Hamarivani.com

बावरा मन

आजकल बहुत सारे शब्द मेरे ज़ेहन में घूमते रहते हैं इतने कि समेट नहीं पा रही हूँ अनगिनत शब्द अंदर जाकर चुपचाप बैठ गए हैं । एक दोस्त की बात याद आ रही है जब कुछ अरसा पहले यूँ ही शब्द मेरे ज़ेहन में कैद हो गए थे ।उसने कहा था , 'सुमी ! अक्सर ऐसा होता है जब बहुत सारे शब्द हमारे अंदर इकट...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  March 25, 2017, 4:40 pm
वो लड़की अक्सर देखती रहती सूर्य किरणों में उपजे छोटे सुनहरी कणों को हाथ बढ़ा पकड़ लेती दबा कर बंद मुट्ठी में ले आती अपने कमरे में खोल कर मुट्ठी बिखेर देती सुनहरापन :रात, पनीली आँखों में चाँद को भरकर ठीक इस तरह रख देती कमरे में शबनमी चाँदनी खिड़की और दरवाजे को बंद करगुनगुनात...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  March 20, 2017, 12:18 pm
प्रेम !हर दिन का उजालाहर रात की चाँदनी हर दोपहर की तपिश हर शाम की मदहोशी तुम्हें एक दिन में समेट पाऊंइतनी खुदगर्ज़ नहीं .....मेरे प्रिय !तुम्हें चिन्हित तुम्हारा ये दिन तुम्हें बहुत बहुत मुबारक !!सु-मन  ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  February 14, 2017, 2:40 pm
बहुत उदास सी है शाम आज आसमान भीखाली खाली घर की ओर बढ़तेउसके कदमों में है कुछ भारीपन यूँ तो अकसर दबे पाँव ही आती है ये उदासी पर आज न जाने क्यूँ इसकी आहट में है चुभन सी जो उसकी रूह को कचोटती हुई भर रही है उसकी नसों में एक धीमा ज़हर और वो अजाने ह...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  February 9, 2017, 12:19 am
वो लड़कीसफ़र में जाने से पहलेबतियाती हैआँगन में खिले फूल पत्तों से देती है उन्हें हिदायत हमेशा खिले रहने कीरोज़ छत पर दाना चुगने आई चिड़िया को दे जाती है यूँ ही हर रोज़ आते रहने का न्योताचाहती है वो माँ का घर हरा – भरा..घर से निकलते वक़्त टेकती है सर घर की देहड़ी परबिना पीछे मुड़...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  December 27, 2016, 1:13 pm
वो लड़कीरोटी सेंकते हुएनहीं मिटने देना चाहती अपने हाथों में लगी नेलपॉलिशचिमटे से पकड़ करगुब्बारे सी फूलती रोटी सहेज कर रख लेती कैसरोल में नहीं माँजना चाहती सिंक में पड़े जूठे बर्तन गुलाबी रंगे नाखूनों से नहीं उतरने देना चाहती सुर्ख रंगत ..पर कुछ ही देर बाद अपनी इस चाहत क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  December 12, 2016, 3:46 pm
वो लड़का सारे दिन के बाझिल पलों को सुला देता है थपकियाँ देकर हर रात अपने बिस्तर में आँख मूंदती बेजान हसरतें जब निढाल हो सो जाती हैं एक कोने में वो उन्हेंलेकरअपनी हथेली में सुबकता है रात भर सुबह उठकर फिर जीने लगता है कुछ और बोझिल साँसें होठों पे मुस्कराहट के साथ वो लड़का ब...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  November 25, 2016, 2:54 pm
सुनो ! याद है वो कड़क धूप तपे थे जिसमें हम दोनों रख ली है मैंने संभाल के शरद में ओढेंगे इस गुनगुने मौसम में भर देंगे थोड़ी सी गर्माहट !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :तपिश
  November 11, 2016, 11:31 am
छाये बादलचहका उपवन नेह बरसा !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  November 3, 2016, 12:11 pm
