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दीपक बाबा की बक बक : View Blog Posts
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दीपक बाबा की बक बक

मैं कब से बकवास करता आ रहा हूँ, पर अब सरकार को भी पता चला है कि आई पी एल वाकई एक गन्दा खेल है. क्रिकेटर, उनकी पत्नियाँ, उनकीमाशुकें, उनके मित्र, उनके लोग, उनके बुकी, उनके सौदे और उनके सट्टे और कहीं तों दामाद भी सभी– सभी इस हमाम में नंगे नज़र आ रहे हैं, और मज़े की बात ये कि उनको इ...
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Tag :अखबारीलाल
  May 23, 2013, 8:32 pm
क्या ये जरूरी है है कि कवि बना जाएक्यों न एक इंसान बना जाए या फिर सवेदनशील पाठक जो अच्छे कवियों की रचनाओं को पढ़े खाली समय में उन्हें गाये गुनगुनाये मनन करे, पर इससे अच्छा है एक नागरिक भी तो बना जा सकता है जो कहीं, अपनी जुस्तजू में धक्के खाता रहे और दुष्यंत को गुनगुनाता र...
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Tag :कविताई
  May 20, 2013, 9:14 pm
आह ! हंगामेदार देश हमारा खुल गया मानो मुद्दों का पिटाराउत्तर से दक्खन तक सब-हारा सब-हारासंस्कारहीन युवा – सम दुश्शासन चरितर कराहती रहीं बेटियां और शर्मशार हुई नाररक्षक, व्यवस्था, कानून - सब हुए लाचारआईपीएल - नित नव बिगड़ैल खेलबेच गहने, तज नौकरी, पैसा बनाने का ये फंडाय...
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Tag :
  April 24, 2013, 4:27 pm
अरे भाई रे, नीचे से उपर आते आते इतने कागज के बंडल दिखे – मुझे तो घबराहट होने लगी,– ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी कागज की फेक्ट्री में आ गया हूँ, वैसे आप क्या छापते हैं,सफ़ेद बाल मोटा चश्मा और उम्र लगभग ७०-७२ साल, प्रश्न के साथ मुस्कुराहट थी,मैंने टेबल से टिफिन एक किनारे किया क...
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Tag :कहानी
  April 6, 2013, 3:49 pm
होली की राम राम जी,कल पूनम पाण्डेय जी होली खेलने बाबा के आश्रम आ रही है, सुधिजन  होली खेलने के लिए आश्रम में आमंत्रण है...१. गिलास खाली ले कर आना, भांग यहाँ घोटी जा रही है.२. शरीर के नाज़ुक अंग से हलके कपड़े पहने ताकि उसके फटने से पहले कपड़े फट जाएँ.आभार.पुनश्च: होली की हार्दि...
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  March 26, 2013, 7:19 pm
सुबह चार बजे से रात्री दस बजे तक ....तुम्हारे अथक परिश्रम को प्रणाम ...
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Tag :
  March 8, 2013, 1:05 pm
इस सेंट्रल पार्क में बहुत गंदगी थी, झील में पास के गाँव की भेंसे, सूअर पड़े रहते. जहाँ तहां पालतू कुत्तों की शीट नज़र आती. पर एक पालतू कुत्तों की शिट को नज़र अंदाज़ कर लें यानि नाक रुमाल से ढकने की बजाय नज़र को रुमाल से ढक दे तो पार्क साफ़ सुथरा मालूम होता है. पार्क की थोड़...
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  March 6, 2013, 4:14 pm
मुझे पश्तोनहीं आती पर पश्तो भाषा से बहुत प्यार है. मेरे दादा दादी – नाना नानी आपस में पश्तो में बात करते थे. हालाँकि पश्तो विदेश भाषा रही होगी. क्योंकि हमारी मातभाषा किड़्रकी रही है. वो बोली नहीं थी जैसा मैं घर मम्मी के साथ या श्रीमती के साथ बोलता हूँ – किसी जमाने में वो प...
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  February 27, 2013, 9:51 pm
मेरी माताजी कि आदत है, कि कितनी ही रजाइयां कम्बल को संभाल कर रखती हैं. ये न केवल स्टोरेज का ही काम है वरन उनको धुप में डालना.. उनमें दवाई की गोलियाँ रख करना. मुझे बहुत कोफ़्त होती है. क्या फायदा इतना सामान संभाल कर रखना. बोलती है - एक दिन भी मुश्किल हो जाता है कि घर में कोई मेह...
