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बरिस्ता..

कमला झरिया न तुम आये न चैन आया न मौत आयी शब-ए-वादादिल- ए- मुज़्तर था मैं था और थीं बेताबिया मेरी अबस नादानियों पर आप अपनी नाज करते हैं अभी देखी कहाँ हैं आपने नादानियां मेरी...
बरिस्ता.....
Tag :ग़ज़ल
  May 2, 2012, 6:59 pm
 तू पिया से मिलकर आयी हैबस आज से नींद पराई हैदेखेगी सपने बालम केये जीवन भर का रोग सखीतोहे पगली कहेंगे लोग सखीयाद आयेंगे वादे बालम केतू लाख चले री गोरी थम थम के   पायल में हैं गीत छम छम के ...
बरिस्ता.....
Tag :इक़बाल बानो
  April 27, 2012, 12:32 am
इक़बाल बानो दश्त ए तन्हाई में ऐ जाने जहां लरज़ा हैतेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराबदश्त ए तन्हाई में दूरी के ख़सो - खाक़ तलेखिल रहे हैं तेरे पहलू के समन और गुलाबउठ रही है कहीं क़ुरबत से तेरी सांस की आंचअपनी ख़ुशबू में सुलगती हुयी मद्धम मद्धमदूर उफ़क़ पार चमकती हुयी कत...
बरिस्ता.....
Tag :फैज़ अहमद फैज़
  April 3, 2012, 6:59 pm
शोभा गुर्टू बारह बरस हुए सैंया को देखे हंस हंस गरवा लगैबे रामा पिया मिलन को जइबे रामा.. ...
बरिस्ता.....
Tag :शोभा गुर्टू
  March 20, 2012, 6:52 pm
पारुल घोष किसकी ये सदा थी, किसने मुझे पुकाराकोई मुझे बता दे क्या वो बुला रहे हैं...
बरिस्ता.....
Tag :पन्नालाल घोष
  March 11, 2012, 12:15 pm
लैटिन बीट्स पर उनकी देह का एक एक अंग ऐसे थिरकता है जैसे  मूसलाधार वर्षा में पीपल का कोई  पत्ता कांपता हो . उनकी आँखों में एक स्थायी गीलापन है जो दिखता नहीं. उनकी मुद्राओं में इतनी मादकता है कि उन्हें नाचते देखते हुए आप पलक नहीं झपक सकते. उनमें बीयर की ताज़ी खुली बोतल सा उफ़ा...
बरिस्ता.....
Tag :स्पैनिश
  March 8, 2012, 12:07 am
काहे करत मोसे बरजोरी ! बार बार बरजो नाहि माने,जाओ जाओ अब छेड़ो न हंसत मो पे सब बिरज  की नारी !काहे करत बरजोरी !  ...
बरिस्ता.....
Tag :होली
  March 6, 2012, 6:27 pm
निज़ाम जब देह छोड़ने वाले थे तब उन्होंने ख़ुसरो को  कहीं दूर भेज दिया था. निज़ाम जानते थे ख़ुसरो यह पीड़ा न सह सकेंगे. सो कहीं और भेज दिया. ख़ुसरो लौटे तो देखा निज़ाम तो गए ! अब तो वो संभाले न संभले ! आंसुओं का सैलाब आ गया. खुद पर वश न रहा. पीड़ा सही न जाए.गुरु के दूसरे शिष्यों ने स...
बरिस्ता.....
Tag :हज़रत निजामुद्दीन
  March 5, 2012, 11:56 pm
डारो रे रंग डारो रे रसियाफागुन के दिन आये रेरंग कच्चो और नयो खिलाड़ीमारी पिचकारी भिगोई साड़ीरंग गयी अंग अंग सजनी, खिलन के दिन आये रे ..दुल्हन घूंघट में शरमाएरसिया नैनन बीच समायेकूक कूक कर कोयल  बोले, जोबन  के दिन आये रे .. साजन बैठा तन मन खोकरछलक रहा है रूप सरोवरप्यासी प्य...
बरिस्ता.....
Tag :पंडित इंद्र
  March 5, 2012, 7:40 pm
आज सुबह से उस्ताद जी की शहनाई सुन रहे हैं. शहनाई सुनने वाले (या न सुनने वालों ने भी ) उनकी सादादिली  के क़िस्से ज़रूर सुने होंगे . एक बात याद आयी जो कहीं पढ़ी थी.एक दिन उनकी एक शिष्या बोली , "बाबा आप ये क्या करते हैं. इतनी प्रतिष्ठा है आपकी..अब तो आपको भारत रत्न भी मिल चुका है. अब...
