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मेरी कल्पनायें...

शहर-ए-बनारस...बसती है ज़वां रूह, शहर-ए-बनारस में,मिलता दिल-ए-सुकूं, शहर-ए-बनारस में,विद्या की राजधानी, बसते हैं ब्रह्म-ज्ञानी,इतिहास है पुराना, पहचान है पुरानी,देवों की है ये नगरी, अमृत यहां का पानी,रहते हैं महादेव, शहर-ए-बनारस में,गंगा बहे सदैव, शहर-ए-बनारस में,कुछ आम नहीं है, स...
मेरी कल्पनायें......
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  April 22, 2013, 3:38 pm
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मेरी कल्पनायें......
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  April 22, 2013, 2:56 pm
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मेरी कल्पनायें......
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  February 25, 2013, 5:18 pm
कारवां गुज़र चुका था, मंज़िलें थी गुमशुदा.........वक्त की मज़ार पे, अस्कों में डूबा था लम्हा.....रास्ते मायूस थे कि, हमसफ़र भी ना मिला.......थी डगर वीरान सी, गुम हुआ दिल काफ़िला......Iशुक्र है उस वक्त का, खुदपर यकीं ये जब हुआ..है खुदा तू साथ मेरे, क्या मिला और क्या गया...वक्त को मंज़ूर कर, लम्हों की...
मेरी कल्पनायें......
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  February 25, 2013, 5:15 pm
 "You, 23 yrs girl...I am sorry that I can't do anything for u from ur level...but from my level I can pray to God....Almighty God ! give her all ur strength to be normal" this poem is for u (23 yr old girl)....same on delhi gang rape.......
मेरी कल्पनायें......
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  December 24, 2012, 8:29 pm
  सूखे है ख्वाइशों के पत्ते,मेरी मोहब्बत की शाख़ के,जो तू इन्हे छू ले, तो इनमें,हरियाली छाये Iहूं फिरता अज़नबी सा,तेरे अपने शहर में,जो तू अपनी चौखट पर बुलाले,तो मेरा घर बस जाये II**********************मेरी आंखों में एक समंदर बसता है,जिसकी लहरों में सिर्फ़,तेरा चेहरा दिखता है,जो हुए कभी उदास ...
मेरी कल्पनायें......
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  December 6, 2012, 7:29 pm
मेरी यादों के परिन्दों का आशियां,तेरा ज़हां है Iतू ही इनकी ज़मीं, तू ही इनका,आसमां है Iइन्हें अपने से दूर,कभी मत करना,वरना लोग पूछेंगे, वो परिन्दें कहाँ है, वो परिन्दें कहाँ है I---------------------------Suresh Kumar...
मेरी कल्पनायें......
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  August 13, 2012, 8:42 pm
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  June 25, 2012, 1:06 pm
चुप्पी के घाट पर,मौन की नौका लिये,तन्हा लहरों संग,इक गुमनाम शहर चला,वह अपने घर चला, वह अपने घर चला Iशून्य से शिखर की,अब कोई ख्वाइश नहीं,जीवन की सप्तरंगी चाहतों की,अब कोई नुमाइश नहीं,सर्व-रस समेटे,इक ऐसी डगर चला,वह अपने घर चला, वह अपने घर चला Iजिस आँगन में फ़ूला, फ़ला,जिन रस्तों प...
मेरी कल्पनायें......
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  March 26, 2012, 11:59 pm
ज़िन्दगी तू क्या है ?कभी दर्द-ए-दिल,कभी दर्द-ए-दवा है,ऐ ज़िन्दगी तू क्या है?अपनी बनायी राहों पर,कभी दौड़े तू, कभी रूके,अपने वसूलों की ख़ातिर,खड़ी रहे तो, कभी झुके,जिसकी दिशा समझ ना पाया,तू इक ऐसी हवा है Iज़िन्दगी तू क्या है ?***********************अब इन सपनों की नगरी में,कुछ ख्वाब तेरे कुछ ख्वाब म...
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  January 21, 2012, 11:22 am
क्यों दिखता है ये अधूरापन ?पर्वतों से गिरते झरनों के पानी,आगे बढ़ते ही नही, थम जाते है,हवायें बहती है, मेरे करीब आती नही,दिये जलते है पर घर-आँगन में अंधेराछाया है, इक सन्नाटे की आवाज़मेरे कान के पर्दे को चीर रही है,मेरी चीखें मुझ तक ही गूँजरही है, किसी को सुनाई नही देती,मेरी प...
