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लम्हों का सफ़र

सुख-दुःख जुटाया है...*******तिनका-तिनका जोड़कर  सुख-दुःख जुटाया है  सुख कभी-कभी झाँककर  अपने होने का एहसास कराता है  दुःख सोचता है  कभी तो मैं भूलूँ उसे  ज़रा देर आराम करे  मेरे मायके की  टिन वाली पेटी में  तिनका-तिनका जोड़कर  सुख-दुख जुटाया है।  - जेन्नी शबनम...
लम्हों का सफ़र...
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  April 24, 2017, 11:25 pm
एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में...*******तन्हा रहे ताउम्र अपनों की भीड़ में  एक घर तलाशते ग़ैरों की नीड़ में!  वक्त के आइने में दिखा ये तमाशा  ख़ुद को निहारा पर दिखे न भीड़ में!  एक अनदेखी ज़ंजीर से बँधा है मन  तड़पे है पर लहू रिसता नहीं पीर में!  शानों शौक़त की लम्बी फ़े...
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  April 17, 2017, 9:04 pm
विकल्प...  *******  मेरे पास कोई विकल्प नहीं  पर मैं हर किसी का विकल्प हूँ,  कामवाली छुट्टी पर तो मैं  रसोइया छुट्टी पर तो मैं  सफाइवाली छुट्टी पर तो मैं  धोबी छुट्टी पर तो मैं  पशु को खिलानेवाला छुट्टी पर तो मैं  चौकीदार छुट्टी पर तो मैं,  इन सारे विकल्पों को निभ...
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  April 1, 2017, 8:26 pm
साथ-साथ...  *******  तुम्हारा साथ  जैसे बंजर ज़मीन में  फूल खिलना  जैसे रेगिस्तान में  जल का स्रोत फूटना!  अक्सर सोचती हूँ  तुममें कितनी ज़िन्दगी बसती है  बार-बार मुझे वापस खींच लाते हो  ज़िन्दगी में  मेरे घर मेरे बच्चे  सब से विमुख होती जा रही थी  ख़ुद का जी...
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  March 24, 2017, 11:39 pm
नीयत और नियति...  *******  नीयत और नियति  समझ से परे है  एक झटके में  सब बदल देता है,  ज़िन्दगी अवाक्!  काँधे पर हाथ धरे  चलते-चलते  पीठ में गहरी चुभन  अनदेखे लहू का फ़व्वारा  काँधे पर का हाथ  काँपता तक नहीं,  ज़िन्दगी हत्प्रभ!  सपनों के पीछे  दौड़ते-दौड़ते  ...
लम्हों का सफ़र...
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  March 21, 2017, 11:29 pm
रेगिस्तान...*******  मुमकिन है यह उम्र  रेगिस्तान में ही चुक जाए  कोई न मिले उस जैसा  जो मेरी हथेलियों पर  चमकते सितारों वाला  आसमान उतार दे!  यह भी मुमकिन है  एक और रेगिस्तान  सदियों-सदियों से  बाँह पसारे मेरे लिए बैठा हो  जिसकी हठीली ज़मीन पर  मैं खुशबू के ढ...
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  March 18, 2017, 7:10 pm
जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)*******  1.  होली कहती  खेलो रंग गुलाल  भूलो मलाल!  2.  जागा फागुन  एक साल के बाद,  खिलखिलाता!  3.  सब हैं रँगे  फूल तितली भौंरे  होली के रंग!  4.  खेल तो ली है  रंग-बिरंगी होली  रँगा न मन!  5.  छुपती नहीं  होली के रंग से  मन का पीर!  ...
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Tag :होली
  March 13, 2017, 12:18 pm
हवा बसन्ती  *******  1.  हवा बसन्ती  लेकर चली आई  रंग बहार!  2.  पीली ओढ़नी  लगती है सोहणी  धरा ने ओढ़ी!  3.  पीली सरसों  मस्ती में झूम रही,  आया बसन्त!  4.  कर शृंगार  बसन्त ऋतु आई  बहार छाई!  5.  कोयल कूकी -  आओ सखी बसन्त!  साथ में नाचें!  6.  धूप सुहानी  छटा ह...
