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डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

ग़ज़लबीच में अपने जो दूरियां हैं.कुछ तो समझो ये मज्बूरियां हैं.भीड़ में कोई ख़तरा नहीं हैं,जान लेवा ये तन्हाइयां हैं.शुहरतें  साथ  उनके हैं चलतीं,साथ अपने तो रुस्वाइयां हैं.ऐब ही देखती हैं मेरे वो,उसने देखी कहां ख़ूबियां हैं.हाल दिल का ये लिखती रहेंगी,जब सलामत मेरी ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 26, 2017, 9:49 am
ग़ज़लचूजों की हिफ़ाज़त का जिम्मा नागों को अगर दोगे लोगो.सामान तबाही का अपने तुम ख़ुद ही कर लोगे लोगो.रावण चहुँ ओर यहाँ पर हैं सीता का रूदन भी ज़ारी है,तुम ही हो राम तुम्हीं लक्ष्मन,कब इन की ख़बर लोगे लोगो.हाथों को धरे यूँ माथे पे तुम जंग को हारोगे कब तक,जब ज़ुल्म से आँख मि...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 17, 2017, 8:15 pm
ग़ज़लसरहदों पे तो हम सर कटाते रहे.सेल्फी अपनी वो तो खिचाते रहे.कितने ख़ुदग़र्ज़ थे देशवासी मेरे,चौकों छक्कों पे ताली बजाते रहे.बात गन की ज़रूरी थी जिस वक्त में,बात मन की वो अपनी सुनाते रहे.आज भी अपने दुश्मन तो बेख़ौफ़ हैं ,शाह आते रहे शाह जाते रहे.कर्ज़ था मुल्क की हम पे ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 5, 2017, 2:00 pm
ग़ज़लधूप में जल रहे हैं कदम दोस्तो.साथ में सिर्फ अपने हैं ग़म दोस्तो.साथ में आजकल वो कहां हैं मेरे ?साथ खाई थी जिसने कसम दोस्तो.वक़्त आया तो हमको पता ये चला,हमको कितने थे झूटे भरम दोस्तो.ग़ैर तो ग़ैर उनका गिला क्या करें,अपनों के भी बहुत हैं करम दोस्तों.याद फिर उसकी आयी बह...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 1, 2017, 2:12 pm
ग़ज़लबेवफ़ा कहके बुलाया तो बुरा मान गये.आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गये.कब तलक रहते अँधेरों में, बताओ तुम ही,हमने एक दीप जलाया, तो बुरा मान गये.तुम नहीं और सही , और नहीं,और सही.फैसला हमने सुनाया तो बुरा मान गये.चैन अपना वो चुरायें, तो कोई बात नहीं,चैन हमने जो चुराया, तो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 17, 2017, 10:07 pm
ग़ज़लजाने क्या ऐसी कशिश है तुझ गुलफ़ाम के साथ.लोग लेते हैं मेरा नाम   तेरे नाम के साथ .तुम कहीं और चले जाओ,अब दुनियां से मेरी,ज़हर भी भेजना था,अपने इस पैग़ाम के साथ.मुझको मरने का नहीं ग़म,ये ख़्वाहिश है मेरी,क़त्ल हो जाऊँ तेरे हाथ से आराम के साथ .मुझसे तन्हाइयों का नर्क कह...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 17, 2017, 8:35 pm
ग़ज़लहर रोज़ का ये तेरा ये रोना भी नहीं होता.आँखों को तो अश्को से भिगोना भी नहीं होता.अब दर्द के बिस्तर पे,लग जाय हैं ये आँखें ,फूलों काा सभी को तो,बिछौना भी नहीं होता.तुम हमको समझ लेते,हम तुमको समझ लेते,इक दूजे को दोनों का खोना भी नहीं होता.बच्चों की तरह दिल ये,अब खुद ही बहल...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 8, 2017, 6:39 pm
ग़ज़लतमाशे पे तमाशा कर रहे हैं.खुलाशे पे खुलाशा कर रहे हैं.नचायें मीडिया को उंगलियों पे,क़लम को भी रक्कासा कर रहे हैं.मिले हैं चूहों से ये पिंजड़े वाले,सभी फँसने की आशा कर रहे हैं.हमारी ऐसी तैसी  हो रही है,वो झांसे पे हैं झांसा कर रहे हैं.चढ़ा सूली गरीबों को वो देखो,ठुका...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 20, 2016, 7:10 pm
