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मनोरमा

इक दूजे को जोड़ रहे हैंकुछ को लेकिन छोड़ रहे हैंलाख बुझाने पर ना समझेफिर उनसे मुँह मोड़ रहे हैंजीवन में जो प्रेम सुधा रसनिशि दिन उसे निचोड़ रहे हैंकदर नहीं रिश्तों की जिनकोरिश्ता, उनसे तोड़ रहे हैंजो चूके, फिर वही सुमन सेमाथा अपना फोड़ रहे हैं...
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  June 3, 2017, 12:57 pm
झूठ शामिल कर सका ना आजतक किरदार मेंप्यार महसूसा जहाँ, धोखा मिला उस प्यार मेंआँख मिलते, मुस्कुराने का चलन बढ़ता गयाकौन अपना,  खोज पाना, है कठिन संसार मेंऔरतों के जिस्म का व्यापार सदियों से हुआ जिस्म बिकते मर्द के भी आजकल बाजार मेंक्या विरासत छोड़ना है कल की खातिर सोचन...
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  May 19, 2017, 3:10 pm
अगर हो पल पल का सम्मान,तो बनता जीवन इक वरदान।करो फिर चाहे लाख बखान,रहेगी बात अधूरी। कभी होगी ना पूरी।।मिले रस्ते में शायद फूल,जहाँ अक्सर मिलते हैं धूल।सदा मौसम किसका अनुकूल,मगर संघर्ष करे इन्सान।रहेगी बात अधूरी। कभी होगी ना पूरी।।कहीं पर चाँद, कहीं पर रवि,बनो श्रोता, ...
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  May 14, 2017, 7:17 am
सबके प्रश्न समान मुसाफिरक्या होते भगवान मुसाफिरबिनु अनुभव के बाँट रहे सबइक दूजे को ज्ञान मुसाफिरजब संकट में जान मुसाफिर लुप्त वहाँ सब ज्ञान मुसाफिरजाने अनजाने सब कहतेबचा मुझे भगवान मुसाफिररखो सभी का ध्यान मुसाफिरकरना सबका मान मुसाफिरकौन जानता बुरे वक्त मेंकौन ब...
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  May 14, 2017, 7:07 am
नई नई तकनीक से, बढ़े देश का मान।बाँट रहे सब मुफ्त में, WhatsApp पर ज्ञान।।पढ़कर भी संदेश को, मिला न कोई Taste।सभी भेजने में लगे, करके Copy, Paste।।WhatsApp खोला जहाँ, Photo की भरमार।व्यर्थ कई शुभकामना, पढ़ने को लाचार।।डरते, Mobile कहीं, हो जाए ना जाम।कर Delet, Photo सदा, Regular तेरा काम।।WhatsApp के Group में, देखा रोज विव...
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  April 30, 2017, 5:27 pm
कहीं रुकना, कहीं झुकना, कहीं पर मुस्कुराना तुमअगर जीना, सलीके से,  तरीका आजमाना तुमभला कैसे ये मुमकिन है, गलत मैं हो नहीं सकतामिले गलती अगर खुद की, जरा खुद को सुनाना तुमगगन भी झुक रहा देखो, भले वो दूर जितना भीबना किरदार यूँ अपना, गगन को फिर  झुकाना तुमवही टूटेगा तूफां म...
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  April 30, 2017, 5:26 pm
श्रद्धा से घर घर में गाते, सब तेरे  यशगान।तुम्हारा त्याग और बलिदान, नहीं भूलेगा हिन्दुस्तान।।देश की माटी खातिर तू ने, अपना सब कुछ लुटा दिया।और वक्त आया तो लड़के, दुश्मन को भी झुका दिया।इसीलिए पग पग पर पूजित, तेरे अमर निशान।नहीं भूलेगा हिन्दुस्तान।।सबने देखा आजादी क...
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  April 30, 2017, 5:24 pm
टूटा घर हैनंगा सर हैमगर हौसलाजीवन भर हैदेखा रुख पेजो अन्दर हैस्वजन हाथ मेंअब खंजर हैअपनों से हीलगता डर हैकोमल रिश्ताअब जर्जर हैसुमन बदल तूजो मंजर है...
