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Kavi Ki Thali कवि की थाली

लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई होता मानव क्या सारा जिव रोता आओ आज मिल जाएँ हम बन जाएँ दीपक मिट जाये तम ............
Kavi Ki Thali कवि की थाली...
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  July 9, 2012, 6:56 pm
लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई होता मानव क्या सारा जिव रोता आओ आज मिल जाएँ हम बन जाएँ दीपक मिट जाये तम ............
Kavi Ki Thali कवि की थाली...
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  July 9, 2012, 6:56 pm
तुमपेफ़िदाहोगयाहूँमैं,जैसेभौराफ़िदाहोकमलपर.मैंअपनेदिलकोकरूगां,समझानेकीकोशिशइसबातपर.मेरेबातकोदिलसमझपाता,इससेपहलेहीओलेबरसनेलगा.जुदाईभीतुमसेनहींहोसका,तेरेप्यारमेंदिलतरसनेलगा.ओलेहानिपहुचाएदिलको,इससेपहलेहीहम-तुममिलकर,दिलमेंप्यारकादीपजलायेगें,इसचमनम...
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  August 4, 2010, 3:36 pm
आज एहसास हुआ की...मुझे प्यार हो गया हैकविता से.जो सताती हैराहों में...और झूल जाती है हमारी बाहों में.न तो समय,और न ही स्थान निश्चित है,हमारी मुलकात की.फिर भी....मिल जाती है हमेशा,रेड लाईट पर.फैक्ट्री के दरवाजे परखड़ीं रहती है घंटों....हमारे इन्तजार में.गलियों में गुजरती है,हमा...
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  July 19, 2010, 3:15 pm
कल्पनाओं मेंउड़ता है कविमनआजाद पंछी की तरह.वह विचरण करता हैखुले आकाश में,इधर से उधर तक.वह पहुंचना चाहता हैअछोर आकाश के छोर तक.वह देखना चाहता हैनीले आकाश केउस पार की दूनिया.न तो वह थकता है न ही बैठता हैसुस्ताने के लिए.वह चाहता हैदो पल का आरामलेकिन...नीले आकाश के पाररंग वि...
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  July 19, 2010, 3:04 pm
मैं हार गयाऔर...जित हुई कविता कीलम्बी लड़ाई के बाद.उसके पक्ष में खड़ी थीकवियों की पूरी फ़ौज,और मैं था अकेला.जित तो उसकी होना ही था.फिर मैं.....समर्पण कर दिया खुद कोउसके सामने,और रंग गया उसकी रंगों में.हमारी लड़ाईद्वितीय विश्वयुद्धया पानीपत की नहीं,हम वैचारिक लड़ाईलड़ रहे थे.ज...
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  July 10, 2010, 8:59 am
(1)भारत में ही नहीं.. पुरे विश्व मेंचर्चित राज्य बिहार.जहां शासन था.आधुनिक कृष्ण कावही कृष्ण जिसके मुख में बिहार ही नहींसमा सकता है, पूरा भारत भी.ट्रक ही नहीं.स्कूटर पर भीकरा सकता है भैंस को,एक शहर से दुसरे शहर तक कीलम्बी यात्रा.हाँ वही कृष्णजो उपदेशक है.आधुनिक गीता का.(2)क...
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  June 20, 2010, 12:28 pm
खो गई हैमेरी कवितापिछले दो दशको से.वह देखने में, जनपक्षीय हैकंटीला चेहरा है उसकाजो चुभता है, शोषको को.गठीला बदन,हैसियत रखता हैप्रतिरोध की.उसका रंग लाल हैवह गई थी मांगने हक़,गरीबों का.फिर वापस नहीं लौटी,आज तक.मुझे शक है प्रकाशकों के ऊपर,शायद,हत्या करवाया गया हैसुपारी दे...
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  June 13, 2010, 1:39 pm
समझनाएक नारी कोशायद........मुश्किल ही नहीं, असंभव है.नारी,आग का वह गोला हैजो जला सकती है,पूरी दुनिया.नारी,पानी का सोता हैवह बुझा सकती है,जिस्म की आग.नारी,एक तूफान हैवह मिटा सकती है,आदमी का वजूद.नारी,वरगद की छाया हैवह देती है, थके यात्री को,दो पल का आराम.नारी,एक तवा हैवह खुद जलक...
