Hamarivani.com

रचना रवीन्द्र

अच्छे दिन खुश हूँ अच्छे दिन आए हैं सदियों से झुग्गी बस्तियों में बसने वाले सडान बदबू में रहने वाले नाले नालिओं में पनपने वालेअब नहीं रहते हैं वहां.बदल गया है बसेरा आयें है अच्छे दिन रहते हैं साफ़ सुथरी हवा मेंअति विशिष्ट व्यक्तियों के घरों मेंदीदार करते हैं...
रचना रवीन्द्र...
Tag :डेंगू
  November 15, 2015, 6:00 am
अभिशप्तमैं चाँद हूँदागदार हूँअनिश्चितता मेरी पहचान हैकभी घटता  कभी  बढ़ताकभी गुम  कभी हाज़िर मैं सूरज की तरह चमकता नहींपर उसकी तरह अकेला भी नहींमेरे साथ हैं अनगिनत सितारों की चादरमेरे न होने पर भी टिमटिमाते हैं तारेआने वाली है दीपावलीघुटने लगा हूँ&nb...
रचना रवीन्द्र...
Tag :अमावस
  November 8, 2015, 6:00 am
मासूम चाँद भीयूँ ही एक दिनपूंछा था चाँद सेक्यों घटते बढ़ते होक्यों रहते नहीं एक सेसूरज की तरह.इधर उधर देखामायूसी  कोभरसक छुपायाबोला एक दीपावली की रातदेखने कोधरती की जगमगाहटआँखों में भर लाने कोराम को शीश नवाने कोअनवरत प्रयत्नरत हूँसदियों सेकभी घटता कभी बढ़ताकभी द...
रचना रवीन्द्र...
Tag :मासूम
  November 1, 2015, 6:00 am
दशाननमैं रावणअधम पापी नीचसीता हरण का अक्षम्य अपराधीसब स्वीकार है मुझे.मैं प्रतिशोध की आग में जला  था,माना कि मार्ग गलत चुना था.किया सबने भ्रमित मुझे मार्ग दर्शन किया नहीं किसी ने.मैं वशीभूत हुआ माया जाल के.मैंने भी फिर कियाविस्तार माया जाल का. देख सीता मुग्ध हु...
रचना रवीन्द्र...
Tag :रचना
  October 25, 2015, 6:00 am
एक रामलीला यह भी यूं तो होता है रामलीला का मंचनवर्ष में एक बारपर मेरे शरीर के अंग अंग करते हैंराम, लक्ष्मण,सीता और हनुमानके पात्र जीवन्त.देह की सक्रियतासतर्कता, तत्परता और चैतन्यता केलक्ष्मण की उपस्थितिके बाद भीमष्तिष्क का रावण देता रहता है प्रलोभनभांति भ...
रचना रवीन्द्र...
Tag :राम
  October 18, 2015, 10:14 am
कुछ सपने मेरेआज एक अजीब सीउलझन, कौतुहल,बेचैनी, उद्विग्नता है.भारी है मनऔर उसके पाँव.कोख हरी हुई हैमन की अभी अभी.गर्भ धारण हुआ है अभी अभीकुछ नन्ही कोपले फूटेंगी,एक बार फिरडरती हूँ,ना हो जायेजोर जबर्दस्ती सेगर्भपातएक बार फिर.ना तैयार होदूध भरा कटोरा,जबरदस्ती डुबोने को,य...
रचना रवीन्द्र...
Tag :कोख
  October 11, 2015, 6:00 am
महात्मादेखती आई हूँ बरसों सेअपनी ही प्रतिमा में कैदमहात्मा को धूप धूलचिड़ियों के घोसलेऔर बीट से सराबोर,मायूसहर सितम्बर माहांत मेंचमकते है,मुस्कुराते हैं,दो अक्टूबर को बाहर भी आते हैं.हम सब के बीचहमारे मन मष्तिष्क मेंविचरते हैंपर इस बारकुछ भी नहीं हुआ ऐसाअंग्रेजो...
रचना रवीन्द्र...
Tag :महात्मा
  October 4, 2015, 6:00 am
रिश्तों में जीवन भूकंप में नहीं गिरते घर गिरते हैं मकानमकान ही नहीं गिरतेगिरती हैं उनकी छतेंछतें भी यूँ ही नहीं गिरतीगिरती हैं दीवारेंगिरातीं हैं अपने साथ छतेंफिर अलग अलग घरों केबचे खुचे जीवित लोगमिल कर बनाते हैंपहले से कहीं अधिकमजबूत दीवारों वाले मकानफिर बना...
रचना रवीन्द्र...
