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डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात : View Blog Posts
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डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

ग़ज़लजान देकर के शान रखते हैं.हम अजब आन बान रखते हैं.शब्दभेदी हैं हमको पहिचानो,दिल में तीरों कमान रखते हैं.दोस्तों पे तो जां छिड़कते हैं,दुश्मनों का भी मान रखते हैं.वैसे तो हम जमी पे रहते हैं,आँख में आसमान रखते हैं.यूँ तो हम हर अदब से वाकिफ़ हैं,हम भी मुँह में ज़बान रखते ह...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 6, 2017, 4:35 pm
ग़ज़लअब भेष धरो लाखों, चुंगल में फँसाने के.इस बार तो गुजराती, नहीं हाथ में आने के.कभी गंगा बुलाती है, कभी बाबा बुलाते हैं,आने को हैं दिन अब तो, धूनी के रमाने के.झोले को सिला करके तैयार फकीरा हो ,सेल्फी की जगह आये, दिन चिमटा बजाने के.हमने तो तुम्हें साहब, पलकों पे बिठाया था,हम ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  October 28, 2017, 3:03 pm
ग़ज़लये कैसा उजाला है ये कैसी दिवाली है.सब्जी भी हुई गायब खाली मेरी थाली है.हमने तो कटोरी में डुबकी को लगा देखा,है दाल बहुत मंहगी और जेब भी खाली है.लोगों की लुगाई ने घर ऐसे संभाला है,शक्कर न मिली गुड़ की फिर चाय बनाली है.अब ताज संभालों तुम, मुश्किल है बहुत मुश्किल,सड़कों प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  October 15, 2017, 8:11 pm
ग़ज़लट्रेन बुल्लट चलाने का वादा करें, पुल बनाने की जिनको न फ़ुर्सत मिली.हादसा हो कहीं भी मेरे मुल्क में, मुझको ऐसा लगे गाज़ मुझपे गिरी.आइनो पे ना पत्थर उछालो बहुत, वक्त है साब इनकी हिफाज़त करो,नोट बंदी से पहले परेशान थे, मर गये और जी.एस. टी है जब से लगी.उड़ रहे आसमां ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 30, 2017, 11:39 am
ग़ज़लफेसबुक पर ही मिल लीजिये.फूल बन कर के खिल लीजिये.जान भी देंगे फिर बाद में,पहले टूटा सा दिल लीजिये.आँख से सब समझ जायेंगे,आप होटों को सिल लीजिये.रफ़्ता रफ़्ता करीब आयेंगे,चाहे जितने उछल लीजिये.ज़िन्दगी तो संभलने को है,आज थोड़ा मचल लीजिये.वो न बदलेगा ज़ालिम कभी,आप अपने...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 29, 2017, 7:28 pm
ग़ज़लअच्छे दिनों का हमको,कोई जवाब दे दो.नज़रें तरस रही हैं, कुछ तो हिसाब दे दो.हम गदहे, कुत्ते, बिल्ली, मुर्गें हैं आपके ही ,हिस्से के कुछ हमारे टुकड़े ही साब दे दो.ये क्या सितम की लाठी, गोली है उनकी  किस्मत,बेटी के हाथ तुमने कहा था किताब दे दो.सच को कहेंगे हम तो, हो दौर झूट क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 25, 2017, 5:14 pm
ग़ज़लबेटा विकास तुमने क्या काम कर दिया है.पापा का और चाचा का नाम कर दिया है.खेतों में लोटा ले के, जाते थे जो कभी वे,हगने का उनको घर में, आराम कर दिया है.पटरी के जो किनारे, आते थे जो नज़ारे,आँखों को अब हमारी, निष्काम कर दिया है.रोटी व दाल को भी , तरसे हैं, अम्मा घर में,इस बेरुख़ी ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 20, 2017, 8:21 pm
ग़ज़लअब तू ही बता तेरा ग़म ऐसे मिटायें क्या.तेरी ही सहेली को, अब फिर से पटायें क्या.दीदार तेरे हमको हों सुब्ह- शाम हरदम,गलियों में तेरी बुल्लट, अब ट्रेन चलायें क्या.कोई ताज़ नया सर पे आ जायें हमारे भी,वादों का कहो चूरन हम सब को चटायें क्या.घर तेरे फिर आने का कोई तो बहाना हो,...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 19, 2017, 9:34 am
