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कासे कहूँ? : View Blog Posts
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कासे कहूँ?

इस साल छुट्टियों में घूमने जाने का कार्यक्रम बना अलीबाग का .वही समय की कमी इसलिए ज्यादा दूर जा नहीं सकते.अचानक के प्रोग्राम में रिजर्वेशन  नहीं मिलता इसलिए कार से ही जाना तय हुआ.(वैसे भी न रिजर्वेशन की कोशिश की न ट्रेन से जाने का सोचा).बस तय हुआ की शनिवार की शाम निकलेंग...
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Tag :
  May 20, 2012, 10:54 pm
में आई इस जहाँ में बिना तुम्हारी इच्छा या मर्जी के अपनी जिजीविषा के दम पर सहा तुम्हारा हर जुल्म निशब्द पर तोड़ नहीं पाए तुम मुझे ये तुम्हारी हार थी.अपनी हार पर संवेदनाओं का मलहम लगाते तुम हंसती रही में तुम्हारी बचकानी मानसिकता पर दर्द दे कर कन्धा देने से शायद मिलता...
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Tag :आफरीन
  April 12, 2012, 11:40 pm
शहर की व्यस्ततम सड़क पर दिनेश की कार एक ठेले  से टकराई ओर ठेले को खींचता बूढ़ा नीचे गिर गया. ओह्ह ये बूढ़े भी न बुदबुदाते दिनेश नीचे उतरा .आस पास भीड़ जमा हो गयी थी बच निकलना नामुमकिन था मौके की नजाकत देखते उसने आवाज़ को भरसक नरम बनाते हुए कहा - बाबा माफ़ कर दो गलती हो गयी ....
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Tag :मजदूरी
  February 17, 2012, 12:44 am
सुबह उठते ही याद आया आज तो मकर संक्रांति है .चलो अब से दिन थोड़े बड़े होंगे ओर इस हाड़ कपाऊ सर्दी से थोड़ी राहत मिलेगी.सबसे पहला ख्याल तो यही आया.सन्डे  की छुट्टी ढेर सारा काम ओर त्यौहार ओर सबसे बड़ी बात काम वाली बाई की छुट्टी.सब काम से निबटते दोपहर हो गयी. वैसे तो आज भी ठण...
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Tag :मकरसंक्रांति
  January 15, 2012, 11:46 pm
ब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी आयी जिससे लिखना कम हुआ लेकिन लिखने का शौक ओर आपका प्रोत्साहन मुझे फिर यहाँ खींच लाया. आज में अपनी १०० वीं पोस्ट डाल रही ...
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Tag :मातृत्व
  December 22, 2011, 5:58 pm
देर रात तक तारों संग ,खिलखिलाने को जी चाहता है.चांदनी के आँचल को खुद पर से, सरसराते गुजरते जाने को जी चाहता है. पीपल की मध्धिम परछाई से छुपते छुपाते ,खुद से बतियाने को जी चाहता है. चलते देखना तारों को ओर खुद ,ठहर जाने को जी चाहता है .रात के सन्नाटे में पायल की आहट दबाते, नदी ...
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Tag :चांदनी
  December 21, 2011, 5:32 pm
वह  उचकती  जा  रही  थी  अपने  पंजों  पर .लहंगा  चोली  पर  फटी चुनरीबमुश्किल  सर  ढँक  पा  रही  थीहाथ    भी  तो  जल  रहे  होंगे .माँ  की  छाया  मेंछोटे  छोटे  डग  भरती ,सूख  गए  होंठों  पर  जीभ  फेरती ,माँ  मुझे  गोद  में  उठा  लोकी  इच्छा  कोसूखे  थूक  के  साथ हलक  में  उतारती .देख...
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Tag :बेबसी
  December 11, 2011, 10:25 pm
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