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लम्हों का सफ़र

उनकी निशानी...  *******  आज भी रखी हैं  बहुत सहेज कर  अतीत की कुछ यादें  कुछ निशानियाँ  कुछ सामान  टेबल, कुर्सी, पलंग, बक्सा  फूल पैंट, बुशर्ट और घड़ी  टीन की पेटी   एक पुराना बैग  जिसमें कई जगह मरम्मत है  और एक डायरी  जिसमें काफ़ी कुछ है&nb...
लम्हों का सफ़र...
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  July 18, 2018, 9:01 pm
रंगरेज हमारा   *******   सुहानी संध्या   डूबने को सूरज   देखो नभ को  नारंगी रंग फैला   मानो सूरज   एक बड़ा संतरा   साँझ की वेला   दीया-बाती जलाओ   गोधूली-वेला  देवता को जगाओ,   ऋचा सुनाओ,   अपनी संस्कृति को   मत बिसराओ,   शाम होते ही जब  &nbs...
लम्हों का सफ़र...
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  July 10, 2018, 8:22 pm
भाव और भाषा   *******   भाषा-भाव का   आपसी नाता ऐसे   शरीर-आत्मा   पूरक होते जैसे,   भाषा व भाव   ज्यों धरती-गगन   चाँद-चाँदनी   सूरज की किरणें   फूल-खूशबू   दीया और बाती   तन व आत्मा   एक दूजे के बिना   सब अधूरे,   भाव का ज्ञान   भाव क...
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  July 5, 2018, 9:53 pm
भाव और भाषा (चोका)   *******  भाषा-भाव का   आपसी नाता ऐसे   शरीर-आत्मा   पूरक होते जैसे,   भाषा व भाव   ज्यों धरती-गगन   चाँद-चाँदनी   सूरज की किरणें   फूल-खूशबू   दीया और बाती   तन व आत्मा   एक दूजे के बिना   सब अधूरे,   भाव का ज्ञान   भा...
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  July 5, 2018, 9:53 pm
भाव और भाषा   *******  भाषा-भाव का   आपसी नाता ऐसे   शरीर-आत्मा   पूरक होते जैसे,   भाषा व भाव   ज्यों धरती-गगन   चाँद-चाँदनी   सूरज की किरणें   फूल-खूशबू   दीया और बाती   तन व आत्मा   एक दूजे के बिना   सब अधूरे,   भाव का ज्ञान   भाव की अ...
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  July 5, 2018, 9:53 pm
परवरिश...   *******  कहीं पथरीली कहीं कँटीली  यथार्थ की जमीन बंजर होती है  जहाँ ख्वाहिशों के फूल उगाना  न सहज होता है न सरल  परन्तु फूल उगाना लाजिमी है  और उसकी खूशबू का बसना भी,  यही जीवन का नियम है  और इसी में जीवन की सुन्दरता है।  वक्त आ चुका ह...
लम्हों का सफ़र...
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  June 22, 2018, 11:03 pm
प्यारी-प्यारी माँ   (माँ पर 10 हाइकु)   *******   1.   माँ की ममता   नाप सके जो कोई   नहीं क्षमता।   2.   अम्मा के बोल   होते हैं अनमोल   मत तू भूल।   3.   सब मानती   बिन कहे जानती   प्यारी-प्यारी माँ।   4.   दुआओं भरा   खजानों का भंडार   ...
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Tag :मातृ दिवस
  May 13, 2018, 5:32 pm
ऐसा क्यों जीवन...   *******ये कैसा सहर है   ये कैसा सफर है   रात सा अँधेरा जीवन का सहर है   उदासी पसरा जीवन का सफर है।   सुबह से शाम बीतता रहा   जीवन का मौसम रूलाता रहा   धरती निगोडी बाँझ हो गई   आसमान जो सारी बदली पी गया।   अब तो आँसू है पीना    और सपन...
लम्हों का सफ़र...
Tag :समाज
  May 1, 2018, 6:17 pm
विनती...   *******   समय की शिला पर   जाने किस घड़ी लिखी   जीवन की इबारत मैंने   ताउम्र मैं व्याकुल रही   और वक़्त भी तड़प गया,   वक़्त को पकड़ने में   मेरी मांसपेशियाँ   कमज़ोर पड़ गई   दूरियाँ बढ़ती गई   और वक़्त लड़खड़ा गया।   अब मैं आँखें मू...
