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दौरे गुजिश्ता

1857: एक इतिहास कथाआशिष सान्याल   11 मई 2011 (सुबह सात बजे)। चिपचिपी गरमी में रात भर करवटें बदलते रहने के बाद दिल्ली ने आंखें खोल दी हैं। हमसे कुछ ही दूर खड़ा लाल किला किसी सोच में गुम है। ठीक 154 साल पहले आज ही के दिन तकरीबन इसी वक्त मेरठ के जांबाज सिपाहियों ने दरिया जुमना को पार ...
दौरे गुजिश्ता...
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  August 31, 2011, 2:57 pm
किसी इतवार की सुबह जागें सूरज से पहले और निकल पड़ें कहीं भी यूं ही बैठ ओस से भीगी घास पर सुनें परिंदों का चहकना देखें रंगबिरंगे फूलों पर तितलियों का मंडराना एक टूटी हुई पुरानी दीवार लांघ जाएं उस शहर में  जिसे देखा नहीं कभी मगर जो आबाद है हमारे अंदर दिल्ली की मुफ्त विर...
दौरे गुजिश्ता...
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  August 8, 2011, 9:33 pm
खुशबुओं और रंगों के शहर में सुविधा कुमरा     सूरज उगने में अभी कुछ वक्त बाकी है। मगर निजामुद्दीन बस्ती में चहल पहल शुरू हो चुकी है। फेरीवालों और फकीरों ने अपने ठौर जमा लिए हैं। तंदूर से निकलती रोटी की सौंधी महक चारों तरफ फैली हुई है। दरगाह तक जाने वाली संकरी गली के दो...
दौरे गुजिश्ता...
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  August 8, 2011, 9:24 pm
पल भर में सदियों का सफर  पी एन अश्रुत   दिल्ली परिवहन निगम की एक चमचमाती लाल एयरकंडिशंड बस टूटीफूटी सड़क परहिचकोले खाती हुई बाईं ओर मुड़ी और टर्मिनल के एक कोने में जाकर खड़ी होगई। उसके पहियों से उड़े धूल के गुबार ने सड़क के दूसरी तरफ खड़े आदम खां केमकबरे को पूरी तरह ढंक ...
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  May 8, 2011, 6:33 pm
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