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किरण की दुनिया

हर काबिल हर कातिल तक अपनी महक अपना हरापन फैलाते वसंत स्वागत है तुम्हारा....मधुमास लिखी धरती पर देख रही हूँ एक कवि बो रहा है सपनों के बीज । किसके सपने है महाकवि मैं पूछती हूं और ग्रीक देवता नहीं अपोलो नहीं.. बोल पड़ा चतुरी चमार । ये कैसा मेल महाप्राण ? कोई मेल नहीं कोई समानता न...
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  April 24, 2017, 10:30 am
सारे दरवाजे बंद करघनघोर अँधेरे में बैठा वोनिराश हताश थादरारों से जीवन ने प्रवेश कियाखोल दी खिड़की, जीवन कीवो स्त्री थीजो रिक्त हुये में भरती रही उजालेऔर बदल गई अँधेरे के जीवाश्म मेंमेरी ये पंक्तियां स्त्री की स्थिति स्पष्ट करने के लिए काफी है । समय बहुत बदला है उसकी प...
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  April 12, 2017, 7:32 pm
प्यारी  जिंदगीकहनो को तुम हमारी हो लेकिन पल-पल लहरो की तरह आती जाती तुम्हारी हर लहर पर अलग-अलग नाम लिखा है और इस कदर लिखा है कि कभी-कभी लगता है तुम सचमुच में हमारी ही हो या किसी और की।सुनो जिंदगी कुछ सपाट रहों पर हमारे कदमों के निशा होते है कभी सपाट रास्तों से पगडंडियों ...
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  April 10, 2017, 10:44 pm
हम भारतीयों की चेतना शक्ति जहां से प्रभावित होती है वो क्या है ? ये एक बड़ा प्रश्न है क्या वो हमारा धर्म यानी हिंदू धर्म है मतलब हमारे वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और शायद हद तक हमारा लोक जीवन वो लोक जीवन जिसका भाव भिन्न पूजा पद्धति ,भिन्न जीवन विधि होने पर भी परस्पर ...
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  April 9, 2017, 9:21 pm
दिन सबका शुभ होमंगलकारी हो...
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  April 7, 2017, 9:31 am
सबका दिन शुभ होसबके कष्ट दूर हों....
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  April 7, 2017, 9:28 am
प्यारी  जिंदगीकहनो को तुम हमारी हो लेकिन पल-पल लहरो की तरह आती जाती तुम्हारी हर लहर पर अलग-अलग नाम लिखा है और इस कदर लिखा है कि कभी-कभी लगता है तुम सचमुच में हमारी ही हो या किसी और की।सुनो जिंदगी कुछ सपाट रहों पर हमारे कदमों के निशा होते है कभी सपाट रास्तों से पगडंडियों ...
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  April 3, 2017, 10:35 pm
संपूर्ण सृष्टि में चीजे एक दूसरे से जुडी होती है और उनमें एक विशिष्ट तालमेल होता है। विज्ञान से लेकर हमारे धर्म ग्रंथ कहते है कि ऐसे कई नियम अविरल काम करते रहते हैं। कार्य कारण को लेकर घटी घटना का सम्बन्ध मनुष्य से सीधे तौर पर न भी हो तो परोक्ष रूप से होता है चाहे वो घटना...
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  March 29, 2017, 7:57 pm
संपूर्ण सृष्टि में चीजे एक दूसरे से जुडी होती है और उनमें एक विशिष्ट तालमेल होता है। विज्ञान से लेकर हमारे धर्म ग्रंथ कहते है कि ऐसे कई नियम अविरल काम करते रहते हैं। कार्य कारण को लेकर घटी घटना का सम्बन्ध मनुष्य से सीधे तौर पर न भी हो तो परोक्ष रूप से होता है चाहे वो घटना...
