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मन पाए विश्राम जहाँ

अंतर अभीप्सा आकाश शुभ्र है शुभ्र हैं हिमालय के शिखर है अग्नि पावन और पावन है मानसरोवर का जल आत्मशक्ति उठना चाहती है गगन की ओर अग्नि की भांति बढ़ना चाहती है उर्ध्व दिशा में ही बुझा देता है शिखा, मन बन जलधार ढक लेती ज्योति को बुद्धि बन दीवार उसे कभी प्रकाशित नहीं होन...
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Tag :आंच
  May 23, 2018, 2:05 pm
जीवन सरिता बहती जाती सुख-दुःख मनहर तटों के मध्य जीवन सरिता बहती जाती, नित्य नवीन रूप धरकर फिर माया के नित खेल रचाती ! बैठ नाव में चला मुसाफिर डोला करता सँग लहरों के, चल इस पार से उस पार तक जाने मंजिल कौन दिशा में ! उठें बवंडर भावनाओं के कभी विचारों के तूफान, धूमिल ...
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Tag :मंजिल
  May 19, 2018, 10:51 am
नई भोर फिर भोर हुई फिर कदम उठे फिर अंतर उल्लास जगा रस्तों पर हलचल मन के बीता पल जिसमें तमस घना फिर आशा खग ने पर तोले उर प्रीत भरी वाणी बोले लख जग भीगा अंतरमन प्राणों में नव संचार भरे कुसुमों ने फिर महकाया वन पलक झपकते कहीं खो गयी घोर निशा का हुआ अंत भीतर लेकर कुछ लक्ष...
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Tag :तमस. प्राण
  May 14, 2018, 2:56 pm
माँ जीवन की धूप में छाया बन चलती है, दुविधा के तमस में दीपक बन जलती है ! कहे बिना बूझ ले अंतर के प्रश्नों को, अंतरमन से सदा प्रीत धार बहती है ! बनकर दूर द्रष्टा बचाती हर विपद से, कदम-कदम पर फूँक हर आहट पढ़ती है ! छिपे हुए काल में भविष्य को गढ़ती है, माँ का हृदय विशाल  ...
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Tag :दीपक
  May 12, 2018, 7:53 pm
जीवन कैसे अर्थवान हो इस जीवन का मर्म सिखाने खुद को खुद से जो मिलवाये, कर प्रज्वलित अंतर उजास आत्मकुसुम अनगिनत खिलाये ! माँ बनकर जो सदा साथ है स्नेह भरा इक स्पर्श पिता का, अपनों से भी अपना प्रियजन समाधान दे हर सुख-दुःख का ! जीवन कैसे अर्थवान हो सेवा के नव द्वार खोलता,...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  May 11, 2018, 1:35 pm
बुद्ध का निर्वाण एक बार देख मृत देह हो गया था बुद्ध को वैराग्य अपार हजार मौतें नित्य देख हम बढ़ा रहे सुविधाओं के अंबार जरा-रोग ग्रस्त देहों ने उन्हें कर दिया दूर भोग-विलास से हम विंडो शॉपिंग के भी बहाने हैं ढूँढ़ते बढ़ती जा रही है दरार आज  धनी और निर्धनों के मध्य जि...
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Tag :दान
  April 30, 2018, 2:56 pm
कोई देख-देख हँसता है आँख मुँदे उसके पहले ही क्यों ना खुद से नजर मिला लें, अनदेखे, अनजाने से गढ़ भेद अलख के मोती पा लें ! कितना पाया पर उर रीता झांकें, इसकी पेंदी देखें, कहाँ जा रहा आखिर यह जग तोड़ तिलिस्म जाग कर लेखें ! बार-बार कृत-कृत्य हुआ है फिर क्यों है प्यासा का प्या...
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Tag :नजर
  April 26, 2018, 11:29 am
अनगाया गीत एक  हरेक के भीतर एक छुपी है अनकही कहानी और छुपा है एक अनगाया गीत भी एक निर्दोष, शीतल फुहार सी हँसी भी कैद किसी गहरे गह्वर में बाहर आना जो चाहती आसमान को ढक ले एक ऐसा विश्वास भी छुपा है और... प्रेम का तो एक समुन्दर है तरंगित किन्तु हरेक व्यस्त है कुछ न कुछ कर...
