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आज जीवन के ३१ वसंत पूरे हुए। जीवन का यह साल बहुत कुछ लेकर आया। थोड़ा संतुष्ट हूं इस साल की उपलब्धियों को लेकर। बहुत-कुछ काम हुआ। सामाजिक दायरा भी बड़ा। नए मित्र भी बने। यह एक पड़ाव था। अब आगे का सफर शुरू करना है। सुखद बात यह है कि मेरे जीवन में अच्छे लोगों की बाढ़ आ गई है। ...
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Tag :
  January 14, 2015, 5:28 pm
 यु वा नायक स्वामी विवेकानन्द को याद करते ही बुद्धि, हृदय और शरीर में ऊर्जा का संचार होने लगता है। स्वामी विवेकानन्द सबके प्रेरणा स्रोत हैं। लेकिन, युवाओं के तो वे हृदय सम्राट हैं। यही कारण है कि उनकी जयंती (१२ जनवरी) युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। देश की वर्तमान पर...
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Tag :व्यक्तित्व
  January 12, 2015, 12:36 pm
 ध र्मान्तरण पर हिन्दू संगठनों खासकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पानी पी-पीकर गाली दे रहे तथाकथित सेक्यूलरों ने शायद इतिहास के पन्ने नहीं पलटे। वैसे भी ये 'सेक्यूलर जमातें'तो इतिहास को अपने हिसाब से रचने के लिए कुख्यात हैं। यदि इतिहास का निष्पक्ष अध्ययन 'सेक्यूलरों'...
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Tag :धर्मान्तरण
  January 9, 2015, 2:02 pm
 व्या वसायिक पत्रकारिता में रहकर निरन्तर करुणा, बुद्धि और विवेक के चिन्तन की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। आधुनिकरण के नाम पर जब देश-समाज अपना 'स्व-भाव'खो रहा है तब गुलाब कोठारी अपने नियमित स्तम्भ 'स्पंदन'और 'मानस'में लगातार भारतीय मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति के संरक...
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Tag :मीडिया विमर्श
  January 6, 2015, 9:00 am
 प्र ख्यात लोहियावादी-समाजवादी चिंतक राजकिशोर को क्रांतिकारी पत्रकार, लेखक और साहित्यकार कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा। अपने समय की राजनीति, पत्रकारिता, साहित्य और समाज व्यवस्था पर अपनी कलम को पैना करना और तमाम सवालों की खोज में उनके समाधान प्रस्तुत करते हुए नए सवाल...
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Tag :मीडिया विमर्श
  January 2, 2015, 9:00 am
 दृ श्य एक।सुबह के पांच बजे का समय है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी वर्ष प्रतिपदा का मौका है। ग्वालियर शहर के लोग शुभ्रवेश में जल विहार की ओर बढ़े जा रहे हैं। जल विहार के द्वार पर धवल वस्त्र पहने युवक-युवती खड़े हैं। उनके हाथ में एक कटोरी है। कटोरी में चंदन क...
