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!!♥๑۩۞۩๑मन-दर्पण๑۩۞۩๑♥!!

इस ज़माने को मैं कैसे जमाना कह दूँ जमाना तो वो था जिसमे हम जवान हुएवो मीठे बोल में छुपी शरारतें और वो सुहावनी रातें वो चाँद की ही गोद थी जिसमे हम जवान हुए अब कहाँ सुनता हूं मैं वो पाजेब की छन-छन मिटटी का वो आगन था जिसमे हम जवान हुए ना पडोसी से है कोई रिश्त...
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  July 22, 2011, 11:09 pm
बेखुदी में भी क्या खुमारी है ये ज़िन्दगी अब कहाँ हमारी है मर तो जाते हम बरसो पहले भूल जाते गर,ये जान तुम्हारी है                                          बेखुदी में भी क्या खुमारी है ये ज़िन्दगी अब कहाँ हमारी है आहिस्ता से इन धडकनों को छ...
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  July 22, 2011, 9:11 pm
अनोखा आभासएकरूप थी एक रंग थी मैं शब्दों से अतरंग थीपीड़ा की डोर बंधी उड़ती बहती बेकल पतंग थीजीवन मेरा, जो एक वृक्ष सा अटल खड़ा थापल दो पल का साथी हर पत्ता ,ना कोई उमंग थी व्याकुल है आतुर है ये कोरा कैसा आभास हैनिशब्द पड़े कुछ पन्ने कलम पड़ी बेरंग थीभीगे भीगे नयनो से जब वो लम्...
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  April 20, 2010, 11:46 pm
अँधेरी राहों से मैंने तुमको जब गुज़रते हुए देखाचाँद कि परस्तिश में जैसे चांदनी को जलते हुए देखायूँ दिल में दबा नहीं सकते उन दहकते शोलों कोवो रंजिश-ओ-ग़म तेरी आँखों में सुलगते हुए देखावक़्त के साथ यूँ तो बढ़ जाएगी सासें मेरीहर लम्हे को जिंदगी ने मगर,थमते हुए देखाइस तन्ह...
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  January 30, 2010, 6:30 pm
कितनी तन्हाई,कितने थे आंसू कितना उदास था मैंतुझसे बिछड़ के तू ही बता दे कितना पास था मैंचाँद भी,आसमा भी और हैं सितारे सब वहांतेरी धरती पर फलक की अनबुझी प्यासथामैंवो आँगन,वो दीवारें,वो तख्त-ओ-ताज-ओ-महलवो दरवाजे वो खिड़कियाँ और इंतज़ार की आस था मैंरिश्तों के दायरों ने कुछ ...
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  November 13, 2009, 7:21 pm
बदल गया है रात का रंग सुबह का रंग क्या होगाबचपन अपना भूल गया जवानी का रंग क्या होगासिमट गए हैं सपने सभी एक फटी-पुरानी चादर मेंरात की सोती सड़कों पर उन सपनो का रंग क्या होगावक्त कहीं गया नही फिर भी वक्त की कमी क्यूँ है आजजिंदगी जी ली जैसे-तैसे अब मौत का रंग क्या होगाहर पल ह...
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  November 9, 2009, 4:10 am
कितने लोगों में अकेला नज़र आता है ये वक़्ततनहा कितनीजिंदगियाँ जी जाता है ये वक़्त जब हों पैरों में पत्थर,तो हाथ नही बढतेठोकर लगे तो उठना सिखाता है ये वक़्तप्यार-मोहब्बत में मजहब,उम्र और जात की बातेंदुआ मिलकर करोगे तुम,तो हाथ उठाता है ये वक़्तकिसी ने मेरा बचपन तो किसी न...
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  July 2, 2009, 9:38 am
मौसम को देखते कुछ उसका रूप शब्दों से निखारा हैहमने देखें हैं कई रंग तुम्हारे मगर ये रंग हमारा हैबरसोंमेघा,बरसोंमेघाआजधरायेप्यासीहैनील-गगन में,नील-गगन मेंक्यूँ छाई गहरी उदासी है ।झोंका पवन का आने सेपत्ता कोई शर्माता हैप्यार बरसा कर इस धरा परदेख गगन मुस्काता है ।भी...
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  June 28, 2009, 4:41 pm
पत्थरोंमेंभीजानहोतीहैयेमैंनेतुमसेजानाहैइस पत्थर को जीवित कर दिया तुमने अपनी कला से...रंगों में भी पहचान होती है ये मैंने तुमसे जाना हैइन रंगों को नया नाम दिया तुमने अपनी कला से....हाथों में भी दुआ होती हैं ये मैंने तुमसे जाना हैइन हाथों से संसार संवार दिया तुमने अपनी ...
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  June 25, 2009, 8:44 am
मेरेशब्दोंनेमुझेनईपहचानदीयामेरेदर्दनेकहनाजरामुश्किलहैलेकिनतुमकहोमैंतुमसेपूछनाचाहताहूंतुम्हारादर्दकितनागहराहैकितनीगहराईमेंडूबेहैंतुम्हारेशब्द,अपनेहीशब्दइनकोरेपन्नोपरभरतेहुएक्यातुमतन्हाहोतेहो?क्याउसीतन्हाईमेंतुम्हारीआत्माजीवितहोतीहैजोजा...