ग़ज़लकभी इसने मार ली तो,  कभी उसने मार ली.लुच्चों ने मेरे मुल्क की चड्ड़ी उतार ली.हिन्दू या मुसलमान मरें उनको क्या पड़ी,गीधों ने भेड़ियों ने तो किस्मत संवार ली.मज़्बूरियां ना पूछ ओ, जीने की सितमगर,बच्चों की फीस बेंक से हमने उधार ली.तुम अपनी अपनी ख़ैर मनइयो अय दोस्तो,रो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 17, 2017, 7:53 pm
ग़ज़लजिनमें जान होती है, वो ही डूब जाते हैं.मुर्दे बैठे साहिल पे,शोर ही मचाते हैं.खूँन के निशां मेरे, धोयेंगे भला किस तरह,और भी नज़र आयें, जितना वो छिपाते हैं.सच को हमने कहने का, ये इनाम पाया है,लाश पर मेरी देखो, गिद्ध मुश्कराते हैं.मौत की करें परवाह, और लोग होंगे वे,हम तो जा...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 10, 2017, 9:01 pm
गुरू महिमा.हमको गुरू घंट मिले ऐसे. अँधों को बटेर मिले जैसे.हमको दुत्कारत थे हर दम, वे प्रीत करत थे छोरिन ते.हम द्वार पे ठाड़े राह तकें वे इश्क़ करे कुलबोरन ते.पंछी वे हमाये उड़ाये सदा, फिर फाँसत थे बलजोरिन ते.हमको तलफत वे छोड़ गये वे जाय फँसे हैं औरन ते.हमरी वो पंतग को काटत ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 5, 2017, 4:39 pm
ग़ज़लताज़ा ताज़ा है ये ज़ख़्म गहरा नहीं.अब ख़यालों पे है उसका पहरा नहीं.दिल भी भूतों का डेरा था अपना कोई,जो भा आया यहाँ ज़्यादा ठहरा नहीं.वो सुनी अनसुनी कर गया सब मेरी,मुझको मालूम था वो था बहरा नहीं.छोड़ दे, छोड़ दे तेरी मर्ज़ी है ये,टूटा खंडहर हूँ मैं, घर सुनहरा नहीं.जाते ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  August 23, 2017, 11:22 am
ग़ज़लसोचे समझे बिना मुझको क्या लिख दिया.उसने ख़त में मुझे बेवफ़ा लिख दिया.ढूँढ़ लो दूसरी अपने जैसी कोई,कितना दिलचस्प ये मश्वरा लिख दिया. उसकी गुस्ताख़ियों को लगाया गले,ज़हर का नाम हमने दवा लिख दिया.दिल के हाथों में हम कितने मजबूर थे,दिल के क़ातिल को ही दिलरुबा लिख दि...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  August 21, 2017, 9:42 pm
ग़ज़लतुम तपिश दिल की बढ़ने तो दो, बर्फ पिघलेगी ही एक दिन.तोड़कर सारी जंज़ीरें वो, घर से निकलेगी ही एक दिन.शौक़ जलने का परवाने को, होगया आजकल इस कदर,लाख कोशिश करे कोई भी, शम्आ मचलेगी ही एक दिन.अश्क बहते नहीं उम्र भर, ग़म न कर अय मेरे हमसफ़र.बात बिगड़ी है जो आजकल, वो तो सँभलेगी ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  August 16, 2017, 1:04 pm
ग़ज़लरोते हैं बिलखते हैं, मछली से तड़पते हैं.माँ-बाप से उनके जब, बच्चे जो बिछुड़ते हैं.अय बच्चों दुबारा तुम, लेना कहीँ और जनम,दौलत की यहां ख़ातिर सांसों को जकड़ते हैं.संतान का ग़म क्या है, समझेंगे वही जिनकी,हर याद पे जिनके दिल ,दिन रात सिकुड़ते हैं.आज़ाद वतन की, ये बस इतनी ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  August 13, 2017, 2:17 pm
ग़ज़लवो तो उलझ के रह गये योगी की चाल पे.हमतो रिसर्च कर रहे हैं रोटी दाल पे.दुश्मन से आर पार का कब होगा फैसला,आँखें वो मूदे बैठे हैं मेरे सवाल पे.आँखें वतन को रोज़ दिखाये हैं देख लोचिंता की रेखा खिच गयी हैं सब के भाल पे.तुम रोओ गाओ या सभी अब जाओ भाड़ में,कुछ होने वाला है नहीं ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  August 10, 2017, 5:34 pm
ग़ज़लरात दिन अब  तेरे मैं  ख़यालों  में हूँ.मैं जवाबों में हूँ  मैं सवालों  में  हूँ.मुझको महसूस कर अय मेरे हमनशीं,उँगलियां बन  के फिरता मैं बालों में हूँ.चांद को चूमने की करे  आर्ज़ू ,मैं समन्दर की ऊँची  उछालों  में  हूँ.जिसको मंज़िल मिले ना कभी उम्र भर,प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 27, 2017, 10:33 pm