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Tag :भारत वैभव
  December 31, 2014, 12:42 pm
 द मदार लेखन शैली और प्रभावशाली वक्तृत्व कला डॉ. वेदप्रताप वैदिक की ताकत है। लेकिन, हिन्दी के सम्मान के लिए लड़ाई उनकी पहचान है। रूसी, फारसी, अंग्रेजी और संस्कृत सहित अन्य भारतीय भाषाओं को जानने वाले डॉ. वेदप्रताप वैदिक अपने हिन्दी प्रेम को लेकर सर्वाधिक चर्चित तब हु...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 30, 2014, 9:00 am
 दु नियाभर का काम, सांसद होने से बाय प्रोडक्ट मिली तमाम व्यस्तताएं और सामाजिक गतिविधियों में सक्रियता के बाद भी आप उन्हें नियमित पढ़ पाते हैं, राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व का मजबूती से पक्ष रखने के लिए कटिबद्ध तरुण विजय ही यह कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साप्...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 22, 2014, 9:00 am
 प त्रकारिता के गिरते मूल्यों और घटती साख के बीच राहुल देव एक ऐसा नाम है जो पत्रकारिता के सामाजिक सरोकारों और भारतीय भाषाओं के वजूद के लिए लम्बी लड़ाई लड़ रहा है। हिन्दी पत्रकारिता में राहुल देव का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने 30 साल से भी अधिक वक्त इल...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 20, 2014, 8:00 am
 स फल लोग कभी कुर्सी पर बैठकर आराम नहीं कर सकते। उन्हें लगातार काम में व्यस्त रहने में ही आराम मिलता है। जिस उम्र में अधिकतर लोग अपने काम से ही नहीं अपनी जिम्मेदारियों से भी सेवानिवृत्ति ले लेते हैं, 71 वर्षीय विजय सहगल आज भी पत्रकारिता, लेखन और अध्यापन में सक्रिय हैं। ...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 15, 2014, 9:00 am
 ल गभग 50 साल से पत्रकारिता में सक्रिय श्रवण गर्ग हिन्दी मीडिया के नायाब हीरे हैं। वे उस कुम्हार की तरह हैं, जो काली-पीली मिट्टी से बेहद खूबसूरत और जरूरी बर्तनों को आकार देता है। हिन्दी पत्रकारिता में दैनिक भास्कर को ब्रांडनेम बनाने के लिए उन्हें सदैव याद रखा जाएगा। ल...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 12, 2014, 9:00 am
 को लकाता अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के लिए जितना प्रसिद्ध है, उतना ही अपनी भव्य इमारतों और दौड़ती-भागती जिन्दगी के लिए भी। यह दीगर बात है कि ज्यादातर भव्य इमारतें बूढ़ी हो चुकी हैं। ये ठीक वैसे ही दुर्दशा की शिकार हैं, जैसे नालायक औलाद की अनदेखी से बूढ़े मां-बा...
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Tag :पर्यटन
  December 10, 2014, 1:44 pm
 ए क युवक, जिसे डॉक्टरों के मुताबिक 12-13 साल पहले करीब 30 वर्ष की आयु में ही दुनिया को अलविदा कह देना था। अंग्रेजी दवाओं के साइड इफैक्ट से जिसका शरीर खोखला हो चुका था। फेफड़े और लीवर डैमेज की स्थिति में थे। वह युवक छोटी उम्र से डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहा था। आंखों की र...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 8, 2014, 9:00 am
 ध रती पर अगर स्वर्ग कहीं है तो वह है जम्मू-कश्मीर। लेकिन, जम्मू-कश्मीर की बड़ी आबादी को भयंकर कष्ट भोगने को विवश होना पड़ रहा है। स्वर्ग का सुख उनके नसीब में नहीं है। लाखों की संख्या में कश्मीरी पण्डितों को अपने ही देश में विस्थापित होकर बसर करना पड़ रहा है। अपने ही दे...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 5, 2014, 10:00 am
 उ न्हें पत्रकार, संगठक, लेखक, चिंतक, विचारक, शिक्षाविद और साहित्यकार के रूप में पहचाना जाता है। उनको चाहने वाले हर भूमिका में उन्हें फिट पाते हैं। उन्होंने भी प्रत्येक जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाया है। पत्रकारिता के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान माखनलाल चतुर्वेदी ...
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Tag :मीडिया विमर्श
  December 1, 2014, 9:00 am
साँची स्थित मुख्य स्तूप (स्तूप क्रमांक-1) फोटो :लोकेन्द्र सिंह/Lokendra /Singh  जी वन में चलने वाले रोज-रोज के युद्धों से आपका मन अशांत है, आपकी आत्मा व्यथित है, आपका शरीर थका हुआ है तो बौद्ध तीर्थ सांची चले आइए आपके मन को असीम शांति मिलेगी। आत्मा अलौकिक आनंद की अनुभूति करेगी। श...
