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सहज साहित्य

डॉoसुधा गुप्ता जीके हाइकु [आज आप 78 वर्ष पूरे करके  79 वें वर्ष में प्रवेश कर रही हैं ।सभी सहृदय  रचनाकारों की  अशेष शुभकामनाओं  आपके साथ हैं ]1काँटों की खेती जीवन जोत दियाचुभे तो रोती ?2मेघ मुट्ठी मेंक़ैद चाँद , फिसलानिकल भागा ।3कौन पानी पीबोलती री चिड़ियाइतना मीठा !4पूनो की ...
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Tag :हाइकु :सुधा गुप्ता
  May 18, 2012, 3:04 pm
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’1धोखा दे नेतालुटती है जनताठौर न  मिले ।2खा गए देशगरीब बदहाल कौर न मिले ।3हरे न भूखआँकड़ों का खेलचिढ़ाता रोज़ ।4भोर समीरपरसे जब तनहरसे मन ।5 कितनी पीर !कोकिल हो अधीरदिल दे चीर । 6जीवन -रागलगता जब दाग़गूँजे संगीत ।7कच्ची कली-सीकच्ची नींद जो टूटेस...
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Tag :हाइकु
  May 1, 2012, 3:55 pm
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’1आती न पाती हूक -सी उठ तेरीयाद रुलाती2घायल पाखीउड़ा न गगन मेंमिलता कैसे3सागर पारबिन कश्ती कठिनज्यों इन्तज़ार।4जीवन-साँझसिमट गई धूपबची है रात। जीवन एक कला है । साहित्य उसी का सहज मार्ग है । सम्पूर्ण विश्व सुखी हो , यही सच्चे मानव का प्रयास होन...
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Tag :हाइकु
  December 14, 2011, 10:17 am
सीमा स्‍मृतिसर्दी का अर्थ,गरम रजाई मेंकविता करते शब्‍दों में नहीं, ठिठुरता,ए सी कारों  के दरवाजों से नहीं  झाँकता,शरीरों की गर्मी से नहीं मिटता,सर्दी के लिए सरकारी इंतज़ामों की डींगों से नहीं, ढकतासर्दी का अर्थ,भूखे पेटसूखे बदन,बिना छप्‍पर,फटी शाल लिये,सुबह अखबार और इ...
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Tag :पथ के साथी
  December 13, 2011, 7:57 pm
झरना बहाएँगे (ताँका)-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’1किसे था पता-ये दिन भी आएँगेअपने सभीपाषाण हो जाएँगेचोट पहुँचाएँगे।2जीवन भररस ही पीते रहेवे तो जिएहम तो मर-मरघाव ही सीते रहे।3वे दर्द बाँटेंबोते रहे हैं काँटेहम क्या करें?बिखेरेंगे मुस्कानगाएँ फूलों के गान।4काटें पहाड़...
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Tag :ताँका
  December 7, 2011, 12:06 am
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