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मेरा मन

आज सुबह  जीमेल  खोल तो सबसे  पहले नव्या से आया एक मेल  मिला जब से खोल तो पढ़ा तो में दंग  रहा गया  अब तक में नहीं समझ पा  रहा हूँ की क्या ये सच में साहित्य  की लड़ाई है या फिर साहित्य के नाम की लड़ाई है या फिर घर्णा  है या द्वेष  है या फिर से एक धोका है  इस संदर्भ  में आप  से राय  ...
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  March 13, 2013, 9:47 am
विनती  सुनिये हे  समाज हमारीदुविधा  में पड़ी  हूँ  जंजीरो  से जकड़ी  हूँ विनती  सुनिये  हे  नाथ हमारी .............................इस दुविधा  की घडी  मैं  इस अत्याचारों  की गली में  ... विनती  सुनिये  हे  कृष्ण  मुरारी भरे  मेरे विलोचन  नयेना दुख  पड़ा है भरी कु द्रष्टि हो रही है  ये तेरी न...
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  March 10, 2013, 6:20 am
 तुम  मुझ पर ऐतबार करो ।मैंने तुम्हारा हाथ थामकर  तुम्हें । उम्र भर चाहने की कसम खाई हैं तुम मेरी इन यादों पर ऐतबार करो । इन में  तुम्हारा ही घरोंदा है तुम मेरे इन होटों का ऐतबार करो !जिस पर हर वक़्त तुम्हारा ही नाम  रहता है तुम मेरी इन आँखों का ऐतबार  करो । जो हर पल तुम्हे...
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  March 7, 2013, 8:55 am
कोन  सुनेगा  मेरा दर्द टिका  कर रखती हैपृथिवी हमें और कंपाती भी,है  जल  धरा  के बरसनेपर बरसता गगन सेजल और अग्नि, पवन देता ठिठुरनऔर चक्रवातसब  कितनी  सहजता  से  हो जाता है कभी हम भी वशीभूत  हो जाते  है इस धरा  पर  फूलो  के महकने  से लेकर मुरझाने  तक  सहना पानी  बरसने  से ल...
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  March 2, 2013, 6:10 am
राष्ट्र हित में आप भी जुड़िये इस मुहीम से -सन 1945 मे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तथाकथित हवाई दुर्घटना या उनके जापानी सरकार के सहयोग से 1945 के बाद सोवियत रूस मे शरण लेने या बाद मे भारत मे उनके होने के बारे मे हमेशा ही सरकार की ओर से गोलमोल जवाब दिया गया है उन से जुड़ी हुई हर जान...
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  February 28, 2013, 7:48 pm
इस रह-ऐ उल्फत के मुसाफिर  के साथ  तूने क्या किया कभी अपना  लिया कभी ठुकरा दिया मेरी मोहब्बत  मिटटी का महल तो नहीं कभी बना दिया तो कभी उसी मिटटी  में  मिला दिया तुम ने मेरे साथ वो खुशियों की बारिश जिया हैं कभी तुमने सरबत तो कभी शोक ऐ - जज्बात  बना दिया में कोई कठपुतली  तो नह...
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  February 26, 2013, 6:10 am
मर्ग  नैनी  चन्दन  के उपवन  से लगती हो इस बसंत  ऋतू  में  महकती  खुशबू  लगती होहोश  तो हम तब भी खो देतें  हैंजब तुम हमें  ( तुम  कैसे  हो भी कहे  देती हो )कजरारे  नेन  घनघोर  काले बालइतराना  भी तो ऐसा  कीबदल  जाये  सब की चालखुशबू  भी ऐसी  फूलो  के उपवन से आती  होमाघ  बिहू  में  भी...
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  February 21, 2013, 6:24 am
इस  वैरागी  प्रेम  ने  इतना दर्द  दिया है की सोते  जागते  इस दर्द  को ही सहना  पड़ता है जब भी सोता हूँ  तो नींद  नहीं आती  है और आ  भी जाये कभी आंखे बंद हो भी जाये कभी  तो  ये  प्रेम विरह  नहीं सोने  देता  ।। हे  मुरली  मोहन  वो मुरली  मुझे  देदो जिसे  में  बजाऊ  और  ना  मैं  सोऊ ...