Tag :दीवारें
  September 27, 2015, 5:38 pm
प्यासप्याज में मात्रभोजन की सीरत सूरत स्वाद सुगंधबदलने की कूबत ही नहींसत्ता परिवर्तन की भी क्षमता है.प्याज और सरकारएक दूसरे के पर्याय हैं.एक जैसे गुण अवगुणएक जैसे भूमिगत तलघरों की तरहएक के भीतर एकपरत दर परत खुलनागोपनीयता यथावत.हर बार बढती जिज्ञासाअंततः हाथ खाली के...
रचना रवीन्द्र...
Tag :प्यास
  September 20, 2015, 6:30 am
पतनसुना है गिरना बुरा है देखती हूँ  आसपास कहीं न कहीं,कुछ न कुछ गिरता है हर रोज़.कभी साख गिरना कभी इंसान का गिरना इंसानियत का गिरनामूल्यों का गिरना   स्तर गिरना कभी गिरी हुई मानसिकतागिरी हुई प्रवृत्तियां.   अपराध का स्तर गिरना नज़रों से गिरना और कभ...
रचना रवीन्द्र...
Tag :गुरुत्वाकर्षण
  September 13, 2015, 6:30 am
कश्तीआम बच्चों की तरहकागज की कश्ती बनानाउसे पानी में तैरानातैरते देखनाखुश होनातालियाँ बजानामैंने भी किया थाये सब कभी.पर मैंने बह जाने नहीं दीकश्ती अपनी कभी.आज भी सहेजी है.सोचती हूँकभी तो फिर तैरेगीबचपन की तरह.अंतर इतना हैकभी मीठेसोंधे पानी मेंउबड खाबडरास्तों से ज...
रचना रवीन्द्र...
Tag :कागज़
  September 6, 2015, 9:26 am
हाथ का मैलबचपन से सुनती आई हूँ आप सब की ही तरह  पैसा ही जीवन है. पैसा आना जाना है.पैसा हाथ का मैल है. समय के साथ बदलती परिभाषाओं नेइसे भी अछूता नहीं छोड़ा बदल गई है इसकी किस्मत,कीमत और तबियतहमारें संस्कारों मेंउच्चतम स्थान प्राप्तव पाप धोने का साधनगंगा हो ...
रचना रवीन्द्र...
Tag :रचना
  August 30, 2015, 5:59 am
दुआएंकल के उस त्यौहार में पाप धोने के उस प्रयास में इंसान ही नहीं जानवरों ने भी दी दुआएंवो रुपहली प्लेटे,प्लास्टिक की डिज़ाइनर कटोरियाँ,जरूर जानती हैं कोई वशीकरण मंत्रखींचती हैं सबको अपनी ओर कुत्तों ने सूंघा, चाटा, खाया कुछ ने ढूंढी हड्डियां. इतना स...
रचना रवीन्द्र...
Tag :प्लास्टिक
  August 23, 2015, 10:25 am
अतिथिकुछ समय सेघर भर गया हैमेहमानों से.घर ही नहीं शरीर, मन, मस्तिष्कचेतन, अवचेतन.ये मात्र मेहमान नहींमेहमानों का कुनबा है.सोचती हूँमन दृढ करती हूँ आज पूंछ ही लूँ अतिथितुम कब जाओगेपर संस्कार रोक लेते है.ये आते जाते रहते है पर क्या मजालकि पूरा कुनबाएक साथ चला जाय...
रचना रवीन्द्र...
Tag :मेहमान
  August 16, 2015, 6:30 am
सावनसब कुछ साफ,धुला, उजला,हरा, चमकदारनिरंतर गति प्रवाह,कर्णप्रिय ध्वनि संगीतसब कुछलगता है अच्छा  अखरता हैतो ठहराव,जल भराव,कीचड़, सडांध   नमी, दरारेंउनमें उगतेजंगली घास फूसकाई, बिछलन, फिसलन.वर्ष में कुछ निश्चित समय के लिएअच्छा लग भी जाए ये,पर मन के भीतररहता ये सावन ज...
रचना रवीन्द्र...
Tag :श्वेत श्याम
  August 9, 2015, 6:00 am
सरगोशीबारिश में भीगी गीली सीली सराबोर धूप ने कल मेरी सांकल बजाई. राहत की साँस ली,चलो कहीं कोई तो है.हताश थी,कितना हठी,और बेपरवाह है सूरज. जब भी आता है, धूप के बिनानहीं आता.सूरज और धूप ज्यों धूप और साया हो गये.आ जाओ,कभी बदली का आंचल भी थाम लोकभी उसके पीछे ...
रचना रवीन्द्र...
Tag :बारिश
  August 2, 2015, 12:44 pm
मन की बातमन की बात जबसे मन की न रही, इनकी उनकी जन जन की हो गई.पूरे शहर में चर्चा ये पुरजोर है बात भी अब बदचलन हो गई.मुद्रा का उठना, उठ-उठ के गिरना,समस्या देश के उत्प्लवन की हो गई,जो मुह खोले उसकी हत्या, आत्महत्या, बात इंसानियत के हनन की हो गयी.अपराध जगत और उसके किस्सेसुन ...