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  January 18, 2013, 5:47 pm
:: सूचना  ::राष्ट्रीय गौरव संस्थान-हरियाणा की मासिक पत्रिका 'राष्ट्रीय उद्घोष' का प्रवेश अंक जनवरी २०१३ का प्रकाशित हो चुका है. यदि आप राष्ट्रवादी विचारों से परिपूर्ण सामग्री युक्त राष्ट्रीय उद्घोष मंगवाना चाहते हैं तो कृपया अपना पता sgsharyana@yahoo.com पर मेल करें. पत्रिका का यह ...
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  January 3, 2013, 1:29 pm
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो हर हर महादेव...
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  December 20, 2012, 11:52 am
कहते हैं जादू वो जो सर चढ कर बोले, जैसे बंगाल के काले जादू के बारे में कहा जाता था. पर १२-१२-१२ के जादू ने तो बंगाल क्या अफ्रीका तक के जादू को फेल कर दिया.      अभी तक ये सुनने में आया था कि कुछ भावी अभिवावकों ने अपने बच्चे के जन्म के लिए ये समय निधारित किया है. कि १२-१२-१२ को आपरे...
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  December 14, 2012, 1:42 pm
एक लघु कथा है, जो गुज़रे जमाने में हर दादी माँ किशोर पोते को सुनाती थी.. मकसद एक होता था, कि बच्चा संस्कारित बने. शादी के बाद भी माँ बाप को भूले नहीं जिन्होंने बड़े जतन से उसे पाल पोस कर बड़ा किया.वो ज़माना ही ऐसा था जब दस्तूर को मानना पड़ता था, हर समर्थवान की एक रखैल होती थी. ...
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  December 12, 2012, 10:01 pm
    २ अक्टूबर - गांधी जी का जन्मदिन मेरे को विशेष रूप से स्मरणीय रहता है... दुनिया कहती है बापू राष्ट्रपिता हैं, होंगे – पर मेरे को एक दिक्कत है इस दिन दारु के ठेके बंद रहते हैं. और १ अक्टूबर को ठेकों पर भारी भीड़ रहती है. दूसरे अगर बापू राष्ट्रपिता हैं तो अपन भी धरतीपुत्र. कही...
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  October 8, 2012, 8:24 pm
एक बार फिर से घोषित करना चाहता हूँ कि मैं तिहाड़ गाँव झील वाले पार्क में रोज सुबह जाता हूँ, और सूर्य देव के विपरीत मेरी सुबह का कोई समय नहीं है. जब जागो तभी सवेरा... आज ८.४० पर गया... और पार्क के गेट पर ही ठिटक गया ...तिहाड़ झील के घाट पर भई नेतन की भीड़.अधिकारी सब मनन करें कि दे ने...
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Tag :झील वाला पार्क
  October 6, 2012, 1:55 pm
कई दिन से कोई भी पोस्ट या टीप लिखते हुए आलस सा आता है... पता नहीं क्यों. अत: कुछ लिखने की कवायद के नाम से बक बक शुरू कर रहा हूँ, मित्रजन संभाल लेंगे :)अस्वीकरण :  इस पोस्ट में तम्बाकू या उससे जुड़े हुए कोई भी प्रोडक्ट की मार्केटिंग का प्रपंच नहीं रचा जा रहा. तम्बाकू को लेकर जो ज...
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Tag :
  October 4, 2012, 7:46 pm
राष्टीय गौरव संस्थान ने अशिवनी कुमार, संपादक पंजाब केसरी की पुस्तक "क्या हिन्दुस्थान में हिंदू होना गुनाह है ?"  महेश समीर जी के संपादन में प्रकाशित की. मैं पिछले सप्ताह उसी में व्यस्त रहा.गत शुक्रवार को महेश जी का आगमन हुआ और अपने कार्यकर्म की रूप रखा बताने लगे, कि ३० स...
