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मन पाए विश्राम जहाँ

बूँद यहाँ हर नयना ढलकी जाने क्या पाने की धुन है हर दिल में बजती रुनझुन है, किस आशा में दौड़ लगाते क्षण भर की ही यह गुनगुन है ! दिवस-रात हम स्वप्न देखते इक उधेड़बुन जगते-सोते, चैन के दो पल भी न ढूँढे जीवन बीता हँसते-रोते ! जाने कितनी बार मिला है फूल यही हर बार खिला है, स्...
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Tag :नयन
  June 18, 2017, 10:43 am
ओ मेरे मन ! ओ मेरे मन ! जरा थम तो सही कर पहचान खुद से हजार छिद्रों वाला तू पूर्ण क्योंकर हो सकेगा अभाव यह तेरा कभी न भरेगा तू मान ही ले यह सच्चाई आज जान ही ले तुझे ऐसा ही बनाया है ऊपरवाले ने ही खेल रचाया है तू कभी गाता कभी रोता है दोनों बार ही नयन भिगोता है दो कलों क...
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Tag :कूल
  June 16, 2017, 10:02 am
सरस बना पल-पल आ डोले सुख आशा में जाने कितने दुःख के बीज गिराए पथ में, जिन्हें खोलने के गुर सीखें बाँधे बंधन निज हाथों से ! एक बूंद भी विष की जग में जीवन हर लेने में सक्षम, धूमिल सी भी कोइ कामना ढक देती अंतर का दर्पण ! यहाँ लगा बाजार चाह का होश कहाँ से जगे हृदय में, फू...
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Tag :प्रणय
  June 15, 2017, 10:37 am
लौट चलें क्यों ना अपने घर गर तलाश सुकून की दिल में भटक-भटक यदि ऊब गया उर, राह तके कोई बैठा है लौट चलें क्यों ना अपने घर ! ठोकर ही खायी हो जिसने पलकों पर यह उसे बिठाये, सदा मुखौटा ही ओढ़ा हो सहज सादगी से देगा भर ! स्वर्ग-नर्क, सुख-दुःख के सपने नहीं दिखाता कभी किसी को, सौगात...
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Tag :जीवन
  June 12, 2017, 11:12 am
समर्पण  झुका चरणों में जब-जब कोई माथ पाया सर पर सदा कोई अदृश्य हाथ नयनों से झरते जिस पल अश्रु कृतज्ञता के हरे हैं भाव सारे उसने अज्ञता के पाया कुछ अनमोल.. क्या है.. कहा नहीं जाता ऐसा कोई गीत है जो शब्दों में नहीं समाता सारा अस्तित्त्व जैसे समा गया हो भीतर या खो गया मन भी...
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Tag :गीत
  June 10, 2017, 4:13 pm
राग मधुर भीतर जो बहता क्या कहना अब क्या सुनना है मौन हुए उसको गुनना है, होकर भी जो नहीं हो रहा उस हित भाव पुष्प चुनना है ! क्या चाहें किसको खोजें अब अंतहीन तलाश हर निकली, मिलकर भी जो नहीं मिला है कदमों पर उसके झुकना है ! क्या पाना अब किसे सहेजें किसका लोभ ? लाभ अब चाहें,...
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Tag :तलाश
  June 5, 2017, 3:23 pm
आँसू बनकर वही झर गया दुःख की नगरी में जा पहुँचे, निकले थे सुख की तलाश में,  अंधकार से भरे नयन हैं   खोल दिये जब भी प्रकाश में !  फूल जान जिसे कंठ लगाया,  काँटे बनकर वही बिँध गया,   अधरों पर जो मिलन गीत था  आँसू बनकर वही झर गया ! तलविहीन कूआं था कोई   किया समर्पित हृदय जिस द...
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Tag :अधर
  May 29, 2017, 2:34 pm
शस्य श्यामला मातरम् लबालब भरे हैं पोखर अमृत जल से हरियाली का उतरा समुन्दर जैसे दूर क्षितिज तक फैले गहरे हरे वन  देख-देख ठंडक उतर जाती भीतर कदली वन.. बांस के झुरमुट धान और अरहर के खेत कीचड़ सने पाँव कई गाते रहे होंगे गीत सुंदर अरहर की पूलियां मानो किसी चित्रकार की आ...