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  March 28, 2017, 9:08 pm
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  March 27, 2017, 12:35 pm
उन्नीस सौ साठ के दशक से या यूं कहें कि उत्तर-आधुनिकता के आगमन से विश्व के सामाजिक,राजनितिक चिंतन और व्यवहार में कुछ नए आयाम जुड़े है। परंपरा और आधुनिकता के संघर्ष से मानव समाज के सामाजिक जीवन एवं व्यवहार में बदलाव होता जा रहा है। सामाजिक व्यवहार तथा मूल्यों में हो रहे ब...
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  March 8, 2017, 9:46 am
होना तो ये थापाबंद बन जाने थे माथे परजलाना था दियाजाना था तकिया परये पूछनेदरिया में आग क्यों अमृत क्यों नहींशायद दो मैना दिख जातीलेकिन झुकना न आयाफिर मारे पत्थर दिल परखौफ़ की चक्की चलाईसोचा तो ये भी थाअब-ए-चश्म में नहा करपता चलेगादिल का जला क्या पता देगाकुछ आंखो मेंजु...
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  March 2, 2017, 4:12 pm
हर धुन, हर गंध, हर तालहर सुर, हर सत्य, हर सुन्दरताशिव तुम होतुम्हारे रसतत्व मेंतत्व की शक्तितो शक्ति हैहैं न शिवनहीं तो तुम शव होलेकिन शक्ति के छंद में दर्दतो वो क्या करेअपने आंसुओं सेनिकाल जल तत्वक्या स्थापित करेअपने अन्दर वो उर्जाजो आज तक पुरुष को देती आई।...
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  February 23, 2017, 10:37 pm
जीवननयन, मन तारबज उठा सितारलीन हुई मैंतुम में।अंग सिहरनरहस्मय गतितुम सत्य ज्ञानमैं जड़ सी पड़ी।सात लोकसात स्वरसप्तसदीबिन तुम्हारेमैं शून्य हो खडी।अभिमान, स्वाभिमान हुए आलिंगित तब सभ्यता हुई नूतन...
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  February 21, 2017, 8:03 pm
हर काबिल हर कातिल तक अपनी महक अपना हरापन फैलाते वसंत स्वागत है तुम्हारा....मधुमास लिखी धरती पर देख रही हूँ एक कवि बो रहा है सपनों के बीज । किसके सपने है महाकवि मैं पूछती हूं और ग्रीक देवता नहीं अपोलो नहीं.. बोल पड़ा चतुरी चमार । ये कैसा मेल महाप्राण ? कोई मेल नहीं कोई समानता न...
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  February 20, 2017, 7:15 pm
सिबल ऑफ़ द लिवरेटिंग पॉवर्स ऑफ़ फीमेल सेक्सुअलिटी ! सुप्रीम मिस्ट्रेट ऑफ़ द यूनिवार्स । मृत्युजयी निरावरण श्यामवर्ण काली, कालजयी आदि शक्ति जिसके अस्तित्व से जन्मी है प्रलय क्योंकि उस शक्ति ने साधा है काल को और उसे सहा भी है। विरोध स्वरुप जिसका जन्म हुआ हो उसे काल की क्या...
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  February 19, 2017, 12:15 pm
परिपथ से राजपथ तकसंवेदना दिखाई पड़ती हैकिसी मचलती तारिका की तरहअपनी अदाओं सेउत्तेजना फैलातीतूफान खड़ा कर देती हैसंवेदना जो पूरी तरह बदल गई है वेश्या मेंलगाती है अपनी कीमतत्रिवर्ग की सिद्धि में लगे लोगबोली लगा खरीदते हैऔर संवेदना चल देती है उनके साथदुकान चमकानेघटना...
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  October 2, 2016, 8:43 am
सुदूर अतीत केमुर्दे टीले में बनेतालाब की आखरी सीड़ी परपड़ी हुई जली लाशअसल में फिनिक्स पक्षी हैजो अपनी ही राख सेपुन: जीवितस्त्री बनसभ्यताओं के आंसू सेलिख रही है विशिष्टता की दास्तांसभाल रही हैविशिष्ट व्यवस्थाओं के दस्तावेजजिसमे है रूमानियत की लाशज़ज्वातो की डिबियाग...
