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एहसासात... अनकहे लफ्ज़. : View Blog Posts
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एहसासात... अनकहे लफ्ज़.

समस्त सम्माननीय मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाईयों सहित एक नज़्म सादर समर्पित...झुक नहीं सकता कभी भी मान यहअभिमान है।        यह तिरंगा ही हमारी शान है और जान है। जुल्म सह भी माथ पर आने नहीं दीसलवटें,            वीर पूतों ने लुटा दी जिंदग...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
Tag :
  August 15, 2012, 6:02 pm
प्यारी बहना रूठती, भाइ करत मनुहार.भाइ भगिन का प्यार है, भगवत का उपहार. समस्त सम्मानीय स्नेही मित्रों को भाई बहिन के पवित्र प्यार से सराबोर अनूठे "पर्व श्रावणी"की सादर शुभकामनाओं सहित एक नटखट और प्यारा सा गीत.... कलाई में सजेगा रंग दीदी की मुहब्बत का। हमेशा से अनोखा ढं...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
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  August 3, 2012, 9:02 am
कुछ व्यस्तताओं के चलते अपनी लम्बी अनुपस्थिति के लिए स्नेही मित्रों से सादर क्षमायाचना, आप सबके सहृदय स्नेह के लिए सादर आभार सहित शुभाभिनंदन... शीघ्र ही आप स्नेही स्वजनों के साथ नियमितता पुनर्स्थापित हो जायेगी, इसी आशा शुभेक्षाओं के साथ प्रस्तुत है एक गजल....घिर उमड़ते आ...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
Tag :
  July 12, 2012, 9:02 am
समस्त सम्माननीय मित्रों को सादर नमन सहित आज प्रस्तुत है ओपन बुक्स आनलाईन महा उत्सव अंक १५ के लिए तलाश विषय रचित  दोहे....  आँखें अपनी हैं खुली, खोज रही चंहु ओर|  जाने क्यूँ दिखता नहीं, नजरों से ही भोर |१|खेत तलासे नेह को, माटी मांगे स्वेद|बरखा ढूंढे बीज सब, करे नहीं वो भेद|२| प...
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Tag :छंद
  June 24, 2012, 6:37 pm
आज दुनिया भर में महान संत कबीर जी का प्राकट्य दिवस मनाया जा रहा है....  महान संत का पुन्य स्मरण कर आप सभी सम्मानीय स्नेहीजनों को कबीर जयंतीकी सादर बधाई देते हुए कुछ (दो भिन्न भाव रंगों के) दोहे आप सभी सुधीजनों की सभा में सादर.... मैं तन्हा रथ हाँकता,पाँच बली हैं अश्व। सभी पृथक...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
Tag :छंद
  June 4, 2012, 10:12 pm
राह काँटों से भरी हो,या उमड़ती सी सरी हो,   जीत की चाहत खरी हो,                         काल सिर नत हो झुकाये।                         बढ़ कदम रुकने न पाये। पंख अपने आजमाता,नीड़ तिनके चुन बनाता,एक पंछी यह सिखाता,   ...
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Tag :
  May 30, 2012, 3:54 pm
सभी सम्माननीय स्नेही स्वजनों को सादर नमन. आदरणीय मित्रों आप सब की सहृदय संवेदनाओं ने कठिन समय में बड़ा संबल प्रदान किया. आप सभी को मैं ह्रदय से नमन करता हूँ. १३ मई "मदर्स डे" पर कुछ पंक्तियाँ रची थी, पर पता नहीं कुछ तकनीक की समस्या थी या कुछ और मैं रचना पोस्ट (पब्लिश) करने...
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Tag :
  May 15, 2012, 5:20 pm
*समस्त उजाले समेट करसूरज सरक गया क्षितिज के पार...शेष हैसूर्योदय का अंतहीन इन्तजार....*सूखती नदियों और तुम्हारी किस्मत में फर्क ही कहाँ है...?रे आंसुओं ! सागर से होड़ लेना तुम्हारे बस में कहाँ...*सितारों में इतनी रोशनी कहाँ कि तलाश सकें वे खुद की राहें.....मेरे ईश्वर !जाने कि...