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  June 21, 2009, 3:00 am
मेरे इस दिल में तुम्हारा कुछ समान पड़ा हैकुछ यादें,कुछ जज़्बात और टूटे-फूटे से कुछएहसास...जिनपर बेदर्द इस वक्त की गर्द जमी पड़ी हैअब मैं चाहता हूं ये गर्द,ये यादें हमेशा के लिए इस बेरूह जिस्म के साथअपना दम तोड़ दें फ़ना हो जायें और तुम एक रात का अधूरा ख्वाब बनकर इन अंधेरों मे...
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  June 16, 2009, 8:21 am
अंतर्मनकेभावोंसेह्रदय-अमुक परिभाषित होगाअग्न लगाते शब्दों काअर्थ कोई अभिशापित होगा ।जीवन-मृत्यु की पहेलियाँसुख-दुःख के भ्रम को सुलझाती हैकाटों में जैसे अधखिली कलियाँखिल-खिलकर मुरझाती हैं ।ह्रदयमेरा निस्पंद हुआ हैअटकी सांसें प्राणों मेंक्या हैं वो सब सत्य गाथ...
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  June 12, 2009, 11:16 am
जिसवक्ततुमइसआईनेमेंख़ुदकोदेखाकरतीहोउसवक्ततुममुझसेकमख़ुदसेज्यादामोहब्बतकरतीहो :)अरे ! रहमकरो,मेहरबानीकरो,गुनाहहमाराहैतोहमसेकहोहमबन्देहैंखुदाकेऔरतुमखुदासेहीशिकायतकरतीहोहकीक़तमेंतोहमनेतुम्हेभुलादियाहैबरसो-सालोंसेमगरख्वाबोंमेंआ-आकरतुमफिरसेशरारत...
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  June 10, 2009, 2:47 pm
वहां देखो वो खड़ी अभिलाषा है,जिंदगी नेधिक्कारा उसे परन्तु जीने की आशा हैनारी है लाचारी है,पहने फटी-पुरानी साड़ी हैअपना तन न ढक कर अपना बच्चा,अपना आँचल संभाली है.......दुखों के सागर मेंसुखों का किनारा नहीडूबती है हर पलउसे तिनके का सहारा नही...इसके पश्चात् भी उसके नयनों मेंको...
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  June 8, 2009, 4:20 am
मैंखानेमेंआजमैकशोंकीकोईकमीनहीये आब-ए-हमदर्द पीकर देखूं तो कुछ हुआउसकी नशीली आंखें साकी जो बनी हैं आजहर नज़र से मिले दो जाम,पीकर देखूं तो कुछ हुआआईने भी अब लड़खड़ाते हैं मुझे देख-देखकरहर आईने से जाम टकरा पीकर देखूं तो कुछ हुआमेरे लबों को छुने से पहले हर बूंद वो पाकीजा ...
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  June 1, 2009, 5:42 pm
(१)हर रात वो मोती जैसा चमकता हैजब-जब चांदनी उसके चहरे पर पड़ती हैबस अमावस की रात ही पता नही चलता की वो आज रोया है या नही ।(२)इन हवाओं के साथ तेरी खुशबू अब क्यूँ आती हैतेरा जिस्म मुझको अब क्यूँ महसूस होता हैशायद शमशान में तेरी राख अब भी बाकी है,हवाओं का रुख बदलना पड़ेगा ।(३)हमे...
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  May 29, 2009, 2:26 pm
हमें शराब पीने की अज़ब ये अच्छी आदत हुईहकीक़त को हकीक़त बोल बैठे ना जाने कौन-सी आफत हुईआबाद हैं अभी हम,हमको तबाह ना समझो मगर हाँ ये सच हैबे नज़ीरइस विलायती मोहब्बत में बस गरीब ये चाहत हुईकोई कायदा भी है कुछ उसूल भी, हम बड़े मासूम गुनाहगार भीहमको मालूम नहीं जुल्म भी अपना,...
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  May 26, 2009, 2:25 pm
खामोश पड़ी उन आवाज़ों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूंतनहाइयाँ बटोरती उन दीवारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूंबनती-बिगड़ती उन तकदीरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूंबिलगते बचपन की कुछ तस्वीरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूंभूख में हुए कुछ गुनाहों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूंमुझको भटकाती जात...
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  April 26, 2009, 8:41 am
आँखे हैं बंजर दर्द कामौसम अभी आया नहींयादों के खुले आसमान परबादल अभी मंडराया नहींआँखे हैं बंजर दर्द कामौसम अभी आया नहींबहुत अजीब सा लगता हैसच ना जाने क्यूँ छुपता हैमैं अकेला हूं आज इसलिएमैंने कभी कुछ छुपाया नहींआँखे हैं बंजर दर्द कामौसम अभी आया नहींदोस्त कभी दो...
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  February 8, 2009, 11:29 am
ये मेरा दिल है समंदर देखोये भी रोता है छूकर देखो !पत्थरों से दोस्ती की सजालहरों से तुम पूछकर देखो !तन्हाईयां फेली हैं मीलों तकदो पल तुम ठहरकर देखो !होसलों पर गर अपने हो यकीनसमंदर पर तुम चलकर देखो !गहराईयों की तासीर गर मालूम न होमेरे दिल में तुम उतरकर देखो !अक्षय-मन...
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  January 26, 2009, 5:36 pm
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