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शब्‍द श्‍यामल : View Blog Posts
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शब्‍द श्‍यामल

000000000000000 000000000000000ऊपरी तौर पर चाहे भले सर्जिकल स्‍ट्राइक का हमारा यह कदम उरी के कुकृत्‍य की बदले की कार्रवाई जैसा दिख रहा हो, हकीकत में यह दरअसल ऐसा है नहीं। यह तो मानवता की रक्षा के लिए किया गया एक जरूरी और यादगार हतस्‍तक्षेप है! कोई आश्‍चर्य नहीं कि ओसामा बिन लादेन को मारन...
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Tag :
  September 30, 2016, 7:51 am
सुपुत्र विशाल सिंह के 21 वें जन्‍म-दिन का उपहार अनुज निरंजनदेव और पापा श्‍यामल के साथ सबसे दाह‍िने तृषांत सिंह विशाल। दुनिया देखेगी वह नजारा नायाब मम्‍मी सविता सिंह, पापा श्‍यामल औरअनुज निरंजनदेव के साथ सबसे बाएं विशाल।दुनिया में बेमिसाल अपना विशालकमाल ही कमा...
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Tag :
  April 11, 2016, 12:01 am
   दिल्‍ली के बाद बिहार में मिली शिकस्‍त यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा खेमे का खेल अब आगे चलने से रहा। हमारा जनमानस और हमारी राजनीति एकबारगी वैसे मैनेजेबुल कदापि नहीं हैं जैसाकि उन्‍हें समझ लिया गया है। दिवास्‍वप्‍न दिखाने या काेमल भावनाएं छेड़ने वाले फार्मूल...
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Tag :Exclusive
  November 8, 2015, 6:57 pm
दैनिक जागरण में 27 अप्रैल 2007 को प्रकाशित रिपोर्टशोध / श्‍यामबिहारी श्‍यामलमैकूकथा सम्राट प्रेमचंद का जीवित पात्रबनारस के पाण्डेयपुर चौराहे के पास कुम्हार बस्ती में एक शतायु वृद्ध की झाग जैसी निस्‍तेज आंखों में आज भी कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद और उनका युग झिलमिलाते द...
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Tag :Report
  August 8, 2015, 1:02 pm
'हंस'का बत्‍तख-विवेकबनाम हिन्‍दी की राजेंद्र लीला     राजेंद्र यादव के ढाई दशक पहले के रचनात्‍मक अवदान पर उनका बाद का बौद्धिक प्रयास  भारी रहा। भविष्‍य का कोई इतिहासकार जब इस मुल्‍क के बीसवीं सदी के आखिरी और इक्‍कीसवीं के आरंभिक दशकों के समूचे परिदृश्‍य की तल...
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Tag :Report
  August 8, 2015, 1:02 pm
1967 के भीषण अकाल के दौर में संपादक अज्ञेय के नेतृत्‍व में फणीश्‍वरनाथ रेणु समेत 'दिनमान'की जो टीम पलामू आई थी, उसके मुख्‍य संपर्क-सूत्र के रूप में कर्ण जी की ही भूमिका रही। किसी समय 'गीतों के राजकुमार'के रूप में पुकारे जाने वाले कविवर गोपाल सिंह नेपाली भी उन्‍हीं के संपर...
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Tag :
  June 23, 2014, 7:07 am
सोनभद्र के विख्‍यात अमिला वन में यात्रा के दौरान 31 मार्च 2014 को तृषांत सिंह।बड़े सु-पुत्र तृषांत का आज जन्‍म-दिन  दुलरुआ तृषांत बबुआ विशाल जितना सरल उतना गहन प्रशांत संसार भर में अव्‍वल मेरा तृषांतमम्‍मी सविता का वही दुलरुआ हमारा तो वह सदाबहार बबुआआंखों में व...
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  April 11, 2014, 6:42 am
सखा निलय श्‍याम बिहारी श्‍यामल सखा-भाव के महासमुद्र का जिसमें हो चुका विलयवही शख्‍स तो चमक रहा आज बनकर कवि निलयबिसरा नहीं है दो दशक पुराना धनबाद का वह दृश्‍यआरा से आए कवि-मित्र के प्रेम का विरल परिदृश्‍य बंधुवर शिवदेव के बाग में जमे थे हम साथी दो-चारचली देर तक संस्...