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  February 19, 2013, 6:10 am
वो कोनसा दिन था  की आप  जिस दिन हम आपको याद  नहीं करते हैं फर्क इतना सा  है हम भूलने की कोशिश करते हैं और  हमारे नैन  फरियाद करते हैं उनका  क्या हाल  होगा , ये ही  गम सताता  हैंनींद  भी नहीं आती  , और सवेरा  निकल  जाता है हर  तरफ  उजाला है ,  दिल  मैं एक अँधेरा  हैं ।सामने  वो कब ...
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  February 16, 2013, 6:00 am
जिस दिन से  ब्रह्मचर्य की शुरुआत की, हम स्वतंत्र होने लगे। हम  सब की  पत्निया  और नारी  एक स्वतंत्र स्त्री बन गई, उसके स्वामी के रूप हम   उस पर जो अधिकार चलाता था उससे वह मुक्त हो गई और मैं अपनी उस भूख की गुलामी से छुटकारा पा गया जिसकी तृप्ति का साधन वह थी। किसी अन्य स्त्र...
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  February 12, 2013, 12:50 pm
ऐ  तू वफ़ा रुसवा नहीं करनासुनो ऐसा नहीं करनामैं पहले ही बहुत  अकेला हूँ मुझे और तन्हा  नहीं करनालोग कहते हैं हाथो  की लकीरे  अधूरी  होती हैं पर तुम  उस पर  अमल  मत करना जुदाई भी अगर आयेदिल छोटा नहीं करनाबहु मश्रुफ हो जानामुझे सोचा नहीं करनाभरोसा भी जरुरी हैमगर सबका न...
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  February 10, 2013, 9:12 am
मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी!मिट्टी  का घर  मिट्टी   का मैं मिट्टी  मैं मिल  जाऊंगा फिर भी  नहीं मिटेगी  ये मेरी ये तेरी मिट्टी वो कुम्हार की थापी से कितने  रूपों  मै  मिली होगी  कुटी -पिटी हर बार अपना रंग  बिखेर  गई फिर भी नहीं मिट्टी   ये मेरी मिट्टी गीली हो या सुखी कुछ भ...
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  January 24, 2013, 11:58 am
झर- झर कर बहता झरनापहाड़ों से पानी का गिरना।पानी से पानी का गिरना आदमी,जमाने का पानी गिरना॥शर्म से या इज्जत से गिरनागिरना तो आखिर गिरना ही गिरना।झरने से पानी का गिरना आदमी का आँखों से गिरना॥आज के गिरने में बहुत अंतर हैभांति – भांति इसके मंत्र है॥कलि युगी श्रवण इसके उद...
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  January 21, 2013, 4:51 pm
मैं अब नहीं रोउंगी  अब मैं  हसुँगी  अब मेरे साथ पूरा  देश हँसेगा अब तुम  रोवोगे अब मैं  हसुँगीतुम तो मेरे कर्जदार  थे ही हे खुदा  तुम ने किस मिटटी  को मेरा वफादार  बना दिया जिस मिटटी  को मैंने मेरे हाथो  से सजाया  था उस  वफादार को ही तूने  इज्जत  का लुटेरा बना दिया तू क्...
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  January 13, 2013, 11:30 am
जो बीत गया वो लम्हा थाजो आयेगा वो भी एक होगा॥न देख सके उसको जो बीत गया थाभी उसी में जो सामने आए गा॥उस को क्या देखू में जो बीत चुकाजिंदगी क्या है एक पानी का बुल बुला॥जी ले इसको हर पल न मर-मर करकोन है किस को सुना र हा है दुखड़ा॥साथ क्या जाए गा क्या तूमे मिल जाएगाये ही है दुनिय...
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  January 11, 2013, 1:51 pm
मत कहो कि हार गई .....कितनों का ज़मीर जिंदा कर गई !!!सलाम है उसे बहुत शर्म की बात हैं  हमें   चल्लू   भर  पानी  मैं  डूब   मरना  चाहिए ,उस से भी शर्म  की बात इन नेताओ  की बयानबाजी  हैं अब भी चुप  रहना है तो  घर से  मत निकलना    मत कहना की  किसी ने आपको कुछ कहा है कुछ गलत हरकत की है  आपके...
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  December 29, 2012, 10:52 am
अब और सहन  नहीं  होता है देख  इस देश  की हालत  उस दिन अखबार  मैं इस कड़क  ती  ठंड  मैं पसीने  की बूंद   भी  खून  बन  गई एक बेटी , बहन  की इज्जत  तार - तार-देख  कर भी लोगो  से यही सुना  दिल्ली  तो दिलवालों की हैं गलियाँ  बदल  लो , रास्ता  बदल  लो अपना  चेहरा  ढक  लो  अपना पहनावा  बदल...
