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हिमालय की गोद से

गोपाल दास  "नीरज "' की ग़ज़ल  का गढ़वाली भाषा अनुवाद गोपाल दास  "नीरज "'को सादर समर्पित उनकी एक गजल   का गढ़वाली भाषा अनुवाद                          अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी अबा  दौ  सौण  मा शरारत या मी  दगडी व्हाई म्यार घार  छोड़िक बरखा सर्या मुल...
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  April 12, 2015, 5:48 pm
" वूंल बोलि "वूंल बोलि भैज्जि जक्ख पांणि नि वक्ख पांणि पहुँचौलाजक्ख सड़क नि वक्ख गाडी  पहुँचौला जक्ख अस्पताल नि वक्ख डाक्टर  पहुँचौलाजक्ख इस्कूल  नि वक्ख मास्टर पहुँचौला जक्ख कुछ नि  च ब्वै का सौं वक्ख सब्बि  धाणी पहुँचौलाहमर  पाणि कन्नै  ...
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  April 12, 2015, 4:46 pm
"कतील शफ़ाई "की शायरी का गढ़वाली भाषा अनुवाद "कतील शफ़ाई "को सादर समर्पित उनकी एक शायरी  का गढ़वाली भाषा अनुवाद                    अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी कक्खी  कुई औडळ  ना आ म्यारा बिद्रोल से डरदु  छौं  मी  त्यारा मुल्क़ै रस्मौं -रिवाज से लोग ब्वळ...
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  April 12, 2015, 1:59 pm
विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला गोरख पाण्डेय की कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद             तुम्थेय डैर चहज़ार बरस  पुरणु  च वूंकू  गुस्सा हज़ार बरस पुरणी च वूंकि नफ़रात  मी त बस वूंका खत्याँ शब्दोँ थेय ढौल अर तुक  ...
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  April 11, 2015, 11:47 pm
               विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला"कतील शफ़ाई "की शायरी का गढ़वाली भाषा अनुवादअनुवादक : गीतेश सिंह नेगी                  हे भगवानदर्दल भोर दे  मेरि  खुचली  हे भगवानफिर चाहे मिथेय बौल्या बणा दे हे भगवान म...
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  April 9, 2015, 11:38 pm
                                       "सरकार या सर्रकार "                    हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगीअब्बा दा चुनौ कुछ अजीब ही ढंग से हूँणा छीं ,अब जब्कि चुनौ अपडा आखिर चरण मा पहुँची ग्यईं अखबार से लेकि समाचार ,इस्कूल...
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  March 8, 2015, 10:00 pm
                                           जबान         (हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगी ,मुंबई )ना स्वाणु सरैल ना लारा लत्ता द्यखण मा मासै एक छ्वट्टि सी लुथगी , बिना हड्गी एक लुतपुति सी जान अर नौ देखा धौं बल जबान ,स्वादै चटोर्या ...
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  March 8, 2015, 9:37 pm
                                                 कुकुर अर समाजवाद                 (हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगी )कुकुर अर आदिमौ दगडू कुई आजै बात नि च यू साब बल लगभग तैतीस हजार साल पुरणु रिश्ता च ,तब भटेय कुकुर बिन आदिमौ अ...
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  March 8, 2015, 9:34 pm
महंगै अर माभारत (हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगी )महंगै एक इन्नु शब्द च जैकू असर शब्दभेदी बाण से बी जादा च ,म्यार ख्याल से त महंगै अर गरीबी कू साख्युं कु बैर च ,क्या पता महंगै अर गरीबी कू जलम जलामांतर कू प्रेम व्हा या व्हेय सकद वूंन्कि सौं ...
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  March 8, 2015, 9:12 pm
                   विश्व प्रसिद्ध कवियौं की कवितायें उत्तराखण्ड के ख्यात कवि-गीतकार और लोक गायक आदरणीय श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी की गढ़वाली ग़ज़ल "लटुलि फुलिं ग्येनी"का अनुवाद , ( अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी )                   "लटुलि फुलिं ग्येनी"त्यार...