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  June 9, 2010, 4:28 pm
सुबह से शाम तक की,भाग दोड़ में, भूल जाता है,अपने आप को.फैक्ट्री में काम करने वालेमजदूरों के भीड़ में,खो जाता है, उसका वजूद.फिर .......पता नहीं कब,बचपन से जवानीऔर .......जवानी से बुढ़ापातक की सफ़र,पूरा कर लेता है, आदमी.लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई ...
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  June 9, 2010, 4:01 pm
बड़े हुए है साथ-साथ,मैं और मेरी कविता.हमारी दोस्ती आज से नहीं,बचपन से है.जब हम दोड़ते थे,गेंहू के लहलहाते खेतों में.गिल्ली डंडा खेलते थेगाँव की गलियों में,कविता होती थी मेरे साथ.शायद........हम दोनों का, हर पल का साथ,कारण बना प्यार का.हाँ.....तुम क्या जानो,कितनी नजदीक से देखा हूँ,...
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  June 9, 2010, 3:24 pm
दोस्ती की दिवार कितना कमजोर हो गया है,शायद.........इसकी जड़ में,रेत की मात्रा अधिक हैया कहा जाए,रेत की धरातल पर टिकी हैआज की दोस्ती.लोग मतलबी हो गये है,अपने मतलब साधने के लिएदोस्ती करते है,और मतलब पूरा होते हीटूट जाती है,दोस्ती.....लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रात...
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  June 9, 2010, 3:20 pm
सोच नाथू राम गोड्स कीजीवित रहना महात्मा गांधी का,ठीक नहीं था, देश और खुद उनके सेहद के लिए.आज सरेआम वलात्कार की जा रही है,उनके सपनों के भारत की,भर्ष्टाचार के बुलडोजर से .मिटा दी गई है, राम राज्य की निशानी,अतिक्रमण का नाम देकर.नहीं देख सकते थे हकीकत,अपने सपनों के भारत की.सा...
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  June 8, 2010, 4:17 pm
मैं कवि नहीं हूँ,क्योंकि कोई भी गुणनहीं है हमारे अन्दरजो होता है,एक कवि में.न तो दिखने में ही कवि लगता हूँ,और कवियो वाली पोशाक भीनहीं पहनता.फिर भी न जाने क्यों?ऐसा लगता है,दिल के कोई कोने में,छुपा है.....मेरा कवि मन.जो चाहता है,मुझे कवि बनाना.उसके अन्दर दृढ इच्छा है,कठोर परिश...
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  June 8, 2010, 3:48 pm
मैं डरता हूँ,कविता से....शायद रूठ न जाए,मेरी कोई हरकतों से.अब तो इस डर ने,डरने की सीमा पार कर गई है.रात भर जागा रहता हूँऐसा न हो की,कविता...रूठ कर चली जाए,हमारे सोने के बाद.कभी पलक झपकती भीतो पुकारता हूँ,कविता-कविता......कई बार तो पूछ बैठा हूँ,अपनी माँ से,चली तो नहीं गईकविता...?कविता...
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  June 8, 2010, 2:40 pm
उड़ने की कोशिश में,नाकामयाव...... उसकी पंखो को,कुतर दी गई है,बंदिस रूपी खंजर से.चाहती थी वह,उड़ना.....अनंत तकचहकना.....अरमानो के मुडेर पर,फुदकना.....दिल की आँगन में.स्वर्ण पिंजरा को छोड़कर,उड़ने के लिएखुले आकाश में.चाहत की दरवाजे को,पार कर जाना चाहती थी,वह तितली.लोग सुनो तुम मेरी बा...
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  June 8, 2010, 2:31 pm
जब कभी आप ये फैसला नही कर पायें, कि आज कवि की थाली में कौन सी सब्ज़ी लानी है, तो फिर बात मिक्स वेज सब्जी (Mixed Vegetable) तक जा पहुंचती है. आइये आज हम मिक्स वेज सब्जी बनायें. आवश्यक सामग्री * कविता के दाने - 100 ग्राम ( एक छोटी कटोरी ) * कवि की बात - 100 ग्राम * गजल - 100 ग्राम * कहानी - 1 मीडियम आ...
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  June 7, 2010, 10:54 am
सोच कविता बोल कविता बज रहा वह ढोल कवितानदी कविता पेड़ कविताखेत का हर मेड कवितादाये कविता बाये कविताजिधर देखो उधर कविताफिर भी मई ढुं ढं ता हूँगई मेरी किधर कविता ..लोग सुनो तुम मेरी बाते दिन अभी है पर होगी रातें रत कितना कष्ट दाई होता मानव क्या सारा जिव रोता आओ आज मिल जा...
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  March 13, 2010, 7:23 pm
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