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कलम कवि की

जय भारती जय भारती जय भारती जय भारती२६ जनवरी राजपथ को रंगों से है संवारती २६ जन को हमने अपना, संविधान लागू कियारौशनी चमकी यहाँ, हमने जलाया, अपना दीया   पगपग बढ़ते रुकते ना हम, मना रहे गणतंत्र है दुनिया में हमसे बड़ा न,कोई और जनतंत्र हैबार बार जन्मे यहाँ हम,पावन धरा पुचकार...
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  January 20, 2017, 7:07 pm
जो चाहा था वो पाया थामेरे सर माँ का साया था मै जब किसी शुभ कार्य हेतु घर से जाता थामाँ का हाथ बिन भूले दही शक्कर खिलाता थाआज मेरी गलतिओं पर कोई, डाँटने वाला नहीं है पर गलती नहीं करता क्योंकी माँ अब भी यहीं है जब भी नाकामी का अहसास होता हैमाँ के आँचल का सर पर आभास होता है भगव...
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  November 14, 2016, 9:46 am
आने पर ना बस था कोईतब जाने की क्या बात करें तू है मेरी यह कथन तेरा है धरा कहाँ पग कहाँ धरें जहाँ भी जाते जहान में हम कण रण क्षण सब उसका हैकहते हैं हम धरा के प्राणी पर है अपनी कित्ती  हद यह तू बता हम कहाँ मरें है धरा कहाँ पग कहाँ धरें आयें है तो पायेंगे क्याखेत तेरा खलियान ते...
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  November 11, 2016, 12:45 am
बापू मुझे बस कवि बना देतोड़ मोड़ जोडू क़ायदा सीखा देअनभिज्ञ जहान से बचपन थादेख लेख लिखने को मन था मुठ्ठी भर शब्दों का जोड़ देखदर्द पुत्रमोह उमडाया था नग्न फाके समान थे कवि फटी धोती हाड़ दिखाया था   आज देख कवि रेलम पेलजैसे हो गेंद बल्ले का मेल ईस युग में बस यह दोनोंअनगिन पै...
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  November 6, 2016, 11:25 am
पर्वत पर कहाँ फूल खिलें कहाँ वृक्ष बढे चट्टानों में आज जिंदगी बोल रही शांत हुए शमशानों में ...
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  November 6, 2016, 8:46 am
हंसी संजोये होठों पर वह रखती थी आँखों मे पानीमन मे सपने लिए अनोखेपाले थी वह पेट मे रानीपुरुष ने पुरुषार्थ दिखाया कहकर दबदबा बनाया जने  जो तेरी कोख़ जनियोदुनिया जाने वंश बढ़ाया कुछ न बोली कुछ न बोली मन रोता पर गर्दन हामी  बादल ने ज्यूँ ली अँगड़ाईसमय बीतता बद्री छाई ला...
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  November 4, 2016, 9:25 pm
दलदली नेताओं से अपने देश को बचायेंगे पुराने पन्ने फाड़ अब नया ग्रन्थ रचाएंगे  झाड़ू को झटको हाथ को पटकोकमल को तोड़ो हाथी को फटकोनिक्कमा नेता कहीं दिखे यदिकुत्ते छोडो मत से मत भटको बुधि का उपयोग कर मोहर सही लगायेंगे  दलदली नेताओं से अपने देश को बचायेंगे जब से हम आज़ाद ...
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  September 11, 2016, 1:17 pm
उम्र अभी वो नहीं कि सब हमे बाबा कहेंतुम यूँ अलग हुए कि नूर ही चला गयाअब किस किस को सुनाएँ अपनी व्यथावो जो भीतर था बाहर क्यों चला गयाअपने हक़ का लगता है ज्यादा मसलादबाव कुछ ज्यादा था वो कुचल गयाहमने तो सोचा था पूरा हक़ है उनपररबर को इतना खींचा, टूटता चला गया  ...
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  August 31, 2016, 7:47 pm
हर सितम सर झुकाया रिश्ते की नाजुकता जानकरमौन हम, नीची औकात कहा उसने भौं तानकरमेरे अंगना तूफ़ान आया और सब उजड़ गयाबचा वही जो उस पल झुका और संवर गयाकौन कौन कितने थे वो यह तो हमको याद नहीं आज खो कर पाया हमने कोई उनके बाद नहींहमने बिस्तर बाँध लिया, कब सफ़र शुरू हो पता नहीं, दुनिय...
