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Blog: हमसफ़र शब्द

Blogger: sandhya arya
तमाम यादों से बनीएक रात का सपनों ने उसे बाहर किया तबसमन्दर में लहरें बहुत तेजउठ-उठकर ठीठक रहीं थीं तबवही किनारे पर बैठी हुई बची जिन्दगी नेउसे नई सुबह का इंतजार करने को कहारौशन जहान मेंमाना की सितारे&n... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   11:12am 26 Aug 2019
Blogger: sandhya arya
घुप अंधेरे कोतलाशएक सितारे की थीपर वह हमेशा टूटता मिलाएक दीपक जलता हैरात भररौशन जमाने मेंकौन सा अंधेरा थाजो दीप से रौशन रहाहम बुझ जाये किमिट जायेये सवाल हमेशा दो तरफ़ा रहाजैसे रात के बाददिन या दिन&nbs... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   11:38am 19 Aug 2019
Blogger: sandhya arya
दुनिया की तमाम धर्मों के चेहरेअगर आकाश और धरती की तरह हो जायेतब भी हरे लहलहाते जमीन परगेहूं की बालियों मेंचांद का चेहरा होगाऔर उसकी पूजाइंसानियत बचाने के लिये हैइश्क अगर जिस्म हैतो रुह से निकलने वा... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:45am 27 Jul 2019
Blogger: sandhya arya
हम अपने बाहरी और भीतरी अस्तित्व से ही नहीबल्कि उस समाज से भी बनें हैंजहां हमसब रहते हैंऔर जिसकी संरचना से बाहर होने की कोशिशएक छलावा हो सकती हैचाहे जिस रुप में साकार होपहचान तभी संभव हैजब तक सूरज ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   3:25pm 10 Jul 2019
Blogger: sandhya arya
वह उन समस्त संभावनाओं कोबचा लेना चाहती थीजिनका अंत वर्षों पहले हो चुका थाऔर जिसके ना होने सेउथल पुथल मची थीऔर मानवीय संवेदना का चेहरा पूर्णत: परिवर्तित हो चुका थासंभावनाओं के गुणतत्व मेंवह सब कुछ थाजिससे हम और तुम बने थेनदी थीबयार थीरौशनी थावो तमाम पहाड़ थेजिसस... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   12:57pm 4 Jul 2019
Blogger: sandhya arya
धरती की सतह परजिस्म इंद्रियों का एक संग्रह भरऔर इसका नष्ट होनानई संभावनाओं को जन्म देना हैऔर आकाश के नीलेपन पररुह एक सफ़ेद बिंदी है! जब तक रौशनी हैउसकी सतह पर हरियाली हैपर शरीर का संबंधअंधकार से है... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   12:07pm 12 Jun 2019
Blogger: sandhya arya
आसमान से लगकरटीकता वजूद मेरा पर उसके पहलेजमीन नेहमें तोडा बहुत है यूं आये हो तोबरस भी जाओकाले साये काडेरा बहुत है गिनते हुये एहसासगिरते है जबऊंगलियों से छूटकरक्या कहेउन्हें जोडा बहुत है !... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   6:57pm 7 May 2019
Blogger: sandhya arya
लोटे में दुबका बैठा है समन्दरऔर लोटे को सब भूल गये हैं क्योंकि चेतना धुंधली है जिन औरतों ने अपने पति को परमेश्वर माना हैऔर चांद को चांदनी में देखा हैवे ईर्ष्या करती हैंचांदनी सेऔर कत्ल करती है अन्धेरे&... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:41pm 26 Apr 2019
Blogger: sandhya arya
