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लम्हों का सफ़र : View Blog Posts
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लम्हों का सफ़र

यकीन...*******  हाँ मुझे यक़ीन है  एक दिन बंद दरवाज़ों से निकलेगी ज़िन्दगी  सुबह की किरणों का आवाभगत करेगी  रात की चाँदनी में नहाएगी  कोई धुन गुनगुनाएगी  सारे अल्फाजों को घर में बंद करके  सपनों की अनुभूतियों से लिपटी  मुस्कुराती हुई ज़िन्दगी  ...
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  November 16, 2017, 7:16 pm
फ्लाईओवर...  *******  एक उम्र नहीं  एक रिश्ता नहीं  कई किश्तों में  कई हिस्सों में  बीत जाता है जीवन  किसी फ़्लाइओवर के नीचे  प्लास्टिक के कनात के अंदर  एक सम्पूर्ण एहसास के साथ। गुलाब का गुच्छासस्ती किताबसस्ते खिलौने  जिनपर उनका हक होना थ...
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  November 14, 2017, 5:44 pm
दीयों की पाँत (दिवाली के 10 हाइकु)  *******  1.  तम हरता  उजियारा फैलाता  मन का दीया!  2.  जागृत हुई  रोशनी में नहाई  दिवाली-रात!  3.  साँसें बेचैन,  पटाखों को भगाओ  दीप जलाओ!  4.  पशु व पक्षी  थर-थर काँपते,  पटाखे यम!  5.  फिर स...
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Tag :हाइकु
  October 24, 2017, 9:22 pm
महाशाप...  *******  किसी ऋषि ने  जाने किस युग में  किस रोष में  दे दिया होगा  महाशाप  नियमित, अनवरत, बेशर्त  जलते रहने को  दूसरों को उजाला देने को,  बेचारा सूरज  अवश्य होत होगा निढाल  थक कर बैठने का  करता होगा प्रया...
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  October 7, 2017, 1:50 pm
कैसी ज़िन्दगी?  (10 ताँका)  *******  1.  हाल बेहाल  मन में है मलाल  कैसी ज़िन्दगी?  जहाँ धूप न छाँव  न तो अपना गाँव!  2.  ज़िन्दगी होती  हरसिंगार फूल,  रात खिलती  सुबह झर जाती,  ज़िन्दगी फूल होती!  3.  बोझिल मन  भीड़ भरा जंगल  ज़िन्दगी गुम,  है छटपटाहट  सर्वत्र ...
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  September 17, 2017, 7:21 pm
हिसाब-किताब के रिश्ते  *******  दिल की बातों में ये हिसाब-किताब के रिश्ते  परखते रहे कसौटी पर बेकाम के रिश्ते! वक़्त के छलावे में जो ज़िन्दगी ने चाह की  कतरा-कतरा बिखर गए मखमल-से ये रिश्ते!  दर्द की दीवारों पे हसीन लम्हे टँके थे  गुलाब संग काँटों के ये बेमेल-से रिश्ते!  ...
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  September 8, 2017, 11:33 pm
सूरज की पार्टी (11 बाल हाइकु)  *******  आम है आयासूरज की पार्टी मेंजश्न मनाया! 2.फलों का राजाशान से मुस्कुरातारंग बिरंगा! 3.चुभती गर्मीतरबूज़ का रसहरता गर्मी! 4.खीरा-ककड़ीलत्तर पे लटकेगर्मी के दोस्त! 5.आम व लीचीकौन हैं ज़्यादा मीठेकरते रार! 6.मुस्कुराता हैकँटीला अन...
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Tag :हाइकु
  September 1, 2017, 5:22 pm
बादल राजा (बरसात पर 10 हाइकु)  *******  1.  ओ मेघ राजा  अब तो बरस जा  भगा दे गर्मी!  2.  बदली रानी  झूम-झूम बरसी  नाचती गाती!  3.  हे वर्षा रानी  क्यों करे मनमानी  बरसा पानी!  4.  नहीं बरसा  दहाड़ता गरजा,  बादल शेर!  5.  काला बदरा  मारा-मारा फिरता  ठौर न पाता!  ...
