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दास्तां उनकी अलग, मेरी कहानी और हैमैं तो दरिया हूं मेरे अंदर रवानी और है.कौन समझेगा हमारी कैफ़ि‍यत अबके बरसकह रही है कुछ ज़बां लेकिन कहानी और है.वो अगर गूंगा नहीं होगा तो बोलेगा ज़रूरचुप लगा जाना अलग है, बेजु़बानी और है.आपने अबतक ज़मीं की तह में देखा ही नहींऔर बर्फ़ीली नद...
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  October 2, 2016, 2:23 pm
हर घड़ी ग़म से आशनाई है.ज़िंदगी फिर भी रास आई है.आस्मां तक पहुंच नहीं लेकिनकुछ सितारों से आशनाई है.अपने दुख-दर्द बांटता कैसेउम्रभर की यही कमाई है.ख्वाब में भी नज़र नहीं आतानींद जिसने मेरी चुराई है.अब बुझाने भी वही आएगाआग जिस शख्स ने लगाई है.काफिले सब भटक रहे हैं अबरहनुम...
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  June 30, 2016, 2:17 am
https://www.youtube.com/watch?v=qxhwTDI1lZQ...
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  June 25, 2016, 5:28 pm
और कुछ दूर काफिला तो चले.हम कहां हैं, हमें पता तो चले.हमसफर की तलब नहीं हमकोसाथ कदमों के रास्ता तो चले.बंद कमरे में दम निकलता हैइक जरा सांस भर हवा तो चले.हर हकीक़त बयान कर देंगेआज बातों का सिलसिला तो चले.अपनी मर्जी के सभी मालिक हैंकोई कानून-कायदा तो चले.वो अकेले कहां-कहां ...
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  June 11, 2016, 1:24 am
अपनी रफ़्तार दे गया है मुझेजब कोई रहनुमा मिला है मुझेवक़्त के साथ इस ज़माने मेंहर कोई भागता मिला है मुझेउससे मिलने का या बिछड़ने काकोई शिकवा न अब गिला है मुझेतजरबे हैं जो खींच लाते हैंवर्ना अब कौन पूछता है मुझेक्या बताएगा अब नजूमी भी‘अपने अंजाम का पता है मुझे’वैसी सूरत उ...
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  May 4, 2016, 4:00 pm
फुगाओं से निकलूं तो आहों में आऊं.कदम-दर-कदम बेपनाहों में आऊं.मैं चेहरों के जंगल में खोया हुआ हूंमैं कैसे तुम्हारी निगाहों में आऊं.कभी मैं अंधेरों की बाहें टटोलूंकभी रौशनी की पनाहों में आऊं.मैं इक सनसनीखेज़ किस्सा हूं गौयाशराफत से निकलूं गुनाहों में आऊं.अभी तक तो पगडं...
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  February 28, 2016, 3:49 pm
(जेएनयू प्रकरण पर)तिल का ताड़ बना बैठे.कैसी आग लगा बैठे.वही खता दुहरा बैठे.फिर इतिहास भुला बैठे.फर्क दोस्त और दुश्मन काकैसे आप भुला बैठे.पुरखों के दामन में वोगहरा दाग लगा बैठे.सबका हवन कराने मेंअपने हाथ जला बैठे.उसकी गरिमा रख लीजेजिस कुर्सी पर जा बैठे.बैठे-बैठे वो हमकोक...
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  February 17, 2016, 4:17 pm
               उलझनों की धुंद सबके ज़ेहन में फैली हुई सी.वक़्त की गहराइयों में ज़िंदगी उतरी हुई सी.हर कोई अपनी हवस की आग में जलता हुआ साऔर कुछ इंसानियत की रूह भी भटकी हुई सी.आपकी यादें फज़ा में यूं हरारत भर रही हैंधूप जैसे चांदनी रातों में हो घुलती हुई सी.बर्फ से जम...
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  February 7, 2016, 6:43 pm
                              रहगुजर पे रहबरों की रहबरी रह जाएगी.ज़िंदगी फिर ज़िंदगी को ढूंढती रह जाएगी.मैं चला जाउंगा अपनी प्यास होठों पर लिएमुद्दतों दरिया में लेकिन खलबली रह जाएगी.रौशनी की बारिशें हर सम्त से होंगी मगरमेरी आंखों में फरोजां तीरगी रह जाएगी....