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  April 18, 2018, 8:51 pm
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ...   *******   वो कहते हैं -   बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।   मेरे भी सपने थे   बेटी को पढ़ाने के   किसी राजकुमार से ब्याहने के   पर मेरे सपनों का कत्ल हुआ   मेरी दुनिया का अंत हुआ,   पढ़ने ही तो गई थी मेरी लाड़ली   खून से लथपथ सड़क पर पड़ी   ज...
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  April 12, 2018, 5:31 pm
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ...   *******   वो कहते हैं -   बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।   मेरे भी सपने थे   बेटी को पढ़ाने के   किसी राजकुमार से ब्याहने के   पर मेरे सपनों का कत्ल हुआ   मेरी दुनिया का अंत हुआ,   पढ़ने ही तो गई थी मेरी लाड़ली   खून से लथपथ सड़क पर पड़ी   ज...
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  April 12, 2018, 5:31 pm
कैक्टस...  *******  एक कैक्टस मुझमें भी पनप गया है  जिसके काँटे चुभते हैं मुझको  और लहू टपकता है  चाहती हूँ  हँसू खिलखिलाऊँ  बिन्दास उड़ती फिरूँ  पर जब भी उठती हूँ  चलती हूँ  उड़ने की चेष्टा करती हूँ  मेरे पाँव और मेरा मन  लहूलूहान हो जाता ...
लम्हों का सफ़र...
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  March 31, 2018, 7:47 pm
जिद्दी मन...  *******  ये ज़िद्दी मन ज़िद करता है  जो नहीं मिलता वही चाहता है,  तारों से भी दूर  मंज़िल ढूँढता है  यायावर-सा भटकता है,  जीस्त में शामिल  जंग ही जंग  पर सुकून की बाट जोहता है,  ये मेरा ज़िद्दी मन  अल्फाज़ों का बंदी मन  ख़ामोश...
लम्हों का सफ़र...
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  March 18, 2018, 10:29 pm
पायदान...  *******  सीढ़ी की पहली पायदान हूँ मैं  जिसपर चढ़कर  समय ने छलाँग मारी  और चढ़ गया आसमान पर  मैं ठिठक कर तब से खड़ी  काल चक्र को बदलते देख रही हूँ,  कोई जिरह करना नहीं चाहती  न कोई बात कहना चाहती हूँ  न हक़ की न ईमान की  न तब की न अब की।  ...
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Tag :स्त्री
  March 8, 2018, 1:39 am
मरघट  *******  रिश्तों के मरघट में चिता है नातों की  जीवन के संग्राम में दौड़ है साँसों की  कब कौन बढ़े कब कौन थमे  कोलाहल बढ़ती फ़सादों की,  ऐ उम्र! अब चली भी जाओ  बदल न पाओगी दास्ताँ जीवन की।  - जेन्नी शबनम (30. 1. 2018)  ____________________________...
लम्हों का सफ़र...
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  January 30, 2018, 6:02 pm
अँधेरा...  *******  उम्र की माचिस में  ख़ुशियों की तीलियाँ  एक रोज़ सारी जल गई  डिबिया ख़ाली हो गई  आधे पायदान पर खड़ी होकर  हर रोज़ ख़ाली डिब्बी में  मैं तीलियाँ ढूँढती रही  दीये और भी जलाने होंगे  जाने क्यों सोचती रही  भ्रम में जीने की आद...
लम्हों का सफ़र...
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  January 18, 2018, 11:44 pm
धरातल...  *******  ग़ैरों की दास्ताँ क्यों सुनूँ?  अपनी राह क्यों न बनाऊँ?  जो पसंद बस वही क्यों न करूँ?  दूसरों के कहे से जीवन क्यों जीऊँ?  मुमकिन है ऐसे कई सवाल कौंधते हों तुममें  मुमकिन है इनके जवाब भी हों तुम्हारे पास  जो तुम्हारी नज़रों में सटीक ...
लम्हों का सफ़र...
