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चलते -चलते...

कल आधी रात के बाद मेरे मोबाईल पर एक मैसेज आया- “अन्ना के आंदोलन का एक साल पूरा हो गया। क्या बदल गया देश?” मेरा जवाब था “बड़े परिवर्तन में वक्त लगता है। निरंतर संघर्ष से ही हमें विजय हासिल होगी। अगर आप मानते हैं कि अन्ना का आंदोलन सही है, तो आपको भी इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की जि...
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Tag :सरकार
  April 6, 2012, 2:42 pm
अपडेट  के  लिए नीचे जाएँ ये रिश्तों का क़त्ल  है! “वो लोग जबरदस्ती गाडी में बैठ गए। उसके बाद सब सामान माँगने लगे और फिर आंटी(Aunty) को बगल की गली में जाने कहा फिर मार दिया” यह बयान है चार साल के उस बच्चे का जिसकी आँखों के सामने उसकी आंटी का पहले सामूहिक बलात्कार किया गया, फिर ह...
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Tag :समाज
  March 27, 2012, 2:19 pm
किसी भी देश की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नायकों को किस तरह से याद करता है। भारत ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास में देश के लिए त्याग और बलिदान के प्रतीक शहीद-ए-आजम भगत सिंह किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं। अंग्रेजों के साम्राज्य विस्तार की नीतियों और पूंजीवादी व्यवस्थ...
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Tag :देश
  March 23, 2012, 12:00 am
अपनी पारंपरिक सुंदरता और खुशियों के मिश्रण का विहंगम संगम, होली आज बदरंग हो चुकी है। अगर कुछ बचा है तो वह है परम्पराओं के नाम पर रिवाजों को ढोने की मज़बूरी और धार्मिक आस्था, जिसे मानव समाज छोड़ नहीं सकता। एक वह समय होता था, जब होली की खुमारी फागुन के पूरे महीने रहती थी। फाग ...
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Tag :होली
  March 8, 2012, 12:19 pm
क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? मैं जिस बिल्डिंग में रहता हूँ वह कतई भूकंपरोधी नहीं है। ज़ाहिर है, अगर तेज झटके वाला  भूकम्प आया तो इन पंक्तियों का लेखक भी उस त्रासदी का शिकार हो सकता है। कल एक बार फिर देश के कई शहरों में भूकंप ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। देश ...
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Tag :समाज
  March 7, 2012, 2:14 am
शरीर पर गंदे, मैले कुचैले कपड़े, ठंड और उचित देखभाल न होने से हाथ पैर और चेहरों के चमड़े फटे-फटे, उम्र बमुश्किल 12-13 साल, आँखे किसी खरीदार के इंतजार में। यह किसी एक की कहानी नहीं है ऐसे कई चेहरे आपको सरकारी स्कूल के बाहर मिल जायेंगे, जिनकी ज़िन्दगी गुटखा, पान मसाला और तम्बाकू बे...
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Tag :समाज
  February 19, 2012, 10:16 pm
रूबी सिंह फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ की ‘सिल्क’ को लोग डर्टी मानते हैं। हालाँकि सिल्क बाजारी है या विचारी, इसमें से किसी निष्कर्ष पर पहुँचना आसान नहीं है। लेकिन गंभीर और बड़ा सवाल यह है कि ‘सिल्क’ डर्टी है या सिस्टम? क्योंकि इस सिस्टम में सफलता के लिए या तो समझौता करना होत...
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Tag :
  February 12, 2012, 5:18 pm
आलीशान बंगले में खूबसूरती के सारे साजो-सामान करीने से रखे गए थे। हॉलनुमा कमरे में शीशे की तरह चमकते फर्श पर मँहगी कालीन, गद्देदार सोफ़ा, बीच में टेबल और सामने बड़ा सा रंगीन टेलीविजन। किसी भी घर के आर्थिक रूप से समृद्ध होने के परिचायक के रूप में इतना परिचय काफी है। यूँ तो उ...
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Tag :उपेक्षा
  February 1, 2012, 11:11 pm
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Tag :सूरत
  January 14, 2012, 6:28 pm
“मेरे मम्मी-पापा हमारी शादी के लिए राज़ी नहीं थे। क्योंकि हमारी जाति अलग थी। उनकी इच्छा के विरुद्ध हमने मुंबई कोर्ट में शादी कर ली। उन्होंने मुझे यह कहकर बुलाया कि हमें तुम्हारी शादी मंजूर है। मैं बहुत ही साधारण लड़की हूँ। मैं उनकी चालों को नहीं समझ पायी। उन्होंने मुझे ...
