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नवगीत

-डॉ० कुँअर बेचैन [ डॉ० कुँअर बेचैन ]रोज़ आँसू बहे रोज़ आहत हुएरात घायल हुई, दिन दिवंगत हुएहम जिन्हें हर घड़ी याद करते रहेरिक्त मन में नई प्यास भरते रहेरोज़ जिनके हृदय में उतरते रहेवे सभी दिन चिता की लपट पर रखेरोज़ जलते हुए आख़िरी ख़त हुएशीश पर सूर्य को जो सँभाले रहेनैन म...
नवगीत...
Tag :डॉ० कुँअर बेचैन
  January 15, 2012, 8:00 pm
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