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Tag :हाइकु
  March 1, 2017, 11:09 pm
मुआ ये जाड़ा  (ठंड के हाइकु 10)*******1.  रज़ाई बोली -  जाता क्यों न जाड़ा, अब मैं थकी!  2.  फिर क्यों आया  सबको यूँ कँपाने,  मुआ ये जाड़ा!  3.  नींद से भागे रज़ाई मे दुबके  ठंडे सपने!  4.  सूरज भागा  थर-थर काँपता,  माघ का दिन!  5.  मुँह तो दिखा -  कोहरा ललकारे,  सूरज छु...
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Tag :हाइकु
  January 23, 2017, 11:12 pm
तुम भी न बस कमाल हो...  *******  धत्त!तुम भी न  बस कमाल हो!  न सोचते  न विचारते  सीधे-सीधे कह देते  जो भी मन में आए  चाहे प्रेम  या गुस्सा  और नाराज़ भी तो बिना बात ही होते हो  जबकि जानते हो  मनाना भी तुम्हें ही पड़ेगा  और ये भी कि  हमारी ज़िन्दगी का दायरा  बस तुम तक ...
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  January 16, 2017, 1:21 pm
जीवन को साकार करें...  *******  अति बुरी होती है  साँसों की हो  या संयम की  विचलन की हो  या विभोर की  प्रेम की हो  या परित्याग की  जीवन सहज है  जीवन प्रवाह है  जीवन निरंतर है  जीवन मंगल है  अतियों का त्याग कर  सीमित को अपना कर  जीवन के लय में बह कर  जीवन का सत...
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  January 1, 2017, 11:49 pm
जग में क्या रहता है  (9 माहिया)*******  1.  जीवन ये कहता है  काहे का झगड़ा  जग में क्या रहता है!  2.  तुम कहते हो ऐसे  प्रेम नहीं मुझको  फिर साथ रही कैसे!  3.  मेरा मौन न समझे  कैसे बतलाऊँ  मैं टूट रही कबसे!  4.  तुम सब कुछ जीवन में  मिल न सकूँ फिर भी  रहते मेरे मन में!...
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  December 10, 2016, 8:16 pm
मानव नाग...   *******   सुनो   अगर सुन सको तो   ओ मानव केंचुल में छुपे नाग   डँसने की आज़ादी तो मिल गई तुम्हें   पर जीत ही जाओगे   यह भ्रम क्यों   केंचुल की ओट में छुपकर   नाग जाति का अपमान   करते हो क्यों   नाग बेवजह नहीं डँसता   पर तुम?  ...
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  November 27, 2016, 11:27 pm
बुझ क्यों नहीं जाता है सूरज...*******   बुझ क्यों नहीं जाता है सूरज   क्यों चारों पहर ये जलता है,   दो पल चैन से सो लूँ मैं भी   क्या उसका मन नहीं करता है?   बुझ क्यों नहीं जाता है सूरज   क्यों चारों पहर ये जलता है!   देस परदेस भटकता रहता   घड़ी भर को नहीं ठहर...
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  November 14, 2016, 11:38 pm
पुकार... *******हाँ, मुझे मालूम है  एक दिन तुम याद करोगे  मुझे पुकारोगे  पर मैं नहीं आऊँगी  चाह कर भी न आ पाऊँगी  इसलिए जब तक हूँ  करीब रहो ताकि उस पुकार में  ग्लानि न हो  महज़ दूरी का गम हो !- जेन्नी शबनम (4. 11. 2016)_______________________...
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  November 4, 2016, 11:02 pm
हिन्दी खिलेगी(हिन्दी दिवस पर 9 हाइकु) *******   1.   मन की बात   कह पाएँ सबसे   हिन्दी के साथ।   2.   हिन्दी रूठी है   अंग्रेज़ी मातृभाषा   बन ऐंठी है।   3.   सपना दिखा   हिन्दी अब भी रोती   आज़ादी बाद।   4.   हिन्दी की बोली   मात खाती रहती  &...
लम्हों का सफ़र...
Tag :हिन्दी दिवस
  September 14, 2016, 10:59 pm
देर कर दी...   *******   हाँ ! देर कर दी मैंने   हर उस काम में जो मैं कर सकती थी   दूसरों की नज़रों में   ख़ुद को ढालते-ढालते   सबकी नज़रों से छुपाकर   अपने सारे हुनर   दराज में बटोर कर रख दी   दुनियादारी से फ़ुर्सत पाकर   करूँगी कभी मन का।   अंतत: अब &n...
