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मन पाए विश्राम जहाँ

पत्ते उड़ा दिए पुरवा बन   टूट गया सुख स्वप्न, सत्य ने जैसे ही पलकें खोलीं, अंगडाई ले जागी कविता शब्दों में सुवास घोली ! छूट गया दुःख भेद, हृदय से  गीत विराग सरस गाया, खनक उठी अनजानी कोई कदमों में ताल समाया ! सिमट गया हर माज़ी पीछे रिक्त हुआ दिल का दर्पण,  पत्ते उड़ा दिए ...
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Tag :दुःख
  April 17, 2019, 9:48 am
सुरमई शाम ढली खग लौट चले निज नीड़ों को भरकर विश्वास सुबह होगी ! बरसेगा नभ से उजियारा फिर गगन परों से तोलेंगे, गुंजित होगा यह जग सारा जब नाना स्वर में बोलेंगे ! इक रंगमंच जैसे दुनिया हर पात्र यहाँ अभिनय करता, पंछी, पादप, पशु, मानव भी निज श्रम से रंग भरा करता ! किससे प...
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Tag :दुनिया
  April 15, 2019, 11:54 am
राह पर मन की गुजरते आज जीलें अभी जीलें जो कल कभी आया नहीं, जिन्दगी ने गीत उसके सुर साज पर गाया नहीं ! सुख समाया इस घड़ी में हम जहाँ पल भर न ठहरे, वह छुपा उस रिक्तता में जिसे भरने में लगे थे ! अभी रौनक, रंग, मेले पलक झपकी खो गये सब, एक पल में जो सजे थे स्वप्न सारे सो गये अ...
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Tag :जिन्दगी
  April 4, 2019, 2:54 pm
माया की माया जो देख सकती है, वह आँख नहीं जानती भले-बुरे का भेद जो देख नहीं सकती, वह आत्मा  सब जानती है, फिर भी गिरती है गड्ढ में ! जो सुन सकता है, वह कर्ण नहीं जानता सच-झूठ का भेद जो सुन नहीं सकती, वह आत्मा  सब जानती है, फिर भी गिरती है भ्रम में ! देह और आत्मा के मध्य कोई ह...
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Tag :आत्मा
  April 2, 2019, 1:55 pm
इस उमंग का राज छुपा है  जाने क्यों दिल डोला करता नहीं किसी को तोला करता, जब सब उसके ही बंदे हैं भेद न कोई भोला करता ! नयना चहक रहे क्यों आखिर अधरों पर स्मित ठहरी कब से, जन्मों का क्या मीत मिला है थिरक रहे हैं कदम तभी से ? रुनझुन सी बजती है उर में गुनगुन सी होती अंतर म...
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Tag :भेद
  March 29, 2019, 10:34 am
जीवन मधुरिम काव्य परम का फिरे सहज श्वासों की माला मन भाव सुगंध बने, जीवन मधुरिम काव्य परम का इक सरस प्रबंध बने ! जगती  के इस महायज्ञ में आहुति अपनी भी हो, निशदिन बंटता परम उजास मेधा ही ज्योति हो ! शब्द गूँजते कण-कण में नित बांचें जान ऋचाएं, चेतन हो हर मन सुन जिसको गी...
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Tag :जीवन
  March 28, 2019, 10:54 am
दूर कोई गा रहा है कौन जाने आस किसकी किस बहाने आँख ठिठकी  प्रीत की गागर बना दिल बेवजह छलका रहा है ! चढ़ हवाओं के परों पर अनुगूँज मुड़ जाती किधर कौन उस पर कान देगा सुर मधुर बिखरा रहा है ! बद्ध लय ना टूटती है अनवरत बहती नदी है मिल गयी निज लक्ष्य से जब मौन अब बस छा रहा ह...
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Tag :प्रीत
  March 27, 2019, 10:23 am
झर-झर झरता वह उजास सा  कोई पल-पल भेज सँदेसे  देता आमन्त्रण घर आओ,  कब तक यहाँ वहाँ भटकोगे  मस्त हो रहो, झूमो, गाओ ! कभी लुभाता सुना रागिनी  कभी ज्योति की पाती भेजे,  पुलक किरण बन अनजानी सी  कण-कण मन का परस सहेजे ! कभी मौन हो गहन शून्य सा  विस्तृत हो फैले अम्बर सा,  वह अनन्त...