मेरी कल्पनायें......
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  December 28, 2011, 7:58 pm
खूबसूरती ने तेरे उसपर, कुछ ऐसा कहर ढाया होगा,हो गयी मोहब्बत खुदा को, जब उसने तुझे बनाया होगा,भेज कर धरती पर तुम्हे, वो भी बहुत पछताया होगा,याद तेरी जब-जब आयी, आँसु-ए-बारिश बरसाया होगा,तेरी यादों का दामन सदा थामे,सीने-ए-ज़िगर से लगाया होगा,तन्हाई में अकेले इस खुदा ने,बहुत रोय...
मेरी कल्पनायें......
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  December 14, 2011, 10:34 pm
कुछ यूँ मेरी गली से गुजरे वो,घर-आँगन इश्क से महकने लगा Iउनकी नज़र मुझ पर यूँ पड़ी,हुस्न-ए-सागर दिल मे उतरने लगा IIजो ठहरे वो और मेरे करीब़ आये,इश्क-ए-बारिश में, फ़िसलने लगा Iऔर पूछा जो हाल-ए-दिल उसने मेरा,चौखट पर खड़े-खड़े, मै तो मरने लगा IIउनकी चूड़ियों की खनक में इश्क है,उनकी सांसों क...
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  December 9, 2011, 9:15 pm
रहब़र की राह तकते नयन,प्रेम-धुन में रमते नयन,नयनों की भाषा बस वो जाने,देखन जिनको तरसे नयन Iरति स्वरूप सुन्दर काया,मनः दशा उनकी माया.दर्शन-अभिलाषी बस तेरा,नमन तुम्हे करते नयन Iनयन कभी नही थकते है,आस लिये नित रहते है,राहों में रहबर मिल जाये,खुदा से मन्नत करते है Iइक झलक मेरे ...
मेरी कल्पनायें......
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  November 10, 2011, 9:53 am
दिल-ए-तन्हाइ , तेरी याद आयी,लम्हो संग अस्क बहे, भीगे परछाई,सिकवा-ए-ज़िन्दगी हम करे भी तो क्यों,ज़िन्दगी ने अक्सर, यही राह दिखायी.मेरी तन्हाइयों की खबर,लम्हों-लम्हों को है, उनको नही.उनकी गली से गुज़रता हर लम्हा,उन्हे देखता है.हवा का इक-इक झोंका, जो मेरे करीब़से गुज़रता है,वफ़ा-ए-इ...
मेरी कल्पनायें......
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  October 22, 2011, 8:38 am
वो लम्हे भी खुश्बू-ए-इश्क में,तब्दील हो जाते है, तुमसे मिलकर, तुम्हे छूकर,जो मेरे करीब़ आते हैं.लम्हों का रूख़, अब बदल गया,इश्क के रंग, जिस्म-ए-रूह,पर उड़ाते है. उनकी ख़्वाइश थी कि,वो मेरा हमसफ़र बनेंगे,और हमने सफ़र-ए-जिन्दगी,उनके नाम कर दी.इतनी मोहब्बत है उनके दिल में,कि मत पूछो,...
मेरी कल्पनायें......
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  October 18, 2011, 8:21 pm
जिन्दगी का हरलम्हा तुम्हें सौंप दिया,बस ये सोचकर कि तुम मेरी जिन्दगी हो.जी करता है, वक्त के अंतिम सांस तक तुम्हे प्यार करूं,भू की अंतिम परिक्रमा से परे प्यार करता रहूँ.तुम हो, मैं हूँ, वरना मै था ही नही.मेरी ख़ामोशियों का शोर सिर्फ़ तुमने सुना,महसूस किया,दिल की अबोध धड़कनको ...
मेरी कल्पनायें......
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  October 11, 2011, 2:41 pm
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मेरी कल्पनायें......
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  October 7, 2011, 11:17 pm
ना अंजन, ना श्रृंगार, अद्भुत तेरी सौन्दर्य छटा,तन यौवन का चरमबिन्दु, अधर खुले, बरसे घटा,बंद पलक में निशा बसे, खुली पलक में भोर,हृदय-मुग्ध करती हो प्रतिपल, इत-उत व चहुँ ओर.[१] बिन घुँघरू पग अतिशोभित, बिन कंगन ये हस्त,प्रकृति-अंश समान ये काया, करे सदा मदमस्त,मनु तुम-पर मन से मरा, ...