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  August 26, 2016, 9:28 pm
जब तारे न थमते नभ में न लौ सूरज की फीकी होतू थक कर क्यों बैठ गया ज्यूँ मंजिल तेरी रीती होयहाँ पथ पर चलने वाला, हर कोई मुसाफिर होता हैतू निराला मत बन यहाँ, ये जीवन मंजिल जोहता हैमंजिल सबकी अलग अलग, साथी की तू बाट न जोहवो जायेगा अपने पथ तू लेता फिरता उसकी क्यूँ तोहपवन चले तू च...
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  August 5, 2016, 2:56 pm
दोनों चैन से बेठे आँख खोल सोये थे अधजगेअजीब से सपनो में खोये थे जाते हुए अम्मा ने पूछा खाने का डब्बा रख लिया, पानी तो नही रह गया सारी पुस्तके रख ली कोई काम तो नहीं रह गया बापू कमा पीठ झुका पूछेबेटा तेरा सारा सामान आ गया कुछ और तो नही रह गया थोड़े पैसे और रख ले देख लियो कुछ बाक...
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  August 3, 2016, 10:33 pm
आओ बच्चो खेलें खेल एक बनायें ऐसी रेल जिसका ईंजन अपना भारत बाकी देश डब्बों का मेल ऐसी पटरी सरपट दोड़े नदी खेत गाँव पीछे छोड़ेनिकली पाने मंजिल को वो छुक छुक धड-धड का ये मेल आओ बच्चो खेलें खेल........................दुनिया वालों जानलो अब हिन्द को पहचान लो अब एक नंबर पर अपना भारतबाकि देश करे...
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  November 19, 2014, 6:13 pm
मानव सभ्य है या असभ्ययदि सभ्य हैतो क्या ज़रुरतसंविधान और कानून कीयदि असभ्य हैतो क्या ज़रुरतसंविधान और कानून कीसभ्य समाजसंविधान, कानूननियंत्रण और कचेहरीअजब विडंबना है...
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  October 30, 2014, 7:42 pm
ये ईद है तुम्हारी तुम्हारी है दिवाली ऐ खुदा क्यों तूने मुझको कर दिया खाली खाली बरसों से मेरे दिल में भी जलती थी फुलझड़ियाँ पर इस बरस बुझी हैं मेरी चाहतों की लड़ियाँफूलों की महक सबकी पर मेरी डोली खाली ये ईद है तुम्हारी तुम्हारी है दिवाली ये जगमगाते आँगन त्योहारों की बौछा...
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  October 21, 2014, 9:31 pm
कल मैंने एक सपना देखा जी हाँ मैंने सपना देखा सपना कुछ अपना सा ना था सपने ने सुख चैन छीना था रह रह कर बदबू आती थी नाक स्थान छोड़ना चाहती थी उठा छोड़ अपनी चारपाई खोजने बदबू कहाँ से आईबदबू घराना जे जे बस्ती गरीबी यूँ रहना हक समझती ना बदबू वहाँ नहीं कोई जात भाई भौच्चकी आँखे इतनी ...
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  October 16, 2014, 7:29 am
 मुझे याद क्यूँ ना कुछ रहाभूल गया क्यूँ कल का सहापानी मे वो प्रतिबिम्ब थाप्रतिबिम्ब मुझसे कहाजो तुझमे है वो उड़ेल देहर्फों के सबको खेल देतेरी वेदना या चेतनाउसमे हो तेरा लिखा सनाजो पाया मैंने संचय कियालिखने बैठा जो था सहापर हाय रे यह क्या हुआफिर भूल गया कल का सहा एक ...
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  October 10, 2014, 8:16 am
आज भीतर जब झाँकाधूल पुस्तकें दबा रही थीउनमे छपी हर व्याख्या डरी सहमी सी पड़ी थीबाबा पुस्तकें पुरानी है मै चौंका, आवाज़ सहम गई माँ कहती है, धीमे स्वर बोलाबात संभाली और समझाई बिलकुल नई बस थोड़ी धुल तले सोयी भीतर छपे ज्ञान की परिभाषा न खोई   कबाड़ी वाला इसका बस रुपैया देत...
