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गाँव

डिजिटल युग मे ONLINE SHOPPING और व्यापार की असीमित संम्भावनाये हैं कुछ प्रयोग कर  देखे।...
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  February 23, 2017, 3:26 pm
वैशाख शुक्ल पक्ष  की तृतीया को अक्षय तृतीया का त्योहार भारत मे बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। प्रायः इस दिन पर लोग स्वर्ण व चांदी के धातुओं को व इन से निर्मित आभूषण खऱीद कर मनाते हैं। इस तिथि को अबूझ मुहूर्त या चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अ...
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Tag :गंगा जी
  May 9, 2016, 10:36 am
शायद सभी को अपना बचपन कुछ इस तरह याद आये!!! मेरा नया बचपन / सुभद्राकुमारी चौहानबार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद? ऊँच-नीच का ज्ञान नह...
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  January 19, 2016, 2:53 pm
हम छोटे थे तो कलम और दवात के साथ लिखना पढ़ना होता था। 1985 में जब नौकरी शुरु की तो पहली बार कम्प्यूटर देखा। सारे काम तो हाथ से ही होते थे किन्तु डाटा संग्रह कर कम्प्यूटर विभाग को दे दिया जाता था। धीरे धीरे अकांउटस्  की मोटी मोटी किताबें लिखनी आसान हो गयी। हिसाब किताब मे...
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  November 24, 2014, 7:35 pm
ये रिक्शे वाले !सदियों से मानव का बोझ ढ़ोते आ रहे हैं,मजदूरी की सौदे बाजी निरन्तर करते आ रहे हैं।मैंने रिक्शे वाले को आवाज दी-'चलोगे  चौक तक''जी चलूंगा''पैसे बताओ कितने लोगे''जी दे देना''नहीं पूरे बताओ''पूरे पांच रुपये''अच्छा मुझे नही जाना''बाबू जी चार दे देना''दो देंगे बोलो ...
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Tag :रिकशे वाले
  September 29, 2012, 11:15 pm
                    14 सितम्बर को एक ऐसे कवि की पुण्य तिथि है जो कभी इस दिन पर याद भी नही किया जाता है। हिन्दी साहित्य को अभूतपूर्व योगदान करने वाले, किन्तु प्रायः अप्रकाशित रहने वाले इस कवि का नाम है- चन्द्रकुंवर वर्त्वाल। ठीक उसी तरह है जैसे छोटी न...
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Tag :चन्द्रकुवंर वर्त्वाल
  September 14, 2012, 12:00 am
भावभीनी  विदाई  .संसार   परिवर्तन   शील  है, यह उक्ति कितनी सार्थक है कि जीवन पर्यंत कई परिवर्तन देखने को मिलते  हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी नई रीतियाँ , परम्पराएं, पनपती  है  और बदलती रहती हैं. मान्यतायें  जन्म लेती है. बचपन , युवावस्था तदोपरांत का जीवन  और मर्यादा...
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Tag :विदाई
  February 23, 2012, 6:13 pm
चित्र  गूगल  से  साभार आज वालेन  टाइन  डे  है . सभी, युवक -युवती, मित्र प्रेमियों, जो इस दिन को मना रहे हैं या नहीं मना रहे हैं, को हार्दिक शुभकामनाएं.यह भारत में आयातित  दिवस है. और इस दिवस की परिचर्चा में सारा भारत अंतर्विरोधी भाषाओँ में लगभग एक महीने से लगा हुआ है. मानने वा...
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Tag :तीज त्यौहार
  February 14, 2012, 5:13 pm
गूगल से साभार भारत जननी के गौरव हे पर्वत राज !हे शत युग-युग के इतिहास,तुम देख रहे हो स्वयं काल काल का राज !                                                 क्यों रो नहीं उठते, मौन क्यों खड़े तुम आज! जब प्रवाहित थी ...
