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कभी-कभार

प्रतिष्ठा        पिताजी ने अपने जीवन में पैसे ज्यादा नहीं कमाये, मगर जैसी प्रतिष्ठा उन्होंने गाँव-समाज में हासिल की, वैसा सम्मान बहुत कम लोगों को हासिल होता है। आज बरहरवा के किसी भी व्यक्ति से पूछकर देख लिया जाय (बीते आठ-दस वर्षों में जो पीढ़ी युवा हुई है, उन्हें छ...
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  December 18, 2016, 2:12 pm
       बड़े दिनों बाद शौक हुआ कि मकान का नक्शा बनाया जाय। पहले कभी बनाता था। खोज-खाज कर एक प्रोग्राम डाउनलोड भी किया, मगर रास नहीं आया।        अन्त में कम्यूटर को फॉर्मेट कर उसके एक हिस्से में 'विण्डो एक्स.पी.'डलवाया और अपने पुराने पसन्दीदा प्रोग्राम को ही ...
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  November 30, 2016, 11:53 pm
पिछले दिनों जब अभिमन्यु घर आया हुआ था, तो हमने उसे यूँ ही दो पोस्टर डिजाईन करने को कहा था। उसने फटाक् से बना दिये। मेरे पास फोटो-पेपर थे ही, हमने उनका प्रिण्ट निकाल लिया। सोचा, लैमिनेट करवा कर एक खिड़की के दोनों तरफ इन्हें टाँग दिया जायेगा। मगर आलसवश, ये प्रिण्ट कई दिन यूँ ...
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  November 30, 2016, 11:51 pm
       चौथी-पाँचवी कक्षा में हमें तीन ऐसी शख्सीयतों के बारे में पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था, जिनके लिए ‘थे’ के स्थान पर ‘हैं’ शब्द का प्रयोग किया गया था। हम सहपाठियों के बीच यह कौतूहल और चर्चा का विषय बन गया था- अच्छा, तो ये अभी जीवित हैं? क्या हमलोग आज भी इनसे म...
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  November 27, 2016, 7:59 am
हमारा सन्थाल-परगना "दामिन-ए-कोह"है: अर्थात् "पर्वतों का आँचल"। इस पर्वत-शृँखला का नाम है- "राजमहल की पहाड़ियाँ"। ये पहाड़ियाँ प्रागैतिहासिक काल की हैं- यहाँ डायनासोरों के जीवाश्म पाये जाते हैं! राजमहल इस इलाके का एक ऐतिहासिक शहर है, जो मुगलकाल में दो बार बँगाल प्रान्त (अँग-ब...
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  October 23, 2016, 2:06 pm
       क्या आपने कभी रामप्रिय मिश्र "लालधुआँ"का नाम सुना है?        यह सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं कि हमने अपने बचपन में बाल-गीतों की एक पुस्तिका पढ़ी थी, जिसके रचयिता रामप्रिय मिश्र "लालधुआँ"जी थे। पुस्तिका का नाम था- "बात-बात में बात"। पुस्तिका आयताकार थी- लैण...
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  October 21, 2016, 8:03 pm
       क्या आपने कभी रामप्रिय मिश्र "लालधुआँ"का नाम सुना है?        यह सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं कि हमने अपने बचपन में बाल-गीतों की एक पुस्तिका पढ़ी थी, जिसके रचयिता रामप्रिय मिश्र "लालधुआँ"जी थे। पुस्तिका का नाम था- "बात-बात में बात"। पुस्तिका आयताकार थी- लैण...
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  October 21, 2016, 8:03 pm
बरहरवा के बँगालीपाड़ा (कालीतला) में जो दुर्गापूजा होती है, वहाँ की दो खासियत है- एक तो वहाँ आडम्बर, दिखावा या तामझाम नहीं के बराबर होता है; दूसरे "कला"की किसी-न-किसी विधा को वहाँ हर साल "थीम"बनाया जाता है.  तो इस बार रेत या बालू से बनी कलाकृतियाँ वहाँ प्रदर्शित की गयी हैं. आम ...
