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डायरी के फूल

.............................................सर्वप्रथम नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.......................................  मेरे मन को बार-बार बेधती तुम्हारी निःशब्द बोलती आँखें .सरे बाजार जो गुजर जाऊं दिल में नश्तर सी चुभोती तुम्हारी निःशब्द बोलती आँखें .                                              इजहार-ए-इश्क को बेक़रार       ...
डायरी के फूल...
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  January 3, 2012, 5:22 pm
सात सुर से अलग एक सुर मै रचूँ,बस तुम्हारे लिएबस  तुम्हारे लिए.तुम भगीरथ बनोमै बनके गंगा बहूँ  बस तुम्हारे लिए बस तुम्हारे लिए चाँद पूनम के तुम बन जा ऐ प्रियेमै रात पूनम बनूँबस तुम्हारे लिए बस तुम्हारेलिएइस धरती की बगियाबहुत है बड़ीमै कली बन खिलीबस तुम्हारे लिए बस तु...
डायरी के फूल...
Tag :kavita
  May 7, 2011, 9:05 pm
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