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Blog: प्रेमरस

Blogger: Shah Nawaz
बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए पुरुषों में "पुरुष" होने का दंभ भी एक कारण है। पुरुषों को बचपन से यह ही यह अहसास दिलाया जाता है कि वह पुरुष होने के कारण महिलाओं से अलग हैं, उनका होना ज्यादा अहमियत रखता है। अगर हम बचपन से बेटों को विशेष होने और लड़कियों को कमतर होने का अहसास कराना बंद कर दें तो स्थिति काफी हद तक सु... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   6:20am 8 Nov 2019 #Social
Blogger: Shah Nawaz
पर्यावरण की रक्षा पर दिल्ली ने दम दिखलाया है। बदलाव बड़ा लाने हेतु #OddEven अपनाया है। गर आज नहीं कोशिश होगी तो भविष्य तबाह हो जाएगा। आने वाली पीढ़ी को यह कर्ज़ा आज चुकाया है। जो कहते हैं कुछ नहीं होता, उन्हें दिल्ली राह दिखाएगी। आओ देखो दुनिया वालो बदलाव यहाँ पर आया है। सेहत वाली सांसों का सपना दिल्ली ने देख... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   4:37am 4 Nov 2019 #Poetry
Blogger: Shah Nawaz
इंसान अकेला ही इस दुनिया में आया है और अकेला ही जाएगा... एक मशहूर कहावत है कि "खाली हाथ आएं है और खाली हाथ जाना है।" फिर भी हम हर वक्त, इसी जुस्तजू में रहते हैं कि कैसे हमारा माल एक का दो और दो का चार हो जाएँ! जबकि सभी जानते हैं कि हम एक मुसाफिर भर हैं, और सफ़र भी ऐसा कि जिसकी हमने तमन्ना भी नहीं की थी। और यह भी पता नहीं... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   10:00am 1 Nov 2019 #Social
Blogger: Shah Nawaz
क्या हमारी महान मातृभाषा "हिन्दी" हमारे अपने ही देश हिंदुस्तान में रोज़गार के अवसरों में बाधक है? बोलनेवालों की संख्या के हिसाब से दुनिया की दूसरे नं॰ की भाषा "हिंदी" अगर अपने ही देश में रोज़गार के अवसरों में बाधक बनी हुई है तो इसका कारण हमारी सोच है. हम अपनी भाषा को उचित स्थान नहीं देते हैं अपितु अंग्रेजी जै... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   4:00am 18 Oct 2019 #Social
Blogger: Shah Nawaz
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है" इत्यादि-इत्यादि.... यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें बनी हुई हैं। जब लोग लोकतंत्र के विरोधी ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   2:55pm 15 Oct 2019 #Politics
Blogger: Shah Nawaz
आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहब की कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें: आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे तालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छ: चमचे रहें माइक रहे माला रहे - अदम गोंडवी हिन्‍... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   10:28am 13 Oct 2019 #Poem
Blogger: Shah Nawaz
यह तो है कि मैं यहाँ तन्हा नहीं तुझसे भी तो पर कोई रिश्ता नहीं तिश्नगी तो है मयस्सर आपकी जुस्तजू दिल में मगर रखता नहीं साज़िशों से जिसकी हों ना यारियां आज कोई भी बशर मिलता नहीं नफरतें इस दौर का तोहफा हुईं दिल किसी का भी यहाँ दुखता नहीं बन गया है मुल्क का जो हुक्मरां ज़ालिमों के साथ वो लड़ता नहीं इ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   4:32am 7 Oct 2019 #Poem
Blogger: Shah Nawaz
भय्या पत्नी की भी अजीब ही महिमा है। पता है कि आप कार्यालय में हैं, अब रोज़ ही जाते हैं तो वहीं होंगे। लेकिन श्रीमती जी का फोन पर एक ही सवाल होता है ‘कहां हो?’। अब बन्दा परेशान! हम भी चुटकी लेने के लिए बोल देते हैं कि ‘झुमरी तलैय्या में’! तो भड़क जाती हैं, ‘सीधे-सीधे नहीं कह सकते कि ऑफिस में हो’। अब श्रीमती जी जब पता ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   5:36am 4 Oct 2019 #Vyangya
Blogger: Shah Nawaz
विचारों में चाहे विरोधाभास हो, आस्था में चाहे विभिन्नताएं हो परन्तु मनुष्य को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए कि बात के महत्त्व का पता चल सके। ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय॥ किसी ने सही कहा है कि अहम् को छोड़ कर मधुरता से सुवचन बोलें जाएँ तो जीवन का सच्चा सुख मिलता है। कभी अंहकार में त... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   6:26am 3 Oct 2019 #Social
