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Kusum's Haiku

"अछि दुर्दशा"कवि महान पर्व त मनेलहुं सौंसे ढिंढोरा फोटो त छल कोना में हेरायल अछि दुर्दशा पाग दुपटा नहि जानथि मोल मंच आसीन  चंदा भेटल व्यवस्थापक हम त बूझत के ढर्रा बनल किया बदलि हम  अछि बहाना लाखक खर्च नहि अछि उद्देश्य होय कल्याण नेता &...
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  April 2, 2012, 12:07 am
अंधी जनता तो है?देश की चिंता भ्रष्टाचार है नाराअपना स्वार्थ  हम सन्यासी आसन होगा ऊँचा जनता मूर्ख होड़ लगी है मैं बनूँ लोकप्रिय  मिडिया खुश हम फक्कड़अंधी जनता तो है  करोड़ों खर्चो लोकप्रियताअपना हथियार है अनशन  -कुसुम ठाकुर-...
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  June 3, 2011, 3:30 pm
  ममता माँ की निःस्वार्थ सतत ही है अनमोल गोद समेटे धरा और जननी यही शाश्वतदिव्य नर्मदा अचल हिमालय भारत भूमि अतिथि सेवा है संस्कार युगों से मानो सौभाग्य शून्य दिया है आयुर्वेद औ योग रहो विनम्र -कुसुम ठाकुर-...
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  May 30, 2011, 7:34 am
"अंतर्मन में झांको" अन्ना की सोच बना है राजनीति मनन करो परिणाम क्या है सबको मालूम हैं आशावादी मिला है मंच क्यों न करें ऐलानधरा सपूत  है आम कौन उसका न अस्तित्व धैर्य तो धरो जनता मूर्खमिला सबको मुद्दाबहस करो गाँधी का नाम नेहरु बदनाम यों भिड़...
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  April 13, 2011, 3:42 pm
"अछि सन्देश"समृद्ध भाषा मैथिली मिथिलाकजायत हेरालाज होइछबाजब कोना भाषापढ़ल हमदोषारोपणनेता अभिभावकनहि कर्त्तव्यदेशक नेता  नहि जनता केरस्वार्थे डूबल  करू ज्यों स्नेहमाँ आ मात्रि भाषा सँसंकल्प लियआबो तs जागू मिथिला केर लालप्रयास करूअबेर भेलतैयो विचार करू ...
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  March 3, 2011, 5:20 pm
"कर्म ही छोटा"घोटाले बनेपर्याय नेताओं केक्षुब्ध जनतान छोड़े कोई ज्यों मौक़ा कभी मिले वर्ना सन्यासी  है लूट मची जनता भी है अंधी न खोले आँख देखा किसने फल भी क्या मिलता न देखा जन्मआह लिया है ख़ुशी की परिभाषा न जाने वह है दोषी कौन जब शीर्ष ही खोटा ...
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  February 28, 2011, 5:33 pm
"रक्त ही मनुज  का"मनुष्य रूप कर्म से तो भेड़ियेमनन करो धर्मांध कहेस्वार्थ ही सर्वोपरि सुझावे कौन अल्ला ईश्वर बस है शक्ति एक क्यों बांटो तुम बूझो मनुष्यतो पाओ सुख चैनहो धर्म यही लगता सस्तारक्त ही मनुज काकिसे फिकर- कुसुम ठाकुर - ...
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  December 8, 2010, 1:04 pm
"हो अनमोल "हो तुम मीत कहूँ मैं बारम्बार न भाये तुम्हेतुम गंभीर न कभी कुछ कहो यह स्वभाव मुझे विश्वास आहत क्यों मैं करूँ मेरा स्वभाव मुझे तो लगे दिलाऊं जो विश्वास समझो तुम हो अनमोल न बूझो अतिश्योक्ति ह्रदय कहे लाये ये दिन खुशियाँ हर वर्ष&...
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  November 30, 2010, 8:11 am
"शिष्य देखल "विद्वान छथि  ओ शिष्य कहाबथि  छथि विनम्र गुरु हुनक सौभाग्य हमर ई ओ भेंटलथिइच्छा हुनक बनल छी माध्यमतरि जायब भरोस छैन्ह छी हमर प्रयासपरिणाम की ?भाषा प्रेमक नहि उदाहरण छथि व्यक्तित्व छैन्ह उद्गारदेखल उपासक  नहि उपमा कहथि नहिवि...
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  September 14, 2010, 7:53 pm
" सुख औ दुःख " सुख औ दुःख जीवन के दो पाट तो गम कैसा चलते रहो हौसला ना हो कम दूरियाँ क्या है लक्ष्य जो करो ज्यों ध्यान तुम धरो मिलता फल हार ना मानो ज्यों सतत प्रयास मंजिल पाओ कर्म ही पूजा उस सम ना दूजा कहो उल्लास ध्यान धरो बस मौन ही रहो प...
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  September 13, 2010, 6:27 pm
"एक प्रयास"हाइकु छैक   विधा सरल तैयोरचि ज्यों पाबि  हमरा लेल गर्वक गप्प बस हमहू  जानि नहि बुझल इ विधाक लिखबकोन आखर सलिल जीक इ मार्ग प्रदर्शन भेटल जानी मोन प्रसन्न भेटल नव विधा छी तैयो शिष्याडेग बढ़ल सोचि नहि छोरब  ज्यों दी आशीष -...
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  September 13, 2010, 3:59 am
हमर पहिल हाइकु संस्कृत साहित्य में सहस्त्रों वर्षों पूर्व त्रिपदिक छंद रचे गए जिनमें गायत्री तथा ककुप प्रसिद्ध हैं. हाइकु मूलतः त्रिपदिक (तीन पदों अर्थात पंक्तियों का ) जापानी छंद है. जापान में इस छंद में प्राकृतिक छटा का वर्णन करने की परंपरा है किन्तु हिन्दी में ह...
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  September 12, 2010, 11:18 pm
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