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  January 18, 2015, 8:11 pm
                   विश्व प्रसिद्ध कवियौं की कवितायें उत्तराखण्ड के ख्यात कवि-गीतकार और लोक गायक आदरणीय श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी की गढ़वाली ग़ज़ल "लटुलि फुलिं ग्येनी"का अनुवाद , ( अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी )                   "लटुलि फुलिं ग्येनी"त्यार...
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  January 18, 2015, 8:11 pm
विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का अनुवाद     गढ़ भाषा गौरव श्री "नरेंद्र सिंह नेगी "जी "को सादर समर्पित उनकी एक रचना  का  अनुवाद  ,अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,                "खैरिका अन्धयरों मा खोजायूँ बाटु "            नरेंद्र सिंह नेगीखैरिका अन्धयरो...
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  December 6, 2014, 12:08 am
विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का अनुवाद     गढ़ भाषा गौरव श्री "नरेंद्र सिंह नेगी "जी "को सादर समर्पित उनकी एक रचना  का  अनुवाद  ,अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,                "खैरिका अन्धयरों मा खोजायूँ बाटु "            नरेंद्र सिंह नेगीखैरिका अन्धयरो...
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  December 6, 2014, 12:08 am
                               भगीरथ                           (हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगी ,Mumbai)धरती बल ७१ % पाणिळ ढकीं च ,समोदर बी ९६.५ % खारु पाणि लेकि उछ्ल्णु च ,जाणकार लोग ब...
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  June 15, 2014, 11:47 am
                                                                       जुगाड                                             &nbs...
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  June 8, 2014, 12:52 pm
    विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला  "दुष्यंत कुमार "को सादर समर्पित उनकी एक कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद                     अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बईधर्म / दुष्यंत कुमारतेज़ी से एक दर्दमन में ज...
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  May 24, 2014, 3:39 pm
     विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला  "अटल बिहारी वाजपेयी  "जी को सादर समर्पित उनकी एक कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद                                 अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बई       ...
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  May 22, 2014, 11:46 pm
विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला "कतील शफ़ाई "को सादर समर्पित उनकी एक शायरी  का गढ़वाली भाषा अनुवाद                     अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बईमेहरबानी से अगर पेश बी अैंय कुछ लोग घाम मा लिबटयूँ छैल सी...
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  May 22, 2014, 10:50 pm
विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला "कतील शफ़ाई "को सादर समर्पित उनकी एक शायरी  का गढ़वाली भाषा अनुवाद                     अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बईमेहरबानी से अगर पेश बी अैंय कुछ लोग घाम मा लिबटयूँ छैल सी...
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  May 22, 2014, 10:50 pm
अदम गोंडवी उर्फ रामनाथ सिंह को सादर समर्पित उनकी एक कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद          अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बई                                         (1)काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधाय...
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  May 22, 2014, 12:43 am
                                             घपरोल                     (चबोड़्या -चखन्यौर्या -गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बई ) देश मा जक्ख द्याखा तक्ख घपरोल मच्युं च ,संसद से लेकि सड़क तक गौं ...
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  March 4, 2014, 11:05 pm
                                                    "परपंच  "                                                            (चबोड़्या -...
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  March 2, 2014, 8:54 pm
                                                                     घंग्तोल                                             ...
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  March 2, 2014, 8:33 pm
गढ़वाली में अनुदित साहित्य परम्परा (साभार : भीष्म कुकरेती ) भीष्म कुकरेती    किसी भी भाषा के साहित्य में अनुवाद का महत्वपूर्ण स्थान होता है। अनुवाद से साहित्य को नये नये विषय, नई शैली, नये विचार, नई संस्कृति , अनुभव मिलते हैं।अनुवाद विषयी साहित्य में कई धार...
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  September 6, 2013, 9:03 pm

        बाँध की विभीषिका पर आधारित गढ़वाली कविता :  त्राहि माम                                  (BY : Geetesh Singh Negi )A Poem based on dam catastrophe   ;  A Poem based on dam catastropheby an Asian poet ; A Poem based on dam catastrophe by a south Asian poet ;  A Poem based on dam catastrophe by an SAARC countries poet ; A Poem based on dam catastrophe by an Indian subcontinent ...
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  July 25, 2013, 1:16 am
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