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parwaz परवाज़.....

बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर पोस्ट कर रही हूँ ..बेटे के लिए एक कविता लिखी है कितना सुन्दर है प्यारे बेटे तेरा इस जीवन में आना शीतल कोमल पूर्ण चन्द्र सा मद्धम मद्धम मुस्काना इस दुनिया के सब रिश्तों पर धीरे से भारी पड़ जानाहौले हौले से मेरा सबसे प्यारा अन्वित (दोस्त) हो जानातु...
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  September 20, 2016, 12:05 am
उतने मासूम नहीं लगते,उतने कच्चे नहीं लगते तेरे इस शहर के बच्चे मुझे बच्चे नहीं लगते जहाँ लगते थे मेले कभी गर्मी की छुट्टी में उन जगहों को अब झूले अच्छे नहीं लगते वो सिक्के जो बोए थे कभी नाना के बाग़ में पूरी जेबें भरे नोट भी उन सिक्को से नहीं लगते जो लोग दूसरों की गलतियों ...
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  March 17, 2015, 5:12 pm
छोटा सा, शहर गंगा का किनारा, कुछ गलियां  इन गलियों से ही अन्दर की तरफ जाती और छोटी गलियां जिनके दोनों तरफ कुछ घर, बड़ी गलियों में कुछ दुकानें और इन दुकानों में कुमार शानू ...नहीं कुमार शानू खुद नहीं पर उनकी आवाज़ ...और हमारे साथ उस आवाज़ को सुनता आयुष्मान खुराना ...मतलब फिल्म का ...
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  March 4, 2015, 7:07 pm
मैं हमेशा से तुम्हे लिखना चाहती थी और  लिखना चाहती थी खुद को. लिखते लिखते जी लेना चाहती थी पर न जाने क्यों लिखते लिखते खो जाना इतना आसान नहीं , मैं ज़हर लिखना चाहती हु ऐसा ज़हर जो लिखते लिखते सूज गई उँगलियों में उतर आए , लिखने वाले को खबर ही न हो उसकी खुद की कलम अब उसे छलनी कर...
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  January 30, 2015, 5:52 pm
आज कई दिन बाद ब्लॉग पर एक पोस्ट … इसे  कविता की जगह एक ऑफबीट सांग कहना ज्यादा बेहतर होगा … कोशिश कैसी है बताइयेगा …… कोई हमको ये बताए क्यों ये अंधी दौड़ है गलियां और चौबारे नहीं लंबी सड़क पर मोड़ हैक्यों  रात में दिन जैसा हो जाने की लम्बी  होड़ हैदिल घरों में रख...
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  January 7, 2015, 2:51 pm
बात ये नहीं की तुमने उसे कहाँ कैसे माराबात ये भी नहीं की मार देने के बादतुम्हें कितना अहसास हुआ की तुमने मार दिया ...मार दिया एक बच्ची को माँ के पेट मेंमार दिया उसे किसी पेड़ से लटकाकरमार दिया उसे काल कोठरी में बंद करकेया मार दिया उसके अरमानो कोफर्क नहीं पड़ता की क्यों  मा...
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  June 25, 2014, 7:32 pm
एक ऐसी कविता जिसे कोई पुरूष लिखता तो बेहतर लिखता ज्यादा शिद्दत से लिखता...पर मैंने लिखी...लोग कहते हैं नारी का मन पढ़ा नहीं जा सकता..पर सच ये है कि पुरूष का मन ज्यादा गहरा है...उसमें भी प्रेम हैं संवेदनाए है...पुरूषो की ओर से ये एक कविता हर नारी के लिए....क्या कहूँ ओ प्रियतमा तु...
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  April 23, 2014, 3:00 pm
फ़ोन की लम्बी लम्बी  बातें कभी वो सुकून नहीं दे  सकती जो चिट्ठी के चंद शब्द देते हैं .तुम्हे कभी लिखने का शौक नहीं था और पढने का भी नहीं तो मेरी न जाने कितनी चिट्ठियां मन की मन में रह गई न उन्हें कागज़ मिले न स्याही .तुम्हारे छोटे छोटे मेसेज भी मैं कितनी बार पढ़ती थी तुमन...