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Tag :गीत
  April 20, 2018, 1:14 pm
बहना भूल गया यमुना जल माधव, मुकुंद, मोहन, गिरधर नाम-नाम में छुपे प्रीत स्वर, प्रेम डोर में बाँध, विरह की परिभाषा गढ़ डाली सुंदर ! युग बीते गूँजे वंशी धुन ठहर गया है जैसे वह पल, वन-उपवन भी चित्र लिखित से बहना भूल गया यमुना जल ! अनुपम, अद्भुत एक अलोना वैकुंठ से उतर विहं...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  April 19, 2018, 3:39 pm
पल-पल सरक रहा संसार कौन यहाँ किसको ढूंढे है  किसे यहाँ किधर जाना है, खबर नहीं कण भर भी इसकी  पल भर का नहीं ठिकाना है ! जोड़-तोड़ में लगा है मनवा बुद्धि उहापोह में खोयी, हर पल कुछ पाने की हसरत  जाने किस भ्रांति में सोयी ! दिवास्वप्न निरन्तर देखे  मन ही स्वप्न निशा में गढ़ता...
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Tag :मंजिल
  April 12, 2018, 12:27 pm
मुक्त हुआ हर अंतर उस पल पैमाना हम ही तय करते जग को जिसमें तोला करते, कुदरत के भी नयन हजारों भुला सत्य यह व्यर्थ उलझते ! जो चाहा है वही मिला है निज हाथों से जीवन गढ़ते, बाधाएँ जो भी आती हैं उनमें स्वयं का लिखा ही पढ़ते ! दुःख के बीज गिराए होंगे कण्टक हाथों में चुभते हैं, ...
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Tag :जग
  April 11, 2018, 12:12 pm
टूट गया जड़ता का बंधन कुसुम उगाया उपवन में जब मन मकरन्द हुआ जाता है, प्रीत भरी इक नजर फिराई अंतर् भीग-भीग जाता है ! खंजन  ख़ुशी बिखेरें गाकर सहज उड़ान भरा करते हैं, स्वीकारा हँसकर जब जग को मधुमय गीत झरा करते हैं ! राग-रागिनी जहाँ गूँजती प्राणों में जग गया स्पंदन, सुरभित ...
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Tag :प्रीत
  April 9, 2018, 11:43 am
एक नगमा जिन्दगी का एक दरिया या समन्दर बह रहा जो प्रीत बनकर, बाँध मत बाँधें तटों पर उमग जाये छलछलाकर ! एक प्यारी सी हँसी भी कैद है जो कन्दरा में, कसमसाती खुदबुदाती बिखर जाएगी जहाँ में ! एक नगमा जिन्दगी का शायराना इक फसाना, दिलोबगिया में दबा जो बीज महके बन तराना ! एक ...
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Tag :जिंदगी
  March 28, 2018, 3:09 pm
भीतर एक स्वप्न पलता है आहिस्ता से धरो कदम तुम हौले-हौले से ही डोलो, कंप न जाये कोमल है वह वाणी को भी पहले तोलो ! कुम्हला जाता लघु पीड़ा से हर संशय बोझिल कर जाता, भृकुटी पर सलवट छोटी सी उसका आँचल सिकुड़ा जाता ! सह ना पाए मिथ्या कण भर सच के धागों का तन उसका,   मुरझायेगा ...
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Tag :ख्वाब
  March 17, 2018, 3:41 pm
किसने खिलकर किये इशारे पी पी कह कर कौन पुकारे किसे खोजते नयन तुम्हारे, अंतर सरस तान बन गूँजा किसने खिलकर किये इशारे ! हल्का-हल्का सा स्पंदन है सूक्ष्म, गहन उर का कम्पन है, जाने कौन उसे पढ़ लेता चुप हो कहती जो धड़कन है ! मधुर रागिनी सा जो बिखरा रस में पगा स्वाद मिश्री का...
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Tag :तान
  March 15, 2018, 12:07 pm
उम्मीद  उम्मीद है कि दुनिया एक दिन यही कहेगी  इंसानियत सिखाये भारत की परम भूमि  कश्मीर के जवां फिर भारत के साथ होंगे  जन्नत बनेगा फिर से अमनोहवा बहेगी  दिलों में बनी जो दूरी घाव की पीर ताजी पुरनम हुईं जो आँखें फिर झूम के हँसेंगी   केसर गुलाब महकें अंतर में ख्वाब...
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Tag :कश्मीर
  March 13, 2018, 12:19 pm
महिला दिवस पर कभी जो भ्रमण करती थी सावित्री की तरह  देश-देश योग्य वर की तलाश में गार्गी की तरह गढ़ीं वेद ऋचाएं विवश कर दी गयी अवगुंठन में रहने को  उड़ा करती थी जो खुले युद्ध क्षेत्र में   शेरनी की तरह रथ की लगाम थामे अबला की उपाधि दे चुप करा दी गयीं अन्याय सहते हुए जब ...