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  September 9, 2016, 11:44 pm
शबनम...   *******   रात चाँदनी में पिघलकर   यूँ मिटी शबनम   सहर को ये ख़बर नहीं थी   कब मिटी शबनम !   दर्द की मिट्टी का घर   फूलों से सँवरा   दर्द को ढ़कती रही पर   दर्द बनी शबनम !   अपनों के शहर में   है कोई अपना नहीं   ठुकराया आसमां और   उफ़्फ़ कही ...
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  August 31, 2016, 10:23 pm
प्रलय...   *******   नहीं मालूम कौन ले गया   रोटी को और सपनों को   सिरहाने की नींद को   और तन के ठौर को   राह दिखाते ध्रुव तारे को   और दिन के उजाले को    मन की छाँव को   और अपनो के गाँव को    धधकती धरती और दहकता सूरज   बौखलाई नदी और चीखता मौसम  &n...
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  August 24, 2016, 10:39 pm
चहकती है राखी   *******   1.   प्यारी बहना   फूट-फूट के रोई   भैया न आया !   2.   राखी है रोई   सुने न अफ़साना   कैसा ज़माना !   3.   रिश्तों की क्यारी   चहकती है राखी   प्यार जो शेष !   4.   संदेशा भेजो   आया राखी त्यौहार   भैया के पास !  ...
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Tag :हाइकु
  August 18, 2016, 4:50 pm
जय भारत !*******   1.   तिरंगा झूमा    देख आज़ादी का जश्न,   जय भारत !   2.   मुट्ठी में झंडा   पाई-पाई माँगता  देश का लाल !   3.   भारत माता  सरेआम लुटती,   देश आज़ाद !   4.   जिन्हें सौंप के   मर मिटे थे बापू,   देश लूटते !   5.   महज़ नारा   हम स...
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Tag :हाइकु
  August 15, 2016, 7:43 pm
उसने फ़रमाया है   *******   ज़िल्लत का ज़हर कुछ यूँ वक़्त ने पिलाया है   जिस्म की सरहदों में ज़िन्दगी दफ़नाया है !   सेज पर बिछी कभी भी जब लाल सुर्ख कलियाँ   सुहागरात की चाहत में मन भरमाया है !   हाथ बाँधे गुलाम खड़ी हैं खुशियाँ आँगन में   जाने क्यूँ तक़दीर ने उ...
लम्हों का सफ़र...
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  August 8, 2016, 11:15 pm
चलो चलते हैं...*******  सुनो साथी  चलो चलते हैं नदी के किनारे ठंडी रेत पर पाँव को ज़रा ताज़गी दे वहीं ज़रा सुस्ताएँगे अपने-अपने हिस्से का अबोला दर्द  रेत से बाँटेंगे  न तुम कुछ कहना  न हम कुछ पूछेंगे  अपने-अपने मन की गिरह  ज़रा-सी खोलेंगे  मन की गाथा  जो हम रचते हैं &...
लम्हों का सफ़र...
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  August 4, 2016, 10:55 pm
खिड़की मर गई है...  *******  खिड़की सदा के लिए बंद हो गई है  वह अब बाहर नहीं झाँकती  ताज़े हवा से नाता टूट गया  सूरज अब दिखता नही  पेड़ पौधे ओट में चले गए  बिचारी खिड़की  उमस से लथपथ  घुट रही है  मानव को कोस रही है  जिसने  उसके आसमान को ढँक दिया है  खिड़की उजाले से ...
लम्हों का सफ़र...
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  August 2, 2016, 10:59 pm
अजब ये दुनिया (चोका)  *******  यह दुनिया  ज्यों अजायबघर  अनोखे दृश्य  अद्भुत संकलन  विस्मयकारी  देख होते हत्प्रभ !  अजब रीत  इस दुनिया की है  माटी की मूर्ति  देवियाँ पूजनीय  निरपराध  बेटियाँ हैं जलती  जो है जननी  दुनिया ये रचती !  कहीं क्रंदन  कहीं गूँ...
लम्हों का सफ़र...
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  July 28, 2016, 11:40 pm
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