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Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा) : View Blog Posts
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Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)

"हार मिली पर हार वही"है चाहत  हर बार वहीक्यों रहता ना प्यार वहीआती जाती यादों परहो अपना अधिकार वहीप्यार सदा सच  कहता हैहार मिली पर हार वहीप्यार कला है जीने कीतब जगमग संसार वहीसमझ कुसुम नैनों की भाषाप्रेम सहज हर बार वही-कुसुम ठाकुर-...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :कुसुम ठाकुर
  February 3, 2015, 10:43 pm
 कहते हैं कन्यादान महा दान अर्थात इससे बड़ा दान नहीं होता है. बेटियों को दान में क्यों दिया जाता है यह आजतक मेरी समझ से परे है. दान में तो वस्तु दी जाती है, तो क्या बेटियाँ वस्तु हैं ? कहते हैं जो वस्तु दान में दे दी जाती है  उस पर न कोई अधिकार होता है न ही उसके बारे में सो...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :
  February 2, 2015, 11:43 am
एक बार एक प्रसिद्ध फिल्म नेर्देशक से बातें हो रही थी और उन्होंने कहा था "एक दिन मैं बम्बई में एक फिल्म शूटिंग देख रहा था उस दिन मेरे मन में आया सिनेमा सबसे अच्छा माध्यम है लोगों तक अपने विचारों को पहुंचाने का." उसके बाद ही हमने  पुणे फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :
  December 31, 2014, 3:51 pm
"चलने का बहाना ढूँढ लिया"चलने की हो ख्वाहिश साथ अगर चलने का बहाना ढूंढ लिया यूं रहते थे दिल के पास मगर तसरीह का बहाना ढूंढ लियामुड़कर भी जो देखूं मुमकिन नहींआरज़ू थी जो मुद्दत से ढूंढ लियातसव्वुर में बैठे थे शिद्दत सही खलिश को छुपाना ढूंढ लिया कहने को मुझे हर ख...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
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  July 13, 2014, 10:14 pm
"दर्द इस कदर दिया "यूँ नसीब ने तो ऐसा हमसफ़र दिया मेरी जिंदगी में ऐतवार भर दियादर्द पाया फिर भी लगता खुश नसीब हूँ जाने जादू क्या उसने ऐसा कर दियावैसे जिन्दगी में कम कहाँ है उलझनें जाते जाते भी न चैन इक पहर दियाये तो जाना हमसफ़र का भी सफ़र वहींवो हसीन पल भी सपनों में है भ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
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  June 12, 2014, 6:25 pm
कर्म के आधार पर वर्ण बनाया गया परन्तु कालान्तर में वर्ण ही  छूआछूत भेदभाव को जन्म दिया और पराकाष्ठा पर पहुँच गया.उसी प्रकार ईश्वर ने स्त्री को मात्र शारीरिक तौर पर पुरुषों से कमजोर बनाया. उन्हें शारीरिक श्रम वाले काम से दूर रखने के लिए घर के काम काज उनके जिम्मे दिया ग...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :
  March 8, 2014, 7:24 am
"नीम गुणों का खान"औषधीय गुणों मान  नीम गुणों का खान, कहे सब नीम गुणों का खान और मिलना भी आसान उच्च हिमालय नहीं है भाता जगह जगह मिल जाता दोषमुक्त औषधीय गुण वाला चमत्कार दिखलाता छाल पत्तियाँ फल फूल बीज के नियमित सेवन से रोगों को दूर भगाता है पर्...
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Tag :
  February 20, 2014, 5:02 pm
मन में झंझावात"दिल के तहखाने में बीता तनहा सारी रात कहती क्यों सावन हरजाई लाई है सौगातस्नेह का सागर भरा हुआ है, क्यूँ मन में अवसाद किसको बोलूँ, रूठूं कैसे,  मन में झंझावात तिल-तिल दीपक सा जलता मन, लिए स्नेह की आस गुजरी यादें, धुमिल हो गईं, इतनी रही बिसात समझूं कै...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :
  October 13, 2013, 5:20 pm
माँ मैं तो हारी, आई शरण तुम्हारी,अब जाऊँ किधर तज शरण तुम्हारी। दर भी तुम्हारा लगे मुझको प्यारा, तजूँ मैं कैसे अब शरण तुम्हारी। माँ .........................................मन मेरा चंचल, धरूँ ध्यान कैसे,बसो मेरे मन, मैं शरण तुम्हारी।माँ..........................................जीवन की नैया मझधार में है, पार उ...
