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मन पाए विश्राम जहाँ

अगन होलिका की है पावन बासंती मौसम बौराया मन मदमस्त हुआ मुस्काया, फागुन पवन बही है जबसे अंतर में उल्लास समाया ! रंगों ने फिर दिया निमंत्रण मुक्त हो रहो तोड़ो बंधन, जल जाएँ सब क्लेश हृदय के अगन होलिका की है पावन ! जली होलिका जैसे उस दिन जलें सभी संशय हर उर के, शेष रहे...
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Tag :गुलाल
  March 19, 2019, 11:48 am
बिखरा दूँ, फिर मुस्का लूँ  खाली कर दूँ अपना दामन जग को सब कुछ दे डालूँ,  प्रीत ह्रदय की, गीत प्रणय के बिखरा दूँ, फिर मुस्का लूँ ! तन की दीवारों के पीछे मन मंदिर की गहन गुफा, जगमग दीप उजाला जग में फैला दूँ, फिर मुस्का लूँ ! अंतर्मन की गहराई में सुर अनुपम नाद गूंजता, च...
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Tag :तन
  March 12, 2019, 3:03 pm
सत्यमेव जयते कहा जा रहा है जो भी कहा जाना चाहिए न ही छिपा है और न ही थमा है हो रहा है विरोध जो किया जाना चाहिए हर जुल्म के खिलाफ खड़ा है कोई न कोई डटकर जिसका गुलशन है नहीं रह सकता कभी वह बेखबर सुन लेता है चींटी की आवाज भी जो भर देता है वही शोले किसी कलम में सुलगत...
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Tag :जमीन
  March 9, 2019, 10:53 am
जिन्दगी का गीत मिलकर सादगी हो जिन्दगी में दिलों में थोड़ी शराफत, दिन कयामत अगर आये खुशदिली से करें स्वागत ! नफरतों की बात ना हो दूरियां मिट जाएंं दिल से, प्यार के किस्से कहेंं फिर फूल बन मुस्काएं खिल के ! 'शुक्रिया'हर साँस में हो  हर दिल से बन दरिया बहे, इश्क की ह...
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Tag :दिल
  March 2, 2019, 10:57 am
एक जागरण ऐसा भी हो पल में गोचर हो अनंत यह इक दृष्टिकोण ऐसा भी हो, जिसकी कोई रात न आये एक जागरण ऐसा भी हो ! कुदरत निशदिन जाग रही है अंधकार में बीज पनपते, गहन भूमि के अंतर में ही घिसते पत्थर हीरे बनते ! राह मिलेगी उसी कसक से होश जगाने जो आती है, धूप घनी, कंटक पथ में जब एक ...
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Tag :ऊर्जा
  February 23, 2019, 10:07 am
नभ झाँके जिस पावन पल में सुखद खुमारी अनजानी सी ‘मदहोशी’ जो होश जगाए, सुमिरन की इक नदी बह रही रग-रग तन की चले भिगाए ! नीले जल में मन दरिया के पत्तों सी सिहरन कुछ गाती, नभ झाँके जिस पावन पल में छल-छल कल-कल लहर उठाती ! छू जाती है अंतर्मन को लहर उठी जो छुए चाँदनी, एक नजर भर ...
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Tag :जल
  February 20, 2019, 11:39 am
सुख की परछाई है पीड़ा सुख की चादर ओढ़ी ऐसी धूमिल हुई दृष्टि पर्दों में, सच दिनकर सा चमक रहा है किन्तु रहा ओझल ही खुद से ! सुख मोहक धर रूप सलोना आशा के रज्जु से बांधे, दुःख बंधन के पाश खोलता मन पंछी क्यों उससे भागे ? सुख की परछाई है पीड़ा दुःख जीवन में बोध जगाता, फिर भी अ...
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Tag :दुःख
  February 19, 2019, 1:06 pm
ऐसा है वह अनंत चादर की तरह लपेट लिया है काँधे पर उसने नीले आकाश को मस्तक पर चाँद की बिंदी लगाये धार लिया है सूरज वक्षस्थल पर गलहार में आकाश गंगाएं उसकी क्रीडा स्थली हैं सितारों को पहन लिया है कानों में बादलों में छिपी बूँदें बन गयी हैं पाजेब पैरों की दिशाओं को भर...
