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KAVITA RAWAT

मुगल साम्राज्य की स्थापना के बाद जब तलवार के जोर पर धर्म परिवर्तन का सिलसिला चल पड़ा तो भय और अज्ञान के कुहासे को समूचे हिन्दुस्तान से मिटाने के लिए सन् 1469 को लाहौर के तलवंडी गांव में सिक्ख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक ने जन्म लेकर सत्य की राह दिखायी। वे एक ऐसे धर्मगुरु ह...
Tag :गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व 6 अक्टूबर
  November 5, 2014, 10:19 am
31 अक्टूबर 1875 ईं. को गुजरात के खेड़ा जिला के करमसद गांव में हमारे स्वतंत्रता-संग्राम के वीर सेना नायक सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि भी है, जिसे अभी तक तुलनात्मक रूप से बड़ा महत्व दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार मोदी ...
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  October 30, 2014, 10:27 am
कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक मनाया जाने वाला पांच दिवसीय सुख, समृद्धि का खुशियों भरा दीपपर्व ’तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् 'अंधेरे से प्रकाश की ओर चलो'का संदेश लेकर आता है। अंधकार पर प्रकाश का विजय का यह पर्व समाज में उल्लास, भ...
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  October 21, 2014, 10:48 am
गुलाब को कुछ भी नाम दो उससे उतनी ही सुगंध आयेगी।शक्कर सफेद हो या भूरी उसमें उतनी ही मिठास रहेगी।।कभी चित्रित फूलों से सुगंध नहीं आती है।हर चमकदार वस्तु स्वर्ण नहीं होती है।।धूप में धूल के कण भी चमकदार मालूम पड़ते हैं।हाथी के खाने और दिखाने के अलग दाँत होते ह...
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  October 16, 2014, 10:46 am
आसुरी शक्ति पर दैवी-शक्ति की विजय का प्रतीक शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा के नवस्वरूपों की नवरात्र के पश्चात् आश्विन शुक्ल दशमी को इसका समापन ‘मधुरेण समापयेत’ के कारण ‘दशहरा’ नाम से प्रसिद्ध है। एक ओर जहाँ नवरात्र पूजा-पाठ का पर्व है, जिसमें की गई पूजा मानव मन को प...
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  October 2, 2014, 4:58 pm
गांधी जयंती गांधी जी को स्मरण करने का पुण्य दिन है। 2 अक्टूबर 1869 को गांधी जी के जन्म हुआ था। इसलिए कृतज्ञ राष्ट्र उनके जन्म दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। अर्चना के अगणित स्वर मिलकर इस युग के सर्वश्रेष्ठ महामानव की वंदना करता ह...
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  October 1, 2014, 3:20 pm
हमारे भारतीय चिन्तन में शरीर को धर्म का पहला साधन माना गया है। महाकवि कालिदास की सूक्ति "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" और इस हेतु सदैव स्वस्थ रहने को कर्तव्य निरूपित किया है।"धर्मार्थ काममोक्षाणाम् आरोग्यम् मूल मुत्तमम्।"इसीलिए अच्छा स्वास्थ्य महा-वरदान है। इसकी  ...
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  September 23, 2014, 11:59 am
किसी भी देश में राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्र चिन्ह की भांति ही राष्ट्रभाषा का भी बराबर  महत्व होता है। जिस व्यक्ति के मन में इन सबका सम्मान नहीं, उसकी राष्ट्र के प्रति भी अपनी कोई आस्था नहीं हो सकती है। राष्ट्रभाषा किसी भी स्वतंत्र देश की संपत्ति होती है और हमारे...
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  September 13, 2014, 10:42 am
हम सबके प्यारे गूगल बाबासारे जग से न्यारे गूगल बाबासबको राह दिखाते गूगल बाबादुनिया एक सिखाते गूगल बाबासबकी खबर लेते गूगल बाबासबको खबर देते गूगल बाबाकभी न थकते गूगल बाबाचलते रहते गूगल बाबादेश विदेश घुमाते गूगल बाबामेल मिलाप कराते गूगल बाबारंगभेद,जातपात मिटाते गूग...