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  September 14, 2016, 5:05 pm
सूक्ष्म खुशबू, भीनी गंधऐसा ही होता है प्रेमप्रेम मतलब एक बिंदु पर खड़ा होनायाअंतस से एक स्त्री का पुरुष होना , पुरुष का स्त्री होनाप्रेम, हर पल चलती सांसो का उत्सवया अस्तित्व में समाई जीवन- मृत्युउल्लास,उमंग का जरियाप्रेम मतलब उर्जा, सृजन, जीवन, आशा, विश्वास, उम्मीदप्रे...
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  September 4, 2016, 10:21 am
वो गूंजते दिन बचपन केझूमते आंवले के पेड़बचपन तोड़ता तेदू फलऔर खंडहर हुयेकिले मेंछुपती किलकारीसर्पीली सडको से दौड़पहाड़ो पर चड़नाजालपा मैया केघंटे के लिएघंटो मशक्कत करनाआज भीभीड़ के सूनेपन मेंमंदिर के घंटेयाद दिल ही देते हैबीते बचपन की।...
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  August 21, 2016, 4:31 pm
तेदू पत्ता तुड़ान करते हुये एक दिनमेरे ही धधकती जवानी सेठेकेदार ने जब बीड़ी सुलगा ली तोमैं नहीं बचीगुम हो मिल गईदंडकारणय  की गुमनाम कहानियों मेंलेकिन कहते है नकुछ बचा रह जाता हैसो बची रहीनख भर उम्मीद  नख भर ताकतउसी से ले हाथ में बगावत की विरासतगांधी के न्यासिता के स...
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  August 16, 2016, 8:56 am
युवा कविताएं उतार रही है कपडेउन हिस्सों के भीजिन्हें ढकने की कोशिशमें त्रावणकोर की महिलाओं नेकटा दिये थे अपने स्तनवो सुना रही है कहानीउन पांच दिनों कीये शायद टोटका है उनकापुरस्कारों के वशीकरण काकुछ कविताएं जोचाहती है ज्यादा कुछउन्होंने स्त्री पुरुष के मिलन काकरा...
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  August 9, 2016, 2:22 pm
महज़ब की चीखें होया धर्मों की चिल्लाहटेंउजडती भावना केटूटते रिश्तें पुरानेभ्रमित विश्वास के कारवा मेंउम्मीदें उखडती सी दिखती हैदमन होती लज्जा मेरीयहां गलियों और चौबारों मेंइस दूभर समय में मैंजीती आई हूंहे शिव मैं भी तेरी तरहहर विषपीती आई हूं ।...
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  July 25, 2016, 9:24 pm
सुनो ओमौत केनुमाइंदोतुम डल झीलके किनारे होया हो चिनारो के दरमियाँ,ओढ़े है जो बर्फ की चादरउन पहाड़ो के  पासया शिकारे परबांध रहे हो मनसूबेशिकार केबस एक बारचले जानानूर की मज़ार परशायद नूर के करम सेआने वाली नस्लउग्रवादी,आतंकवादीन कहलाये,बस कहलाये वोआदमी।...
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  July 23, 2016, 3:37 pm
आज फिर पूर्णिमा का चाँद अपनी चांदनी के साथ अठखेलियाँ कर रहा है बिल्कुल उस दिन की ही तरह जब बिरजू की माँ नाँच देखने जा रही थी।गाड़ी गांव से बाहर हो कर धान के खेतों के बगल से जा रही है चाँदनी कातिक की !.......खेतों से धान झरते  फूल की गंध आती है। बाँस की झाड़ी में कही दूद्धी की लता ...
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  July 13, 2016, 11:26 am
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