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  January 7, 2018, 9:00 pm
हाइकु काव्य  (हाइकु पर 10 हाइकु) *******  1.  मन के भाव  छटा जो बिखेरते  हाइकु होते।  2.  चंद अक्षर  सम्पूर्ण गाथा गहे  हाइकु प्यारे।  3.  वृहत् सौन्दर्य  मन में घुमड़ता,  हाइकु जन्मा।  4.  हाइकु ज्ञान -  लघुता में जीवन,  सम्पूर...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु-काव्य
  December 28, 2017, 12:20 am
यकीन...*******  हाँ मुझे यक़ीन है  एक दिन बंद दरवाज़ों से निकलेगी ज़िन्दगी  सुबह की किरणों का आवाभगत करेगी  रात की चाँदनी में नहाएगी  कोई धुन गुनगुनाएगी  सारे अल्फाजों को घर में बंद करके  सपनों की अनुभूतियों से लिपटी  मुस्कुराती हुई ज़िन्दगी  ...
लम्हों का सफ़र...
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  November 16, 2017, 7:16 pm
फ्लाईओवर...  *******  एक उम्र नहीं  एक रिश्ता नहीं  कई किश्तों में  कई हिस्सों में  बीत जाता है जीवन  किसी फ़्लाइओवर के नीचे  प्लास्टिक के कनात के अंदर  एक सम्पूर्ण एहसास के साथ। गुलाब का गुच्छासस्ती किताबसस्ते खिलौने  जिनपर उनका हक होना थ...
लम्हों का सफ़र...
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  November 14, 2017, 5:44 pm
दीयों की पाँत (दिवाली के 10 हाइकु)  *******  1.  तम हरता  उजियारा फैलाता  मन का दीया!  2.  जागृत हुई  रोशनी में नहाई  दिवाली-रात!  3.  साँसें बेचैन,  पटाखों को भगाओ  दीप जलाओ!  4.  पशु व पक्षी  थर-थर काँपते,  पटाखे यम!  5.  फिर स...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  October 24, 2017, 9:22 pm
महाशाप...  *******  किसी ऋषि ने  जाने किस युग में  किस रोष में  दे दिया होगा  महाशाप  नियमित, अनवरत, बेशर्त  जलते रहने को  दूसरों को उजाला देने को,  बेचारा सूरज  अवश्य होत होगा निढाल  थक कर बैठने का  करता होगा प्रया...
लम्हों का सफ़र...
Tag :
  October 7, 2017, 1:50 pm
कैसी ज़िन्दगी?  (10 ताँका)  *******  1.  हाल बेहाल  मन में है मलाल  कैसी ज़िन्दगी?  जहाँ धूप न छाँव  न तो अपना गाँव!  2.  ज़िन्दगी होती  हरसिंगार फूल,  रात खिलती  सुबह झर जाती,  ज़िन्दगी फूल होती!  3.  बोझिल मन  भीड़ भरा जंगल  ज़िन्दगी गुम,  है छटपटाहट  सर्वत्र ...
लम्हों का सफ़र...
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  September 17, 2017, 7:21 pm
हिसाब-किताब के रिश्ते  *******  दिल की बातों में ये हिसाब-किताब के रिश्ते  परखते रहे कसौटी पर बेकाम के रिश्ते! वक़्त के छलावे में जो ज़िन्दगी ने चाह की  कतरा-कतरा बिखर गए मखमल-से ये रिश्ते!  दर्द की दीवारों पे हसीन लम्हे टँके थे  गुलाब संग काँटों के ये बेमेल-से रिश्ते!  ...
लम्हों का सफ़र...
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  September 8, 2017, 11:33 pm
सूरज की पार्टी (11 बाल हाइकु)  *******  आम है आयासूरज की पार्टी मेंजश्न मनाया! 2.फलों का राजाशान से मुस्कुरातारंग बिरंगा! 3.चुभती गर्मीतरबूज़ का रसहरता गर्मी! 4.खीरा-ककड़ीलत्तर पे लटकेगर्मी के दोस्त! 5.आम व लीचीकौन हैं ज़्यादा मीठेकरते रार! 6.मुस्कुराता हैकँटीला अन...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हाइकु
  September 1, 2017, 5:22 pm
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