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  January 28, 2014, 4:44 pm
जश्‍न दर जश्‍न प्रश्‍न पर प्रश्‍न  राष्‍ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर'को गणतंत्र-दिवस पर आज स्‍मरण करते हुए अनेक मनोभाव जाग रहे हैं। देखने की बात तो यह कि उन्‍होंने स्‍वतंत्रता का विभोर कर देने वाला जश्‍न ही नहीं शब्‍दबद्ध किया, बल्कि बाद के हालात देख विचलित करने व...
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Tag :
  January 26, 2014, 6:34 am
भांति-भांति के जीव-निजीर्वों से भरी है यह आभाषी दुनिया। कौन कब कहां क्‍या शिगूफा या जहर उगलकर लीपने में जुट जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में किसी विचारवान व्‍यक्ति का सक्रिय रहना कितना राहत देने और भरोसा बनाए रखने वाला हो सकता है, फेसबुक पर आदरणीय अग्रज मोहन श्रोत्रि...
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  December 6, 2013, 2:07 pm
 चमक रहा महाकवि का अनन्‍य आंगन दिव्‍य यह कामायनी का भव्‍य प्रांगण श्‍यामबिहारी श्‍यामल     काशी के सरायगोवर्द्धन में विख्‍यात प्रसाद-प्रांगण में 25 नवंबर 2013 की शाम कुछ खास रही। हमारी भाषा में तुलसीदास के बाद सबसे बड़े कवि जयशंकर प्रसाद की प्रपौत्री दिव्‍या के पा...
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  November 28, 2013, 4:57 pm
निरंजन अनुपम-अनोखादिमाग में जिसके झर-झर झरता जिज्ञासाओं का झरनाजिसकी हर लम्‍हे की फितरत कुछ न कुछ करते रहनाजिद ऐसी कि हजार वोल्‍ट जैसे अचानक दहकने लग जाएंमम्‍मी सविता की एक नजर पर ज्‍वालामुखी प्रपात हो जाएकल्‍पनारत, सृजनशील और अध्‍ययनलीन जो हरदम वह निरंजन अखिल वि...
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  November 19, 2013, 6:09 am
ओमप्रकाश वाल्‍मीकि का जाना भारतीय साहित्‍य के ऐसे नक्षत्र का अंतर्धान होना है जिसने पहली बार स्‍वानुभव  की अभिव्‍यक्ति से हमारे समाज के प्रभु वर्ग को विचलित करते हुए शब्‍द-कर्म की नई भूमिका रची और इसे यादगार ढंग से साबित भी करके दिखाया। उनकी आत्‍मकथा 'जूठन'को इसी अ...
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  November 17, 2013, 4:24 pm
ी इस शख्‍स को श्रद्धांजलि नहीं बहसांजलि दीजिएश्‍याम बिहारी श्‍यामल      'नई कहानी'के तीसरे और अंतिम स्‍तंभ राजेंद्र यादव का निधन अपने समूचे शाब्दिक अर्थों में हिन्‍दी साहित्‍य की कभी न भरने वाली क्षति है। वह विचार को अकेले एकांत में कलम की सलाइयों पर बुनते र...
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  October 29, 2013, 7:12 am
चाहे जितने-जैसे सवाल, पर मिसाल बेमिसाल नामवर सिंहश्‍यामबिहारी श्‍यामल नामवर जी हमारे साहित्‍य समाज में ऐसे पहले व्‍यक्तित्‍व हैं जिसका विरोध-प्रतिरोध बेशुमार हुआ या होता रहा है तो इसके समानांतर ही उनका बहुआयामी सर्व-स्‍वीकारभी बेमिसाल। उनके प्रति गहरी जिज्ञासा ...
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  May 1, 2013, 3:47 pm
उत्‍तर प्रदेश के मऊ में चौदह अप्रैल ( 2013 ) को राहुल सांकृत्‍यायन सृजनपीठ के पुस्‍तकालय का उद्घाटन करने पहुंचे शीर्षस्‍थ आलोचक डा. नामवर सिंह से चर्चा-लाभ का संक्षिप्‍त ही किंतु यादगार अवसर।  मऊ में चौदह अप्रैल (2013 ) को राहुल सांकृत्‍यायन सृजनपीठ के पुस्‍तकालय का उद्घ...
शब्‍द श्‍यामल...