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Tag :आकाश
  February 16, 2019, 10:42 am
तृष्णा दुष्पूर है कश्मीर को भारत से अलग करने की तृष्णा की आग में जलता हुआ पाकिस्तान बाँट रहा है वही हिंसा की आग  विश्व देख रहा है विनाश के इस पागलपन को कभी धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला  कश्मीर आज जल रहा है और जल रहे हैं अमन बहाल करने वाले वीर महर्षि कश्यप की तप स्थल...
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Tag :कश्मीर
  February 15, 2019, 2:44 pm
तू महासूर्य मैं एक किरण तू महासूर्य मैं एक किरण तू सिंधु अतल हूँ लहर एक, मैं भ्रमर बना डोला करता शुभ खिला हुआ तू कमल एक ! मैं श्वेत श्याम घन अम्बर का तू विस्तारित नील आकाश, मैं गगन तारिका जुगनू सम  तू ज्योतिर्मया महा प्रकाश ! तू महा आरण्य चन्दनवट मैं कोमल डाली इक व...
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Tag :अम्बर
  February 13, 2019, 11:34 am
जाने कितने पर्वत नापे अनगिन बार खिलाये उपवन, कंटक अनगिन बार चुभे हैं, जाने कितने पर्वत नापे कितनी लहरों संग तिरे हैं ! मंजिल अनजानी ही रहती द्वार न उसका खुलता दिखता, एक चक्र में डोले जीवन सार कहीं ना जिसका मिलता ! बार-बार इस जग में आकर दांवपेंच लड़ाए होंगे, अंधका...
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Tag :उपवन
  February 10, 2019, 4:40 pm
सरहद पर बर्फीले पर्वत कण-कण में भारत धरती के बहता एक शाश्वत सँजीवन, दूर पूर्वी अंचल में जब उगती नभ में अरुणाभ, नमन ! सरहद पर बर्फीले पर्वत कहीं सिंधु, रेतीले निर्जन रक्षित करने को तत्पर है सेनानी का तन मन अर्पण ! जयहिन्द मधुर नाद गूँजता अंतर में हिलोर इक उठती, ...
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Tag :जयहिंद
  February 9, 2019, 12:51 pm
रस की धार निरंतर बहती देह व मन के घाट अधूरे  इन पर ही जो डाले डेरा,  उस से कैसे नैन मिलेंगे  स्वयं के घर न डाला फेरा ! एक पिपासा जगे न जब तक  राह नहीं निज घर की मिलती,  सूना सा घर-आँगन तन का   मन में कोई कली न खिलती !  रस की धार निरंतर बहती  बाहर ढूँढ़ रहा जग सारा,  कोई अपना हाथ पकड़...
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Tag :देह
  February 8, 2019, 1:56 pm
नव बसंत आया सरसों फूली कूकी कोयल पंछी चहके कुदरत चंचल, नवल राग गाया जीवन ने नव बसंत लाया कोलाहल ! भँवरे जैसे तम से जागे फूल-फूल से मिलने भागे, तितली दल नव वसन धरे है मधुमास कहता बढ़ो आगे ! आम्र मंजरी बौराई सी निज सुरभि कलश का पट खोले, रात-बिरात का होश न रखे जी चाहे जब को...
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Tag :बसंत
  February 5, 2019, 12:42 pm
बापू के नाम एक पत्र हुए डेढ़ सौ वर्ष आज, जब वसुंधरा पर तुम थे आए  देवदूत बन घोर तिमिर में, बने प्रकाश पुंज मुस्काए ! जाने किस माटी के बने थे, सत्य की इक मशाल जलाई कोटि-कोटि भारत वंशी हित, निज सुख-सपन की बलि चढ़ाई ! कोमल पुष्प सा अंतर किन्तु, फौलादी संकल्प जगाये भारत की जन...
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Tag :बापू
  January 30, 2019, 3:17 pm
‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है  दिल में जोश गीत अधरों पर लिए हाथ में हाथ डोलते, इक दूजे के मित्र बने अब अंतर्मन के राज खोलते ! जीवन एक यात्रा अभिनव प्रियतम का यदि संग साथ हो, ‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है  धूप कड़ी या घन वर्षा हो ! दिवस महीने बरस दशक अब संग-संग जीते बी...
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Tag :जीवन
  January 25, 2019, 9:56 am
द्वार खुलें बरबस अनंत में कहाँ छुपा वह मन मतवाला गीत गुने जिसने सावन के, एक सघन सन्नाटा भीतर नहीं चरण भी मन भावन के ! शून्य अतल पसरा मीलों तक मदिर, मधुर सा कोई सपना, कुछ भी नजर नहीं आता है बेगाना ना कोई अपना ! क्या कोई बोले किससे अब दूजा रहा न कोई जग में, कदमों में राहे...