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  February 1, 2016, 3:14 pm
आंच शोले में नहीं, लह्र भी पानी में नहीं.और तबीयत भी मेरी आज रवानी में नहीं.काफिला उम्र का समझो कि रवानी में नहीं.कुछ हसीं ख्वाब अगर चश्मे-जवानी में नहीं.खुश्क होने लगे चाहत के सजीले पौधेऔर खुशबू भी किसी रात की रानी में नहीं.क्या जरूरी है उसे सबको सुनाया जाएकुछ नई बात अगर...
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  January 19, 2016, 1:51 pm
कोई सुर था न ताल था क्या थाबेख़ुदी का धमाल था क्या थाख्वाब था या खयाल था क्या थाहमको जिसका मलाल था क्या थातुमने पत्थर कहा, खुदा हमनेअपना-अपना ख़याल था क्या थाआग भड़की तो किस तरह भड़कीजेहनो-दिल में उबाल था क्या थासारे किरदार एक जैसे थेहर कोई बेमिसाल था क्या थामौत को हम गल...
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  October 18, 2015, 1:58 pm
मन की गहराई का अंदाजा न था.डूबकर रह जायेंगे, सोचा न था.कितने दरवाज़े थे, कितनी खिड़कियांआपने घर ही मेरा देखा न था                                                    एक दुल्हन की तरह थी ज़िन्दगीगोद में उसके मगर बच्चा न था.                           &n...
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  July 22, 2015, 9:16 pm
मसअ़ले अपने सुलझते ही नहीं.पेंच इतने हैं कि खुलते ही नहीं.हम कसीदे पर कसीदे पढ़ रहे हैंआप पत्थर हैं पिघलते ही नहीं.लोग आंखों की जबां पढ़ने लगे हैंकोई बहकाये बहकते ही नहीं.बात कड़वी है, मगर सच है यहीजो गरजते हैं, बरसते ही नहीं.चार अक्षर पढ़ के आलिम हो गयेपांचवा अक्षर समझत...
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  July 9, 2015, 3:56 pm
न नौसबा की बात है, न ये किसी बयार कीये दास्तान है नजर पे रौशनी के वार कीकिसी को चैन ही नहीं ये क्या अजीब दौर हैतमाम लोग लड़ रहे हैं जंग जीत-हार कीन मंजिलों की जुस्तजू, न हमसफर की आरजून काफिलों की चाहतें न गर्द की, गुबार कीजहां तलक है दस्तरस वहीं तलक हैं हासिलेंन कोशिशों की ...
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  July 1, 2015, 2:42 pm
हर तलातुम से गुज़र जाना हैदिल के दरिया में उतर जाना हैज़िंदा रहना है कि मर जाना है‘आज हर हद से गुज़र जाना है’मौत की यार हक़ीक़त है यहीबस ये अहसास का मर जाना हैपेड़ से टूट गए हैं जैसेखुश्क पत्तों सा बिखर जाना हैसब ज़मींदोज़ उभर आये हैंअब दुआओं का असर जाना हैवादा करना तो अदा है उनक...
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Tag :तरही गज़ल
  February 26, 2015, 1:27 pm
और जीने की रज़ा चाहती हैज़िंदगी मेरा बुरा चाहती हैआंधियों से न बचाये जायेंजिन चराग़ों को हवा चाहती हैसर झुकाये तो खड़ा है हर पेड़और क्या बादे-सबा चाहती हैबंद कमरे की उमस किस दरजाहर झरोखे की हवा चाहती हैमेरी तकलीफ़ बिछड़ कर मुझसेमुझको पहले से सिवा चाहती है--देवेंद्र ग...