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  April 30, 2017, 5:22 pm
पैसा, अक्सर पास नहीं हैपर पैसे की प्यास नहीं हैअच्छे दिन के अपने जितनेउनसे भी कुछ आस नहीं हैवे प्रायः रोते हैं जिसकोअपने पर विश्वास नहीं हैपीछे वो रह जाता जिसकोकल का कुछ आभास नहीं हैकहलाता वो बहुत अभागाजिसका कोई खास नहीं हैक्या जीवन जब इक दूजे मेंकोमल सा अहसास नहीं है...
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  April 30, 2017, 5:21 pm
रिश्ते - नाते, अमृत धारा,निभ जाए वो तबतक प्यारा,रिश्ते जब रिसने लग जाए,छा जाता तब तब अंधियारा,ऐसा लगता वो जीवन में,जहर गमों के घोल रहा है।सोच! सुमन क्या बोल रहा है?समय के सँग रिश्ते गढ़ते हैं,इक दूजे को नित पढ़ते हैं,लेकिन कुछ स्वारथ के कारण,भूल प्रेम को, सर चढ़ते हैं,आसपास क...
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  April 30, 2017, 5:20 pm
मिलना उन्हीं से जो मन की जरूरतवो झुकना धरा पे गगन की जरूरतजरा देख रिश्तों में ठंडक बढ़ी हैयारो मुहब्बत में अगन की जरूरतकभी हार मिलती कभी हार मिलताअगर जीतना है तो सपन की जरूरतअपने गमों को क्या गिनना, गिनानाचाहत खुशी की तो जतन की जरूरतसुमन बात कहना मुश्किल है सारीहोती न...
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  April 30, 2017, 5:14 pm
अच्छे दिन की तैयारी हैया रोने की फिर बारी हैक्यों दशकों से छले गए हमनादानी या लाचारी हैवादे बदले, शासक बदलाजनता अबतक बेचारी हैकौन धरम है ऊंचा, नीचाइस पर भी मारामारी हैमानवता भी गयी रसातलयह आयोजन सरकारी हैदहशतगर्दी बढती जातीकारण घर घर बेकारी हैलूटा जिसने देश अभीतकने...
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  April 30, 2017, 5:12 pm
रात अँधियारे में अपनी दिन का सूरज कैद मेंजो रचा दुनिया को वो भी बन के मूरत कैद मेंएक ही दुनिया में जी कर ढंग सबके हैं अलगदूसरों की फिक्र कुछ को कुछ की नीयत कैद मेंटूटते सपनों को यारो जोड़ना तू सीख लेएकता किस्मत हमारी और किस्मत कैद मेंजंग सरहद पर अगर तो खेत में भी जंग हैइक...
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  April 30, 2017, 5:10 pm
हार सभी के पास में, हार जगत श्रृंगार।जीत बिना भी हार है, जीत गए तो हार।।सबको मरना एक दिन, अक्सर कहते लोग।पर डरते सब मौत से, हर दिल में यह रोग।।प्रीतिभोज में आजकल, किया प्रीति की खोज।सहभोजन भी युद्ध सा, प्रीति बिना ही भोज।।हो पूनम का चाँद या, जीवन में हो प्यार।पूर्ण हुआ, घटन...
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  April 30, 2017, 5:07 pm
गीत लिखना चाहता, हँसने हँसाने के लिएवक्त भी मिलता कहाँ अब मुस्कुराने के लिएरोज सूरज सँग निकलना रात को घर लौटनाइस तरह से दिन कटे रोटी कमाने के लिएहाल तेरा क्या पड़ोसी पूछना मुश्किल हुआजिन्दगी अब कैद में है छटपटाने के लिएदर्द का एहसास भी आँखों में अब आता नहीँदिन गुजरते ...
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  April 30, 2017, 5:03 pm
पढ़ना ज्यादा लिखना कम हैलेखन का बस एक नियम हैगीत, गजल, दोहा, कविता होलिखते जब जैसा मौसम हैपाठक, श्रोता याद रखे तबशब्द, भाव में जब संगम हैकभी मुहब्बत कभी सियासतखुशियाँ रचना में या गम हैसीता, राधा, मीरा, कविताऔर यशोदा या मरियम हैभीड़ जुटाना क्यों शब्दों कीकविता कला और संय...
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  April 30, 2017, 5:01 pm
माँ से अर्थ बड़ा है कोई?और शब्द छोटा है कोई?रहते बच्चे माँ के दिल मेंदूजा और पता है कोई?भूल करे बच्चे, माँ कहतीइसकी कहाँ खता है कोई?बाप क्रोध में तब माँ कहतीइसकी भला सजा है कोई?मोल सभी का पर माँ धूरीउनके और शिवा है कोई?माँ की गोदी में बन बच्चाइससे जुदा मजा है कोई?जीवन में जो ...