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Tag :खेत
  May 26, 2017, 2:22 pm
लहरें उठतीं अम्बर छूने जग पल-पल रूप बदलता है  कैसे नयनों में थिर होगा, लहरें उठतीं अम्बर छूने गिर जातीं सागर फिर होगा ! खो जाता ज्यों भोर  सितारा  अस्त हो रहे प्राणी ऐसे,  दृश्य बदलता पलक झपकते   दुनिया रंगमंच हो जैसे ! विस्मयकारी जग का मालिक  स्वयं छुपा है पट के पीछ...
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Tag :जग
  May 22, 2017, 3:47 pm
उड़ न पाते हम गगन  में गुनगुनी सी आग भीतर  कुनकुन सा मन का पानी,  एक आशा ऊंघती सी  रेंगती सी जिन्दगानी ! फिर भला क्यों कर मिलेगा  तोहफा यह जिन्दगी का,  इक कशिश ही, तपन गहरी  पता देगी मंजिलों का ! जो जरा भी कीमती है  मांगता है दृढ़ इरादे,  एक ज्वाला हो अकंपित  पूर्ण होते अटल...
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Tag :गगन
  May 19, 2017, 2:20 pm
कोई राग छिपा कण-कण में पाहन में ज्यों छिपी अगन है उर भावों में छिपी तपन है, कस्तूरी सी महके भीतर, घट-घट में जो बसी लगन है ! कोई राग छिपा कण-कण में मृदु अनुराग बसा जीवन में, मद्धिम-मद्धिम दीप जल रहा इक  सुगंध  हर अंतर्मन में  ! एक अरूप रूप के भीतर दृष्टा तकता एक निरंतर, तम कितन...
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Tag :अर्रूप
  May 15, 2017, 3:23 pm
परम पूज्य सदगुरू के जन्मदिन पर  खिलता कमल, पूनम का चाँद अरुणिम सूर्य, नीला आकाश, मंद समीर प्रातः का जैसे सद्गगुरु बहता हुआ प्रकाश ! नयन बोलते, स्मित झरता है मधुरिम आभा सँग-सँग डोले, प्रश्न सभी गिर जाते मन के वाणी राज जगत के खोले ! सुख-दुःख की सीमा दिखलाई छोड़ दिया ले जा अन...
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Tag :जन्मदिन
  May 12, 2017, 3:19 pm
मन सिमटा आंगन में जैसे फिर घिर आये मेघ गगन पर फिर गाए अकुलाई कोकिल, मौसम लौट लौट आते हैं, जीवन वर्तुल में खोया मन !   वही आस सुख की पलती है वही कामना दंश चुभोती, मन सिमटा आंगन में जैसे दीवारें चुन लीं विचार की ! मन शावक भी यदि निशंक हो,  तोड़ कैद उन्मुक्त हुआ सा, एक नजर ...
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Tag :कोकिल
  May 11, 2017, 3:37 pm
एक लघु कहानी कल रात्रि पुनः स्वप्न में उसे वही स्वर्ण कंगन दिखा, साथ ही दिखी मारिया की उदास सूरत. वह झटके से उठकर बैठ गयी. एक बार उसने ईश्वर से प्रार्थना की और मन ही मन मारिया से भी क्षमा मांगी,  “नहीं, उसे उस पर जरा भी संदेह नहीं है कि उसका कीमती आभूषण उसने चुराया है.” उसे ...
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Tag :चोरी
  April 25, 2017, 3:52 pm
चलों संवारें वसुधा मिलकर  दुनिया युद्ध की भाषा बोले  प्रीत सिखाने आया भारत,  टुकड़ों में जो बांट हँस रहे उनको याद दिलाता भारत ! एक विश्व है एक ही धरती  एक खुदा है एक ही मानव, कहीं रक्त रंजित मानवता  कहीं भूख का डसता दानव  विश्व आज दोराहे पर है  द्वेष, वैर की आग सुलगती, ...
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Tag :प्रेम
  April 24, 2017, 1:36 pm
नई कोंपलें जो फूटी हैं कोकिल के स्वर सहज उठ रहे जाने किस मस्ती में आलम, मंद, सुगन्धित पवन डोलती आने वाला किसका बालम ! गुपचुप-गुपचुप बात चल रही कुसुमों ने कुछ रंग उड़ेले, स्वर्ग कहाता था जो भू पर उस भूमि पर नफरत डोले ? कैसा विषम काल आया है लहू बहाते हैं अपनों का, जिनसे ...