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  January 7, 2015, 4:02 pm
जो अपना नाम किसी फन में कर गए रौशन.उन्हीं के नक्शे-कदम पर हैं काफिले रौशन.ये कैसे दौर से यारब, गुजर रहे हैं हमन आज चेहरों पे रौनक न आइने रौशन.किसी वरक़ पे हमें कुछ नजऱ न आएगाकिताबे-वक्त में जब होंगे हाशिये रौशनहवेलियों पे तो सबकी निगाह रहती हैकिसी गरीब की कुटिया कोई करे र...
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  December 31, 2014, 11:37 am
जो अपना नाम किसी फन में कर गए रौशन.उन्हीं के नक्शे-कदम पर हैं काफिले रौशन.ये कैसे दौर से यारब, गुजर रहे हैं हमन आज चेहरों पे रौनक न आइने रौशन.किसी वरक़ पे हमें कुछ नजऱ न आएगाकिताबे-वक्त में जब होंगे हाशिये रौशनहवेलियों पे तो सबकी निगाह रहती हैकिसी गरीब की कुटिया कोई करे र...
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  December 31, 2014, 11:37 am
सबकी नज़रों से जुदा हो जाए.उसने चाहा था ख़ुदा हो जाए.चीख उसके निजाम तक पहुंचेवर्ना गूंगे की सदा हो जाए.अपनी पहचान साथ रहती हैवक़्त कितना भी बुरा हो जाए.थक चुके हैं तमाम चारागरदर्द से कह दो दवा हो जाए.उसके साए से दूर रहता हूंक्या पता मुझसे खता हो जाए.कुछ भला भी जरूर निकलेग...
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  December 12, 2014, 4:08 pm
कु़दरत की मस्ती को कायम रहने दो.मत बांधो, सारी नदियों को बहने दो.आसमान को चाहो तो छू सकते होधरती को अपनी धूरी पर रहने दो.बंगला-गाड़ी की उसको दरकार नहींरौशनदान में गोरैया को रहने दो.बुरे-भले का फर्क जमाना कर लेगाहम जो कहना चाह रहे हैं, कहने दो.हम तो उनकी ईंट से ईंट बजा देंगे...
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Tag :शायरी
  May 16, 2014, 11:57 pm
अंधी सी इक डगर थी, कोई राहबर न थाहम उसको ढूंढते थे उघर, वो जिधर न थाइतना कड़ा सफ़र था कि रूदाद क्या कहेंहर सम्त सिर्फ़ धूप थी, कोई शज़र न थाअहबाब की कमी न थी राहे-हयात मेंलेकिन तुम्हारे बाद कोई मोतबर न थासुनने को सारे शहर की सुनते थे हम मगरहम पर किसी की बात का कोई असर न थारखते ...
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  March 30, 2014, 1:10 am
तमाम उम्र अंधेरों ने जिसको पाला है.उसी के नाम पे कायम अभी उजाला है.छुपा के रखता है खुद को सफेद कपड़ों मेंहमें पता है, वो अंदर से बहुत काला है.हम अपने आप ही गिरते हैं और संभलते हैंयहां किसी को किसी ने कहां संभाला है.सब अपने-अपने हिसारों में कैद रहते हैंतुम्हारे शह्र का दस्...
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  February 1, 2014, 11:02 pm
तमाम उम्र अंधेरों ने जिसको पाला है.उसी के नाम पे कायम अभी उजाला है.छुपा के रखता है खुद को सफेद कपड़ों मेंहमें पता है, वो अंदर से बहुत काला है.हम अपने आप ही गिरते हैं और संभलते हैंयहां किसी को किसी ने कहां संभाला है.सब अपने-अपने हिसारों में कैद रहते हैंतुम्हारे शह्र का दस्...
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  February 1, 2014, 11:02 pm
मित्रो,मेरी ग़ज़लों का पहला संकलन आख़री मुकाम धुआं ज्योति पर्व प्रकाशन, गाजियावाद से प्रकाशित हो रहा है। फरवरी 2014 में विश्व पुस्तक मेला में इसका लोकार्पण होगा। इसका कवर आप इस लिंक पर देख सकते हैं।-देवेंद्र गौतमhttps://www.facebook.com/photo.php?fbid=10201960835277204&set=a.1632079956599.2082757.1074652902&type=1&relevant_count=1m/...
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  January 13, 2014, 9:42 pm
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