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Tag :हाइकु
  August 27, 2017, 11:35 pm
कैसी आज़ादी पाई  (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)  *******  1.  मन है क़ैदी,  कैसी आज़ादी पाई?  नहीं है भायी!  2.  मन ग़ुलाम  सर्वत्र कोहराम,  देश आज़ाद!  3.  मरता बच्चा  मज़दूर किसान,  कैसी आज़ादी?  4.  हूक उठती,  अपने ही देश में  हम ग़ुलाम!  - जेन्नी शबनम (15. 8. 2017)  _______...
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Tag :हाइकु
  August 15, 2017, 5:24 pm
सँवार लूँ...  *******  मन चाहता है  एक बोरी सपनों के बीज  मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ  मनचाहे सपने उगा  ज़िन्दगी सँवार लूँ।  - जेन्नी शबनम (9. 8. 2017) ________________________...
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  August 9, 2017, 4:45 pm
रिश्तों की डोर  (राखी पर 10 हाइकु)  *******  1.  हो गए दूर  संबंध अनमोल  बिके जो मोल!  2.  रक्षा का वादा  याद दिलाए राखी  बहन-भाई!  3.  नाता पक्का-सा  भाई की कलाई में  सूत कच्चा-सा!  4.  पवित्र धागा  सिखाता है मर्यादा  जोड़ता नाता!  5.  अपनापन  अब भी है दिखता  र...
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Tag :हाइकु
  August 7, 2017, 8:00 pm
मुल्कों की यही रीत है...  *******  कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है  नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है!  मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है  गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  दहशत की ये धुन बजाते,...
लम्हों का सफ़र...
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  July 17, 2017, 11:15 pm
मुल्कों की रीत है...  ******* कैसा अजब सियासी खेल है, होती मात न जीत है नफ़रत का कारोबार करना, हर मुल्कों की रीत है! मज़हब व भूख़ पर, टिका हुआ सारा दारोमदार है गैरों की चीख-कराह से, रचता ज़ेहादी गीत है!  ज़ेहन में हिंसा भरा, मानव बना फौलादी मशीन  दहशत की ये धुन बजाते, दानव का यह सं...
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Tag :
  July 17, 2017, 11:15 pm
उदासी...  *******  ज़बरन प्रेम ज़बरन रिश्ते  ज़बरन साँसों की आवाजाही  काश! कोई ज़बरन उदासी भी छीन ले!  - जेन्नी शबनम (7. 7. 2017)  _______________________________...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  July 7, 2017, 7:36 pm
ज़िद...  *******  एक मासूम सी ज़िद है -  सूरज तुम छुप जाओ  चाँद तुम जागते रहना  मेरे सपनों को आज  ज़मीं पर है उतरना!  - जेन्नी शबनम (1. 7. 2017)_________________________ ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :प्रेम
  July 1, 2017, 11:11 pm
धरा बनी अलाव  (गर्मी के 10 हाइकु)  *******  1.  दोषी है कौन?  धरा बनी अलाव,  हमारा कर्म!  2.  आग उगल  रवि गर्व से बोला -  सब झुलसो!  3.  रोते थे वृक्ष -  'मत काटो हमको',  अब भुगतो!  4.  ये पेड़ हरे  साँसों के रखवाले  मत काटो रे!  5.  बदली सोचे -  आँखों में आँसू नहीं  बर...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  June 30, 2017, 2:49 pm
फ़ौजी-किसान  (19 हाइकु)  *******  1.  कर्म पे डटा  कभी नहीं थकता  फ़ौजी-किसान!  2.  किसान हारे  ख़ुदकुशी करते,  बेबस सारे!  3.  सत्ता बेशर्म  राजनीति करती,  मरे किसान!  4.  बिकता मोल  पसीना अनमोल,  भूखा किसान!  5.  कोई न सुने  किससे कहे हाल  डरे किसान!  6.  भू...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  June 25, 2017, 8:21 am
मर गई गुड़िया...  *******  गुड़ियों के साथ खेलती थी गुड़िया  ता-ता थइया नाचती थी गुड़िया  ता ले ग म, ता ले ग म गाती थी गुड़िया  क ख ग घ पढ़ती थी गुड़िया  तितली-सी उड़ती थी गुड़िया !  ना-ना ये नही है मेरी गुड़िया  इसके तो पंख है नुचे  कोमल चेहरे पर ज़ख़्म भरे  सारे बदन स...