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  October 10, 2016, 10:51 am
बरहरवा के बँगालीपाड़ा (कालीतला) में जो दुर्गापूजा होती है, वहाँ की दो खासियत है- एक तो वहाँ आडम्बर, दिखावा या तामझाम नहीं के बराबर होता है; दूसरे "कला"की किसी-न-किसी विधा को वहाँ हर साल "थीम"बनाया जाता है.  तो इस बार रेत या बालू से बनी कलाकृतियाँ वहाँ प्रदर्शित की गयी हैं. आम ...
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  October 10, 2016, 10:51 am
       कल 20 मई को माँ-पिताजी के विवाह की "हीरक-जयन्ती" (Diamond Jubilee) थी, यानि विवाह के साठ साल पूरे हुए। इस अवसर पर सुबह एक हवन और सन्ध्या में स्वल्पाहार का छोटा-सा कार्यक्रम घर में आयोजित हुआ।        10 साल पहले "स्वर्णिम जयन्ती" (Golden Jubilee) भी मनायी गयी थी। उसके कुछ छायाच...
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  May 21, 2016, 9:28 pm
      मेरे इस ब्लॉग में क्रमांक 141 में एक आलेख है-"रोमियो"। इसमें बिल्ली के उस बच्चे का जिक्र है, जो मई'15 में हमारे घर में आकर रहने लगा था और अभिमन्यु से कुछ ज्यादा ही हिल-मिल गया था। यह हिलना-मिलना कुछ ज्यादा ही हो गया था। इतना कि अगस्त में जब अभिमन्यु कोलकाता चला गया, तब ...
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  May 18, 2016, 9:00 pm
       इस ब्लॉग के आलेख क्रमांक- 2 में चरक मेला का पहला भाग है। यह आलेख 2010 का है- 6 साल पुराना, मगर इसमें जिस मेले में जाने का मैंने जिक्र किया है, वह 2005 से 2008 के बीच के किसी साल का है। इसमें जिक्र है कि किसी-न-किसी साल मैं इस चरक मेले की तस्वीरें जरुर प्रस्तुत करुँगा। मग...
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  April 14, 2016, 9:05 pm
       कल दिन में कुछ ज्यादा ही गर्मी थी। रात ढलने तक गर्मी रही। उसके बाद तेज हवाओं का चलना शुरु हुआ, जो भोर होने तक जारी रहा। नतीजा, अगला दिन- यानि आज का दिन सुहाना हो गया। हम भी निकल पड़े।        पहले बिन्दुवासिनी मन्दिर में जाकर हमने पूजा की। देखा, 108 सीढ़ियो...
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  March 13, 2016, 5:46 pm
(इस आलेख को मैंने लिखा तो था शिवरात्रि के दिन, पर कुछ कारणों से पोस्ट नहीं कर पाया था.)       शिवजी आडम्बर एवं विलासिता से रहित जीवन व्यतीत करते हैं- सादगी भरा। वे कभी कोई छल-प्रपंच नहीं रचते- न ही किसी के द्वारा रचे गये प्रपंच में स्वयं को शामिल करते हैं। उनका स्वभ...
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  March 13, 2016, 5:37 pm
       अपने बचपन में हम "खेत देके"स्कूल जाना पसन्द करते थे। "खेत देके"मतलब- खेत से होकर।        पूरी बात इस तरह है कि हमारा घर जिस सड़क पर है, उसका नाम "बिन्दुधाम पथ"है और यह बरहरवा के "मेन रोड"यानि मुख्य सड़क के लगभग समानान्तर है। हमारा स्कूल यानि "श्री अरविन्द प...
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  March 5, 2016, 9:07 pm
       कुछ दिनों पहले छुट्टी के दिन घूमते हुए चण्डोला पहाड़ की तरफ निकल गया था।        दरअसल, बरहरवा राजमहल की पहाड़ियों की जिस श्रेणी की तलहटी में बसा है, उसके अलग-अलग हिस्सों के अलग-अलग नाम हैं। बचपन में हमलोग बोरना और घोड़ाघाटी पहाड़ जाया करते थे- चकमक पत्थ...
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  February 14, 2016, 12:33 pm
बीते दिसम्बर-जनवरी में दो पिकनिक स्पॉट में जाना हुआ था, जिनका जिक्र फेसबुक पर तो हो गया था, मगर सोचा कि ब्लॉग पर भी उनका जिक्र रहना चाहिए, सो अभी कुछ पोस्ट कर रहा हूँ.मसानजोरदुमका से कोई 40 किलोमीटर दूर यह बाँध है- सिउड़ी जाने वाले मार्ग पर. बहुत ही खूबसूरत जगह है. मैं यहाँ क...