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  April 2, 2014, 12:02 am
कई दिनों से कुछ लिखा ही नहीं जिसे यहाँ औसत किया ये कुछ  टुकड़े है कविताओं के  बस जो फेसबुक पर बिखरे थे समेत लाई हूँ …1. नज़दिकियां बढ़ी तो पता चला आसमां भी तंगदिल होता है...   कितने छोटे थे वो लोग जो सर पर साये की तरह थे 2. मैं तेरे नाम को हज़ार जगह लिखती हूँ,पर जो खो गया ह...
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  April 1, 2014, 11:58 pm
 हमें नहीं चाहिए इतिहास की उन किताबों में नामजिनमें त्याग की देवी बनाकर स्त्री-गुण गाए जाएत्याग हमारा स्त्रिय गुण है जो उभरकर आ ही जाता है पर इसे बंधन बनाकर हम पर थोपने का प्रपंच बंद करो......नहीं चाहिए तुम्हारी झूठी अहमतुष्टि के लिए अपनी आत्मा से प्रतिपल धिक्कार....तुम ...
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  January 20, 2014, 2:31 pm
तुम लाशों के ढेरों पर तिलक लगाकर खुश होगे या खून की नदियों को अज़ान सुनाकर खुश होगे तुम धर्म के रंगों से मरघट में होली खेलोगे या बच्चो के सर से माँ का आँचल चुराकर बहलोगे तुम संगीत की ध्वनि में करूणा का रस भर दोगे या बचपन के कन्धों पर बारूद की बोरी धर दोगे तुम सावन की बूंदों...
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  October 18, 2013, 2:38 pm
अपना पसीना उनकी नज़रों में ख़राब है आजकल नेताजी क्या कम नवाब है उनके इत्र भी हमारी भूख पर भारी पड़े खुशबुओं के दौर में रोटी का ख्वाब है रेशमी शालू ,गुलाबी शाम के वो कद्रदान आमजन की बेबसी का क्या जवाब है मशहूर हो जाने को वो रोंदे हमारी लाश को लाश हो जाना ही बस अपना सबाब है रोश...
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  August 14, 2013, 5:46 pm
भूख है और उम्र है ,दोनों ही खत्म होती नहीं प्रसादों जेसे बड़े आवास लेकर क्या करू उम्र भर की सेवा का मोल दिया न प्रेम से सम्पूर्ण समर्पण के बदले ,परिहास लेकर क्या करू बूँद बूँद के लिए तरसे हुए अंतस यहाँ कागजों के कुएं और तालाब लेकर क्या करूँ मैं चुनुँगा और को, राज करेगा दू...
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  August 13, 2013, 3:32 pm
parwaz blog:kyo khand khand hai uttarakhandलाशों के ढेरों के बीच मानवता कराह रही बिगड़े हालातों के  बीच भूख हिलोरे मार रही बिना दस्तक के आ गया सारी वादी में प्रचुर विध्वंस किससे करें सवाल क्यों खंड खंड है उत्तराखंड क्यों बांधों ने सीना चीरा क्यों नदियों का रस्ता मोड़ा ...
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  July 5, 2013, 5:31 pm
वो सारी लड़कियां हाँ वो सब की सब  जेसी हैं वेसी थी नहीं  वो बनाई गई वैसी ,गढ़ा गया उन्हें  धीरे धीरे  जैसे जहर दिया जाता है ठीक वैसे ही  उनमे से कई को दिया गया  पढने लिखने का अधुरा सा हक  दूध के आधे ग्लास की तरह  जिसमे बची हुई आधी जगह  में ठूस ठूस कर भरा था  एक अ...
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  July 5, 2013, 3:53 pm
होममेकर मैगज़ीन के मई अंक में मेरा आर्टिकल "जाने अपने रिश्ते की गहराई " शीर्षक के साथ प्रकाशित हुआ ....लेख की झलकिया प्रस्तुत हैं ...
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  July 2, 2013, 3:08 pm
 तुम और हम दो ध्रुवो की तरह दोनों पर ज़िन्दगी टिकी हुई नहीं हम नदी के दो किनारे नहीं जो साथ न  होकर भी साथ ही हो हम तो विज्ञान की पूरी किताब है न्यूटन के क्रिया प्रतिकिया के सिद्धांत की तरह जितनी तेज़ी से क्रिया होती है उतनी ही तेजी से प्रतिक्रिया एक दम नपे तुले कितने प्रेम...