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  September 4, 2014, 9:57 am
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद इन दिनों भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक दस दिन तक चलने वाले भगवान गणेश जी के जन्मोत्सव की धूम मची है। एक ओर जहाँ शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय और दूर-दराज से आये अधिकांश मूर्तिकारों द्वारा प्लास्ट...
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  August 28, 2014, 10:18 am
मान्यता है कि त्रेता युग में  'मधु'नामक दैत्य ने यमुना के दक्षिण किनारे पर एक शहर ‘मधुपुरी‘ बसाया। यह मधुपुरी द्वापर युग में शूरसेन देश की राजधानी थी। जहाँ अन्धक, वृष्णि, यादव तथा भोज आदि सात वंशों ने राज्य किया। द्वापर युग में भोजवंशी उग्रसेन नामक राजा राज्य करता था, ...
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  August 17, 2014, 2:36 pm
यह सभी जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हुआ। यह हमारे राष्ट्रीय जीवन में हर्ष और उल्लास का दिन तो है ही इसके साथ ही स्वतंत्रता की खातिर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों का पुण्य दिवस भी है। देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रांतिकारियों व आन्दोल...
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  August 12, 2014, 11:16 am
हमारी भारतीय संस्कृति में अलग-अलग प्रकार के धर्म,  जाति,  रीति,  पद्धति,  बोली, पहनावा, रहन-सहन के लोगों के अपने-अपने उत्सव, पर्व, त्यौहार हैं,  जिन्हें वर्ष भर बड़े धूमधाम से मनाये जाने की सुदीर्घ परम्परा है। ये उत्सव, त्यौहार, पर्वादि हमारी भारतीय संस्कृति की अने...
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  August 7, 2014, 9:44 am
          हिन्दी साहित्य की आजीवन सेवा कर हिन्दी-गद्य का रूप स्थिर करने, उपन्यास-साहित्य को मानव-जीवन से संबंधित करने एवं कहानी को साहित्य-जगत् में अग्रसर करने वाले महामानव मुंशी प्रेमचंद का जन्म बनारस से चार मील दूर लमही ग्राम में 31 जुलाई, 1880 को हुआ। उनकी आरंभिक शि...
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  July 30, 2014, 7:34 am
कोई भूख से मरता,       तो कोई चिन्ताओं से है घिरा,किसी पर दु:ख का सागर       तो किसी पर मुसीबतों का पहाड़ गिरा।कहीं बजने लगती हैं शहनाइयाँ       तो कहीं जल उठता है दु:ख का चिराग,कहीं खुशी कहीं फैला दु:ख       जग में कैसा है यह संताप।।कोई धनी तो कोई निर्धन  ...
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  July 23, 2014, 10:04 am
कल्पना पब्लिकेशन, जयपुर ने मेरे पहले लघु कविता संग्रह ‘लोक उक्ति में कविता’ को प्रकाशित कर मेरे भावों को शब्दों में पिरोया है, इसके लिए आभार स्वरूप मेरे पास शब्दों की कमी है; लेकिन भाव जरूर है। भूमिका के रूप में श्रद्धेय डॉ. शास्त्री ‘मयंक’ जी के आशीर्वचनों के लिए मैं न...
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  June 14, 2014, 11:47 am
जब सूरज की प्रचण्ड गर्मी से हवा गर्म होने लगी, तो वह आग में घी का काम कर लू का रूप धारण कर बहने लगी। सूरज के प्रचण्ड रूप को देखकर पशु पक्षी ही नहीं, वातावरण भी सांय-सांय कर अपनी व्याकुलता व्यक्त करनी लगी तो प्रसाद जी की पंक्तियां याद आयी- "किरण नहीं, ये पावक के कण, जगती-तल पर ग...