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Tag :अम्बर
  March 22, 2019, 3:41 pm
अगन होलिका की है पावन बासंती मौसम बौराया मन मदमस्त हुआ मुस्काया, फागुन पवन बही है जबसे अंतर में उल्लास समाया ! रंगों ने फिर दिया निमंत्रण मुक्त हो रहो तोड़ो बंधन, जल जाएँ सब क्लेश हृदय के अगन होलिका की है पावन ! जली होलिका जैसे उस दिन जलें सभी संशय हर उर के, शेष रहे...
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Tag :गुलाल
  March 19, 2019, 11:48 am
बिखरा दूँ, फिर मुस्का लूँ  खाली कर दूँ अपना दामन जग को सब कुछ दे डालूँ,  प्रीत ह्रदय की, गीत प्रणय के बिखरा दूँ, फिर मुस्का लूँ ! तन की दीवारों के पीछे मन मंदिर की गहन गुफा, जगमग दीप उजाला जग में फैला दूँ, फिर मुस्का लूँ ! अंतर्मन की गहराई में सुर अनुपम नाद गूंजता, च...
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Tag :तन
  March 12, 2019, 3:03 pm
सत्यमेव जयते कहा जा रहा है जो भी कहा जाना चाहिए न ही छिपा है और न ही थमा है हो रहा है विरोध जो किया जाना चाहिए हर जुल्म के खिलाफ खड़ा है कोई न कोई डटकर जिसका गुलशन है नहीं रह सकता कभी वह बेखबर सुन लेता है चींटी की आवाज भी जो भर देता है वही शोले किसी कलम में सुलगत...
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Tag :जमीन
  March 9, 2019, 10:53 am
जिन्दगी का गीत मिलकर सादगी हो जिन्दगी में दिलों में थोड़ी शराफत, दिन कयामत अगर आये खुशदिली से करें स्वागत ! नफरतों की बात ना हो दूरियां मिट जाएंं दिल से, प्यार के किस्से कहेंं फिर फूल बन मुस्काएं खिल के ! 'शुक्रिया'हर साँस में हो  हर दिल से बन दरिया बहे, इश्क की ह...
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Tag :दिल
  March 2, 2019, 10:57 am
एक जागरण ऐसा भी हो पल में गोचर हो अनंत यह इक दृष्टिकोण ऐसा भी हो, जिसकी कोई रात न आये एक जागरण ऐसा भी हो ! कुदरत निशदिन जाग रही है अंधकार में बीज पनपते, गहन भूमि के अंतर में ही घिसते पत्थर हीरे बनते ! राह मिलेगी उसी कसक से होश जगाने जो आती है, धूप घनी, कंटक पथ में जब एक ...
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Tag :ऊर्जा
  February 23, 2019, 10:07 am
नभ झाँके जिस पावन पल में सुखद खुमारी अनजानी सी ‘मदहोशी’ जो होश जगाए, सुमिरन की इक नदी बह रही रग-रग तन की चले भिगाए ! नीले जल में मन दरिया के पत्तों सी सिहरन कुछ गाती, नभ झाँके जिस पावन पल में छल-छल कल-कल लहर उठाती ! छू जाती है अंतर्मन को लहर उठी जो छुए चाँदनी, एक नजर भर ...
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Tag :जल
  February 20, 2019, 11:39 am
सुख की परछाई है पीड़ा सुख की चादर ओढ़ी ऐसी धूमिल हुई दृष्टि पर्दों में, सच दिनकर सा चमक रहा है किन्तु रहा ओझल ही खुद से ! सुख मोहक धर रूप सलोना आशा के रज्जु से बांधे, दुःख बंधन के पाश खोलता मन पंछी क्यों उससे भागे ? सुख की परछाई है पीड़ा दुःख जीवन में बोध जगाता, फिर भी अ...
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Tag :दुःख
  February 19, 2019, 1:06 pm
ऐसा है वह अनंत चादर की तरह लपेट लिया है काँधे पर उसने नीले आकाश को मस्तक पर चाँद की बिंदी लगाये धार लिया है सूरज वक्षस्थल पर गलहार में आकाश गंगाएं उसकी क्रीडा स्थली हैं सितारों को पहन लिया है कानों में बादलों में छिपी बूँदें बन गयी हैं पाजेब पैरों की दिशाओं को भर...
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Tag :आकाश
  February 16, 2019, 10:42 am
तृष्णा दुष्पूर है कश्मीर को भारत से अलग करने की तृष्णा की आग में जलता हुआ पाकिस्तान बाँट रहा है वही हिंसा की आग  विश्व देख रहा है विनाश के इस पागलपन को कभी धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला  कश्मीर आज जल रहा है और जल रहे हैं अमन बहाल करने वाले वीर महर्षि कश्यप की तप स्थल...