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  February 2, 2012, 11:03 am
ढोल और दमाओंसंगीत और नृत्य  दोनों के लिए वाद्य यंत्रों की आवश्यकता मनुष्य की सदा से बनी रही है. इसीलिए समयानुकूल तरह तरह  के वाद्य यंत्रों का अविष्कार  होता रहा. कुछ यंत्र तो सामयिक रूप से अवतरित होते रहे, किन्तु कुछ पारंपरिक रूप से दीर्घावधि में ज्यों के त्यों बने...
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Tag :वाद्य यन्त्र
  October 8, 2011, 4:58 pm
प्रायः देखने में आता है कि जब आप किसी प्रिय कि प्रतीक्षा करते है तो जैसे जैसे समय बीतता चला  जाता है, उसी गति से आपका हृदय भी धडकने लगता है .  प्रिय व्यक्ति आपका चेहेता बेटा, बेटी हो सकती है, पति, या पत्नी, भाई या बहिन, अथवा प्रेमी और प्रेमिका, इनमे कोई भी हो सकता है. प्रतीक...
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Tag :प्रेम
  August 1, 2011, 6:07 pm
अनुशासन  मनुष्य के जीवन के  लिए  महत्व पूर्ण   है  अनुशासन को बनाये  रखने के लिए व्यक्ति तरह तरह  के यत्न करता रहता है  कभी इसे बनाये  रखने के लिए अनुशासन तोड़ता भी है . और न जाने किस किस को कितनी सजा देता है  इसकी कोई मानक सीमा तय नहीं है,  कभी स्वयंम को , तो क...
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Tag :सजा
  June 24, 2011, 1:43 pm
  "अस्त्युत्तरस्याम दिशी देवतात्मा .हिमालयो नाम नगाधिराज :,   पूर्वापरो तोयनिधि वगाह्या ,स्थित :पृथिव्याम एव मानदंड : ||  " कुमारसंभव का प्रारंभ  करते हुए महा कवि कालिदास ने जिस हिमालय पर्वत को नगाधिराज की उपाधि प्रदान की उस नगाधि राज की प्राकृतिक सम्पदा, सुन्दरत...
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Tag :पलायन
  June 15, 2011, 3:05 pm
जब आप कोई पुस्तक  पढ़ते है  तो पुस्तक का मुख पृष्ठ  अपनी आत्म कथा वर्णित करने का प्रयास करता है. तब कोई व्यक्ति आपको पढ़ते हुए देखता है  या किताब के पन्नो पर ताक झांक कर  पढने की कोशिश करता है, तो वह सहज ही इस  बात का निर्णय ले लेता है कि आप क्या  और क्यों पढ़ रहे हो . ...
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Tag :अध्यन
  May 19, 2011, 6:29 pm
 आओ लौट  चले प्रकृति  की ओर!कहाँ हिमखंडों का ढेला,कहाँ नदियों का जल प्रवाह,हो रहे वन भी कंगाल देखो ! कहाँ खिचीं जा रही जीवन की डोर,आओ  लौट चले प्रकृति की ओर !नष्ट हुए खेत खलिहान ,नग्न हुई पर्वत श्रृंखलाएं,तोड़ इन्हें, सड़क हुयी परवान,सूखे जल स्रोत, और जल दायिनी  गंग...
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Tag :कविता
  May 10, 2011, 6:56 pm
मस्तिष्क  और ह्रदय  से संयोजित होते हुए विचार प्रकट होते है . इस तरह जब विचार मन में उदेव्लित हो रहे हो बाढ़  की तरह,  तब उन्हें सकलित करने की आवश्यकता जान पड़ती है, इसीलिए संभतः  लेखन का कार्य भी प्रारंभ हुआ . इस उद्वेलन को सँभालने के लिए उसी क्षण लेखन सामग्री की भी ...