रहें ना रहें हम , महका करेंगे बन के कली बन के सबा बागे वफ़ा में ..सर्दियों में क्यारी की शुरुआत आखिर मेहनत रंग ला ही गई |बात कई महीनों पहले की है | हमारे ऑफिस के प्रांगण में सामने की तरफ खाली पड़ी जगह थी जिसमें मैं पौधे लगाना चाहती थी पर सभी द्वारा मेरी बात नज़रअंदाज़ की जाती ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  July 21, 2016, 11:39 am
एक हद तकजीये जा सकते हैं सब सुखएक हद तक ही सहा जा सकता है कोई दुखसरल सी चाही हुई जिंदगी में मिलती हैं कई उलझने बेहिच बदल देते हैं हम रास्ता मनचाहे को पाने के लिएभूल जाते हैं अक्सरपाने के लिए कुछ खोने की गहरी बात तय करना चाहते हैं खुदअपने आकाश का दायरा छोड़ देते ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :सुख
  June 24, 2016, 11:29 pm
मेरे जाने के बादहोती रहेंगी यूँ ही सुबहेंशामें भी गुजरेंगी इसी तरहरातें कभी अलसाई सी स्याह होगींकभी शबनमी चांदनी से भरपूरखिला करेंगे यूँ हीये बेशुमार फूल इस आँगनकमरा यूँ ही सजा रहेगाकुछ मामूली और कीमती चीज़ों सेयूँ चलती रहेगी घड़ी टिक-टिकचलता रहेगा वक़्त अपनी चालधड़क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  May 21, 2016, 7:39 pm
पिछले 2-3 बरस के सहेज कर रखे सामान को टटोला तो पाया कि वक़्त के साथ-साथ बदलने लगा है सब । उस वक्त के सहेजे इस सामान में फफूंद लगने लग गई है । बहुत बचा के रखा था कि बेशकीमती ये सामान यूँ ही नया नया रहे । पर इक उम्र होती है हर चीज़ की, उसके बाद वो नयापन फीका पड़ जाता है उसकी जड़त...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  April 1, 2016, 3:08 pm
हर बार सोचती हूँएक हद में सिमट जाऊँकर लूँ अपनी सोच को एक अँधेरी कोठरी में बंद दुनिया की रवायत संग जीने लगूं एक बेनाम जिंदगी बांध अपने पैरों में बेड़ियाँ चल दूँ राह पर उस तरफ जिस तरफ ले जाना चाहे कोई दिल दिमाग के हर दरवाजे पर लगा दूँ एक जंग लगा ताला मन के वांछित कारावास से क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :वजूद
  March 1, 2016, 2:45 pm
                                    खोया कुछ भी नहीं जो पाया था । जो पाया था वो अब तक भीतर है ।उसे खोया ही नहीं जा सकता ।तुम हमेशा खोजते रहते थे भटकते रहते थे यहाँ वहां । सब कुछ तो यहीं था भीतर, सब जगह तलाशा तुमने बस अपने भीतर नहीं देखा ।मैंने भीतर देखा और पा ल...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  February 20, 2016, 2:32 pm
               खाली को भरने की कवायद में भरते गए सब कुछ अंदर । कुछ चाहा कुछ अनचाहा । भर गया सब..बिलकुल भरा प्रतीत हुआ, लेश मात्र भी जगह बाकी ना रही । फिर भी उस भरे में कुछ हल्कापन था । कुछ था जो कम था...दिखने में सब भरा भरा..फिर खाली खाली सा । भरे की तलाश कम नहीं हुई ..भटकते ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  January 29, 2016, 1:16 pm
‘समर्पण की पराकाष्ठा ही शायद उपेक्षा के बीज अंकुरित करती है और कविता को विस्तार भी यहीं से प्राप्त होता है |’निवेदिता दीऔर अमित जीजूद्वारा लिखी कविताओं की पुस्तक ‘कुछ ख़्वाब कुछ ख़्वाहिशें’ में पाठकों के लिए लिखे शब्दों ये पंक्तियाँ मन को छू गई | समर्पण और उपेक्षा के बी...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  January 8, 2016, 12:05 pm