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  April 30, 2017, 5:00 pm
हम आते हैं।जीवन के गीत सुनाते हैं।जमीं हुई बदरंग जहाँ पे,रंग वहीं बरसाते हैं।।हम आते हैं - - - -सबके दिल में इक ज्वाला है,यारो उसको जलने दो।टूटा इक सपना तो दूजे,सपने को भी पलने दो।हर उलझन को सोच समझके,मिलजुलकर सुलझाते हैं।हम आते हैं - - - -जिसकी रोने की आदत है,रोता ही रह जाएगा।...
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  April 30, 2017, 4:57 pm
नभ में जितने तारे हैंवे सब रूप तुम्हारे हैंजहाँ अमावस घर आयातुम हो तो उजियारे हैंमेरी सारी कमियाँ भीतुमको कितने प्यारे हैंतुम बिन जीना, सोचा तोआँसू बहते सारे हैंरुग्ण हुए तुम ये जानादिखते दिन में तारे हैंबुझा दिए मेरे पथ केअबतक जो अंगारे हैंतू प्रकाश हो तुम बिन तोसु...
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  April 30, 2017, 4:54 pm
कैसे कह दूँ प्यार नहीं हैबंधन भी स्वीकार नहीं हैदिल में तेरी यादें हरदममन पर ही अधिकार नहीं हैकुछ खोया तो पाया भी कुछप्यार कभी बेकार नहीं हैप्यार सलामत अगर जिन्दगीसूना ये संसार नहीं हैआँखों आँखों में महसूसोप्यार कभी व्यापार नहीं हैयह मेरा है सब कहते परअपना तो घर द्व...
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  April 30, 2017, 4:51 pm
जीवन का आधार मुसाफिरहो रिश्तों में प्यार मुसाफिरपर स्वारथ में बना आजकलरिश्ता ही बाजार मुसाफिररिश्तों में तब जान मुसाफिरजब अन्दर में ज्ञान मुसाफिरएक बार टूटा तो रिश्तेहो जाते बेजान मुसाफिरसब रिश्ते अनमोल मुसाफिरप्यार करो दिल खोल मुसाफिरबुरे दिनों में लोग समझतेक...
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  April 30, 2017, 4:49 pm
पहले पढ़ना कर्म मुसाफिरतब लेखन है धर्म मुसाफिरउड़ा लिया दूजे की रचनातब तो ये दुष्कर्म मुसाफिर                        है लेखन में वाद मुसाफिरकरते लोग विवाद मुसाफिरप्रतिभाएं उलझीं तर्कों मेंजिसका है अवसाद मुसाफिरलिखो, मिलेंगे फूल मुसाफिरसम्भव मिलना धूल म...
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  April 30, 2017, 4:46 pm
दण्ड बैठकी पेल रहे हैंफिर शब्दों से खेल रहे हैंशब्द भाव में कुश्ती जैसीपाठक, श्रोता झेल रहे हैंकविता में शब्दों को प्रायःकविगण यार धकेल रहे हैंगया व्याकरण कौन पूछताअब तो नहीं नकेल रहे हैंहै औकात सुमन की जितनीशब्दों को बस ठेल रहे हैं...
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  April 30, 2017, 4:42 pm
जीवन की शैली कभी, घर घर में था योग।युग बदला अब देखिये, योग बना उद्योग।।ध्यान, धारणा भूलकर, कुछ आसन पर जोर।कसरत होता देह का, मन रहता कमजोर।।योग जरूरत आज की, करो नियम से यार।खुद से होगा प्यार तब, दुनिया से भी प्यार।।जीवन का मतलब तभी, अगर रहें नीरोग।पर मजहब से जोड़कर, व्यर्थ झ...
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  June 24, 2016, 8:59 am
भले NOSE को EAR बोलनहीं किसी को DEAR बोलशासक का है खौफ यहाँसाहस को भी FEAR बोलरिश्ते, सरकारी जनता सेदूर बहुत, पर NEAR बोलजहर उगलते, जो घर घरउस सियार को DEER बोलभूख सुमन की, तुमको क्याBEAR भर के CHEER बोलनोट - हिन्दी प्रेमियों से मुआफी की अपील के साथ ...
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  June 24, 2016, 8:52 am
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