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Tag :साहित्य
  April 22, 2011, 6:45 pm
गौरा देवी नेतृत्व क्षमता  और विवेक शील बुद्धिमता सिर्फ शिक्षित लोगों  में ही नहीं पनपती  है, यह तो ह्रदय से अनुकंपित, स्नेह, और लगाव तथा मस्तिष्क की वैचारिक चपल  अनुगूँज  से प्रस्फुटित होती है, व्यक्ति की वैचारिक क्षमता, कार्यशीलता और अनुभूति की गति  पर सदा न...
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Tag :चिपको
  March 25, 2011, 12:57 pm
यमुना ! वृद्धाकार ! तटबंधों पर रेत के टीले ! और उन पर उगते सफ़ेद कांस केश ! रुग्णित, विक्लांत !                                   दिल्ली में,जीवनदान या इच्छा मृत्यु की भीख मांगती ! चौमासा में यौवन, इठलाती बलखाती और आवेशित रोष  भी ...
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Tag :यमुना
  March 11, 2011, 11:54 am
                    सभी  महिला ब्लोगरों को                      अंतर्राष्ट्रीय                महिला दिवस  की                                      हार्दिक&n...
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  March 8, 2011, 5:02 pm
संसार परिवर्तन शील है यह एक ब्रह्म सत्य है जन्म मृत्यु के चक्र में प्राणी घूमता रहता  है . तरह तरह की व्याख्याएं  परिभाषित है, प्राणी जीवन के वृत्त चित्र की .धर्म भी अलग अलग मान्यताएं प्रदान करते हैं . उस एकाकार  नियंता की निर्माण कार्यदायिनी में  निर्माण, उत्पादन, ...
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  March 4, 2011, 6:38 pm
निस्तब्ध शून्य के नीचे यह कोलाहल सा कैसा ! अधिकार विकृत जीवन का स्वार्थ कैसा ! निरा  सा धुंवा  कर्तब्य का कैसा ! माँ  भारती !  अपहृता- अनादि योद्धा, हिमगिरी मौन साधे कैसा! तिरोहित  मनः स्थिति  में, निर्निमेष अवलोक रहा  कैसा ! विक्षिप्त जीवन की व्यथा है, यह प्रलय का ...
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Tag :कविता
  February 15, 2011, 4:43 pm
 सुभद्रा कुमारी चौहान  पंक्तियाँ  सार्थक  हैं - आजा बचपन  एक बार फिर ....................
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  February 15, 2011, 3:34 pm
वैज्ञानिक विकास की   सघन छाया में पलता पोषता आधुनिक जीवन  और जीवन की विचारधारा  अतीव तीव्र है गति भी और सञ्चालन भी . इस खोजी युग में ना जाने कितने वैज्ञानिक जन्म ले रहे है प्रश्न का उत्तर कठिन है . ऐसे युग में  वैज्ञानिक दृष्टिकोण  से  अवलोकन करने पर  प्रतीत  ह...
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Tag :छायावाद
  January 24, 2011, 4:17 pm
यों तो गढ़वाल ही नहीं अपितु सारे उत्तराखंड में तीर्थ स्थलों, मंदिरों एवं सुरम्य पर्यटक स्थलों की भरमार है । इस धरोहर के लिए भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्द है इसी कारण हजारों तीर्थ यात्री एवं पर्यटक उत्तराखंड पहुँचते हैं।प्रायः लोग मुख्य स्थानों , बदरीनाथ क...
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Tag :पर्यटन
  January 4, 2011, 3:30 pm
सभी ब्लागरों , पाठकों,  लेखकों  व् नागरिकों,  को  सहृदय, नव आगंतुक वर्ष के लिए,  हार्दिक  शुभ कामनाएं , .आशा करता हूँ कि सभी के लिए नव वर्ष में अपार हर्ष और खुशियाँ  आयें  आपका लेखन दिनोदिन मर्म और जीवंत हो उठे जिससे समाज और देश का  गौरव बढ़ सके . इस सन्देश को पढन...
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Tag :
  December 31, 2010, 6:01 pm
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