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वीरांश

मेरी उदासी मेरी गहराईयों का नतीजा है, मेरा सुखन मेरी तन्हाईयों का नतीजा है| इतना ज़हर कैसे भर गया मेरे दिल में, मेरी कड़वडाहट तुम्हारी नादानियों का नतीजा है| मेरा सुखन मेरी तन्हाईयों का नतीजा है… मैं ढूंढता रहा एक साया अंधेरों में, मेरा हश्र मेरी रवानियों का नतीजा है| म...
वीरांश...
Tag :ग़ज़ल
  January 20, 2012, 6:01 pm
कुछ कमी ज़रूरी है वफ़ा में, दर्द से ही तो मुकम्मल होती है मोहब्बत| तुम भी शीशे की असलियत जान ना पाए, बेज़ुबान है पर बेनज़र नही है वो| खुदी बिखर गयी है चारों तरफ, अरसों में खिला है ज़हन मेरा| आज तनहाई को कोई रंग नहीं दूँगा, देखों कितना फीका है ज़हन उसका| हर [...]...
वीरांश...
Tag :ख्याल
  December 9, 2011, 2:16 pm
महंगी नहीं है ख्वाबों की ताबीर, बस एक जिंदगी की कमी है| पल पल का हिसाब जोड़ा, तो भी ज़िन्दगी ना मिली| जाने क्या अदा है इसकी तुममें घुल जाने की| उनसे क़ैद-ऐ-मोहब्बत ना देखी गयी.. तो ज़माने ने इसे सूली पर लटका दिया| अब महफ़िलों से लो उठ चले हम, सुना है कोई नया [...]...
वीरांश...
Tag :ख्याल
  December 9, 2011, 2:13 pm
अनकही समझने की अदा जाती रही, हमने घुटने टेक दिए लफ़्ज़ों के आगे| यूँ तो ओढ़ रखी थी हमने चादर ज़माने वाली, उसकी आँखों में देखा तो शरमिंदा ज़रूर हुए| ना पूछ साहिल कैसे डूबा मैं, तूफ़ानो की ज़िद थी और हम मगरूर रहे| दिलों के फ़ासले दिलों को मंज़ूर हुए, इतने करीब होकर भी [...]...
वीरांश...
Tag :ख्याल
  December 9, 2011, 1:36 pm
ऐसा है अपनी फिराक का फ़साना ‘वीर’, सच पूछो तो हम को इंतजार-ए-विसाल नहीं| उम्मीद मैंने भी छोड़ दी है ‘वीर’, गर तुझे अपने हौसलों पर एतबार नहीं| तुम्हारे दिल का सुकून, मेरे इख्तियार में नहीं, शरमिंदा हूँ के असर इतना, मेरे प्यार में नहीं| मेरा हौसला जब चुभने लगा उन आँखों को ‘वीर’, ...
वीरांश...
Tag :ख्याल
  December 7, 2011, 8:41 am
मोहब्बत करते-करते तू बंदगी कर बैठा है, करीब आते-आते तू खुद को खो बैठा है| जब तलक बेपरवाह था ठीक ही था, अब सोचता है मुझे, तो मजबूरी की तरह| वो पहले सा हौसला ‘वीर’ में नहीं, घुटने टेक देता है अब जिंदगी के आगे वो| उलटे पांव ना चल सका जज़्बातों का मुसाफिर, जाने [...]...
वीरांश...
Tag :ख्याल
  December 7, 2011, 8:27 am
मायूस दिलों में उम्मीद जगाई जाए, वीर चलो इस बार ऐसी ईद मनाई जाए| मुफ़लिसी ने सितम ढाया है जिन पर, उन चेहरों पर मुस्कुराहट सजाई जाए| जुनून की इंतहा का इल्म है ‘वीर’ को, उसने सिर्फ रास्ता बदला है, हौसला नहीं| गीला ना रह जाए तुझे अपनी ज़िन्दगी से ‘वीर’, एक कोशिश लाज़मी है [...]...
वीरांश...
Tag :ख्याल
  December 6, 2011, 10:14 pm
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