझ आंधियों में मुस्काया ! तेरह मास, पांच वर्षों  का सफर बड़ा ही कठिन गुजारा, किन्तु नहीं आया फिर से वह गौरवशाली समय दुबारा ! जनसंघ के संस्थापक बने बीजेपी को भी जन्म दि...
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Tag :कवि
  August 17, 2018, 10:27 am
तिरंगा नीलगगन में लहराते तिरंगे को देख याद आते हैं वे अनाम चेहरे इतिहास में जिनका कोई वर्णन नहीं इस अमर स्वतन्त्रता के वाहक जो बने ! आज आजाद हैं हम खुली हवा में श्वास लेने,  दिल का हाल कहने सुनने को ! चैन की नींद सो सकते हैं उगा सकते हैं धरा में अपनी पसंद की फसलें भ...
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Tag :कृष्ण
  August 14, 2018, 4:13 pm
अभी समर्थ हैं हाथ अभी देख सकती हैं आँखें चलो झाँके किन्हीं नयनों में उड़ेल दें भीतर की शीतलता और नेह पगी नरमाई सहला दें कोई चुभता जख्म कर दें आश्वस्त कुछ पलों के लिए ही सही बहने दें किसी अदृश्य चाहत को वरदान बनकर ! अभी सुन सकते हैं कान चलो सुनें बारिश की धुन और ...
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Tag :प्यार
  August 11, 2018, 6:49 pm
खुले आकाश सा सवाल बन के जगाये कई रातों को  जवाब बनकर एक दिन वही सुलाता है  ढूँढने में जिसे बरसों गुजारे वही हर रोज तब आकर जगाता है जिसकी चाहत में भुला दिया जग को  जग की हर बात में नजर आता है छुपा हुआ है जो हजार पर्दों में खुले आकाश सा दिपदिपाता है मांगते फिरते हैं ...
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Tag :पर्दा
  August 8, 2018, 10:50 am
राखी के कोमल धागे आया अगस्त अब दूर नहीं श्रावणी पूनम उत्सव एक अनोखा, जिस दिन मधुर प्रीत की लहर बहेगी हृदय जुड़ेंगे, बांध रेशमी तार उरों में नव उमंग, तरंग जगेगी और सजेंगे घर-घर में, दीपक-रोली के थाल देकर कुछ उपहार हथेली में, बहना की मुस...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 6, 2018, 3:16 pm
मोहन की हर अदा निराली माधव केशव कृष्ण मुरारी अनगिन नाम धरे हैं तूने, ज्योति जलाई परम प्रेम की अंतर घट थे जितने सूने ! दिया सहज प्रेम आश्वासन युग-युग में कान्हा प्रकटेगा , सुप्त चेतना दबी तमस में हर बंधन से मुक्त करेगा ! सच की आभा सुहृद बिखेरे अनुपम प्रतिमा सुन्दरत...
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Tag :बंधन
  August 3, 2018, 4:14 pm
शब्दों से ले चले मौन में माटी का तन ज्योति परम है सद्गुरु रब की याद दिलाता, है अखंड वह परम निरंजन तोषण का बादल बरसाता ! खुद को जिसने जान लिया है गीत एक ही जो गाता है, एक तत्व में स्थिति हर क्षण  अंतर प्रेम जहाँ झरता है ! शब्दों से ले चले मौन में परिधि से सदा केंद्र की ...
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Tag :ज्योति
  July 30, 2018, 1:04 pm
पावन प्रीत पुलक सावन की कितने ही अहसास अनोखे कितने बिसरे ख्वाब छिपे हैं, खोल दराजें मन की देखें अनगिन जहाँ सबाब छिपे हैं ! ऊपर-ऊपर उथला है जल कदम-कदम पर फिसलन भी है, नहीं मिला करते हैं मोती इन परतों में दलदल भी है ! थोड़ा सा खंगालें उर को जाल बिछाएं भीतर जाकर, चलें खोजन...
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Tag :उर
  July 23, 2018, 4:57 pm
अस्तित्त्व और हम अस्तित्त्व खड़े करता है प्रश्न खोजने होते हैं जिनके उत्तर हमें आगे बढ़ने के लिए.. जरूरी है परीक्षाओं से गुजरना अनसीखा मन लौटा दिया जाता है बार-बार कच्चे घड़े की तरह अग्नि में ! जीवन कदम-कदम एक मौका है खड़े रहें इस पार.. डूब जाएँ मंझधार में.. या उतर जाएँ उ...
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Tag :जीवन
  July 16, 2018, 2:12 pm
नदिया सा हर क्षण बहना है ख्वाब देखकर सच करना है  ऊपर ही ऊपर चढ़ना है,   जीवन वृहत्त कैनवास है  सुंदर सहज रंग भरना है ! साथ चल रहा कोई निशदिन  हो अर्पित उसको कहना है, इक विराट कुटुंब है दुनिया  सबसे मिलजुल कर रहना है ! ताजी-खिली रहे मन कलिका नदिया सा हर क्षण बहना है, घाट...
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Tag :जीवन
  July 12, 2018, 9:10 am
 माँ का उपहार  पिता ने कहा कुछ दिन पहले जन्मदिन आ रहा है तुम्हारा, क्या भेजें ! परमात्मा ने दिया है सब कुछ तुम्हें सोचा, भेजते हैं थोड़ी सी दुआएं दुआएं.. जो दूर तक साथ जाती हैं जब घना हो अँधेरा तब उम्मीद का दीप जलाती हैं इसी तरह खिला रहे मृदु मुस्कान से चेहरा तुम्हारा हर...
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Tag :जन्मदिन
  July 9, 2018, 9:40 pm
चाह जो उस की जगी तो राह कितनी भी कठिन हो दूब सी श्यामल बनेगी, चाह जो उस की जगी तो उर कली इक दिन खिलेगी ! जल रहा हर कण धरा का अनुतप्त हैं रवि रश्मियाँ, एक शीतल परस कोमल ताप हरता हर पुहुप का  ! लख नहीं पाते नयन जो किन्तु जो सब देखता है, जगी बिसरी याद जिसमें मन वही बस चेतता ...
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Tag :कोमल
  July 7, 2018, 2:49 pm
राज खुलता जिंदगी का एक उत्सव जिन्दगी का चल रहा है युग-युगों से, एक सपना बन्दगी का पल रहा है युग युगों से ! घट रहा हर पल नया कुछ किंतु कण भर भी न बदला, खोजता मन जिस हँसी को उसने न घर द्वार बदला ! झाँक लेते उर गुहा में सौंप कर हर इक तमन्ना, झलक मिलती एक बिसरी राज खुलता जिंद...
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Tag :घर
  July 4, 2018, 9:54 am
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