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मनोज अबोध

कुछ तो सोचो- विचारो  कभी ।नयन भर कर  निहारो  कभी ।कब से बैठे  हैं पलकों  पे वो..अब तो दिल में उतारो  कभी ।...
मनोज अबोध...
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  May 23, 2012, 11:53 am
प्‍यार  की  साधना  के  लिए  ।भाव  की  अर्चना  के  लिए  । आओ,हम-तुम मिलें आज फिरइक  नई  सर्जना  के  लिए  ।।...
मनोज अबोध...
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  May 22, 2012, 9:11 am
भाव की  नवधरा  चाहिए  ।प्राण-प्रण  से वफ़ा  चाहिए ।मैं  अधूरा हूँ  बिन  आपके..आप से  पूर्णता  चाहिए  ।।...
मनोज अबोध...
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  May 20, 2012, 1:20 pm
प्‍यार में फिर वफ़ा के लिए ।।इस अधूरी  कथा के लिए ।।है निवेदन  यही, आपसे .....लौट आओ सदा के लिए  ।।...
मनोज अबोध...
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  May 18, 2012, 12:26 pm
DG Post No. 113-01/2011-SB dated 30-03-2012Subject: Revision in interest Rates of Small Savings Schemes wef 1st April 2012            The undersigned is directed to say that vide its OM No. 6-1/2011-NS-II(Pt.) dated 26-03-2012, Ministry of Finance (DEA) has revised interest rates of Small Savings Schemes from 1stApril 2012. Detail about old and revised rates is given below:INTEREST RATE TABLEName of SchemePeriodInterest ratesFrom 1.12.2011Interest ratesFrom 1.4.2012Savings AccountsGeneral4.00 %4.00 %Time Deposit1 Years7.7 %8.20 %2 Years7.8 %8.30 %3 Years8.0 %8.40 %5 Years8.3 %8.50 %5 Years Recurring Deposit5 Years8.0 %8.40 %Monthly Income ...
मनोज अबोध...
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  May 10, 2012, 2:31 pm
क्‍यों कसम मेरी खाते हो तुम ।और फिर भूल जाते हो तुम । कब निभा पाए हो तुम वफ़ा ...मुझको झूठा बताते हो तुम ।...
मनोज अबोध...
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  May 10, 2012, 1:38 pm
दूर ख़ुद मुझसे  जाते हो तुम ।अश्‍क भी फिर बहाते हो तुम ।जब मिलन चाहते  ही नहीं ..क्‍यों  बहाने बनाते  हो तुम ।...
मनोज अबोध...
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  May 10, 2012, 1:36 pm
भाव  इतने  सघन हों न हों ।स्‍वागतम् में नयन हों न हों ।आज ही हमसे मिल लीजिए..फिर मिलन के यतन हों न हों ।...
मनोज अबोध...
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  May 7, 2012, 10:07 am
खु़द  को  यूँ  गुदगुदाओ  कभी ।बे-वजह   मुस्‍कुराओ    कभी  ।याद  करके  किसी  बात  को .. खु़द-ब-ख़ुद  खिलखिलाओ कभी ।...
मनोज अबोध...
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  May 6, 2012, 3:15 pm
व्‍यक्तिगत  टिप्‍पणी,  फिर  कभी ।हम में जो कुछ ठनी, फिर  कभी  । चन्‍द  पल   पास   बैठो   जरा....आपसी  दुश्‍मनी,   फिर   कभी  । ...
मनोज अबोध...
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  May 4, 2012, 12:18 pm
सपनों से दिल लगाना  है अच्‍छा  कभी-कभीबस, यूं ही मुस्‍कुराना है अच्‍छा  कभी-कभीहै प्‍यार तो आएगा,  मनाने   भी वो जरूरबे-वजह रूठ   जाना  है  अच्‍छा  कभी-कभी ।। 0000000000000000000000000000000000...
मनोज अबोध...
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  May 3, 2012, 11:09 am
वो  मिले, पर मिले  भी नहीं ।गुल खिले, पर खिले  भी नहीं । देख  लेते  थे  पहले   उन्‍हें... अब तो ये सिलसिले  भी नहीं ।...
मनोज अबोध...
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  April 28, 2012, 3:34 pm
दर्द  की ये दवा  क्‍या  करूँ  ।तू नहीं   तो वफ़ा क्‍या करूँ ।हर खुशी थी जो तुम साथ थेमैं अकेला बता क्‍या करूँ ।...
मनोज अबोध...
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  April 28, 2012, 3:30 pm
जब भी यूँ मुस्‍कुराते हो  तुम ।स्‍वप्‍न कितने दिखाते हो तुम ।बदलियों-सा  बरस जाऊँगा....क्‍यों मुझे गुदगुदाते हो  तुम । ...
मनोज अबोध...
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  April 26, 2012, 1:48 pm
मित्र, यदि  शायरी  जरूरी है ।आपकी  टिप्‍पणी  जरूरी है ।ताम्र को स्‍वर्ण बनाने के लिएये  कीमियागरी  जरूरी  है ।...
मनोज अबोध...
Tag :मुक्‍तक
  April 9, 2012, 8:15 am
जब भी लेखन की बात होती है ।इसको शह, उसको मात होती है ।वो दलित, मैं सवर्ण,  तू नारी....लेखकों की भी ‘जात ‘ होती है ।...
मनोज अबोध...
Tag :मुक्‍तक
  April 7, 2012, 12:02 pm
झूठ  की  चाशनी  मत  करो  ।सत्‍य  पर  तर्जनी  मत  करो  ।चाहते  हो  अगर  मित्रता ....आतिशी  टिप्‍पणी  मत  करो  ।...
मनोज अबोध...
Tag :मुक्‍तक
  April 6, 2012, 8:29 am
सोच का निष्‍क्रमण  प्रेम है  ।भाव का अतिक्रमण  प्रेम है  ।या, अचानक हृदय कक्ष  में.. साध्‍य का अवतरण  प्रेम है  ।...
मनोज अबोध...
Tag :मुक्‍तक
  April 5, 2012, 11:24 am
नेह  का (इ)स्‍फुरण  प्रेम  है ।प्रीत का  अभिकरण  प्रेम  है ।स्‍वांस- दर–स्‍वांस  जीते  हुएप्रेम   तो  आमरण  प्रेम  है।...
मनोज अबोध...
Tag :मुक्‍तक
  April 4, 2012, 7:23 am
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