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समाज की बात - Samaj ki Baat

वह किसी महान फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, जिसमें उनका पात्र मुख्य भूमिका में था. जिसने उन्होने दर्जनों गुंडों को कुछ ही पलों में धूल चटा दी थी और कई गरीबों की मदद की व उन्हें न्याय दिलाया. शॉट बहुत बढ़िया गया था. डायरेक्टर सहित सारी टीम बहुत खुश नजर आ रही थी. कुछ ही देर में प...
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  December 4, 2018, 4:33 pm
                                                    सरकारी अस्पताल में घायल जवान की मरहम पट्टी करते हुए नर्स ने पूछा"आप को इतनी सारी चोटें कैसे लगीं!"जवान ने जख्मों के दर्द को दबाते हुए चेहरे पर बनावटी मुस्कान लाते हुए कहा "वतन की मोहब्बत के जख्म है...
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  December 4, 2018, 4:23 pm
      दस दिन की गर्मियों की छुट्टियों में विनय नानी के गाँव, बुआ के गाँव और ससुराल भी हो आया था बीवी-बच्चे वहीँ ससुराल में ही रुक गए थे. फिर भी दो दिन की छुट्टियाँ और बच रही थी उसकी.  अचानक ही उसके मन में ख्याल आया कि क्यों न पास के ही गाँव चला जाए जहाँ पर उसके स्कूल के दिन...
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  November 30, 2018, 11:02 am
“स्कूल जाते-जाते आज पंडित को जरूर बोल देना कि कल सवेरे कथा सुनाने आ जायेंगे”.“ठीक है माँ, बोलते हुए जाऊंगा”. “वैसे बुढ़ऊ पंडित को ही बोलना है कि बच्चू पंडित को बोल दूंगा”!“तू फ़ालतू की बकवास मत कर. बुढ़ऊ पंडित जब तक जिन्दा हैं हम लोग उन्हीं से ही कथा सुनेंगे.”“ठीक है माँ”. कहक...
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  November 30, 2018, 10:55 am
कंपनी के काम से मैं पहले भी बस्तर आ चुका था लेकिन इस बार का अनुभव काफी कड़वा रहा. हालाँकि इससे पहले भी मैंने असंतोष की चिंगारियां देखी थी पर इस बार वह चिंगारियां लपटों का रूप धारण कर चुकी थीं.लौह अयस्क कि खुदाई हो या ढुलाई, किसी भी तरह के कार्य के लिए मजदूरों को उनका उचित? प...
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  November 30, 2018, 10:45 am
एक दिन कुछ लोग किसी घटना परभीड़ बनकर बेहद आक्रोशित हुए आक्रोश ने उन्माद की शक्ल ली उन्माद ने भीड़ पर अपना असर किया वह कुसूरवार था या बेकसूर!उन्माद ने भीड़ को सोचने ही न दिया भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला वह भी पिटता ही रहा मरने तक यही सोचकर, कि इतने सारे लोग मिलकर पीट रहे हैं ...
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  November 30, 2018, 10:35 am
बूढों के पास बचा ही क्या था कुछ अदद नाती-पोतों के सिवाय जो खिंचे चले आते थे उनके पास सुनने कुछ नए-पुराने किस्से-कहानियां या ढूँढने अपने कुछ अनसुलझेसवालों के जवाब वरना कौन आता है भला उनके पास बड़े बेटे के अलावा जो हफ्ते में छुट्टी के दिन 2 मिनट का समय निकाल पूछ लेता है “कुछ ...
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  November 30, 2018, 10:33 am
हरे-भरे और पुराने, छाँव वाले पेड़ों को  घर के बड़े-बूढों और अनुभवी बुजुर्गों को सदियों पुरानी आस्थाओं को, मान्यताओं को बिना जाने उनके फायदे या नुकसान काट देना जड़ों से बेवजह ही क्योंकि उनकी वजह से आती हैं हमारी स्वछंदता में कुछ अडचनें जो कि बनता जा रहा है आजकल विकास का सू...