बरिस्ता.....
Tag :शहनाई
  March 5, 2012, 9:26 am
निजाम की दरगाह सालों पहले पंकज अवस्थी की आवाज़ ने दिल में एक  सूराख  बना दिया था. मैं कब से एक सुर की तलाश में हूँ जो ये सुराख़ भर सके . तेरा ही करमतेरा ही करममेरे साथ ही चला मेरे साथ ही रुकामुझ पे रहा हर दम तेरा ही करमकहता ही नहीं.........................पत्थर में तू है समायादिल इन्सां में...
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Tag :फ्यूज़न
  February 29, 2012, 5:29 pm
ग़ुलाम अलीइक अजनबी झोंके ने जब पूछा मेरे ग़म का सबबसहरा की भीगी रेत पर मैंने लिखा आवारगीले अब तो दश्त- ए- शब की सारी वुसअतें सोने लगींअब जागना होगा हमें कब तक बता आवारगीकल रात तनहा चाँद को देखा था मैंने ख़्वाब में'मोहसिन' मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगीये दिल ये पागल दिल मेर...
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Tag :ग़ज़ल
  February 27, 2012, 11:45 pm
शकीरा तुम्हारे लिए मैं वो सब छोड़ दूँ जो मेरा हैजो तुम मेरे साथ आओ निस्संदेह किसी कम्युनिस्ट देश की ओर चल पडूँमैं अपने नाखून कुतर दूँ कि तुम्हें चोट न पहुंचे अगर तुम इन वजहों से मेरे पास रह जाओ कि मैं अपना वज़न कम कर लूँ फुटबॉल के बारे में अपनी समझ और पैनी करूँ तो मैं यह भी क...
बरिस्ता.....
Tag :शकीरा
  February 26, 2012, 8:05 pm
एक दिन तुम सब कुछ भूल जाओगे, तब तुम्‍हारी विस्‍मृति की उंगली में मैं कौन-सी अंगूठी पहनाऊंगी कि तुम्‍हें याद आ जाए? स्‍मृति की चादर तुम हमेशा ओढ़े रखना, सुनो, बहुत जाड़ा है, विस्‍मृति की हवाएं एक बार बदन छू गईं, तो रोमछिद्र सुराख़ों की तरह हो जाएंगे. बर्फ़ के पेड़ का रंग भी ...
बरिस्ता.....
Tag :दादरा
  February 24, 2012, 11:44 pm
मीत के कैमरे से सुपरमून ( मार्च १९ , २०११ )हथेली में लेते ही सारे धागे आपस में उलझ गए थे. एक सुबह बहते पानी के नीचे हथेली रखी, तो लकीरें बह निकलीं. हथेलियां अब कोरे आसमान की तरह थीं. एक दिन बिना लकीर की उन हथेलियों में चाँद उगा. मेरी हथेली पर चंद्र पर्वत नहीं, 'सुपरमून' है. तब से ...
बरिस्ता.....
Tag :नौस्टेलजिया
  February 22, 2012, 11:27 pm
..................... और पता है, उन दिनों सतपुडा का जंगल पलाश की लपटों से झुलस रहा था . घड़ी की टिक टिक तो दीवार के ह्रदय की धड़कन है...चलती ही जाती है पर तब से वक़्त ठहर गया. ठहरा हुआ वक़्त दूर कहीं जंगल में धूनी रमाये हुए है . वैसे,फ़रवरी की किसी शाम फरीदा आपा को सुना है .............?सुनोगे ?फ़रीदा...
बरिस्ता.....
Tag :फ़रीदा ख़ानम
  February 19, 2012, 7:47 pm
मुन्नी बेग़म मजबूर कर के फिर मुझे मेरे यार ले चलोउसकी गली में फिर मुझे इक बार ले चलोशायद ये मेरा वहम हो मेरा ख़याल होमुमकिन  है मेरे बाद से मेरा मलाल होपछता रहा हो फिर मुझे दर से उठा के वोबैठा हो मेरी राह में आँखें बिछा के वोउसने भी तो किया था मुझे प्यार ले चलोउसकी गली को ज...
बरिस्ता.....