मेरी कल्पनायें......
Tag :रूप-स्वरूप-दिल-ए-ख्वाइश.
  September 28, 2011, 1:57 am
विरह, वेदना, क्रन्दन,रोता, बिलखता अबोध मन,अप्रत्यक्ष जीवन,उत्कंठित नयन,मृत इच्छा उद्बोधन,चहु दिशा अप्रसन्न,मुर्झाया उपवन,शून्य-तनन-संवेदन,यथासमय शिरश्छेदन,मत-भ्रमित अवलोकन,उत्सावाग्नि चुभन,अभिलाषा अभिशून्यन,भावशून्य अध्यर्थन,पराकष्ठा ठिठुरन,दिशाहीन अन्तर्मन,गह...
मेरी कल्पनायें......
Tag :तुम बिन मेरी परिभाषा
  September 11, 2011, 12:30 pm
गरीबी समाज की बहुत बड़ी मर्ज़ है,इसे बचपन से देखा है.गरीब परिवार में पला-बढ़ा हूँ इसलिये इसे अच्छे से समझ सकता हूँ,पर शुक्रगुज़ार हूँ खुदा का जिसने मुझे इतने महान माँजी और बाबूजी दिये जिनके त्याग और बलिदान की वजह से मैं इस काबिल बना कि आज इस दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल ...
मेरी कल्पनायें......
Tag :गरीबी
  September 7, 2011, 7:29 pm
समस्त गुरुजन को समर्पित...(आपका जलाया हुआ दीप आज जगमगा रहा है गुरुजन)..है गुरुजन को सत-सत नमन,प्रज्वलित हुआ है जिनके लौ से,दृष्टिकोण और अंतर्मन.है गुरुजन को सत-सत नमन.हाथ थामकर राह दिखाई,शीर्षलम्ब उद्देश्य दिया,इत्र-उत्र-सर्वत्र हे गुरुजन,जीवन को सर्वोच्च किया.दिया है इन ...
मेरी कल्पनायें......
Tag :है गुरुजन को सत-सत नमन
  September 5, 2011, 1:41 pm
मैने अभी लिखा नहीं, जो अंतर्मन को दिखा नही,मैं ढूढ रहा उस लम्हे को, जो अधियारों मे छुपा कहीं.कलम उठाता हूँ लिखने को,भाव निकल भी आते है.हस्त कलम संग कम्पित होते,शब्द उमड़ नही पाते है.मै सोच रहा उसे प्रतिपल,जो मुझमें होकर मिला नही.मैं ढूढ रहा उस लम्हे को, जो अधियारों मे छुपा कह...
मेरी कल्पनायें......
Tag :हिम्मत ना हारिये
  September 4, 2011, 10:55 am
कभी-कभी ही सही, मेरे खयालों में आ जाया भी करो.मेरे सूखे जहां को, खूश्बू-ए-इश्क से महकाया भी करो.तेरी परछाई मुझपे हो तो, खुदको पाक़ समझूंगा.कभी-कभी ही सही, बनके घटा, यूँ छाया भी करो.प्रज्वलित हुआ हूँ, इश्क की ज्वाला में ऐ हमदम.जलने दो अंत तक, इसे यूँ बुझाया भी ना करो.कांपता हूँ र...
मेरी कल्पनायें......
Tag :कभी-कभी ही सही
  September 2, 2011, 4:06 pm
मैं मालिक हूँ तुम सब का,मैने तुम्हे बनाया है.भेजा अपना अंश समझकर,पर कुछ और ही पाया है.चौरासी लाख योनियों में,उच्च श्रेणी है तुम्हे दिया.पर कर्तव्य तुम्हारे ऐसे,तुमने खुद को तुच्छ किया.नित-प्रतिदिन बदलाव तुम्हारा,मेरे शोक का कारण है.अब तुम ऐसी मर्ज़ बने,जिसका ना कोई निवार...
मेरी कल्पनायें......
Tag :ईश्वर का संदेश मानव को....
  August 30, 2011, 6:40 pm
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