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Tag :कश्मीर
  February 15, 2019, 2:44 pm
तू महासूर्य मैं एक किरण तू महासूर्य मैं एक किरण तू सिंधु अतल हूँ लहर एक, मैं भ्रमर बना डोला करता शुभ खिला हुआ तू कमल एक ! मैं श्वेत श्याम घन अम्बर का तू विस्तारित नील आकाश, मैं गगन तारिका जुगनू सम  तू ज्योतिर्मया महा प्रकाश ! तू महा आरण्य चन्दनवट मैं कोमल डाली इक व...
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Tag :अम्बर
  February 13, 2019, 11:34 am
जाने कितने पर्वत नापे अनगिन बार खिलाये उपवन, कंटक अनगिन बार चुभे हैं, जाने कितने पर्वत नापे कितनी लहरों संग तिरे हैं ! मंजिल अनजानी ही रहती द्वार न उसका खुलता दिखता, एक चक्र में डोले जीवन सार कहीं ना जिसका मिलता ! बार-बार इस जग में आकर दांवपेंच लड़ाए होंगे, अंधका...
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Tag :उपवन
  February 10, 2019, 4:40 pm
सरहद पर बर्फीले पर्वत कण-कण में भारत धरती के बहता एक शाश्वत सँजीवन, दूर पूर्वी अंचल में जब उगती नभ में अरुणाभ, नमन ! सरहद पर बर्फीले पर्वत कहीं सिंधु, रेतीले निर्जन रक्षित करने को तत्पर है सेनानी का तन मन अर्पण ! जयहिन्द मधुर नाद गूँजता अंतर में हिलोर इक उठती, ...
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Tag :जयहिंद
  February 9, 2019, 12:51 pm
रस की धार निरंतर बहती देह व मन के घाट अधूरे  इन पर ही जो डाले डेरा,  उस से कैसे नैन मिलेंगे  स्वयं के घर न डाला फेरा ! एक पिपासा जगे न जब तक  राह नहीं निज घर की मिलती,  सूना सा घर-आँगन तन का   मन में कोई कली न खिलती !  रस की धार निरंतर बहती  बाहर ढूँढ़ रहा जग सारा,  कोई अपना हाथ पकड़...
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Tag :देह
  February 8, 2019, 1:56 pm
नव बसंत आया सरसों फूली कूकी कोयल पंछी चहके कुदरत चंचल, नवल राग गाया जीवन ने नव बसंत लाया कोलाहल ! भँवरे जैसे तम से जागे फूल-फूल से मिलने भागे, तितली दल नव वसन धरे है मधुमास कहता बढ़ो आगे ! आम्र मंजरी बौराई सी निज सुरभि कलश का पट खोले, रात-बिरात का होश न रखे जी चाहे जब को...
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Tag :बसंत
  February 5, 2019, 12:42 pm
बापू के नाम एक पत्र हुए डेढ़ सौ वर्ष आज, जब वसुंधरा पर तुम थे आए  देवदूत बन घोर तिमिर में, बने प्रकाश पुंज मुस्काए ! जाने किस माटी के बने थे, सत्य की इक मशाल जलाई कोटि-कोटि भारत वंशी हित, निज सुख-सपन की बलि चढ़ाई ! कोमल पुष्प सा अंतर किन्तु, फौलादी संकल्प जगाये भारत की जन...
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Tag :बापू
  January 30, 2019, 3:17 pm
‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है  दिल में जोश गीत अधरों पर लिए हाथ में हाथ डोलते, इक दूजे के मित्र बने अब अंतर्मन के राज खोलते ! जीवन एक यात्रा अभिनव प्रियतम का यदि संग साथ हो, ‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है  धूप कड़ी या घन वर्षा हो ! दिवस महीने बरस दशक अब संग-संग जीते बी...
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Tag :जीवन
  January 25, 2019, 9:56 am
द्वार खुलें बरबस अनंत में कहाँ छुपा वह मन मतवाला गीत गुने जिसने सावन के, एक सघन सन्नाटा भीतर नहीं चरण भी मन भावन के ! शून्य अतल पसरा मीलों तक मदिर, मधुर सा कोई सपना, कुछ भी नजर नहीं आता है बेगाना ना कोई अपना ! क्या कोई बोले किससे अब दूजा रहा न कोई जग में, कदमों में राहे...
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Tag :कदम
  January 18, 2019, 3:13 pm
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