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  May 22, 2013, 9:56 am
कैरी की चटनी के जैसा खट्टा मीठा जीवन हैखरबूजे के पन्ने की तरह स्वाद बदलता मौसम हैतुम शक्कर जैसे मीठे , मैं नमक सी खारी हूँतुम रूककर थमकर चलते मैं बहने की तैयारी हूँतुम आते रहना ख्वाबों में, मैं सारा जहाँ भुला दूंगीतुम जब गुस्सा कर लोगे मैं भोलापन बिखरा दूंगीतुम हाथो म...
parwaz परवाज़........
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  May 15, 2013, 4:24 pm
वो पकड़ता है वो  रुपैये भीचकर मुट्ठी मेंसोचता है दे मारू मुनीम के मुह पर अभी कर दू हड़ताल और मांगू  अपने हिस्से के पूरे पैसे फिर याद आता है ठंडा पड़ा चूल्हा ,रोटी और नमक का भाव घर में भूखे  बैठे  बीमार माँ बाप और तभी उसकी क्रांति के लाल और काले झंडे बदल जाते है शांति  के ...
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Tag :majdoor
  April 24, 2013, 6:46 pm
ये कविता शुरू किसी अन्य  भाव से हुई थी ख़तम दुसरे भाव पर हुई . कोई फेरबदल न करते हुए इसे पोस्ट कर रही हूँ आशा है दोनों भाव पाठको तक पहुंचेंगेतुम नर्तन के अनन्य भक्त से मुझको जीवन नाच नचाए जितना ज्यादा गहरा उतरु उतना फंदा कसता जाए तुम वैभव के स्वामी हो मैं अंधियारे का बं...
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  April 23, 2013, 11:12 am
गौ हत्या को लेकर हमेशा से तरह तरह के विवाद उठते रहे हैं कई संगठन और व्यक्ति समय समय इस मुद्दे अपनी बात रखते रहते है और विराध किया भी जाना चाहिए क्योंकि किसी  भी जीव की हत्या किया जाना मानवीय और नैतिक रूप पूरी तरह सही है।सामान्य तौर पर देखा जाए तो हमेशा से ये लड़ाई कभी धर्...
parwaz परवाज़........
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  April 1, 2013, 2:14 pm
म्यूट का बटन सिर्फ टीवी में ही नहीं ज़िन्दगी में भी बड़ा ज़रूरी होता है सारी चिल्लपों से दूर थोड़ी देर शांति के लिए , उदासियों से मोहब्बत करने के लिए  .... उदासियाँ कभी भी आ सकती हैं दबे पैर ,किसी ख़ुशी के मौके पर ,दर्द की घड़ी में कभी भी क्यूंकि इनके लिए कभी कोई समय बनाया ही ...
parwaz परवाज़........
Tag :udasiyan
  March 17, 2013, 3:16 am
म्यूट का बटन सिर्फ टीवी में ही नहीं ज़िन्दगी में भी बड़ा ज़रूरी होता है सारी चिल्लपों से दूर थोड़ी देर शांति के लिए , उदासियों से मोहब्बत करने के लिए  .... उदासियाँ कभी भी आ सकती हैं दबे पैर ,किसी ख़ुशी के मौके पर ,दर्द की घड़ी में कभी भी क्यूंकि इनके लिए कभी कोई समय बनाया ही ...
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Tag :udaasiyan
  March 17, 2013, 2:42 am
love therapy best therapy प्रेम लिखने पढने समझने के सबके अलग ढंग है ... पंजाब की हाथ की बनी  फुलकारी का काम देखा है कभी ? या मेहंदी के कोन से बनी मेहंदी की डिजाइन  तो देखी होगी ? सोचते हो इसमें नया क्या है अलग क्या है ? अलग है नया भी है ...अलग है हाथ का जादू , अलग अलग हाथ से बनी एक ही कलाकृति कभी एक...
parwaz परवाज़........
Tag :love therapy
  March 11, 2013, 5:39 pm
अपनी बिखरी यादों का हर ज़र्रा हमसाया लगता है जब याद तुम्हारी आती है ये शहर पराया लगता है वो लम्हे जो पीछे छूट गए वो अपने जो हमसे रूठ गए वो गाँव जो हमने देखे ना वो शहर जो आकर बीत गए सपनो की दुनिया में उनका मंच सजाया लगता है जब याद तुम्हारी आती है ये शहर पराया लगता है वो बरखा ...
parwaz परवाज़........
Tag :hindi kavita parwaz
  February 18, 2013, 4:39 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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