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  October 9, 2014, 12:02 am
तुम भरे भरे से रहते होबिन बोले सब कहते हो खुश होते तब भी बहते हो दुःख में भी संग रहते हो सागर से लगे रिश्ता गहराछलके लगे मोती है ठहरा कभी मिलाई कभी जुदाईबिन तुम्ह्रारे कभी न आई     भोले भाले नयन हमारेकभी कुछ न कहते हो निकलते और बहते हो भीड़ है तन्हा रहते हो नयन बसे...
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  October 7, 2014, 8:18 pm
नित खोजूं आने का कारणपर जाने का समय निकट दुविधा विकटरिश्ते थे हम जग मेंचलते हमारे उनपर संकट दुविधा विकटबना बनाया सब छुटेगासंग क्या जाये ये कटकट दुविधा विकटभेजा था भेजा न भेजाभेजे में भरते रहा मै चिरकुटदुविधा विकट ...
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  October 6, 2014, 3:46 pm
चिंगारी नफरत की भीतर लिये फिरते रहे  रिश्ते खाक कर दोष रिश्तों पर मढ़ते रहे तुम तो सदा तुम थे हम समझ ना सके आइना समझा और अस्क हम ढूढ़ते रहेसंभल कर चले उम्रभर कहीं गिर न जाएँगिरे तो उठाने को तुम्हे खुदा समझते रहेतुम संग थे फिर क्यों जुदाई का अहसासदिल की अनसुनी कर दिमाग र...
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  October 4, 2014, 8:32 pm
मुखड़ा क्यूँ फेरते हो मुखड़ा क्यूँ फेरते होइतने बुरे ना हम हैंजीवन में कम ना गम हैंऐसे में तुम भी हमारादुखड़ा ना देखते होमुखड़ा क्यूँ फेरते हो मुखड़ा क्यूँ फेरते होतुम्हारा था हमको सहाराअब कर गये क्यूँ किनाराअपने हो फिर भी तुमबेगाने से लगते होमुखड़ा क्यूँ फेरत...
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  September 24, 2014, 10:02 am
आखरी साँस आने को है पर कोई अपना न आया गुनाह इतने किये रहा उम्रभर अकेलेपन का सायाहर तत्व इस शरीर का अपने अपने में जा मिलापर माटी को माटी ने अब तक ना था अपनाया अहसास कुछ होने लगा माँ का दिल था दुखाया  निर्जीव जीव पड़ा रहा बिन माता पिता का सायाअपने किये हर गुनाह की सजा को तैय...
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  September 18, 2014, 9:38 am
ताबूत से पहले बुत लिये चला चलन बुत खड़ा निहारे बुत बुत का काटे कफन बुत तराश धरा से लेकर उसके संचयन यूँ चलावे हाथ ज्यूँ बुत बोले वचनप्राण संग बुत बुत रहे जगा ताबूत में ओढ़े कफ़न ...
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  January 12, 2014, 11:41 am
मुझको न समझाया किसी ने ना ही था बतलाया चढा मै घोड़ी अंतिम हंसी संग बीबी रोती लाया रास्ते भर सोचता आया संगनी क्यूँ थी रोती सबको गले लगाती चलती मुझे देख चुप होती पूछा सबसे है पहली शादी वजह मुझे बतलाओ सबने दी सांत्वना कहा समय पर जग जायो धीरे धीरे समय चला समझ मुझे सब आया स्वंम...
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  January 8, 2014, 9:24 am
देखो मेरीभौरहो गयी एक डाली पर चिडिया चहकेदिवार सहारे तुमना चहकना वो भूलतीना हीचहकनातुमउसके सुरया तुम्हारे सुरना कुछ अंतर विशेष है बस तुम दोनों कीचहकमेरा हर दिवस में प्रवेश है मौसम बांध सके ना दोनोंना दोनों की मीठी बोली उठ जा अब न तोड़ चारपाई देख धूप चहुँ ओर ...
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  January 4, 2014, 8:54 am
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