हम बादल थे बरस गये पर जमीन सूखी रह गई तेरे समान के तह में दुनिया जहान सब था शरीर कुछ भी ना था हमारे लिये इक रुह की प्यास में हम जुदा रह गये ओंस थे घास पर और नमी आंखों की शब्द शब्द पिघले प... Read more
clicks 110 View   Vote 1 Like   3:10pm 15 Apr 2019
Blogger: sandhya arya
चिट्टियों ने बनाये हैघर मिट्टी के हे मानवतुमने तोड़े हैदिल चिट्टियों के वे काटते नही हैजंगलनही मिटातेसंस्कृतियों कोवे रौपते है दिलमिट्टी मेंहे मानव, तुमनेतोड़े है घरमिट्टियों के !... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   9:06am 7 Apr 2019
Blogger: sandhya arya
अवसाद मेंजब आप टटोलते होजमीनजहां ठंडक और छांव मिलस केउसकी जगह आपकोकुछ नीले-पीले पत्तों वालीजमीन देखने को मिलेआप सांस लेना चाहोऔर ठीक उसी वक्तऊंच-नीच और उबड-खाबड जमीन परअपने आसपास के अधिकांश लोगों कोसिर्फ़&nb... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   8:20am 22 Mar 2019
Blogger: sandhya arya
गुलशन से रुखसत हुईइस उम्मीद में किफ़ूल खिलेंगेंपर पत्थर परकब फ़ूल खिले हैंपांव जख्मी थेकांटे की सफ़र मेंजमीन का जो हिस्साउसके हिस्से में आयावह बंजर थाइंतजार में बैठी रहीएक नन्ही गौरैया कीजो खिंच लायेग... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:41am 16 Mar 2019
Blogger: sandhya arya
बडे शहर मेंबडी बिमारियां निगलने लगी है इंसान कोबात आंखों से मुस्कुराने वाली लडकी की है जिसने अभीना गरमाहट देखी थी उगते सूरज काऔर ना ही चांद देखा था चांदनी कीबस यादों में रहने को मजबूर कर गईउन सभी लोगो को जो उसके अपनो में शामिल थे उसके मुस्कुराते होंठजब हाय और हेल... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   12:54pm 8 Mar 2019
Blogger: sandhya arya
बडे शहर मेंबडी बिमारियां निगलने लगी है इंसान कोबात आंखों से मुस्कुराने वाली लडकी की है जिसने अभीना गरमाहट देखी थी उगते सूरज काऔर ना ही चांद देखा था चांदनी कीबस यादों में रहने को मजबूर कर गईउन सभी लोगो को जो उसके अपनो में शामिल थे उसके मुस्कुराते होंठजब हाय और हेल... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   12:54pm 8 Mar 2019
Blogger: sandhya arya
चांद तारों की बातचांदनी में हो तो अच्छा लगता है सुनहरे ख्वाबों की बातचमन में हो तो अच्छा लगता है नींद की बात पररात सुहानी लगती है पर क्या करेदस्तूरे-मोहबत मेंबन्धन,बडी रेशमी लगता है दहकते सूरज परएक नाम तेरा है जो जिन्दगी के बाद का सबेरा लगता है !... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   9:34am 26 Feb 2019
Blogger: sandhya arya
समन्दर में डूबेंतो मोती होआकाश में उडेंतो सितारा होजमीन पर चलेतो किनारा होआंखों में नींद भरेतो ख्वाब होजगने पररौशनी का सहारा होसाथ चले या ना चले,बस शब्द शब्द नज़ारा हो! ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:16pm 9 Dec 2018
Blogger: sandhya arya
लिखतामन पढतातन सफ़रमेंएकपरिंदापेडकीशाखपरबैठाइंतजारकरताभोरकीअंधेरेमेंभटकीसुबहसिर्फ़नारंगीहोगी इश्कसफ़ेदचादरसीबातखत्महोगीकुछइसतरहजिस्मसेरुहकीरिहाईपर !... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   11:39am 26 Nov 2018