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Tag :पर्यटन
  November 28, 2014, 2:30 pm
 अ नूठी लेखन शैली, वाकपटुता, प्रतिबद्धता, गंभीर अध्ययन, बेबाक बयानी और धारदार तर्क प्रेम शुक्ल को निर्भीक पत्रकारों की श्रेणी में सबसे आगे खड़ा करते हैं। मंच से भाषण दे रहे हों, टीवी चैनल्स पर बहस में शामिल हों या फिर पत्रकार के रूप कलम चला रहे हों, प्रेम शुक्ल में दिल-द...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 27, 2014, 9:30 am
 प त्रकार की चेतावनी को नजरअंदाज करना कितना घातक साबित हो सकता है, दुनिया में इसका सबसे बड़ा उदाहरण है भोपाल गैस त्रासदी। राजकुमार केसवानी उस पत्रकार का नाम है, जो वर्ष 1984 में हुई भीषणतम गैस त्रासदी की ढाई साल पहले से चेतावनी देते आ रहे थे। हुक्मरानों ने अगर उनकी चेताव...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 26, 2014, 9:00 am
 क रीब तीन साल पहले तक प्राइम टाइम में भूत-प्रेत की कहानियां, रियलिटी शो और मनोरंजन के नाम पर फूहड़ सामग्री दिखा रहे टीवी चैनल्स की स्क्रीन अब कुछ बदली-बदली सी नजर आती है। प्राइम टाइम में न्यूज चैनल्स पर सार्थक बहस और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर शुद्ध खबरें अब दिखने ल...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 24, 2014, 9:00 am
 प्र ख्यात गांधीवादी चिंतक मणिमाला, सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता में एक जाना-पहचाना नाम हैं। पत्रकारिता उनके लिए फैशन नहीं पैशन है। पत्रकारिता उन्हें समाज में सार्थक बदलाव लाने का एक प्रभावी जरिया लगा। इसीलिए पढ़ाई के दौरान ही वे लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 21, 2014, 9:00 am
 प्र त्येक पत्रकार की इच्छा होती है कि वह राजनीतिक या फिर अपराध पत्रकारिता में सबसे चर्चित नाम बन जाए। मीडिया जगत में उसकी धमक हो। बड़े से बड़ा राजनेता या फिर अंडरवर्ल्ड के कुख्यात गुण्डे सबसे पहले उससे बात करें। लेकिन, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बड़ी मेहनत तो लगती ह...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 10, 2014, 8:00 am
 बा जार की होड़ के साथ-साथ सामाजिक प्रतिबद्धता, पाठकों की रुचि और बेहतर मापदंडों के बीच कोई समाचार-पत्र कैसे संतुलन कायम रख सकता है, यह साबित करके दिखाया था हिन्दी पत्रकारिता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर अभय छजलानी ने। पिछले 40-50 वर्षों में अखबार मालिक से लेकर संपादक तक उन्...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 7, 2014, 10:00 am
 जि सकी कथनी-करनी-लेखनी में राष्ट्र सबसे पहले रहा और है। न्यूजरूम में जिसने कागद कारे करने से पहले राष्ट्र का चिंतन किया और करता है। दमदार लेखनी, स्पष्ट सोच, अनथक श्रम करने का माद्दा, घुमक्कड़ी और मिलनसार स्वभाव, ये कुछ गुण हैं जो हितेश शंकर को भीड़ से अलग पहचान दिलाते ...
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Tag :मीडिया
  November 3, 2014, 9:00 am
 व्या वसायिक पत्रकारिता के दौर में भी पत्रकारिता किसी के लिए मिशन बनी रही तो वह नाम है जयकिशन शर्मा का। सामाजिक चेतना और सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए पत्रकारिता को औजार बनाने वालों में जयकिशन शर्मा का नाम ऊपर आता है। उनका स्पष्ट मानना है कि पत्रकार का मूल कार्य है ...
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Tag :मीडिया विमर्श
  November 1, 2014, 9:00 am
 आ धुनिक भारत के शिल्पी सरदार वल्लभ भाई पटेल के विचार, कर्म और उनकी स्मृतियां मन को रोमांच और गौरव से भर देती हैं। वे ऐसे राष्ट्रभक्त महापुरुष थे जिनके लिए 'राष्ट्र सबसे पहले'था। सरदार सही मायने में राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे और हैं। उनकी जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिव...
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Tag :जवाहरलाल नेहरू
  October 31, 2014, 8:30 am
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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