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स्पष्ट कालसर्प योग के ग्रहयोग १- जन्मांग में चोथे और दसवे स्थान में राहू केतु हो तो २- जन्मांग में पांचवे और ग्यारहवे स्थान राहू केतु हो तो ३-जन्मांग में छठे और बारहवे स्थान में राहू केतु हो तो,४- जन्मांग के सातवे और पहले स्थान में राहू केतु हो,५- जन्मांग के छठे और दूसरे स्...
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  August 17, 2012, 12:46 am
श्रीबगला कीलक-स्तोत्रम्.ह्लींह्लीं ह्लींकार-वाणे, रिपुदल-दलने, घोर-गम्भीर-नादे !ज्रीं ह्रीं ह्रींकार-रुपे, मुनि-गण-नमिते, सिद्धिदे, शुभ्र-देहे !भ्रों भ्रों भ्रोंकार-नादे, निखिल-रिपु-घटा-त्रोटने, लग्न-चित्ते !मातर्मातर्नमस्ते सकल-भय-हरे ! नौमि पीताम्बरे ! त्वाम् ।। १क्...
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  June 7, 2012, 5:41 pm
श्री यन्त्र इस यन्त्र को धन वृद्धि, धन प्राप्ति, क़र्ज़ से सम्बंधित धन पाने के लिए उपयोग में लाया जाता है | इस यन्त्र की अचल प्रतिष्ठा होती है इस यन्त्र को व्यापार वृद्धि में रखा जाता है तथा जीवन भर लक्ष्मी के लिए दुखी नहीं होना पड़ता |कुबेर यन्त्र :-इस यन्त्र की स्था...
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  October 26, 2011, 12:22 pm
देवों में प्रथम पुज्य भगवान गणपति की पुजा,साधना,आराधना,ध्यान और स्थापना जीवन के प्रत्येक शुभ कार्य में आवश्यक है,अतः अपने पुजा स्थान में गणेश जी को स्थापित करके स्तोत्र पाठ ,वंदना अवश्य करनी चाहिए !जहां गणपति स्थापित होते है वहां ऋध्दि-सिध्दि,शुभ-लाभ  अपने आप स्थाप...
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  June 10, 2011, 6:41 pm
अब आगे---------------------बौध्दो का शक्ति तन्त्र साहित्य भी कम महत्वपुर्ण नहीं है ! अनेकों संस्कृत ग्रन्थ इस संबन्ध में उपलब्ध है! कुछ के नाम इस प्रकार है -१-तारा कल्प,२--तारा तन्त्र,३-तारा प्रदीप,४-कल्पलता, ५-तारा कवच,६-तारा तत्व,७.तारा पंजिका,८-तारा पध्दिति,९-तारा पंचाग,१०-तारा पराज...
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  June 3, 2011, 10:06 pm
अब आगे--------------वाराही तंत्र में ५५ शिवोक्त तन्त्रों का नाम आता है !जिनमें ९,६४,९४९ श्लोक है,आगम तन्त्र विलास ग्रन्थ के लेखक का विश्वास है कि आज भी २०८ तन्त्र ग्रन्थ उपलब्ध है,बौध्दो के विशाल तन्त्र साहित्य में से आज संस्कृत भाषा के २ ग्रन्थ प्राप्त है ! तिब्बत में तन्त्र सा...
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  June 2, 2011, 10:29 pm
कोई समय था जब तंन्त्रो क विशाल साहित्य उपलब्ध था आज उसमें से बहुत कम देखने को आता है!तंन्त्र ज्ञान के अभाव के कारण जन साधारण के द्वारा  इस साहित्य के प्रति जो उपेक्षा  का भाव बरता गया,उसके अध्ययन और विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया,अतःउसका विलुप्त होना स्वाभाविक ह...
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  May 31, 2011, 8:55 pm
विवाह की आयु - गोचर का गुरु जब लग्न,त्रितीय,पंचम,नवम या एकादश भाव में आता है,उस वर्ष विवाह होता है! विशेषकर लग्न अथवा सप्तम बाव मेंआने पर विवाह हो जाता है! तथापि संबध्द वर्ष में शनि की दृष्टि लग्न अथवा सप्तम भाव पर नहीं होनी चाहिए !                  &n...
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  May 30, 2011, 3:16 pm
जन्म पत्रिका में योगो का अध्ययन करने के लिये निम्न बातों क विशेष ध्यान रखना चाहिए-१.लग्नेश कौन ग्रह है और कहां बैठा है?                                                                 &nb...
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  May 15, 2011, 6:06 pm
मैं भास्कर शास्त्री छत्तीसगढ का ज्योति्षविद्यार्थी हूं,एवं ज्योतिष का कार्य मे विगत पांच वर्ष से  कर रहा हूं,अगर आप को कोई समस्या है तो आप निम्न नंबर पर फोन कर सकते है! +919303037891,+919685535092,+919425527927....
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  May 14, 2011, 8:13 pm
अष्टलक्ष्मी योग वैदिक ज्योतिष में राहु नैसर्गिक पापी ग्रह के रूप में जाना जाता है.इस ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं है अत: जिस राशि में होता है उस राशि के स्वामी अथवा भाव के अनुसार फल देता है.राहु जब छठे भाव में स्थित होता है और केन्द्र में गुरू होता है तब यह अष्टलक्ष्मी य...
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  April 30, 2011, 12:37 pm
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावकेकिशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥1॥जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थलेगलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयंचका...
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  April 30, 2011, 12:32 pm
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