Tag :ग़ज़ल
  February 19, 2012, 2:22 am
उनकी आवाज़ अनगढ़ सी है. इस आवाज़ का कच्चापन सोंधा सा लगता है.नाहिद अख्तर को सुनते हुए याद आ रही हैं बस नाहिद अख्तर.ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या                                              जहां तेरा नक्श- ए- क़दम देखते हैं ...
बरिस्ता.....
Tag :नाहिद अख्तर
  February 16, 2012, 9:13 pm
व्हिटनी ह्यूज़टन के गीत  मैं अपनी खुरदुरी आवाज़ में हमेशा गुनगुनाती रही हूँ. सुबह Times  Now से उनके इंतकाल की खबर मिली तो मन उदास हो गया. उनकी रूह को चैन आये. आमीन.जानती हूँ अर्सा हुआमगर मुझे कुछ कहना हैपता है नवम्बर के उस सर्द दिन के बादमैं फिर पहले जैसी नहीं रही. हमें लगा हम...
बरिस्ता.....
Tag :श्रद्धांजलि
  February 12, 2012, 12:25 pm
इधर कई दिनों से नींद पूरी नहीं हुयी. कोई बहुत परेशानी भी नहीं है नींद न होने से . एक दिन तो ऐसी गहरी नींद में जाना ही है कि  ज़िन्दगी भर के रतजगे का हिसाब बराबर कर ही लेंगे. अ-निद्रा  को हम  किसी  बीमारी की तरह नहीं लेते . कई बार सोते हुए भी जागना चलता रहा है. कभी कभी आँख खोल के भ...
बरिस्ता.....
Tag :हर्षदीप कौर
  February 8, 2012, 9:10 am
पसंदीदा पेंटिंग ( आर्टिस्ट नामालूम )मेरी बालकनी में वसंत की हलकी पीली सुबह जिब्रान के अल-मुस्तफा की याद लेकर आयी है. 'द प्रोफेट' फिर खुली हुयी है . पंडित भीमसेन जोशी और मन्ना डे की जुगलबंदी सुबह से लगातार चल रही है. केतकी गुलाब जूही चम्पक बन फूले..झुलना  में  बैठ  आज  पी  के  ...
बरिस्ता.....
Tag :द प्रोफेट
  January 28, 2012, 2:07 pm
सुशोभित सक्तावत की क्लिक एक रोज़ तुम्हारी छाती में दफ़न हो गया दुर्मद 'ईगल'जरछार उल्काएं भुजा में सिर रख सो गयीं पर विषमताओं और रहस्य की देवी जब तुमसे मिलने पहुंची ओ खम्भात ,सलीके से लिफ़ाफे में मोड़ कर लौटा दी तुमने उसकी बेचैनी !अक्सर एक कथा के पीछे कई कथाएँ छुपी होती ह...
बरिस्ता.....
Tag :यानी
  January 22, 2012, 12:24 am
कड़क ब्लैक लेमन टी,तकिये के पास पड़ी हरे-सफ़ेद कवर में लिपटी शिम्बोर्स्का और ग़ुलाम अली की आवाज़ !जनवरी की सुबह ऐसा बेड रेस्ट नसीब वालों के हिस्से ..इश्क में जीना नसीब वालों के हिस्से..इश्क में मरना नसीब वालों के हिस्से ....थू थू थू थू..... खुदा खैर करे नसीब वालों को बुरी बला से बचा...
बरिस्ता.....
Tag :ग़ज़ल
  January 18, 2012, 1:00 pm
ये शीशे के सपने, ये रिश्तों के धागे..किसे क्या ख़बर है कहाँ टूट जाएँ..मुहब्बत के दरिया में तिनके वफ़ा केन जाने ये किस मोड़ पर डूब जाएँअजब दिल की वादी,अजब दिल की बस्तीहर एक मोड़ मौसम नई ख़्वाहिशों कालगाए हैं हमने भी सपनों के पौधेमगर क्या भरोसा यहाँ बारिशों कामुरादों की मंज़िल के...
बरिस्ता.....
Tag :जगजीत सिंह
  January 16, 2012, 7:28 pm
हारमोनियम की मद्‍धम आवाज़ और तबले की थाप का साथ देती हुई तालियाँ.....और फिर रफ़्ता-रफ़्ता कानों से होते हुए मन पे एक जादू सा तारी हो जाता है.... उस्ताद नुसरत फतेह अली ख़ाँ और..... हुसैन शाह का कलाम... बीच में युवा राहत का आलाप........................
बरिस्ता.....
Tag :राहत फतेह अली खान
  January 16, 2012, 1:00 am
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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