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Tag :कदम
  January 18, 2019, 3:13 pm
नया वर्ष समय के अनंत प्रवाह में... गुजर जाना एक वर्ष का, मानो सागर में एक लहर का उठना और खो जाना ! और इस दिन लाखों की आतिशबाजी जलाना उस दुनिया में ? जहाँ लाखों घरों में अँधेरा है एक दिये के लिए भी नहीं है तेल नया वर्ष तो तब भी आएगा, जब हम कान फोड़ पटाखे नहीं जलायेंगे नहीं...
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Tag :अनंत
  January 9, 2019, 2:03 pm
बीता बरस जरूर है बीत न जाये प्यार, आने वाले साल में खुशियाँ मिलें हजार । जंग लगे न सोच पर बना रहे उल्लास, हर पल यहाँ अमोल है जो भी अपने पास । श्वासों में विश्वास हो उर में सुर संगीत, कदमों में थिरकन भरी कहता जीवन गीत । सुख की चादर ओढ़ कर दुख न आये द्वार , पलकों के अश्रु बनें अ...
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Tag :नया वर्ष
  December 31, 2018, 7:52 pm
घाटियाँ जब खिलखिलायीं बह रही थी नदी उर की बने पत्थर हम अड़े थे, सामने ही था समुन्दर नजर फेरे ही खड़े थे ! गा रहा था जब कन्हैया बांसुरी की धुन सुनी ना, घाटियाँ जब खिलखिलायीं राह भी उनकी चुनी ना ! भीगता था जब चमन यह बंद कमरों में छिपे थे, चाँद पूनो का बुलाता नयन स्वप्न...
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Tag :चमन
  December 14, 2018, 9:10 am
रास्ते में फूल भी थे  कंटकों से बच निकलने में लगा दी शक्ति सारी, रास्ते में फूल भी थे बात यह दिल से भुला दी ! उलझनें जब घेरती थीं सुलझ जायें प्रार्थना की, किन्तु खुद ही तो रखा था चाहतों का बोझ भारी ! नींद सुख की जब मिली थी स्वप्न नयनों में भरे खुद, मंजिलें जब पास ही...
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Tag :फूल
  December 11, 2018, 4:26 pm
अपने जैसा मीत खोजता ओस कणों से प्यास बुझाते, जगती के दीवाने देखे, चकाचौंध पर मिटने वाले बस नादां परवाने देखे ! जो है, वही उन्हें होना है अपने जैसा मीत खोजते, घर है, वहीं उन्हें बसना है वीरानों में रहे भटकते ! बदल रहा है पल-पल जीवन जिसमें थिरता कभी न मिलती, बांट रहा है क...
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Tag :निर्मल
  December 7, 2018, 4:39 pm
स्वर्ण रश्मियों सा छू लेता माँ शिशु को आँचल में छुपाती आपद मुक्त बनाती राहें, या समर्थ हथेलियाँ पिता की थामें उसकी नन्हीं बाहें ! वैसे ही सिमटाये अपने आश्रय में कोई अनजाना, उस अपने को, जिसने उसकी चाहत को ही निज सुख माना !  अपनाते ही उसको पल में  बंध जाती है अविरत ड...
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Tag :चाहत
  November 27, 2018, 12:21 pm
बचपन लौटा था उस पल में बचपन को ढूँढा यादों में बाल दिवस पर नगमे गाये, मन के गलियारों में कितने साथी-संगी खड़े दिखाए ! रोते हुए किसी बच्चे के पोँछे आँसू और हँसाया, नन्ही सी ऊँगली इक थामी दूर गगन में चाँद दिखाया ! बचपन लौटा था उस पल में भीतर कोई खेल रहा था, बाहर मुस्कात...
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Tag :बाल दिवस
  November 15, 2018, 12:14 pm
जगमग दीप दीवाली के कुछ कह जाते  कुछ दे जाते सरस पावनी ज्योति बहाते जगमग दीप दीवाली के ! संदेसा गर कोई सुन ले कही-अनकही भाषा पढ़ ले शीतल मधुरिम  अजिर उजाला कोने-कोने में भर जाते जगमग दीप दीवाली के ! पंक्ति बद्ध सचेत प्रहरी से तिमिर अमावस का हर लेते खुद मिट कर...
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Tag :दीप
  October 30, 2018, 4:32 pm
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