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Tag :
  October 1, 2012, 7:29 pm
फ्रस्टियाओ नहीं मूरा,नर्भासाओ नहीं मूरा, एनीटाइम मूडवा को अप्सेटाओ नहीं मूरा,जो भी रोंग्वा है उसे - सेट राईटवा करो जी,नहीं लूजिये जी होप, थोडा फाईटवा करो जी, मूरा .....एनीटाइम मूडवा को  एनीटाइम मूडवा को  अप्सेटाओ नहीं मुरा, ज्यादा लिखने की आवश्यकता नहीं है; आप भावनाओं को स...
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  September 8, 2012, 6:03 pm
बच्चपन है साहेब,बच्चपन.....बस अपने धुन में मग्न रहने का समय...ध्रुव और पूर्वा पिछले सप्ताह मेक डोनल गए थे? जी ये मेरे बच्चे हैं, और मेक डोनल गए थे, ये मैं भरी पंचायत में स्वीकृत कर रहा हूँ (थोड़ी शर्म के साथ, क्योंकि ऐसे वातावरण में, मैं अपने को एडजस्ट नहीं कर पाता). वहाँ से खाली ...
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Tag :
  August 27, 2012, 9:48 pm
मुस्कुराइए कि सरकार मुस्कुरा रही है, क्योंकि 'आपजी', २ जी से बाहर आ गए हैं, बिना किसी नुक्सान के.  मैदाम ने राहत की सांस ले, सरदार जी को भी धीरज बंधाया, जब इतनी ही जीरो वाला 2 जी सरकार की मुस्कान नहीं छीन सका तु ये मुया कोयला क्य छीनेगा : वो भी तब जब मीडिया ने इसे 'कोलगेट' नाम द...
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  August 24, 2012, 12:08 pm
खबरें कहीं से भी आ सकती हैं और कुछ खबरें आपको बैचेन करती हैं – इसी बैचेनी में बन्दा बक बक करने लग जाता है यही दीपक बाबा की बक बक है.और जब ‘बक बक’ कोई सुनने के लिए तैयार नहीं होता समय नहीं दे पाता तो ये बन्दा ब्लॉग्गिंग करने लगता है. ब्लॉग्गिंग का तात्पर्य मात्र पोस्ट लेखन स...
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Tag :
  August 18, 2012, 10:21 pm
इक रास्ता है ज़िन्दगी जो थम गए तो कुछ नहींये क़दम किसी मुक़ाम पे जो थम गए तो कुछ नहींइक रास्ता है ज़िन्दगी ..बहुत सुंदर गीत है साहेब,जो थम गये तो कुछ नहीं,हमारा जीवन यात्रा ही तो है... ये कदम किसी मुकाम पर रूकने नहीं चहिये. चरेवेति चरेवेति... चलते रहे.... कहीं मंजिल तो होगी. नहीं...
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Tag :
  August 8, 2012, 8:59 pm
चाँद और रोटी की बात पता नहीं कब किस शायर/कवि ने सबसे पहले कही होगी... कहा नहीं जा सकता. रोटी को देख कर चाँद के प्रति जी ललचाया होगा या फिर चाँद को देख कर रोटी की याद आयी होगी. मेरे ख्याल से चाँद को देख कर रोटी को याद किया गया होगा... क्योंकि आज माध्यम वर्ग में न तो चाँद चाहिए और न ...
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Tag :
  July 22, 2012, 4:03 pm
डॉ अनवर जमाल साहेब, दिसम्बर २००९ से ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं, ये पूर्ण कालीन ब्लोगर हैं, नून आटा दाल चावल सोरी ये सब तो ये खाते नहीं, अंडे चिकन मटन सब इन्हें ब्लॉग्गिंग से ही प्राप्त होता है. रात रात भर जाग कर डॉ साहिब न केवल पोस्ट लिखते/कट पेस्ट करते हैं अपितु कमेंट्स भी कर...
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Tag :ब्लॉग्गिंग
  July 7, 2012, 8:55 pm
१३-१४ साल पुरानी बात कर रहा हूँ, प्रगति मैदान में एक प्रदर्शनी लगी थी, प्लास्टिक उद्योग के उपर .... और उस का नारा था, Life is incomplete without Plastic.  तब ज्यदा समझ नहीं आया. पर आज राशन की दुकान पर शेम्पू के, रसोई मसोलों के, टाफी, चाकलेट, नमकीन, बिस्कट, कुरकुरे, पानी, देसी शीतल पेय आदि के पाउच देख वा...
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Tag :
  July 3, 2012, 8:34 pm
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