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फुरसतिया

दुनिया में करप्शन का चलन शुरु से रहा है। अगर सृष्टि की शुरुआत के लिये बड़े धमाके वाले सिद्धांतको ही सही मान लिये जाये तो देखिये कि जरा सी जगह से निकला हुआ मसाला पूरी दुनिया में फ़ैलता जा रहा है। बिना रजिस्ट्री कराये सितारे, आकाशगंगायें, ब्लैकहोल, धूमकेतु, अलाय-बलाय बनते च...
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Tag :बस यूं ही
  May 4, 2012, 7:54 pm
पता चला कि सचिन रमेश तेंडुलकर का नाम राज्यसभा के लिये प्रस्तावित हो गया। अलग-अलग लोग इस पर अलग-अलग बयान जारी कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि सचिन को वहां जाना चाहिये कोई कह रहा है कत्तई नहीं जाना चाहिये।अब लोगों को कौन समझाये कि सचिन अपनी मर्जी से कहां जा पाते हैं कहीं। शुरु...
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Tag :बस यूं ही
  April 30, 2012, 9:39 am
कल खबर आई कि अमेरिकाजी ने हाफ़िज भाई पर पचास करोड़ का इनाम घोषित कर दिया।आगे कुछ कहने के पहले साफ़ कर दें आतंकवादी हाफ़िज भाई को हाफ़िज भाई इसलिये लिखा कि अपने पाकिस्तान में गुंडो/आतंकवादियों को भी भाई कहने का रिवाज है। वैसे साझा संस्कृति के चलते यह परंपरा अपने यहां भी है। अ...
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Tag :बस यूं ही
  April 9, 2012, 9:51 am
गुरुजी आन लाइन कविता लिखना सिखा रहे हैं। हर रस की कविता लिखना सिखाते हैं गुरुजी। श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत, शांत रस। सब रसों का पैकेज है गुरुजी का पास। इन मूल रसों के अलावा वे रसों का फ़्यूजन भी सिखाते हैं। रसों का फ़्यूजन मतलब कि एक रस में दूसर...
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Tag :बस यूं ही
  April 5, 2012, 10:10 pm
पिछली बार कानपुर जाने के लिये गाड़ी में बैठे। चित्रकूट एक्सप्रेस खुली आठ चालीस पर। इधर गाड़ी खुली उधर शिखा वार्ष्णेयकी किताब “स्मृतियों में रूस”!शुरु पन्ने से आखिर तक पहुंचने पर टाइम देखा तो मोबाइल नौ बजकर पैंतालीस मिनट बता रहा था। पूरे पचपन पन्ने एक घंटा पांच मिनट मे...
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Tag :बस यूं ही
  March 30, 2012, 9:20 pm
आज सुबह जरा जल्दी उठ गये।अरे एकदम से थोड़ी न उठे। सब काम आहिस्ते-आहिस्ते किये।पहले जगे! फ़िर आंख खोली। पलक झपकाई। पहले सोचा उठें। फ़िर सोचा थोड़ी देर और सो लें। इसके बाद मध्यम मार्ग अपनाने का विचार बनाया कि जग जायें लेकिन उठे न!फ़िर सोचा कि नहीं उठ ही जायें। लेकिन फ़िर बहुमत ल...
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Tag :बस यूं ही
  March 28, 2012, 9:59 pm
{अगर मुझसे पूछो तो तो मैं हर पत्नी को एक सलाह दे सकती हूं। वह अपने पति को अपने से बाहर-घर से बाहर अगर वह पति का प्यार पाना चाहती है तो- घर से बाहर प्रेम करने की छूट दे; उकसाये उसके लिये! क्योंकि वह कहीं किसी और को प्यार करेगा तो, उसके अन्दर का कड़वापन रूखपन भरता रहेगा और इसका ला...
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Tag :बस यूं ही
  March 24, 2012, 7:51 pm
…और अब तेंदुलकर को भी गुस्सा आ गया। तेंदुलकर के संन्यास लेने की बात पर नाराज होने वालों की भीड़ में सचिन भी शामिल हो गये। कल किसी के पूछने पर उन्होंने कहा – मुझे आलोचकों ने क्रिकेट खेलना नहीं सिखाया। मतलब सचिन को संन्यास लेने की सलाह देने का हक सिर्फ़ उनके कोच रमाकांत अचर...
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Tag :बस यूं ही
  March 23, 2012, 9:58 pm
हमारे देश की शिक्षा नीतिरास्ते में पड़ी कुतिया है। जिसका मन करता है दो लात लगा देता है।– श्रीलाल शुक्ल आज सुबह सुबह अखबार में श्री श्री रविशंकर का एक बयान पढ़ा। जीने की कला सिखाने वाले गुरु जी का कहना था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई से नक्सलवाद को बढ़ावा मिलता है। सरकारी स्...
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Tag :बस यूं ही
  March 21, 2012, 9:58 pm
हमारे एक लेखक मित्र बताते हैं कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं- एक वे जो लेखक होते हैं और दूसरे वे जो लेखक नहीं होते।सूबे की दूसरी राजभाषा वाले मोड में होने पर इसी बात को शायराना अंदाज में बताते हुये कहते- पूरी दुनिया अदीब और गैर अदीब लोगों में बंटी हुई है।बात को आगे ब...
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Tag :बस यूं ही
  March 12, 2012, 2:57 pm
आजकल टेलीविजन पर अक्सर एक विज्ञापन आता है।इसमें एक बुजुर्गवार ट्रेन पर चढ़्ते हैं। उनको भोपाल उतरना है। वे लोगों से पूछते रहते हैं कि भोपाल कब आयेगा। लोग उनको बताते नहीं। शायद उनकी बात नहीं समझ पाते। भाषा का चक्कर। रेल चलती रहती है। उनका सवाल अनुत्तरित रहता है। अंतत: व...
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Tag :बस यूं ही
  March 6, 2012, 9:40 pm
कल इतवार को छुट्टी थी सो अपन उठाये मोटरसाइकिल चले गये भेड़ाघाट। दोस्तों ने कुल दूरी बताई गयी 25 किमी। जहां-जहां पूछते गये वहां तक तो मामला सीधा रहा। एक जगह पूछा नहीं- मारे कान्फ़ीडेंस के मारे । बस वहीं आगे निकल गये। जहां मुड़ना था वहां से दस किलोमीटर आगे निकल गये। आत्मविश्व...
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Tag :बस यूं ही
  March 5, 2012, 8:58 pm
पिछले काफ़ी समय से इस तरह की बातें हो रही हैं कि ब्लॉग पोस्टें कम लिखीं जा रही हैं। लोग फ़ेसबुक और ट्विटर पर ज्यादा रहने लगे हैं। लोग व्यस्त हो गये हैं। इसके कारण क्या हैं! आदि-इत्यादि।कुछ इसी तरह के सवाल मुझसे पिछले हफ़्ते मनीषा पाण्डेयने भी किये। वे शायद इंडिया टुडे के ल...
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Tag :बस यूं ही
  December 12, 2011, 2:05 pm
सड़क पर जाम सभ्य समाज की अपरिहार्य स्थिति है। वह समाज पिछड़ा हुआ माना जाता है जहां ट्रैफ़िकजाम नहीं होता। बिनु जाम सब सून! जाम से कुछ लोग परेशान हो उठते हैं। घबरा जाते हैं। शुरु-शुरु में ऐसा होना सहज बात है। लेकिन जाम से घबराना नहीं चाहिये। इसको एक चुनौती की तरह लेना चाहिय...
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Tag :बस यूं ही
  December 9, 2011, 12:24 am
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