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"सत्य"

(छवि गूगल से साभार)ज़िन्दगी जीते-जीते आया एक अजनबी खयालक्या कभी ज़िन्दगी जी मैंने? कौंधा ये सवाल हरपल  रहा  बस  सुनहले  ख्वाबों  में  खोया रचा निज विचारो का संसार, कभी हंसा तो कभी रोया निष्फिक्र होकर, बन विक्रम, बचपन बिताया न जाने कब फिर मैं "किशोर कुल" में आया अभी भी ज़िन्...
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  September 11, 2012, 12:13 pm
जबसे तेरी यादों में दिल को बहलाना सीख लिया हमने मुहब्बत में खोकर भी पाना सीख लिया जब धड़कन-२ भीगी गम से, सांसे भी चुभने लगी दर्द की चिंगारी को बुझाने के लिए आंसू बहाना सीख लियातरसी-२ प्यासी-२ भटकती हैं मेरी नजरें इधर उधर जबसे तेरी आँखों ने संयत अदा में शर्मना सीख लियाजब...
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  March 17, 2012, 2:31 pm
कुछ इस दिलकश ढंग से मेरी ज़िन्दगी चलीमंजिल की तलाश में उम्र भर भटका इस उस गलीइक खामोश दर्द की तड़प में गुजरे है दिनकभी तन्हाई तो कभी  रुशवाई में मेरी शाम ढलीन पूंछ  तू,  कि मेरे अकेलेपन की दास्ताँ क्या थीमुझे तो रंगीं महफ़िलो में भी तेरी कमी खलीवक़्त ने कुछ यूँ सितम ढाया...
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  January 11, 2012, 12:51 pm
आपको याद होगा कुछ साल पहले जब अटल जी प्रधानमंत्री पद पर कार्यरत थे, तब प्याज की महंगाई से सारा देश आक्रोशित था, अपोजिशन ने उस समय खूब उछल कूद की थी, सरकार पर दूरदर्शिता की समझन होने का आरोप लगाया था, हड़ताल, बंदी जैसी न जाने कितनी ही प्रकार की गतिविधियों का हुजूम देश भर में ...
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  December 12, 2011, 12:20 pm
लुट गया है सब कुछ,अब भला ये दिल बेक़रार क्यूँ  हैं ऐ सितमगर तुझसे अबतलक मुझको प्यार क्यूँ  हैं जब भी धड्कीं हैं ये, कोई नया गम दे गई मुझको दिल की धडकनों पर भला अब भी मुझको एतबार क्यूँ हैंजिसका आना नहीं मुमकिन  वापस लौट कर न जाने उस इक पल का मुझको इंतजार क्यूँ हूँनिगाहें तो क...
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  November 6, 2011, 6:21 pm
इक नजर भर देख लूँ तुझे, अब वक़्त कहाँ है बातों का जिस्म से रूह हो रही जुदा, उजड़ा मौसम मुलाकातों काक्या बयां करूँ हालत-ए-दिल, अब भला क्या आरजू करूँ  इश्क की रहो राहों में निकल रहा   जनाजा मेरे जज्बातों कारोशन है दिलकश शमा हर तरफ, पर बुझ गया है दिलशायद यही है तक़दीर मेरी, शिकवा ...
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  October 28, 2011, 6:56 pm
मेरा दिल अब दिल नहीं, एक वीरान सी बस्ती हैरूठ गई खुशियाँ, बेबसी मुझपर हंसती है क्या था मेरा क्या पता, क्या है मेरा क्या खबर खुद से हूँ खफा अब मै, लुट गई मेरी हस्ती हैये जिंदगी है बोझ मुझपर या जिंदगी पर बोझ मैंन चैन की सांसे मयस्सर मुझे, न मौत ही सस्ती हैतुफानो में गर मैं घिरत...
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  October 19, 2011, 6:03 pm
क्यूँ विकल हुआ हिय मेरा क्यूँ लगते सब दिन फीके हर छिन कैसी टीस उठे अब साथ जागूं रजनी केजब से वह किसलय सी कोमल काया मेरे मन में छाई संयोग कहूँ या प्रारब्ध इसे मैंवो पावन पेम मिलन था इक पल का मिटीजन्मो की तृष्णा सारीइक स्वप्न सजा सजल साइस सुने से जीवन में मेरे मचली प्रेम तर...
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  September 29, 2011, 6:22 pm
 छवि गूगल से साभार   भला विचारा कभी,हम क्या थे और क्या हो गयेस्वार्थ की प्रतिस्पर्धा ऐसी जगीपरहित भूल, अलमस्त हो खो गये !न फिक्र की समाज की,किसी के दुःख से न रहा कोई वास्ताफंसकर छल कपट के जुन्गल मेंबहाया अपनों का लहू, चुना बर्बादी का रास्ता तिल भर सौहार्द न बचा ह्रदय  में ...
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  September 11, 2011, 8:29 am
अलमस्त हो जाय प्रभा की मधुर बेलाछेड़ दो वो प्रीत-गीत फिर से विहागमिटें  निज मन के मनभेद सभीदेश-काल, अन्तराल का भेद मिटाने को हे सरित सुनाओ राग अज्ञान तिमिर सब हिय से मिट जायबस संचारित हो तो स्नेह सौहार्द और मोहमधुप की मधुर गुन-गुन सुनकरकटे जन्म-जन्मातर के के विछोह जगे अन...