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  November 30, 2018, 10:30 am
हमने तालाबों को पाट-पाटकरबड़े-बड़े आलीशान घर बनाये घरों में सुख-सुविधा के तमाम उपकरण लगाये मगर जब नहीं मिला पानी गुजर-बसर के लिए तब हमें वही पाटे हुए तालाब बहुत-बहुत याद आये    (कृष्ण धर शर्मा, 16.05.2018)...
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  November 30, 2018, 10:27 am
तुम्हारी भेड़ियों जैसी भूखी नजरें तुम्हारी गलीज और कामुक भावनाएं तुम्हारी अश्लील और गंदी टिप्पणियां जो, राह चलती किसी की बहन या बेटी को देखकर उपजते हैं तुम्हारे भीतर तुम सोचकर भी देखोगे यही सब अपनी बहन या बेटी के बारे में कभी सिहर जाओगे तुम, गड जाओगे जमीन में कहीं गहरे ...
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  November 30, 2018, 10:25 am
इंसान को जिससे-जिससे डर लगता हैवह उन सबको मार देता है या फिर मारने की कोशिश करता रहता हैभले ही वह डर वास्तविक न हो डर काल्पनिक ही सहीमगर इंसान जिससे-जिससे डरता है वह उन सबको मार देता है इंसान जिससे डरता है वह सांप भी हो सकता है बिच्छू भी हो सकता है शेर, भालू, बाघ, चीता सहित त...
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  November 30, 2018, 10:23 am
टीवी की आवाज म्यूट कर दो मोबाइल को साइलेंट में डाल दो मन को जरा शांत करके गौर से सुनो तो कभी तुम्हारा घर और घरवाले बहुत बेचैन हैं इन दिनों! वह तुमसे बातें करना चाहते हैं  उन्हें लगता है कि वह भी तुम्हारे जीवन का हिस्सा हैं  टीवी, मोबाइल, गाड़ी, कंप्यूटर तुम्हारे दोस्तों ...
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  November 30, 2018, 10:21 am
अल्लसुबह की मीठी नींद का मोह छोड़करलग जाते हैं काम पर जाने की तैयारी में मुंहअँधेरे ही गिरते-पड़ते से सोते हुए बच्चे का माथाचूमकर निकल पड़ते हैं दिनभर काम में अनमने से खटने के लिए निभाने पड़ते हैं कई रस्मो-रिवाजकई रिश्ते भी बेमन से सुननी पड़ती हैं कई-कई बातेंताने-उलाहने भी ...
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  November 30, 2018, 10:19 am
अब जिसे राक्षस ही साबित करना होवह भला आपके कहने भर से कैसे हो जायेगा राक्षस उसके बारे में प्रचारित करना होगादुनियाभर का सच-झूठ जैसे कि वह होता है घोर अत्याचारी एक विशालकाय शरीर वाला होते हैं उसके कई सर, कई हाथहो सकते हैं उसके सर पर सींग भी बड़े-बड़े दांत होना तो अनिवार्य ह...
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  November 30, 2018, 10:14 am
ओ नदी! तुम कितनी अच्छी तुम हो बिलकुल माँ के जैसी लोगों के संताप तुम हरती सबको तुम निष्पाप हो करती सबकी गंदगी खुद में लेकर तुम लोगों के दुःख हो हरतीबाहर से तुम दिखती चंचल अन्दर से तुम कितनी शीतल तर जाते हैं हम सब प्राणी पीकर तुम्हारा निर्मल जल ओ नदी! तुम कितनी अच्छी तुम तो ...
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  June 23, 2018, 5:52 pm
पुराने पुल के आखिरी छोर परशाम के धुंधलके में बैठे हुए  दूर से आती लैंप पोस्ट की मद्दिम रोशनी के सहारे पढ़ना किसी का प्रेम पत्र  प्रेम करने वालों के लिए कितना आकर्षक होता है न!दिनभर की भागा-दौड़ी से दूर शाम को पुराने पुल पर टहलते हुए बूढ़े लोगउन्हें अपना सा लगता है बूढ़ा औ...