लम्हों का सफ़र...
Tag :स्त्री
  June 1, 2017, 3:01 pm
तहज़ीब...*******  तहज़ीब सीखते-सीखते  तमीज़ से हँसने का शऊर आ गया  तमीज़ से रोने का हुनर आ गया  नहीं आया तो  तहज़ीब और तमीज़ से  ज़िन्दगी जीना न आया।  - जेन्नी शबनम (13. 5. 2017)________________________...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  May 13, 2017, 9:07 pm
हमारी माटी  (गाँव पर 20 हाइकु)  *******  1.  किरणें आई  खेतों को यूँ जगाए  जैसे हो माई।  2.  सूरज जागा  पेड़ पौधे मुस्काए  खिलखिलाए।  3.  झुलसा खेत  उड़ गई चिरैया  दाना न पानी।  4.  दुआ माँगता  थका हारा किसान  नभ ताकता।  5.  जादुई रूप  चहूँ ओर बिखरा  आँखों ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  May 11, 2017, 11:01 pm
सुख-दुःख जुटाया है...*******तिनका-तिनका जोड़कर  सुख-दुःख जुटाया है  सुख कभी-कभी झाँककर  अपने होने का एहसास कराता है  दुःख सोचता है  कभी तो मैं भूलूँ उसे  ज़रा देर आराम करे  मेरे मायके की  टिन वाली पेटी में  तिनका-तिनका जोड़कर  सुख-दुख जुटाया है।  - जेन्नी शबनम...
लम्हों का सफ़र...
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  April 24, 2017, 11:25 pm
एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में...*******तन्हा रहे ताउम्र अपनों की भीड़ में  एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में!  वक्त के आइने में दिखा ये तमाशा  ख़ुद को निहारा पर दिखे न भीड़ में!  एक अनदेखी ज़ंजीर से बँधा है मन  तड़पे है पर लहू रिसता नहीं पीर में!  शानों शौक़त की लम्बी फ़े...
लम्हों का सफ़र...
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  April 17, 2017, 9:04 pm
विकल्प...  *******  मेरे पास कोई विकल्प नहीं  पर मैं हर किसी का विकल्प हूँ,  कामवाली छुट्टी पर तो मैं  रसोइया छुट्टी पर तो मैं  सफाइवाली छुट्टी पर तो मैं  धोबी छुट्टी पर तो मैं  पशु को खिलानेवाला छुट्टी पर तो मैं  चौकीदार छुट्टी पर तो मैं,  इन सारे विकल्पों को निभ...
लम्हों का सफ़र...
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  April 1, 2017, 8:26 pm
साथ-साथ...  *******  तुम्हारा साथ  जैसे बंजर ज़मीन में  फूल खिलना  जैसे रेगिस्तान में  जल का स्रोत फूटना!  अक्सर सोचती हूँ  तुममें कितनी ज़िन्दगी बसती है  बार-बार मुझे वापस खींच लाते हो  ज़िन्दगी में  मेरे घर मेरे बच्चे  सब से विमुख होती जा रही थी  ख़ुद का जी...
लम्हों का सफ़र...
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  March 24, 2017, 11:39 pm
नीयत और नियति...  *******  नीयत और नियति  समझ से परे है  एक झटके में  सब बदल देता है,  ज़िन्दगी अवाक्!  काँधे पर हाथ धरे  चलते-चलते  पीठ में गहरी चुभन  अनदेखे लहू का फ़व्वारा  काँधे पर का हाथ  काँपता तक नहीं,  ज़िन्दगी हत्प्रभ!  सपनों के पीछे  दौड़ते-दौड़ते  ...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  March 21, 2017, 11:29 pm
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