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  February 14, 2016, 9:45 am
       दोनों चित्रों में जो पत्थर दिख रहा है, वह सम्भवतः "जीवाश्म"है। जीवाश्म भी ऐसा-वैसा नहीं, किसी डायनासोर की हड्डी का!       यह पत्थर मेरे पास सालभर से ज्यादा समय से रखा हुआ है; ये दोनों चित्र भी कम्प्यूटर के मेरे 'ड्राइव'में लम्बे समय से पड़े हैं; मगर इनप...
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  February 8, 2016, 7:38 pm
       मलूटी एक छोटा-सा गाँव है। पड़ता तो यह है झारखण्ड के दुमका जिले में, मगर यह बंगाल के रामपुरहाट से नजदीक है।        गाँव पुराना है। गाँव के बीच-बीच में छोटे-छोटे बहुत सारे मन्दिर बने हुए हैं, जो ढाई-तीन सौ साल पुराने हैं। मन्दिरों की खासियत है- सामने की द...
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  January 24, 2016, 3:52 pm
उधवा जाने के रास्ते में-        पिछले रविवार उधवा से लौटते वक्त एक परित्यक्त सन्थाली झोपड़ी ने मेरा ध्यान खींचा। पता नहीं, इतनी अच्छी झोपड़ी परित्यक्त अवस्था में क्यों है! प्रसंगवश मैं यहाँ यह बता दूँ कि सन्थालों की ये झोपड़ियाँ कई मामलों में अन्य झोपड़ियों से अल...
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  January 10, 2016, 12:00 pm
       बैंकों में चार दिनों की छुट्टियाँ पड़ गयी हैं। एक सज्जन ने दैनिक अखबार 'प्रभात खबर'में पत्र लिखकर बाकायदे आवेदन किया है कि सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा न हो- बैंक प्रतिदिन खुलना चाहिए, कर्मचारियों को "रोटेशन"पर छुट्टियाँ देनी चाहिए। क्यों भाई? क्योंकि ...
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  December 25, 2015, 6:56 pm
कल (रविवार) की घटना।"ट्रिन-ट्रिन- "मैं घर में नहीं था। 'नम्बर से'एक कॉल आती है।"हैलो- "श्रीमतीजी फोन उठाती है।"जयदीप जी घर में हैं?"उधर से अपरिचित महिला की आवाज आती है।"नहीं, बाहर निकले हुए हैं। आप कौन?""यह जयदीप जी का ही फोन है न? नम्बर डायवर्ट होकर मिला है।"       "हाँ, उ...
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  December 7, 2015, 9:08 am
कल (रविवार) की घटना।"ट्रिन-ट्रिन- "मैं घर में नहीं था। 'नम्बर से'एक कॉल आती है।"हैलो- "श्रीमतीजी फोन उठाती है।"जयदीप जी घर में हैं?"उधर से अपरिचित महिला की आवाज आती है।"नहीं, बाहर निकले हुए हैं। आप कौन?""यह जयदीप जी का ही फोन है न? नम्बर डायवर्ट होकर मिला है।"       "हाँ, उ...
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  December 7, 2015, 9:08 am
       हम भारतीय- आम तौर पर- अपने इतिहास के बारे में वही जानते हैं, जो यूरोपीय इतिहासकारों ने तथा उनके द्वारा खींची लकीरों पर चलने वाले भारतीय इतिहासकारों ने पाठ्य-पुस्तकों में लिख रखा है। इस इतिहास को पढ़कर हम भारतीयों के मन में हीन-भावना ही जन्मती है, क्योंकि इस...
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  November 29, 2015, 9:54 pm
       इस ब्लॉग में आल्पना पर पहले से मेरे दो आलेख हैं (क्रमांक- 89 और 91)। उनमें जिक्र है कि मेरी मँझली और छोटी फुआ (बुआ) इस कला में सिद्धहस्त हैं; दूसरी पीढ़ी में मेरी दोनों दीदी इस कला में पारंगत है और तीसरी पीढ़ी में छोटी दीदी की बेटी को तो इस कला में महारत हासिल है। इस ...
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  November 17, 2015, 11:43 am
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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