रचना रवीन्द्र...
Tag :मन की बात
  July 26, 2015, 12:06 pm
याददाश्त  मैं कुंठित हूँ,व्यथित हूँ,क्षुब्ध हूँ, क्या हृदय ही जीवन है ?मैं भी तो हृदय की खुशी में खुश उसके दुख,असफलता, दर्द, पीड़ा में उसके साथ ही ये सब अनुभव करता हूँ फिर हृदय ही क्यों क्या सही रक्तचाप, हृदय गतिरक्त विश्लेषण औरधमनियों में...
रचना रवीन्द्र...
Tag :रचना
  July 19, 2015, 11:11 am
जीततुम्हारी वो जीतने की,शीर्ष पर रहने की, सदैव अव्वल आने की जिद, हर छोटी होती लकीर के आगे बड़ी लकीर खींचते रहना. छोटी लकीरों को पीछे छोड़ते रहना मात्र बड़ी लकीरों में जीना,सदैव जीतते रहना. और मैं तुम्हारी छोड़ी हर लकीर में जीती रही,जीवंत होती रही, जीतती र...
रचना रवीन्द्र...
Tag :रचना
  July 12, 2015, 12:31 pm
इत्मिनान है की वो खुश हैं चलती हूँ जब भी, उतरती चढ़ती हूँ सीढ़ियाँ, आती हैं अजब सी आवाज़े,घुटनों में हड्डियों से,   कभी कड़कड़ाती, खड़खड़ाती,कभी कंपकपाती.गुस्से में लाल पीला होते तो सुना था,यहाँ तो नीली हो जाती हैं नसें.दबोचती हैं हड्डियां उन्हें जब. कभी खींचती हैं मां...
रचना रवीन्द्र...
Tag :दर्द
  July 5, 2015, 10:37 am
इज़हारे- ख़यालये उम्र अपनी इतनी भी कम न थी,अपनों को ढूंढने में गुजार दी दोस्तों.पांव में छाले पड़े है इस कदर,अपनों में, अपने को खो दिया दोस्तों.कसमें वादों पे न रहा यकीं अब हमें,बंद आँखों से सच को टटोलते हैं दोस्तों.वो इश्क वो चाँद तारे जमीं पर,सब किताबों की बाते है दोस्तो...
रचना रवीन्द्र...
Tag :उम्र
  June 28, 2015, 2:32 pm
हृदयाघातधमनी के गलियारों में तब उत्सव होता है रक्तजड़ित सिंहासन पर जब हिय बैठा होता हैवसा से  चहुँ ओर सुगन्धित फिर लेपन होता है तेरे भित्ति चित्रों से हिय का अभिवादन होता हैहर्ष उल्लास का प्रथम अवलोकन होता है रुधिराणुओं की रोली से अभिनन्दन होता हैघृत शर्करा, म...
रचना रवीन्द्र...
Tag :हिन्दी कविता
  June 21, 2015, 7:11 pm
वजूदकल उतारी थी गठरी ताक से.झोंके थे उसमें से कुछ तुड़े-मुड़े,गीले-सीलेअपने वजूद को तलाशते. कुछ वर्ण, अक्षर और शब्द समय के साथ खो चुके अपनी गरिमा, अपना अर्थ, रंग रूप यौवन नैन नक्शअपना होना ना होना नहीं था वहाँकोई चिन्हअपने होने काअहसास दिलाने की जद्दोजहद वा...
रचना रवीन्द्र...
Tag :वजूद
  June 14, 2015, 12:26 pm
सच ऐसा भी  मेरे शहर की झुकी हुई इमारते,यूँ ही नहीं गुमनामी में खो जाना चाहती हैं. खाक में मिल जाना चाहती हैं.मिटटी हो जाना चाहती हैं.उन्हें इन्तेज़ार है,मजबूत कांधों का, बाहों का, जो उन्हें आगोश में ले सके.बाहुपाश में समां सके अपने में समाहित कर सके.पूर्ण...
रचना रवीन्द्र...
Tag :रचना
  May 31, 2015, 6:00 am
ख्वाब और ख़ामोशी उजाले रोशनी से मिल,धूप में घुल मिल जो गये.बेहद नाजुक कुछ ख्वाब हमारे,होश के आगोश में बेहोश हो गये. भूख की फसल उगी ही थी अभी,वो आ के जुबाँ पे चरस बो गये.मौत भी इस कदर मिली हमसे,कांपते  कांपते खंजर भी रो गये.आवाज़  निकली भी तो ऐसे,ज्यों चीख के पाँव खो गये.ध...
रचना रवीन्द्र...
Tag :रचना
  May 23, 2015, 8:30 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (167971)