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  August 11, 2011, 8:24 am
एक दर्द में फिर डूबी शमा, फिर चाँद हुआ बेनूरबिखरा दिल, टीसती यादें तेरी भला क्यूँ हुए तुम दूरकरूँ वक़्त से शिकवा या फिर अफ़सोस अपनी किस्मत पर तरसती "प्यास" में तडपूं हर पल, ऐसा चढ़ा उस साकी का सुरूर ये कशिश है इश्क की या दीवानगी का कोई दिलकश सबबतडपती जुदाई उसी को क्यूँ ,...
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  July 25, 2011, 8:20 am
प्रखर होने लगी हिय उत्कंठाआलोकित हुई सुप्त उमंगतट पर लहरें खेले जैसेमन में उठे वही तरंगरोम-रोम हुआ स्पंदितमहक उठी तरुनाईफिर सुहानी साँझ आईउठी मचल स्म्रतियां फिर से बज उठे ह्रदय के तार-तार ये प्रीत धुन छेड़ी किसनेसजीव हो उठे आसारविस्तृत होने लगी सुवासित सुरभिमन में...
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  May 28, 2011, 5:33 pm
उसके पंजों में महज एक तिनका नहीं है,और न ही उसकी चोंच में एक चावल का दाना वो तो पंजो में साधेहुए है एक सम्पूर्ण संसार,उसकी चोंच में है एक कर्तब्यएक स्नेहिल दुलार...ये पर्वत शिखा सेनिर्झरिणी का प्रवाहमहज एक वैज्ञानिक कारण नहीं है,और न ही कोई संयोग,ये तो धरा की तड़प,और जीवन ...
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  May 17, 2011, 3:49 pm
अरे अब बस, बहुत शाॅति प्रचार कर लिया हमने। खूब नम्रता दिखा चुके हम। खूब अपने दुष्मनों को बढावा दे चुके हम। अब तो हमें आतंक के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाना ही पडेगा। कोई कारगर राजनीतिक फैसला लेना ही चाहिए। क्यूॅकी अब पानी सर के उपर हो चुका है, अगर अब हम हाॅथ पैर नही चलाएंगे तो क...
Tag :समाज समस्या और निवारण
  May 12, 2011, 9:53 am
अरे अब बस, बहुत शाॅति प्रचार कर लिया हमने। खूब नम्रता दिखा चुके हम। खूब अपने दुष्मनों को बढावा दे चुके हम। अब तो हमें आतंक के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाना ही पडेगा। कोई कारगर राजनीतिक फैसला लेना ही चाहिए। क्यूॅकी अब पानी सर के उपर हो चुका है, अगर अब हम हाॅथ पैर नही चलाएंगे तो क...
Tag :9समाज समस्या और निवारण
  May 12, 2011, 9:51 am
ढलता सूरज, सुहानी साँझ और सागर का किनारापागल हवा ने किया जब दिलकश  इशाराउसके तसव्वुर में, मैं खो सा गयातन्हाई में एक आरजू जगी ऐसी न जाने कब मै किसी का हो सा गया सूरज की लालिमा फिर पानी में घुलने लगीउल्फत की बंदिशें फिर खुलने लगीदिल की अंजुमन फिर जमने लगीधड़कने तेज हुईं, स...
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  May 9, 2011, 1:36 pm
ये चाहत थी दिल कीया प्यार का पागलपनतनहाइयाँ थी, रुशवाइयां थींपर सुना न था दिल का अंजुमनजब तुम न थे,तब भी थे सिर्फ तुम,जब तुम थे तब भी थे,सिर्फ तुम,अब तुम नहीं हो,लेकिन फिर भी होसिर्फ तुम !मैंने तो हर एक खता का इकरार कियाखुद से ज्यादा तुम पर ऐतबार कियापर फिर भी क्यूँ न हो सके ...
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  April 29, 2011, 2:31 pm
भई मानना पडेगा टेक्निक ने तो हमारी दुनिया ही रंगीन कर दी है। कम्प्यूटर, मोबाइल, इण्टरनेट मानो अब एक ही क्लिक  या बटन को प्रेस करके ं दुनिया की सारी जानकारी हमारे पास आ जाती  है। लेकिन क्या आपको पता है कि जहाॅ  ये टेक्निक्स हमारी  लाइफ को बिंदास बना रही हैं वहीं दूसरी  ओर य...
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  April 27, 2011, 6:26 pm
नहीं यह धर्म मनुष्य का, की कठिनाइयों से मान ले हार बैठ जाय होकर  निष्क्रिय खो दे, शत-चैतन्य आसार तेरे उर की उत्कंठा को न रोक सकेंगे दुर्दिन बन कर कारातू नहीं अल्प्स्थाई हिमकणतू तो है चिर-उज्जवल अंगारा मत भ्रमित विचलित हो करके घोर तम का अनुमानसहज खुल जाते अगम द्वार देखकर ...
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  April 15, 2011, 4:10 pm
ए महबूब ! फिर कर रहा, ये नादाँ, वही पुरानी बात तुझसे कौंधते है जो ज़हेन में, पूंछने है वही चंद सवालात तुझसे कब पहुंचेगी अर्सा-ए-दहर की तपिश में ठण्ढक अभी क्या देर है, वस्ल-ए-सब को, आखिर कब होगी मुलाकात तुझसे क्यूँ भटकता दर-बदर आरजू-ए-काफिला दिल का कब पाएगी ये बेजाँ रूह, नूर-ए-ह...
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  March 27, 2011, 1:38 pm
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