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  December 27, 2012, 4:30 am
खूब पहचानती हूँ मैं तुम को और तुम्हारे इस  समाज और इस समाज  के थेकेदारों  को जिस के नाम पर तुम लोग  मेरी  इज्जत  तार- तार  करते हो  और फिर बोलते हो की वो तो मनोरोगी  था मैंने ही उस को भड़काया था हाँ  भड़काया तो मैंने ही था  तुम को जब तुम को पैदा  करने की सोची9 महीनो तक  संता...
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  December 21, 2012, 10:35 am
कभी आसमान तो कभी  धरती  भी  कहा करते हैं फिर  नारी  की समुन्दर से तुलना किया करते है पता नहीं क्यों लोग लड़की को बेजान कहते हैं ? फिर एक नारी को मर्दो की शान कहते है  उन  मैं भी उनकी इज्जत आबरू कहते हैं ?फिर उस लुटी नारी को किस्मत की मारी कहते हैं  कभी आसमान तो कभी  धरती  भी  ...
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Tag :एक औरत हूँ
  December 9, 2012, 12:07 pm
कमावण लागया रूपली जद हुया जवानकागद रो जग जीत गे हू या घणा परेशानजग भुल्या घर भुलग्या , भुलग्या गाँव समाजगाँव री बेठक भूल्या , भुलग्या खेत खलिहान बचपन भुलया, बड़पण भुलया, भुलया गळी -गुवाड़बा बाड़ा री बाड़ कुदणी, पिंपळ री झुरणी बो संगळया रो साथकद याद ना आव बडीया बापड़ी , घण...
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  December 6, 2012, 3:39 pm
चंद लम्हो से मिनट , मिनट से घंटे घंटो से तर-बतर पल-पल दिन जया करते है कभी-कभी हम किसी एक को याद रखने मे किसी ओर को भी तो भूल जया करते हैगर्मी सर्दी वर्षा बसंत बहार हर साल ये जरूर आया करते है मोसम तो आते जाते रहते जानी लेकिन सायद ही कभी भूले याद आया करते हैये तो जालिम जमाने क...
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  December 6, 2012, 3:38 pm
एक अदद ईनसान जो है बड़ा ही खुशचमक चाँदनी से भूल गया सारे दुःखचारों ओर बज रहे हैं बड़े गाजे बाजेसाज धज कर के वो घोड़ी पे साजेनाच-गा रहे है चारों और सारे लोगतन्मय लीन हो के बड़े ही आत्म विभोरछूट रहे है पटाखे – बंट रही है मिठाईयाँखुशी से गले पड़ रहे है हो रही है बधाइयाँमें न...
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Tag :आज कल के प्रेमियों को
  December 6, 2012, 9:28 am
देखने का तो मन था की चाँद देखते हैं  पर आज टिमटिमाते तारो को देख ने लग गया ये  भी इतनी दुरी से केसे टिमटिमाते  रहते हैअपना एक संसार से लगता है उनका कोई भाई कोई कुछ हर एक रिश्तो मैं  बंधे  लगते है ये सब देख चेहरा मुरझा सा जाता है ये अपनी दुजिया बेगानी सी लगती है जैसे  कड़ी ध...
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  November 29, 2012, 5:00 am
ना मुझे प्यार करने का हक है ? ना मुझे इकरार करने का हक है ?मुझे तो बस ,हर किसी के  इशारों पे नाचने का ही हक है ||ना मुझे कुछ पाने का हक है ?  .... मुझे तो बस  हर ................पापा तो हर मेहमान से कहते है ये मेरी प्यारी है ये मेरी राजकुमारी है, नाजो से पाला है  बस एक रंग का फर्क है , बस थोड़ी  सी...
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  November 24, 2012, 9:32 pm
हँसने से पहले उन्होंने मुझे कहा था की तुम रोना नहीं मैं हँसने का प्रयास  करता रहा और वो मुझे रुलाते चले गए मैं रोता चला गया वो हँसते चले गए कहा एक दिन उन्होंने हमें  कह भी दो एक कहानी मैं कह भी कैसे देता  आज तो अंशुओ की आहत सुने दे रही थी कभी प्रयास किया मैंने और एक किस्स...
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  November 17, 2012, 5:00 am
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