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  June 7, 2014, 10:10 am
कभी बचपन में हम बच्चों को दुबले-पतले, खांस-खांस कर बीड़ी फूंकते हुए बुजुर्गो के मुंह से बीड़ी खींच कर और फिर उन्हें यह कह कर चिढ़ाते हुए खूब मजा आता था कि ‘बीडी पीकर ज्ञान घटे, खांसत-खांसत जी थके, खून सूखा अंदर का, मुंह देखो बन्दर का’ । हमारी इन हरकतों से नाराज होकर ...
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  May 31, 2014, 2:28 pm
हम कहलाते हैं भोपालीमिनीबस की है कुछ बात निरालीहम कुछ भी बकें इधर-उधरहर बात हमारी है निराली         हमसे बढ़ती शानहम कहलाते हैं भोपाली।हम ड्रायवर सबको ढ़ोते-फिरतेचाहे चपरासी हो या अफसरपर जब आते टेंशन में भैयातब दिखता न घर न दफ्तरपान-गुटका-बीड़ी साथ हमारेजुबां प...
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  May 14, 2014, 7:38 am
जब से चुनाव आयोग ने लोकतंत्र का चुनावी बिगुल बजाया, तब से कविवर पदमाकर के वसंत ऋतु की तरह ‘कूलन में केलि में कछारन में कुंजन में, क्यारिन में कलिन में कलीन किलकंत है, कहे पद्माकर परागन में पौनहू में, पानन में पीक में पलासन पगंत है, द्वार में दिसान में दुनी में देस.देसन में,...
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  April 25, 2014, 9:52 am
बच्चों के परीक्षा परिणाम आने के बाद एक सप्ताह की छुट्टी मिली तो मन में माँ वैष्णों देवी दर्शन की लालसा जाग उठी। भोपाल से दिल्ली और फिर वहाँ से देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी के परिवार और बड़ी ननद के साथ हम 12 पारिवारिक सदस्य रात्रि को बस से सोते-जागते माँ के दर्शन के लिए निकल पड...
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  April 4, 2014, 12:14 pm
जब से पड़ोसियों के घर विदेशी कुत्ता 'पग' (Pug) आया है, तब से जब-तब झुमरी के दोनों बच्चे उसके इधर-उधर चक्कर काट-काट कर हैरान-परेशान घूमते नजर आ रहे हैं। कुर्सी पर शाही अंदाज में आराम फरमाता लंगूर जैसे काले मुँह वाला प्राणी उन्हें फूटी आँख नहीं सुहा रहा है। उसका अजीबोगरीब थोबड...
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  March 13, 2014, 10:21 am
अण्णा हजारे ने अनशन तोड़ने के साथ चुनाव सुधारों को लेकर संघर्ष छेड़ने की बात की थी। अण्णा के अनुसार मतदाता को मतपत्र पर दर्ज उम्मीदवारों को खारिज करने का भी हक मिलना चाहिए। अगर दस प्रत्याशी मतपत्र में दर्ज हैं तो ग्यारहवाँ या अन्तिम खाना प्रत्याशी को नकारने का हो। ...
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  February 7, 2014, 11:32 am
विवशता की हालत में कोई नियम लागू नहीं होता है।कीचड़ में फँसे हाथी को कौआ भी चोंच मारता है।।कुँए में गिरे शेर को बंदर भी आँखें दिखाता है।उखड़े हुए पेड़ पर हर कोई कुल्हाड़ी मारता है।।मुसीबत में फँसा शेर भी लोमड़ी बन जाता है।मजबूरी के आगे किसी का जोर नहीं चलता है।।विवशत...
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  January 30, 2014, 9:50 am
मध्यप्रदेश रोज सोसायटी संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी की ओर से बीते रविवार को जब मैं सपरिवार भोपाल स्थित शासकीय गुलाब उद्यान में आयोजित 32वीं अखिल भारतीय गुलाब प्रदर्शनी देखने पहुँची तो सप्ताह भर का थका-हारा मन देशभर से आए प्रतिभागियों के 600 से अधिक प्रजा...
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  January 13, 2014, 10:33 am
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