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  June 23, 2018, 5:49 pm
खोखले समाज को और भी खोखला करती एक खोखले कवि की खोखली कविताएंथके-हारे मन को और भी निराश करती खोखले समय की खोखली कविताएंसमय ही बुरा नहीं होता है हमेशा समय को बुरा बनती हैं अक्सर बुरे समय की बुरी कविताएं कब तक दोष दोगे तुम दूसरों को बुरे कवि! दोषी तो अंततः तुम्हीं साबित किय...
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  June 23, 2018, 5:47 pm
किसी शैतान से कहाँ कम होते हैं वह जो सिखाते हैं अपने बच्चों को नफ़रत करना किसी और को कुचलते हुए आगे बढ़ना दूसरों के कंधे पर पैर रखकर ऊपर चढ़ना औरों के हिस्से की रोटी भी खुद हजम करना अपनी छोड़ किसी की परवाह न करना सारा दिन करके गलत काम शाम को बैठकर माला जपना               &nb...
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  June 23, 2018, 5:45 pm
शहरों में भले ही न मानते हों किसी काम का मगर गांवों में बहुत काम के होते हैं बूढ़े लोग छोटे-मोटे कई सारे काम बूढ़े ही कर लेते हैं गाँव में चाहे फिर गाय-बैलों को देना हो चारा-पानीया फिर करनी हो देखभाल घर के छोटे बच्चों कीया करना हो पूजा-पाठ घर की शांति के लिए  खेती-बाड़ी के भी ...
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  June 23, 2018, 5:42 pm
“तो क्या इस पहाड़ को ख़त्म ही करना होगा?क्या नहीं बचा है अब कोई भी विकल्प!”“बात सिर्फ इस पहाड़ की नहीं है मेरे दोस्त कल को जब तोडा जायेगा दूसरा पहाड़ भी रास्ता बनाने को या पत्थर फोड़ने को तब भी तुम पूछोगे यही यही सवाल हर बार इसलिए मैं नहीं समझता जरूरीकि दिया जाए जवाब तुम्हारे ...
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  June 23, 2018, 5:41 pm
आज के भारत की तस्वीर के साथ विश्व में बदलते घटनाक्रम को समझने में हमें महात्मा गांधी से विनोबा भावे और इसके साथ कई और भी महापुरुषों के साथ यात्राएं करनी होंगी। हमें प्रजातांत्रिक मूल्यों के विघटन को रोकने के साथ-साथ उन मानवीय मूल्यों की स्थापना भी करनी होगी जिसका सप...
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  June 22, 2018, 8:00 pm
टोपड़ी गांव सहारनपुर जिले (उत्तर प्रदेश) की एक मिश्रित आबादी का गांव है। दलित परिवारों की संख्या अधिक है। यहां के शान्त जीवन में कुछ समय पहले एक गंभीर समस्या आंधी की तरह आई जिसने अनेक भरे-पूरे परिवारों को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया व विशेषकर महिलाएं तो बुरी तरह परेशान हो ग...
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  December 24, 2017, 11:16 pm
क्रांति****** वह आएगीपर आएगी किसी की पीठ पर चढ़करक्यों कि वह है लंगड़ीसब इन्तज़ार कर रहे हैं उसका ;आकाश से नहींदिलों में उठ रहे हैं बवंडरउथल-पुथल मची हुई हैलोग उठाने लगे हैंराज्य, धर्म पर अँगुली ।कभी तो******** कभी तो भूलोबच्चों को भूगोल पढ़ानाहँसो गड़गड़ हँसी ।हँसो !जिससे बज ...
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  November 5, 2017, 11:00 pm
उतनी दूर मत ब्याहना बाबा ! ********************* बाबा!मुझे उतनी दूर मत ब्याहनाजहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिरघर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हेमत ब्याहना उस देश मेंजहाँ आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते होंजंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहाँवहाँ मत कर आना मेरा लगन वहाँ तो कतई नहीजहाँ की सड़कों परम...
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  November 5, 2017, 10:56 pm
आर्यहम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभीआओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभीभू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहांफैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहांसंपूर्ण देशों से अधिक, किस देश का उत्कर्ष हैउसका कि जो ऋषि भूमि है, वह कौन, भारतवर्ष हैयह पुण्य भूमि प...
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  November 5, 2017, 10:51 pm
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