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Tag :माँ
  April 30, 2012, 9:30 am
कैसे कैसे दुष्कृत्य कर जाते हैं हम.... सुबहा होने लगता है कि हम इंसान हैं.... आफरीन को जानकार कुछ दिन पूर्व मेरी पोस्ट बेटियाँकी क्षणिकाएं कमल की पंखुरियों में थिरकती ओस की बूँद और रजनीगंधा के फूल के रूप में आफरीन बनकर आँखों के सामने आ फिर से आ गईं... बिलखती हुईं... जाने शक्ति ...
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Tag :गजल
  April 15, 2012, 11:14 am
सम्माननीय स्नेही मित्र वृन्द को सादर अभिवादन. मित्रों चैत्र नवरात्र की पावन तिथियाँ चल रही हैं... इस अवसर पर जगतजननी को "छन्दान्जली" (दोहान्जली) अर्पित करते "सर्वे भवन्तु सुखिना" की कामना रखते हुए आप सभी सुधि जनों को नवरात्र और नव संवत की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनायें ...
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Tag :
  March 29, 2012, 9:12 pm
ख्वाब देखा जो पल में बिखर जाएगा।  छोड़ कर अपना घर तू किधर जाएगा।1।  बोल कर मीठी बोली बुला उसको तू,साया बन राहों में वो उतर जाएगा।2। इम्तहां रोजो शब जिंदगी लेती है, आग में बन तू कुन्दन संवर जाएगा।3।  बात दिल में जो है दिल में ही रहने दे,वक्त खुद सारी उलझन कुतर जाएगा।4।दो घड़ी ह...
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Tag :गजल
  March 25, 2012, 12:43 pm
जंगल जंगल वेदना, मनुज वेदना शुन्य| भटके भूले राह सब, कहाँ पाप कंह पुण्य||नादानी है छीनना, हरियाली के प्राण|वरदाता सब पेड अब, मांगें जीवनदान||यदि बचाना स्वयं को, अरु अपना संसार| पेड लगा कर हम करें, सृष्टि का श्रृंगार||सुलगे सूरज सांझ तक, अम्बर त्राहिमाम|बादल बरगद छांव में, तनि...
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Tag :छंद
  March 21, 2012, 6:01 pm
(१) सुबह सुबह कँवल की पांखुरी पर थिरकती...शबनम की वह बूँद कितनी खुश...कितनी प्यारी लग रही है....उसे कहाँ पता है.. अभी कुछ ही देर में सूरज की किरने आयेंगी....!!!Photo Taken from google & Edited(२)दो परिचित से हांथों ने आगे बढ़कर खिल कर महकने को आतुररजनीगंधा के पौधे को,.उखाड लिया जड़ से....और डाल दिया लेजाक...
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Tag :क्षणिकाएं
  March 9, 2012, 5:54 pm
सभी सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार. मित्रों, भारतीय छंद शास्त्र सचमुच महासागर की तरह है. इसमें ऐसे ऐसे मोती हैं जिसकी चमक से विश्व साहित्य हमेशा जगमगाता रहा है. ओपन बुक्स आनलाइनसे जुड़ने के पश्चात  निश्चित ही मेरी छंदों में जानकारी, समझ और रूचि बढी है. सनातनी छं...
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Tag :छंद
  February 26, 2012, 10:18 am
चाँद शरमाता हुआ सा छुप गया |ले गया दिल और जां ले, उफ़! गया ||धडकनों में गीत मीठे बज उठे, बांसुरी ले आसमां  ही झुक गया ||वो घटाएं, वो समंदर क्या कहें, जुल्फ ओ तर चश्म में दिन बुझ गया ||आँख से उनकी दो मोती जो गिरे, तीर सा कुछ आ जिगर में चुभ गया ||इक सितारा हूँ फलक में टूटता,आस्ताना ही स...
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Tag :ग़ज़ल
  February 19, 2012, 5:04 pm
खुशीगुलाब कीपांखुरी को छूते ही खामोशी से उतर आईमेरी तर्जनी की नाख़ून पर मुस्कुराती हुई ओस की एक बूँद.....अभी,मेरी नाडियों का स्पंदन मुझे डराने लगा है....______________________ अस्तित्वमैंने सोचा था, वह एक बूँद है....गिरकर पलकों से ज़मीन में कहीं खो जाएगा....मैं गलत था...!वह एक बूँद का सागर फैला ...