                     पहली बार जब जिन्दगी ने दरवाजा खोला था उस पल क्या महसूस किया होगा इस एहसास से अनभिज्ञ होते हैं हम | धीरे धीरे दरवाजे को लाँघ कर जब जिंदगी के आशियाने में प्रवेश करते हैं तो दुख सुख के कमरे मिलते हैं जिनकी चार दीवारी को हम अपनी इच्छाओं के रंग पोत ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  November 21, 2015, 10:55 am
आओ दीप जलायें देहरी में मंगल का आँगन में सुख का कमरे में शान्ति का खिड़की में आस का बरामदे में ख़ुशी का मंदिर में भक्ति का दिल में उमंग का प्रेम के स्वरूप का आओ दीप जलायें आओ दीप जलायें !!दीप पर्व मुबारक ...सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  November 11, 2015, 9:23 pm
                        मिनी ने पक्का सोच लिया था कि अब वो कबीर से कभी बात नहीं करेगी | बात तो क्या कभी मैसेज भी नहीं करेगी | आज सोमवार था मिनी ऑफिस में अपने काम मैं काफी व्यस्त थी | तभी उसे लगा कि कुछ कम्पन हो रही ..पास रखी अलमारी के हिलने की आवाज़ इतनी थी कि ये समझ आ चूक...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :दोस्त
  November 6, 2015, 10:53 am
माँ !जलाया है मैंने आस्था की डोरी से अखंड दीप तुम्हारे चरणों में किया है अर्पित मुखरित सुमन मस्तक पर लगा कर चन्दन टीका किया अभिषेक तुम्हारा ओढ़ाई तारों भरी चुनरी रोपा है मैंने आस का बीज हाथ जोड़ किया तुम्हारा वन्दन पढ़ा देवी पाठ की क्षमा प्रार्थना फल नैवेद्य कर अर्पण किय...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :माँ
  October 20, 2015, 1:31 pm
आज सोम वार था | राखी को अब सिर्फ एक हफ्ता ही रह गया था आज से ठीक सात दिन बाद सोमवार को राखी थी | बातों ही बातों में रिया ने अनुज को बोला – मैं आपको राखी भेजूं ? पहनोगे ...फिर चुप हो गई |...सॉरी अनुज - अरे सॉरी क्यूँरिया –बस ऐसे ही बाधुंगी ..कोई रिश्ता नहीं थोपूंगी | आप जीजू होने के साथ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :बन्धन
  August 25, 2015, 12:37 pm
बाबुल !स्मृतियों का आकाश आज है भरा भरा उड़ रहे तुम्हारे नेह के परिंदे मैं जमीन पर खड़ी देख रही तुम्हारी काल्पनिक छवि तुम होदूर ..बहुत दूर पर तुम्हारा एहसास आज भी जीवंत है मेरी रूह में देता है मुझे शुभ आशीष जीवन के हर पथ पर चलता है मुझ संग हर कदम तुम हो और रहोगेमेरे साथ अंतिम ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  August 5, 2015, 2:52 pm
मन !सब कुछ तय था पहले से ही | मिलना, जुदा होना..फिर , फिर से मिलना | सब कुछ तयबद्ध तरीके से हुआ | वक़्त ने करीने से तय कर रखा है सब | पल पल का हिसाब दिन और रात के खानों में तरतीब से रख दिया है अपनी अलमारी में | ज्यादा भूल भी न हुई होगी बस लिखना भर था पल पल का हिसाब जिन्दगी की पोथी में , ज...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 21, 2015, 3:12 pm
मन !सब कुछ तय था पहले से ही | मिलना, जुदा होना..फिर , फिर से मिलना | सब कुछ तयबद्ध तरीके से हुआ | वक़्त ने करीने से तय कर रखा है सब | पल पल का हिसाब दिन और रात के खानों में तरतीब से रख दिया है अपनी अलमारी में | ज्यादा भूल भी न हुई होगी बस लिखना भर था पल पल का हिसाब जिन्दगी की पोथी में , ज...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 21, 2015, 3:12 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3645) कुल पोस्ट (162618)