ग़ज़लइबादत घर ही कर लेते हैं बुतख़ाने नहीं जाते.लगी है नोटबंदी जब से मैख़ाने नहीं जाते.तवाइफ़ की भी आँखें थक गयी हैं राह तक-तक के,अभी कोठे पे दिल को लोग बहलाने नहीं जाते.मुहब्बत अब घरों बैठी बहुत मायूस रहती है,अभी आशिक़ कहीं भी इश्क़ फ़र्माने नहीं जाते.हमारे शक्ल पे हैं ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 13, 2016, 8:00 pm
देश के प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदीजी के देशहित में नोटबंधी  करने के कारण उनके दुश्मनों की  तादाद में भारी इज़ाफ़ा हो गया हैं. हमने देश के कई प्रधान मंत्रियों को खोया है जिनके रक्षक भक्षक हुए हैं पर अब हम दुबारा नहीं खोना चाहते.इसलिए  ता.२०-११-२०१६ को  मोदीजी क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  November 21, 2016, 9:15 am
ग़ज़लकरें क्या सारी दुनियां की कमी हिस्से में आयी है.         लगे लाइन में तब ये चांदनी हिस्से में आयी है.बहुत रोये हैं रातों को हमें मत पूछिये साहब,बड़ी मुश्किल से थोड़ी सी खुशी हिस्से में आयी है.सुलाया माँ ने बच्चे को ये भूखा रात में कहकर,सबर कर ये मुसीबत की घ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  November 18, 2016, 8:46 am
बेदर्दी ने हाय राम बड़ा दुख दीना.मृत्युलोक के राजा यमराज के दरबार में एक बुढिया बिलख बिलख के रो रही थी. हाय मैंने खेत बेच कर लड़की की शादी के लिए 50 लाख लिए थे. 500 और 1000  के नोट बंद हो गये इस दुख ने मेरे प्राण ले लिये. हाय अब मेरी लड़की की शादी कैसे होगी. जो दूत बुढिया की आत्मा क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  November 12, 2016, 6:04 pm
ता. 08-11-2016 की रात रंक हुए राजा और राजा हुए रंक.देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदीजी टी.वी. पर देश को संबोधन कर रहे थे. शुरूआत में लगा कि वे पड़ोसी देश से तंग आकर कोई सख़्त कदम के लिए देश को तैयार कर रहे हैं. फिर तुरंत ख़याल आया कि युद्ध जैसी क्रियाओं में गुप्तता होती है ये वे क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  November 10, 2016, 9:39 am
ग़ज़लयाद जब तेरी झिलमिलाये है.फिर कलेजा ये मुँह को आये है.शीश-ए-दिल की अब तो ख़ैर नहीं ,देखो पत्थर से दिल लगाये है.चैन अपना सँभालना तू भी,चैन मेरा तो तू चुराये है.आशिक़ी जान ले के छोड़े है,जो भी सर पर इसे बिठाये है.हम मुहब्बत में जान दे बैठे,क्या पता था वो आज़माये है.ज़िन्दग...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  November 7, 2016, 1:21 pm
ग़ज़लउस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.अश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जायेसूरत ही नहीं मिलती अब तेरी किसी से भी,फिर दूजा कहो कैसे इर्शाद किया जाये .उजड़े जो कहीं गुलशन आबाद करें उसको.उजड़ा  हुआ ये दिल ना आबाद किया जाये.हम चाहे जिस्म अपना फौलाद बना डालें,पर मोंम सा ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  November 5, 2016, 1:51 pm
ग़ज़लअब आओ दोनों मिलकर अरमान ये निकालें.अणुं बोम्ब तुम भी डालो,अणुं बोम्ब हम भी डालें.अब रोज़ रोज़ के ये,खटपट ही ख़तम कर दें,तुम हम को मार डालो,हम तुम को मार डालें.कब किसने ज़हर घोला,कब किसने सांप पाले,कभी पगड़ी तुम उछालो,कभी पगड़ी हम उछालें.महफ़ूज़ आपके भी अब  घर कहां  ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  October 17, 2016, 1:40 pm
ग़ज़लदिल से भी मिटाओ तो जाने, ये नक्श मिटाने से पहले.बेहतर है मुझे लौटा देना ख़त, मेरे जलाने से पहले.तबियत भी कुछ है उखड़ी उखड़ी, मुखड़ा भी है कुछ फीका फीका ,सरकार मेरे क्यों गुमसुम हैं अहवाल सुनाने से पहले.घर वीरां करके कहते हैँ, घर अपना बसा लेना तुम भी,अपना सा समझते हैं स...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  July 29, 2016, 5:56 pm