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  April 21, 2013, 9:46 pm
यह गद्य-उद्यम इसलिए भी संभव हो सका है क्‍योंकि भारत यायावर ने हिन्‍दी के जातीय से लेकर समकालीन साहित्‍य और दैनंदिनी के मीडियायी लेखन तक का जैसा नियमित मंथन-अध्‍ययन किया है, यह कम से कम उनकी अपनी पीढ़ी में तो अन्‍यतम है। उन्‍हें जानने वालों को पता है कि कैसे उनकी दिनच...
शब्‍द श्‍यामल...
Tag :
  December 30, 2012, 9:59 pm
यह गद्य-उद्यम इसलिए भी संभव हो सका है क्‍योंकि भारत यायावर ने हिन्‍दी के जातीय से लेकर समकालीन साहित्‍य और दैनंदिनी के मीडियायी लेखन तक का जैसा नियमित मंथन-अध्‍ययन किया है, यह कम से कम उनकी अपनी पीढ़ी में तो अन्‍यतम है। उन्‍हें जानने वालों को पता है कि कैसे उनकी दिनच...
शब्‍द श्‍यामल...
Tag :
  December 30, 2012, 9:59 pm

यह गद्य-उद्यम इसलिए भी संभव हो सका है क्‍योंकि भारत यायावर ने हिन्‍दी के जातीय से लेकर समकालीन साहित्‍य और दैनंदिनी के मीडियायी लेखन तक का जैसा नियमित मंथन-अध्‍ययन किया है, यह कम से कम उनकी अपनी पीढ़ी में तो अन्‍यतम है। उन्‍हें जानने वालों को पता है कि कैसे उनकी दिनच...
शब्‍द श्‍यामल...
Tag :
  December 30, 2012, 9:59 pm
    जयशंकर प्रसाद के जीवन-युग पर आधारित उपन्‍यास  कंथा     ए‍क अंश                           दिशाकाशश्याम बिहारी श्यामल  आंगन में गवनई की मधुर-मृदुल धारा बह चली। कण-कण राग-रंजित, क्षण-क्षण ताल-तरंगित। रजवंती की मंडली की धूम। बलाघात की पीड़ा की कोख से ही तो जनमती हैं राग-रागिनियां,...
शब्‍द श्‍यामल...
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  November 24, 2012, 9:03 am
रोशनी की धरती प्रकाश का आकाश                        श्‍याम बिहारी श्‍यामलजहां भी अंधकार उठे, दीप से दीप जलेरोशनी का काफिला चलता चले चलता चलेरुके नहीं थके न कभी ज्‍योति का अभियान यहहर अंधेरे की छाती पर दीया यह मूंग दलेजब भी करें अट्टास अज्ञान अहंकार अतिवाद ज्‍योति का अग्नि-आ...
शब्‍द श्‍यामल...
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  November 13, 2012, 9:11 am
...
शब्‍द श्‍यामल...
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  October 31, 2012, 6:55 pm
    लघुकथा क्षेत्र बुद्धि वंचित बौनों   का कैसे बना अभयारण्‍य   हिन्‍दी में लघुकथा की भी बुनियाद हमारे भाषा-साहित्‍य के जनक भारतेंदु बाबू हरिश्‍चंद्र के साहित्‍य में ही खोजी गई है। बाद के दौर में अनेक बड़े नामों के खाते में भी लघुकथाएं दर्ज हैं। इनमें प्रतिनिधि तौर प...
शब्‍द श्‍यामल...
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  October 26, 2012, 10:58 am
तीन तिलंगे जुटकर कभी पटना में कोई 'राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन' ठोंक देते हैं तो कभी चार चौकड़ी एकत्र हो अन्‍यत्र कोई 'अन्‍तर्राज्‍यीय सम्‍मेलन'। ऐसी हरकतों से जो हश्र स्‍वाभाविक है, वही सामने है। लघुकथा क्षेत्र अंतत: हिन्‍दी साहित्‍य का एक ऐसा इलाका होकर रह गया है जिस...
शब्‍द श्‍यामल...
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  October 26, 2012, 10:58 am
जिस हिन्‍दी आलोचना को रुद्र काशिकेय की उपेक्षा के लिए अपराधी ठहराया जाना है उसके प्रथम पुरुष आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल से लेकर आज के सर्वमान्‍य अग्रेता डा. नामवर सिंह तक, सभी प्रमुख नाम तो बनारस से ही ताल्‍लुक रखते हैं। ऐसे में क्‍या कहा जाए, कितना कहा जाए या किसलिए कहा ...
शब्‍द श्‍यामल...
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  September 24, 2012, 7:45 am
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