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Budhapa - The Old Age

रखो ख्याल तुम बुजुर्गों का--------------------------------उठालो फायदा जी भर के तुम बुजुर्गों काये तो हैं,एक समन्दर भरा ,तजुर्बों  का प्रेम से जब भी उसमे डुबकियाँ लगाओगेथोड़े गहरे से ही ,मोती को ढूंढ लाओगेमिला है साया बुजुर्गों का बड़ी किस्मत सेखजाना भरलो उनकी दुआओं की दौलत सेबड़ी तकदीर ...
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  April 11, 2012, 3:59 pm
वो दिन कितने अच्छे होते थे---------------------------कई बार सोचा करता हूँ, वो दिन कितने अच्छे होते थेजब एक घर में ,सात आठ बच्चे होते थेमाँ तो घर के  रोजमर्रा के काम संभालती थीऔर बच्चों को,दादी पालती थी  बाद में बड़े बच्चे,छोटे बच्चों को सँभालने लगते थेलड़ते झगड़ते भी थे,पर आपस में प्यार भी...
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  March 29, 2012, 9:47 am
  बुढ़ापा कैसे काटें?आया बुढ़ापा,हमतुम मिल कर वक़्त बितायेंइक   दूजे के  कामों में   हम हाथ   बँटायेतुम धोवो कपडे और मै फिर उन्हें सुखाऊतुम पूरी बेलो ,मै उनको तलता  जाऊमै  सब्जी काटूं तुम उसमे   छोंक लगाओमै सेकूँगा टोस्ट और तुम चाय बनाओऔर फिर हमतुम साथ बैठ कर पीयें,खायेंआय...
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  March 27, 2012, 9:58 am
हो गयी माँ डोकरी हैप्यार का सागर  लबालब,अनुभव से वो भरी हैहो गयी माँ डोकरी हैनौ दशक निज जिंदगी के,कर लिए है पार उननेसभी अपनों और परायों ,पर लुटाया  प्यार  उननेसात थे हम बहन भाई,रखा माँ ने ख्याल सबकारोजमर्रा जिंदगी के ,काम सब और ध्यान घर काकभी दादी की बिमारी,पिताजी की व्यस...
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  March 25, 2012, 5:20 pm
गुल से गुलकंद -----------------पहले थी तुम कलीमन को लगती भलीखिल कर फूल बनीतुम खुशबू से सनीमहकाया  जीवनहर पल और हर क्षणपखुडी पखुडी खुलीमन में मिश्री  घुलीगुल,गुलकंद हुआउर आनंद   हुआअसर  उमर का पड़ादिन दिन प्यार बढ़ाकली,फूल,गुलकंदहरदम रही   पसंदखुशबू प्यार भरीउम्र यूं ही गुजरीम...
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  January 19, 2012, 6:30 pm
आपने हमको बुलाया,आगये,आपने दुत्कार दी,हम चल दियेहम तो है वो पेड़ जिस पर आपने,फेंका जो पत्थर तो हमने फल दियेफलो,फूलो ,और हरदम खुश रहो,हमने आशीर्वाद ये हर पल दियेभले ही हमको सताया,तंग किया,भृकुटियों पर नहीं हमने बल दियेसीख चलना,थाम उंगली हमारी,अंगूठा हमको दिखा कर चल दियेक...
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  December 13, 2011, 2:22 pm
मैंने तो अपने इस घर में---,-----------------------------मैंने तो अपने इस घर में,जाने क्या क्या क्या ना देखाखुशियों को भी हँसता देखा,तन्हाई को बसता देखा  उगते सूरज की किरणों से,मेरा घर रोशन होता थाफिर दोपहरी में धूप भरा,सारा घर आँगन होता था   बगिया में खिलते फूलों की ,खुशबू इसको महकाती थीहर स...
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  December 13, 2011, 1:49 pm
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