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Tag :अबला
  March 7, 2018, 3:37 pm
गीत उपजते अधरों से यूँ रंग बिखेरे जाने किसने उपवन सारा महक रहा है, लाल, गुलाबी, नीले, पीले कुसुमों से दिल बहक रहा है ! एक सुवास नशीली छायी मस्त हुआ है आलम सारा, रँगी हुई है सारी धरती होली का है अजब नजारा ! फगुनाई भर पवन बह रही उड़ा रही है पराग गुलाल, सेमल झूमी, महुआ टपका ...
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Tag :फागुन
  February 28, 2018, 3:28 pm
राग अनंत हृदय ने गाया मन राही घर लौट गया है  पा संदेसा इक अनजाना, नयन टिके हैं श्वास थमी सी एक पाहुना आने वाला ! रुकी दौड़ तलाश हुई पूर्ण आनन देख लिया है किसका, निकला अपना.. पहचाना सा जाने कैसे बिछड़ गया था ! कदर न जानी जान पराया व्यर्थ दर्द के दामन थामे, एक ख़ुशी भीतर प...
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Tag :दर्द
  February 24, 2018, 11:23 am
फागुन झोली भरे आ रहा सुनो ! गान पंछी मिल गाते मदिर पवन डोला करती है, फागुन झोली भरे आ रहा कुदरत खिल इंगित करती है ! सुर्ख पलाश गुलाबी कंचन बौराये से आम्र कुञ्ज हैं, कलरव निशदिन गूँजा करता फूलों पर तितली के दल हैं ! टूटा मौन शिशिर का जैसे एक रागिनी सी हर उर में, मदमाता ...
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Tag :पवन
  February 21, 2018, 9:40 am
इश्क की दास्ताँ उसने दिए थे हीरे हम कौड़ियाँ समझ के जब नींद से जगाया रहे करवटें बदलते ओढ़ा हुआ था तम का इक आवरण घना सा माना  स्वयं  को घट इक जो ज्ञान से बना था गीतों में प्रेम खोजा झाँका न दिल के भीतर दरिया कई बसे थे बहता था इक समुन्दर गहराइयों में दिल की इक रोशनी सदा...
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Tag :तम
  February 14, 2018, 8:30 pm
‘कुछ’ न होने में ही सुख है  ‘कुछ’ होने की जिद में अकड़ा फिर-फिर दुःख को कर में पकड़ा, इक उलझन में हरदम जकड़ा  क्यों न हो दिल टुकड़ा-टुकड़ा ! कुछ होकर भी देख लिया है कुछ भी जैसे नहीं किया है,   तृषित अधर सागर पिया है  दिल का दामन नहीं सिया है ! ‘कुछ’ ना होने में ही सुख है मिट ज...
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Tag :कुछ
  February 12, 2018, 2:38 pm
अनुरागी मन कैसे कहूँ उस डगर की बात चलना छोड़ दिया जिस पर अब याद नहीं कितने कंटक थे और कब फूल खिले थे  पंछी गीत गाते थे या दानव भेस बदल आते थे अब तो उड़ता है अनुरागी मन भरोसे के पंखों पर अब नहीं थकते पाँव औ'न ही ढूँढनी पड़ती है छाँव नहीं होती फिक्रें दुनिया की  उससे नजर मि...
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Tag :दुनिया
  February 9, 2018, 3:21 pm
शून्य और पूर्ण  तज देता है पात शिशिर में पेड़ ठूंठ सा खड़ा होने की ताकत रखता है  अर्पित करे निज आहुति सृष्टि महायज्ञ में नुकीली चुभन शीत की सहता है भर जाता कोमल कोंपलों औ’ नव पल्लवों से  बसंत में वही खिल उठता है त्याग देता घरबार सन्यासी स्वागत करने को हर द्वार आतुर ...
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Tag :बसंत
  February 8, 2018, 2:40 pm
कल जो चाहा आज मिला है भय खोने का, पाने का सुख मन को डाँवाडोल करेगा, अभय हृदय का, वैरागीपन पंछियों में उड़ान भरेगा ! मंजिल की है चाह जिन्हें भी कदमों को किसने रोका है, बाधाएँ भी रची स्वयं ने सिवा उसी के सब धोखा है ! कल जो चाहा आज मिला है कौन शिकायत करता खुद की, निज हाथो...
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Tag :भय
  February 1, 2018, 11:42 am
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