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Tag :कविता
  February 15, 2012, 1:37 pm
समस्त स्नेही मित्रों को सादर अभिवादन. कुछ समय से जिस अत्यधिक व्यस्तता के चलते आप सभी स्नेहीजनों से अवांछित दूरी बनी रही उसका पटाक्षेप मंत्रोच्चार व शंख ध्वनि के साथ बड़े ही पवित्र ढंग से हुआ. इश्वर की असीम अनुकम्पा, पूर्वजों के आशीर्वाद और आप सभी स्वजनों के शुभकामनाओ...
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Tag :समाचार
  February 12, 2012, 1:32 pm
समस्त सम्माननीय सुधि मित्रों को सादर नमस्कार... पिछले पंद्रह दिनों से अत्यधिक व्यस्तता ने ब्लॉग पठन - पाठन से दूर कर रखा था. अब जल्द ही  नियमितता स्थापित कर लूंगा. इस दरमियान आप सभी से मिले स्नेह के लिए सादर आभार....मित्रों, पिछले दिनों  आदरणीय पंकज सुबीर जी कीसुबीर संवाद स...
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Tag :
  January 22, 2012, 10:25 pm
सादगी से जहाँ में निभाये चलो।आन भी हौसला भी बचाये चलो।इंदिया जिन्दगी का यही एक है,इश्क की पाक लौ को जलाये चलो।आलमे आरिजी क्या गमों के सिवा?आलमे आरिजी को भुलाये चलो।आप जो साथ हों हर घड़ी बज्म है,जिंदगी को सुरों में सजाये चलो।आप ही आसमाँ आप ही हो जमींआइदा आशियाँ पे बनाये ...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
Tag :ग़ज़ल
  January 8, 2012, 12:42 pm
समस्त सम्माननीय सुधि स्वजनों को नूतन वर्ष की सादर बधाईयाँ.....**************************  घट आया घट काल का, घटक गये सब रीत |.स्वागत और विदाइयां, यह घट-घट की रीत.||गया बरस प्यारा बड़ा, कुछ बाकी व्यौहार |नया बरस चौखट खडा, गूंजत द्वाराचार.||नई राह, नव चाह ले, नया नित्य उत्साह |संगी सब ही संग हों, अरु सा...
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Tag :छंद
  December 31, 2011, 9:16 am
सम्माननीय मित्रों, आज उर्दू अदब की रोशन मीनार शायरे आजम असदउल्ला खां ग़ालिब की जयन्ती है. ग़ालिब सचमुच ग़ालिब थे, यानि सबको जीत लेने  वाले... उनके शान में बाअदब चंद अशआर कहने की गुस्ताखी (गुस्ताखी ही तो कही जायेगी) के साथ शायरी के शिखर को सलाम....शायरे आजम रहे, वो शायरे उलफत रहे...
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Tag :ग़ज़ल
  December 27, 2011, 3:12 pm
*******************************उजियारा पावन कहें, या कह दें सब ईश क्रास ह्रदय में हो बना, या श्रद्धानत शीशया श्रद्धानत शीश, राह सच की बतलाये जीवन दे महकाय, सहज सद्प्रेम सिखाये इश्वर का अवतार, जगत को दिये सहारा सदा सदा उपलब्ध, बहे पावन उजियारा*******************************सभी सम्माननीय मित्रों को "बड़े दिन" क...
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Tag :छंद
  December 24, 2011, 8:52 pm
तेरी सूखी यादों के photo taken with thanks from google & editedतिनके चुन चुन कर बनाया एक घर बैठकर उसके भीतर गाने लगा नज़्म मुहब्बत की कि उट्ठेन्गी लपटें... मुझे भी कर देंगी भस्म साथ साथ घर के....लेकिन मेरी आवाज में कुकनुस*वाली बात कहाँ?कि जल उट्ठे आग...मुझे तो जीना होगा उस चकोर की तरह जो ठंडी चांदनी मे...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
Tag :कविता
  December 18, 2011, 1:49 pm
शहरे अलफाज का सौदागर,अहसासों के गुलशन में,ले कर झोली भर गीत मधुर,बैठा है लब खामोश लिए ।कुछ भीगे से,कुछ खिलते से,कुछ मुरझाते,कुछ सपनीले,कुछ उलझे से,कुछ सुलझे से,कुछ ख्वाब हसीं आगोश लिए ।कुछ यार मिले,गमख्वार मिले,कुछ इश्को सुकूं,कुछ शिकवे गिले,कुछ मंजर वाबस्ता दिल में,कुछ ...
एहसासात... अनकहे लफ्ज़....
Tag :ग़ज़ल
  December 14, 2011, 7:44 pm
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