ग़ज़लबीच में अपने जो दूरियां हैं.कुछ तो समझो ये मज्बूरियां हैं.भीड़ में कोई ख़तरा नहीं हैं,जान लेवा ये तन्हाइयां हैं.शुहरतें  साथ  उनके हैं चलतीं,साथ अपने तो रुस्वाइयां हैं.ऐब ही देखती हैं मेरे वो,उसने देखी कहां ख़ूबियां हैं.हाल दिल का ये लिखती रहेंगी,जब सलामत मेरी ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 26, 2017, 9:49 am
ग़ज़लचूजों की हिफ़ाज़त का जिम्मा नागों को अगर दोगे लोगो.सामान तबाही का अपने तुम ख़ुद ही कर लोगे लोगो.रावण चहुँ ओर यहाँ पर हैं सीता का रूदन भी ज़ारी है,तुम ही हो राम तुम्हीं लक्ष्मन,कब इन की ख़बर लोगे लोगो.हाथों को धरे यूँ माथे पे तुम जंग को हारोगे कब तक,जब ज़ुल्म से आँख मि...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 17, 2017, 8:15 pm
ग़ज़लसरहदों पे तो हम सर कटाते रहे.सेल्फी अपनी वो तो खिचाते रहे.कितने ख़ुदग़र्ज़ थे देशवासी मेरे,चौकों छक्कों पे ताली बजाते रहे.बात गन की ज़रूरी थी जिस वक्त में,बात मन की वो अपनी सुनाते रहे.आज भी अपने दुश्मन तो बेख़ौफ़ हैं ,शाह आते रहे शाह जाते रहे.कर्ज़ था मुल्क की हम पे ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 5, 2017, 2:00 pm
ग़ज़लधूप में जल रहे हैं कदम दोस्तो.साथ में सिर्फ अपने हैं ग़म दोस्तो.साथ में आजकल वो कहां हैं मेरे ?साथ खाई थी जिसने कसम दोस्तो.वक़्त आया तो हमको पता ये चला,हमको कितने थे झूटे भरम दोस्तो.ग़ैर तो ग़ैर उनका गिला क्या करें,अपनों के भी बहुत हैं करम दोस्तों.याद फिर उसकी आयी बह...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 1, 2017, 2:12 pm
ग़ज़लबेवफ़ा कहके बुलाया तो बुरा मान गये.आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गये.कब तलक रहते अँधेरों में, बताओ तुम ही,हमने एक दीप जलाया, तो बुरा मान गये.तुम नहीं और सही , और नहीं,और सही.फैसला हमने सुनाया तो बुरा मान गये.चैन अपना वो चुरायें, तो कोई बात नहीं,चैन हमने जो चुराया, तो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 17, 2017, 10:07 pm
ग़ज़लजाने क्या ऐसी कशिश है तुझ गुलफ़ाम के साथ.लोग लेते हैं मेरा नाम   तेरे नाम के साथ .तुम कहीं और चले जाओ,अब दुनियां से मेरी,ज़हर भी भेजना था,अपने इस पैग़ाम के साथ.मुझको मरने का नहीं ग़म,ये ख़्वाहिश है मेरी,क़त्ल हो जाऊँ तेरे हाथ से आराम के साथ .मुझसे तन्हाइयों का नर्क कह...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 17, 2017, 8:35 pm
ग़ज़लहर रोज़ का ये तेरा ये रोना भी नहीं होता.आँखों को तो अश्को से भिगोना भी नहीं होता.अब दर्द के बिस्तर पे,लग जाय हैं ये आँखें ,फूलों काा सभी को तो,बिछौना भी नहीं होता.तुम हमको समझ लेते,हम तुमको समझ लेते,इक दूजे को दोनों का खोना भी नहीं होता.बच्चों की तरह दिल ये,अब खुद ही बहल...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 8, 2017, 6:39 pm
ग़ज़लतमाशे पे तमाशा कर रहे हैं.खुलाशे पे खुलाशा कर रहे हैं.नचायें मीडिया को उंगलियों पे,क़लम को भी रक्कासा कर रहे हैं.मिले हैं चूहों से ये पिंजड़े वाले,सभी फँसने की आशा कर रहे हैं.हमारी ऐसी तैसी  हो रही है,वो झांसे पे हैं झांसा कर रहे हैं.चढ़ा सूली गरीबों को वो देखो,ठुका...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 20, 2016, 7:10 pm
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