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Tag :
  October 5, 2013, 7:04 am
लोग कहते हैं कि आजकल के बच्चे बड़ों की इज्जत करना नहीं जानते खासकर शिक्षकों का गुरुजनों का। पर यह कहना गलत है। मैं भी कभी शिक्षक थी और मैंने जो महसूस किया वह इसके विपरीत है। आजकल वैसे शिक्षक ही विरले मिलते हैं जिनके लिए ये पंक्तियाँ हैं :गुरु गोबिंद दोउ खड़े काके लागू...
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Tag :
  September 5, 2013, 10:54 am
( यह कविता मैं ने अपनी छोटी बहन के २५ वीं शादी की सालगिरह पर लिखी है.)"रजत जयंती स्वर्ण बनाओ"एक दूजे से प्यार बहुतदुनिया में दीवार बहुत किसने किसको दी तरजीहवैसे तो अधिकार बहुत लगता कम खुशियों के पल हैं पर उसमे श्रृंगार बहुत देखोगे नीचे संग में तो जीने क...
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  July 23, 2013, 7:41 am
(कुछ दिन कुछ पल ऐसे होते हैं जो चाहकर भी भूला नहीं जा सकता, उसी दिन की याद में मेरी यह रचना जिसे लोगों ने भुला दिया।)"चाहत तुम्हारी फिर से"चाहत तुम्हारी फिर से मुझको सजा दिया  सोई हुई थी आशा उसको जगा दियाकहने को जब नहीं थे, सोहबत नसीब थी खोजा जहाँ मैं दिल से, चेहरा दिखा ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :
  July 13, 2013, 8:47 am
"यूँ मुहब्बत कहूँ हो इबादत मगर"है कठिन फिर भी सच को कहोगे अगर जिंदगी का सफ़र ना सिफर हो डगर  दिल की बेताबियाँ और ऐसी तड़प  यूँ मुहब्बत कहूँ हो इबादत मगर आज कहने को जब, तुम नहीं पास में क्या है उलझन कहूँ जाने सारा नगरभाग्य रूठे हों तुमसे तो फिर क्या कहें ये इनायत कहो हमसफ...
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Tag :गज़ल
  June 30, 2013, 1:36 pm
कई दिनों से उतराखंड की आपदा से लोग जूझ रहे हैं टीवी में देख मन द्रवित हो जाता है। और तब अचानक समाचार में आया राहत बचाव कार्य में लगे हेलिकोप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उफ़…….  कैसी विडम्बना है। हे  ईश्वर ! उन सैनिकों को किस बात की सजा मिली जो सच में जान जोखिम में डालकर आपद...
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Tag :आलेख
  June 27, 2013, 7:39 pm
"गाते रहो मुस्कुराते रहो"तुम गाते रहो मुस्कुराते रहो जिन्दगी के सफ़र में लुभाते रहो कट जाए सफ़र तो हर हाल में सुख-दुःख को गले से लगाते रहो तुम बेसहारा खुद हो मगर बेसहारों का हाथ बंटाते रहोये दुनिया है माना बहुत मतलबी दूर रहकर भी उनसे निभाते रहो लोग पाहन की पूजा भी करत...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :कविता
  June 24, 2013, 3:39 pm
"मन का भेद पपीहा खोले"जिस माली ने सींचा अबतक सुबक सुबक वह रोता हैपाल पोसकर बड़ा किया हो उसको एक दिन खोता है  धूप हवा का जो ख़याल रख पंखुड़ियाँ है नित गिनताउस उपवन में चाहत से क्या पतझड़ में कुछ होता है  नेमत उसकी है प्रकृति फिर छेड़ छाड़ क्यों है करता फूल खिले काँटों में ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :ग़ज़ल
  March 27, 2013, 10:19 am
" आई शरण तुम्हारी "हरि मैं तो हारी, आई शरण तुम्हारी,अब जाऊँ किधर तज शरण तुम्हारी। दर भी तुम्हारा लगे मुझको प्यारा, तजूँ  कैसे अब मैं शरण तुम्हारी। हरि ..................................मन मेरा चंचल, धरूँ ध्यान कैसे,बसो मेरे मन मैं शरण तुम्हारी।  हरि ...................................जीवन की नैया मझधार में ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :कुसुम ठाकुर