ग़ज़लदिल-दुखाई के किस्से सुनाऊँ किसे.ज़ख़्म गहरे हैं अपने दिखाऊँ किसे.कौन दुनियाँ में अपना तलबगार है ?फोन किसको करूँ मैं बुलाऊँ किसे .रूठने और मनाने के मौसम गये,किससे रूठूँ मैं अब मैं मनाऊँ किसे.ग़म जो दो चार हों तो भुलाऊँ उन्हें,सैकड़ों ग़म हैं अपने भुलाऊँ किसे .शाख़ प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  July 24, 2016, 7:59 pm
ग़ज़लइस दौर के हाक़िम की हर चाल निराली है.सब्जी भी हई गायब खाली मेरी थाली है.हमने तो कटोरी में डुबकी को लगा देखा,है दाल बहुत मंहगी और जेब भी खाली है.लोगों की लुगाई ने घर ऐसे संभाला  है,शक्कर न मिली गुड की फिर चाय बनाली है.इन अच्छे दिनों से तो बेहतर थे पुराने दिन,मँहगाई ने ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 28, 2016, 7:19 pm
ग़ज़लमेघ फिर काले-काले ये छाने लगे.और भी आप अब याद आने लगे.अपने दिल से निकालो न अब इस तरह,आते आते यहाँ तक ज़माने लगे.दर्द-ए-दिल की दवा थे समझते जिन्हें,आजकल वे ही दिल को दुखाने लगे.ख़ूबियों की मेरे कुछ कदर ही नहीं,ऐब ही बस  मेरे वे गिनाने लगे.पूछते हैं जुदाई का अब सब सबब,क्य...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 25, 2016, 6:24 pm
ग़ज़लउनसे अब बात कहां होती है?अब मुलाकात कहां होती है ?रोज़ आँसू कहां निकलते हैं  ?रोज़ बरसात कहां होती है ?दिन तो कट जाय है किसी तरह,अब हंसी रात कहां होती है  ?     भूल जायें तुम्हें !ना मुमकिन .ऐसी आदात कहां होती है  ?इश्क में जां  लुटानी पड़ती है,सब की औकात कहां ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  June 3, 2016, 1:55 pm
ग़ज़लहम वो नहीं जो धूप की गर्मी से पिघल जायें.फेंकोगे जो सहरा में तो सहरा में भी खिल जायें.थोड़े से लड़खड़ाये  क्या सोचा कि गिरेंगे,हम रिन्द हैं वो पी के जो कुछ और सँभल जायें.सुहबत का असर तेरी ये अब गुल ना खिलाये,तेरे ही साथ साथ कहीं हम ना बदल जायें.इस ख़ौफ़ से आँखों नें म...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 13, 2016, 7:24 pm
ग़ज़लजीना तुम्हारे बिन भी तो तुमने सिखा दिया.तुमने कहा था हमको भुला दो,  भुला दिया.अब क्या कहें अख़ीरी में,किस किस का नाम लेंआया करीब दिल के जो उसने दग़ा दिया.इक बूँद थी तो तुम को कोई, पूछता न था,मुझमें गिरीं तो तुमको समन्दर बना दिया. हम दर बदर भटक रहे हैं तुमको क्या पड़ी,...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  May 2, 2016, 3:39 pm
ग़ज़लअपनी मर्ज़ी से कभी पी ही नहीं.ज़िन्दगी हमने कभी जी ही नहीं.उसने उसकी भी दी सज़ा मुझको,जो ख़ता मैंने कभी की ही नहीं.बात अपनी कही सदा उसने,बात मेरी मगर सुनी ही नहीं.आँसुओं के तलाब सूख गये,आँख में अब कोई नमी ही नहीं.एक तेरी कमी खली है मुझे,और दूजी कोई कमी ही नहीं.डॉ. सुभाष ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  April 27, 2016, 7:18 pm
ग़ज़लआँख सूरज लगा है दिखाने.छाँव की फिर लगी याद आने.हम तलबगार तेरे अभी भी,तू चली आ किसी भी बहाने.आँख तरसे है अब मुद्दतों से ,तुझको देखे हुए हैं जमाने.जुस्तजू एक तेरी ही थी बस,हमने चाहे कहां थे ख़जाने ?ज़िन्दगी क्या है अब पूछिये मत,सांस के चल रहे कारखाने.कोई गुज़री हुई याद आ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  March 29, 2016, 12:14 pm
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