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Tag :काश्मीर
  April 21, 2017, 3:26 pm
अनजाने गह्वर भीतर हैं पल-पल बदल रहा है जीवन क्षण-क्षण सरक रही हैं श्वासें, सृष्टि चक्र अविरत चलता है किन्तु न हम ये राज भुला दें ! अनजाने गह्वर भीतर हैं नहीं उजास हुआ है जिनमें, कौन कहाँ से कब प्रकटेगा भनक नहीं जिनकी ख्वाबों में ! फसल काटनी स्वयं को ही है जितने बीज गि...
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Tag :जीवन
  April 19, 2017, 10:34 am
वरदानों को भूल गया मन रिश्ता जोड़ रहा है कब से  पल-पल दे सौगातें  जीवन, निज पीड़ा में खोया पागल  वरदानों को भूल गया मन ! ठगता आया है खुद को ही  उसी राह पर कदम बढ़ाता, शूल चुभा था, दर्द सहा था  गीत वही गम के दोहराता ! एक चक्र में डोले जैसे  बिंधने की पल-पल तैयारी, सुख का बादल रह...
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Tag :गम
  April 17, 2017, 9:25 am
एक रहस्य थम जाती है कलम बंद हो जाते हैं अधर ठहर जाती हैं श्वासें भी पल भर को लिखते हुए नाम भी... उस अनाम का नजर भर कोई देख ले आकाश को या छू ले घास की नोक पर अटकी हुई ओस की बूंद झलक मिल जाती है जिसकी किसी फूल पर बैठी तितली के पंखों में या गोधूलि की बेला में घर लौटते पंछियों...
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Tag :कलम
  April 3, 2017, 3:46 pm
मिट जाने को जो तत्पर है मरना जिसने सीख लिया है उसको ही है हक जीने का, साँझ ढले जो मुरझाये, दे प्रातः उसे अवसर खिलने का ! मिट जाने को जो तत्पर है वही बना रहता इस जग में, ठोकर से जो न घबराए बना रहेगा जीवन मग में ! सच की पूजा करने वाले नहीं झूठ से बच सकते हैं, जो सुन्दरता को ...
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Tag :ठोकर
  March 28, 2017, 12:37 pm
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश (अंतिम भाग ) गेस्टहाउस के कर्मचारियों ने जो वहाँ पिछले कुछ वर्षों से रह रहे हैं कुछ रोचक बातें बतायीं. मिजोरम में संयुक्त परिवार होते हैं. परिवार के बड़े पुत्र को जायदाद नहीं मिलती, बल्कि सबसे छोटे पुत्र को परिवार का उत्तराधिकारी बनाया जाता ह...
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Tag :मिजोरम
  March 25, 2017, 12:45 pm
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश (तीसरा भाग ) १७ मार्च २०१७-लुंगलेई आज भी सुबह मुर्गे की आवाज आने से पहले ही नींद खुल गयी. आज की सुबह भी पहले से बिलकुल अलग थी. कमरे की विशाल खिड़की से जिस पर लगे शीशे से बहर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है, पर्दे हटा दिए. अभी बाहर अँधेरा था. आकाश पर तारे ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 24, 2017, 9:45 am
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश ( दूसरा भाग ) सुबह पांच बजे से भी पहले मुर्गे की बांग सुनकर हम उठे गये. सूर्योदय होने को था, कुछ तस्वीरें उतारीं. पल-पल आकाश के बदलते हुए रंग यहाँ के हर सूर्योदय को एक आश्चर्यजनक घटना में बदल देते हैं. रंगों की अनोखी छटा दिखाई देती है. गेस्ट हॉउस के ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 23, 2017, 11:06 am
ओ रे मन ! किस उलझन में खोये रहते  किस पीड़ा को पल-पल सहते, सुनो गीत जो नभचर  गाते निशदिन  मधुर राग बहता है ! किस शून्य को भरे हो भीतर  कण-कण में अमृत बसता है, सपनों ने दिन-रात जलाया  खुली आंख ही वह मिलता है ! एक विशाल वितान सजाया   रंगमंच पर नट अनेक हैं, सुख-दुःख के झीने पर्द...
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Tag :उलझन
  March 22, 2017, 4:36 pm
मिजोरम - एक अनोखा प्रदेश १४ मार्च २०१७-आइजोल  सुबह पौने छह बजे हम दुलियाजान-असम से रवाना हुए थे. सवा आठ बजे फ्लाईट डिब्रूगढ़ के मोहनबारी हवाईअड्डे से चली और पौने दस बजे कोलकाता पहुंची. जहाँ तीन घंटे प्रतीक्षा करने के बाद दोपहर एक बजे स्टारलाइंस-एयर इंडिया के विमान ने आ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  March 22, 2017, 3:39 pm
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