  March 15, 2013, 9:02 pm
करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ एक एक पल मेरे लिए अनमोल हैं। होता है किसी और काम में लग गई तो कुछ अनमोल घड़ियाँ छूट न जाए। पर जब वह सो जाता है उस समय कुछ लिख लेती हूँ या समा...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :आलेख
  March 8, 2013, 4:56 pm
करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ एक एक पल मेरे लिए अनमोल हैं। होता है किसी और काम में लग गई तो कुछ अनमोल घड़ियाँ छूट न जाए। पर जब वह सो जाता है उस समय कुछ लिख लेती हूँ य...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :
  March 8, 2013, 4:56 pm
करीब ढाई महीने से अमेरिका में हू, इन ढाई महीने में काफी कम लिख पाई हूँ। सच कहूँ तो पोते को छोड़कर कुछ करने का मन ही नहीं होता। उसके साथ एक एक पल मेरे लिए अनमोल हैं। होता है किसी और काम में लग गई तो कुछ अनमोल घड़ियाँ छूट न जाए। पर जब वह सो जाता है उस समय कुछ लिख लेती हूँ या समा...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :आलेख
  March 8, 2013, 4:56 pm
 बर्फ से ढके पेड़ पौधे  प्राकृतिक आपदा पर तो किसी का वश नहीं होता। परन्तु जब बच्चे या प्रिय जन साथ में न होकर हजारों मील दूर या दूसरे देश में हों तो किसी भी तरह के आपदा के आने पर चिंता होना स्वाभाविक है। अमेरिका के न्यू जर्सी में मेरा छोटा बेटा रहता है जहाँ  से मैनहैटन (न...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :आलेख
  February 11, 2013, 2:52 am
( मेरी एक पुरानी कविता, जिसे मैं कुछ बरसों पहले अपने अमेरिका प्रवास के दौरान एक अप्रवासी भारतीय को ध्यान में रखकर लिखी थी। आज मैं अमेरिका में हूँ, अनायास ही यह कविता याद आ गई। )"मुझे आज मेरा वतन याद आया"मुझे आज मेरा वतन याद आया।ख्यालों में तो वह सदा से रहा है , मजबूरियों ने ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :कविता
  January 26, 2013, 7:22 am
"सह सको मुमकिन नहीं" है नशा ऐसी कहो क्या सह सको मुमकिन नहींसो रहे क्यों अब तो जागो सह सको मुमकिन नहींहाथ अब कुर्सी जो आई, धुन अरजने की लगीमृग मरीचिका जो कहें , सह सको मुमकिन नहीं  सच दिखा सकते मगर आँखें वो मूंदे हैं विवसबिखर गए सपने अधूरे, सह सको मुमकिन नहीं कर(टैक्स)...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :ग़ज़ल
  January 14, 2013, 10:56 pm
 "आजादी हमें खैरात में नहीं मिली है उसके लिए हमारे देश के अनेको देश भक्तों ने जान की बाजी लगाकर देश पर मर मिटने की कसम खाई और शहीद हुए. उनके वर्षों की तपस्या और बलिदान से हमने आजादी पाई है ". झंडा के सामने यह हर वर्ष ऐसे बोला जाता है मानो हम प्रतिज्ञा कर रहे हों कि इस देश ...
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)...
Tag :आलेख
  August 18, 2012, 12:35 pm
 "आजादी हमें खैरात में नहीं मिली है उसके लिए हमारे देश के अनेको देश भक्तों ने जान की बाजी लगाकर देश पर मर मिटने की कसम खाई और शहीद हुए. उनके वर्षों की तपस्या और बलिदान से हमने आजादी पाई है ". झंडा के सामने यह हर वर्ष ऐसे बोला जाता है मानो हम प्रतिज्ञा कर रहे हों कि इस देश ...
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Tag :आलेख
  August 18, 2012, 12:35 pm
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