Blogger: sandhya arya
एकवहीतोहैजोबदलतानहीमिलनेकीलाखकोशिश करने पर भी शिकवानहीकरताजमानेसेवक्तकेकोहरेनेदफ़नकरदियाखुदकोखुदकेअन्दरकहीलाखदरवाजेपरकोईदस्तकहोतीवहसोयाऐसाकिउठनेकीकोईजुगतनहीकरताहमारीभटकनमंदिर-मंदिरतलाशयुगोंकीऔरहममिलहीगयेतोमिलनाक्योंनहीहोतासवालपुरानीह... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   9:27am 19 Oct 2018
Blogger: sandhya arya
चाँदकेदरवाजेपरकरवटबदलतीरातदागचेहरेपरकैसेपडाउसकेनाउसे,नाअंधेरेकोमालूमथाऔरनाहीचाँदनीकोफ़िरक्योंउसेयादरहगईचंदबातेंकहानीमेंपतंगऔरअंधेरेमेंहंसनेवालीलडकीतपतेरेतपरमृग-मरीचिकाथीऔरवहीहैजिनदिनोंकहानीलिखीजारहीथीवहगुनाहकीतरहपन्नोंमेंदर्जहोतीगईऔरअ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   4:03pm 4 Oct 2018
Blogger: sandhya arya
सफ़ेदख्वाबोंकावहशहज़ादाथापरउसनेख्वाबोंकोहीकतरनबनादियावर्षोंरहीतबाहीमौतकेबेहदकरीबरहीपलपलऔरभूलगईप्रेममायूसियोंसेभरीशामेंडूबातीरहीएहसासबनतेगयेसबपत्थरपरजीवनतोअंधेरेमेंहीसांसलेतीरहीजहांकोईनहीथातबउसनेशब्दोंकाहाथपकडानींदमेंकरनेलगीथीइकठ्ठाकत... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:04am 26 Sep 2018
Blogger: sandhya arya
अंधेरेंकेउठा-पटकसेदीपकबुझसाजाताहैउम्रमेंकैदस्याही खत्महोनेकानामतकनहीलेतीलिखतीजातीहैजिन्दगीकमोवेशआलापप्रलापएकजुगनूरातभर जागताहैटिमटिमाताहैसपनोंकेआकारप्रकारमेंकईवजहेंएकलकीरखिंचती हैंसचकेइसपारऔरउसपारकैदहोताहैआदमीबितायेरिश्तोंकेउम्रमें... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   12:02pm 12 Sep 2018
Blogger: sandhya arya
होशचांद पर तैरता पानीबूंद बूंद गिरता कि वक्त बहुत कम हैंबिदा होने कावक्त आयेकुछ ऐसे किजहां कोई जिस्म नही होभौतिकताकीजहरपीतेहुयेवक्तबेवक्तउम्मीदसेखालीकरता बेदखलप्रेमसेसिर्फ़ खिलौनें होउल्कें नहीजोटूटकेविखरजाये ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:39pm 9 Sep 2018
Blogger: sandhya arya
होशचांद पर तैरता पानीबूंद बूंद गिरता कि वक्त बहुत कम हैंबिदा होने कावक्त आयेकुछ ऐसे किजहां कोई जिस्म नही होभौतिकताकीजहरपीतेहुयेवक्तबेवक्तउम्मीदसेखालीकरता बेदखलप्रेमसेसिर्फ़ खिलौनें होउल्कें नहीजोटूटकेविखरजाये ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   3:39pm 9 Sep 2018
Blogger: sandhya arya
गांवअपनाखोजतारहावर्षोंलकीरेंमिटतीरहीवहींजहांकोईअपनानथाउम्मीदकोईजंगलहैएककेबादएकखत्महोतीजातीहैरेतकीतरहखुरदरीऔरनाटिकतीकहीनाकोईसीलननाहीनमींआंधियोंमेंउडाकरतीहैं बसयूंहीकभीगौरैयोंतोकभीअन्यपरिन्दोंकोदेखकरजीलेतीहैजिन्दगी!... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   7:55am 7 Sep 2018
Blogger: sandhya arya
एकजहान जो॑मैं ॑सा रहा कुछलोगआयेथेजिस्मकेकईहिस्सोकोटुकडे-टुकडेमेंकाटगयेघावजो अभीभरेभीनहीथेकिछिलगयेऔर रूह कईहिस्सोंमेंबिखरगईशामधुंधलीरहीरातअन्धेरीबर्तनबिल्कुलखालीभूखनेरुपबदललिया समन्दर बिल्कुल शांतपडा था , कि चांदकोवेसमझानेमेंल... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   9:00am 25 Aug 2018
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