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Tag :प्यार
  December 21, 2011, 8:04 pm
“मैं पढ़ता था लेकिन जब से पापा बीमार हुए तब से पढ़ाई छोड़ दी” इस कंपकपाती ठण्ड में सड़क के किनारे दीये की रौशनी में अंडा बेच रहे बमुश्किल दस साल के बच्चे से जब मैंने यह सवाल किया कि तुम पढ़ते नहीं हो? तो उसका जवाब यही था। टूटी-फूटी  भाषा में दिए इस जवाब को सुनकर अनायास ही मन उस ब...
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Tag :बेबसी
  December 13, 2011, 3:53 pm
वो अस्पताल जिसमें आग लगी (तस्वीर-एपी) ज़िंदगी बचाने की जगह मौत की कब्रगाह बन गया और किसी को इस बात का अफ़सोस नहीं है। पश्चिम बंगाल सरकार अपनी सफाई दे रही है तो अस्पताल प्रशासन भी नहीं चाहता कि उसकी साख पर बट्टा लगे। ऐसे में व्यवस्था पर भरोसा करने वाले लोग व्यवस्था की खामि...
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Tag :अस्पताल
  December 10, 2011, 12:04 am
पुरुष वर्चस्ववादी सामाजिक अवधारणा में स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार कोई नई बात नहीं है लेकिन बदलते परिवेश में सीमित सोच और घटिया मानसिकता पूरी  व्यवस्था के लिए घातक है। सवाल है चंद लफंगे पुरे समाज को चुनौती देने का दुस्साहस कैसे कर लेते हैं? सवाल यह भी है कि यह सिलसि...
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Tag :छेड़खानी
  November 27, 2011, 2:32 pm
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Tag :युवा
  November 25, 2011, 11:12 pm
अन्ना का आंदोलन तो टाँय-टाँय फिस्स हो गया न? कंप्यूटर पर कुछ ज़रुरी काम करने के दौरान एक पुराने मित्र का फोन पर यही पहला सवाल था। कई दिनों के बाद अचानक आए फोन पर इस सवाल ने थोड़ी देर के लिए तो मुझे भी सकते में डाल दिया। फिर जवाब दिया अभी अधीर  होने की ज़रूरत शायद नहीं है क्यो...
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Tag :आंदोलन
  November 23, 2011, 2:45 pm
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Tag :सरकार
  November 17, 2011, 9:40 pm
चमचमाती सड़कें, उसपर फर्राटेदार दौड़ती मंहगी कारें और आसमान को छूती इमारतें निश्चित ही किसी भी देश के विकसित और समृद्ध होने का प्रमाण हो सकती हैं लेकिन मुश्किल तब होती है जब इस चकाचौंध में हमारी आँखे इतनी चौंधिया जाती हैं कि हम उसके पीछे छिपे काले अंधेरे को देख नहीं पा...
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Tag :सरकार
  September 27, 2011, 5:07 pm
 लोकतंत्र पर मंडरा रहा है खतरा विविधताओं से भरे इस देश में व्यवस्थागत अराजकता फैले यह हममे से कोई नहीं चाहेगा लेकिन जो परिस्थितियां हाल के दिनों में देश में बनी हैं, जिस तरह से संसद और समाज आमने-सामने दिख रहे हैं या कहें कि संसद और समाज के बीच दुरी बढ़ी है वह इशारा उसी व्...
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Tag :राजनीति
  August 6, 2011, 9:00 pm
                उदारीकरण के 20 साल, आखिर हासिल क्या हुआ?           विकास के लिए विदेशी पूँजी निवेश की चाह लिए तक़रीबन दो दशक पहले जिस उदारीकरण को तात्कालीन नरसिंह राव की कांग्रेस सरकार ने इस देश मे लागू किया उसने आम आदमी को आखिर दिया क्या? आज जब उदारीकरण को २० साल हो चुके हैं तो स...
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Tag :उदारीकरण
  July 25, 2011, 5:48 pm
 कह सकते हैं कि धमाकों के सिर्फ बारह घंटे बाद ही जिस तरह से मुंबई अपने रंग मे आ गई और लोग सड़कों पर उसी तरह से दौड़ने लगे जैसे कुछ हुआ ही नहीं, वो हमारी जिजीविषा, मुश्किलों से लड़ने की हमारी शक्ति और इंसानियत के हत्यारों के खिलाफ़ हमारी एकजुटता को प्रदर्शित करती है| हम यह भी कह ...
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Tag :आम आदमी
  July 17, 2011, 1:15 pm
 समाज और देश का नेतृत्व करना सब के वश की बात नहीं होती| यह काम नेताओं का होता है, एक नेता वह होता है जिसके दिमाग मे समाज के विकास की दूरदर्शी योजनाएं होती हैं| उसकी जिंदगी का हर एक मिनट अपने देश की तरक्की और नए मुकाम हासिल करने के रास्तों पर विचार करने मे बीतता है| नेता जी सु...
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Tag :देश
  July 13, 2011, 3:53 pm
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