Blogger: Shah Nawaz
महिला अधिकारों के हनन के अनेक कारण हो सकते हैं, पर मेरे हिसाब से महिलाओं में शिक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं और इनसे भी बड़ा एक वजह है पौरुषीय दंभ। आइये इसी पर चर्चा करते हैं।... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   12:49pm 1 Oct 2019 #Social
Blogger: Shah Nawaz
प्यार की है फिर ज़रूरत दरमियाँहर तरफ हैं नफरतों की आँधियाँनफरतों में बांटकर हमको यहाँख़ुद वो पाते जा रहे हैं कुर्सियाँखुलके वो तो जी रहे हैं ज़िन्दगीनफ़रतें हैं बस हमारे दरमियाँजबसे देखा है उन्हें सजते हुएगिर रहीं हैं दिल पे मेरे बिजलियाँऔर मैं किसको बताओ क्या कहूँसबस... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   4:27am 12 Jul 2019 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है" इत्यादि-इत्यादि.... ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   7:23am 24 Jun 2019 #politics
Blogger: Shah Nawaz
आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहब की कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें: आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे तालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छ: चमचे रहें माइक रहे माला रहे - अदम गोंडवी... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   9:37am 29 May 2019 #poem
Blogger: Shah Nawaz
महिला अधिकारों के हनन के अनेक कारण हो सकते हैं, पर मेरे हिसाब से महिलाओं में शिक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं और इनसे भी बड़ा एक वजह है पौरुषीय दंभ। आइये इसी पर चर्चा करते हैं।... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   10:02am 27 May 2019 #Social, Tikhibat, Video, समाज
Blogger: Shah Nawaz
उल्फत में इस तरह से निखर जाएंगे एक दिन हम तेरी मौहब्बत में संवर जाएंगे एक दिन एक तेरा सहारा ही बहुत है मेरे लिए वर्ना तो मोतियों से बिखर जाएंगे एक दिन हमने बना लिया है मुश्किलों को ही मंज़िल... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   8:16am 23 May 2019 #
Blogger: Shah Nawaz
उल्फत में इस तरह से निखर जाएंगे एक दिनहम तेरी मौहब्बत में संवर जाएंगे एक दिनएक तेरा सहारा ही बहुत है मेरे लिएवर्ना तो मोतियों से बिखर जाएंगे एक दिनहमने बना लिया है मुश्किलों को ही मंज़िलयूँ ग़म की हर गली से गुज़र जाएंगे एक दिनजिनके लिए लड़ती है उनकी माँ की दुआएँदुनिया भी ड... Read more
clicks 145 View   Vote 1 Like   6:06am 15 Apr 2019 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz
कोई सरकार सिर्फ किसी पार्टी की सरकार भर नहीं होती है बल्कि जनता की प्रतिनिधि होती है और वह अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्षेत्र में काम करती है, उसी के अनुरूप जनता में उसकी जवाबदेही तय होती है और उसी जवाबदेही के अनुसार किये गए कार्यों को लेकर अगले चुनाव में सरकार से संबध... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   4:56am 20 Feb 2019 #राजनीति
Blogger: Shah Nawaz
कल फिर बुलंदशहर में दो लोगों को नफरत की इस राजनीति ने लील लिया, केवल शक के कारण बवाल हुआ, भीड़ में खुद से सज़ा देने की मानसिकता को भरा गया, जिसका हर्जाना दो लोगो को अपनी जान की कुर्बानी देकर चुकाना पड़ा।नफरत की राजनीति का मकसद यह होता है कि लोगों को आपस में दो जगह बाँट दिया ज... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:03am 4 Dec 2018 #
Blogger: Shah Nawaz
महिला अधिकारों के हनन के अनेक कारण हो सकते हैं, पर मेरे हिसाब से महिलाओं में शिक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं और इनसे भी बड़ा एक वजह है पौरुषीय दंभ। आइये इसी पर चर्चा करते हैं।शिक्षा के साथ साथ महिलाओं के अधिकारों के दमन में आर्थिक सशक्तिकरण होना ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:14am 7 Jun 2018 #Tikhibat
Blogger: Shah Nawaz
काफी दिनों से सैफ और करीना खासे परेशान चल रहे थे और उन की परेशानी का सबब था कि देश के इकलौते होनहार बालक तैमूर को पोटी नहीं आना, कई दिनों तक पूरा घर ही नहीं बल्कि पूरा देश परेशान था और देश के न्यूज़ चैनल इस बड़े हादसे को पल-पल कवर कर रहे थे, वोह हम तक यह खबर पहुंचाते रहे कि तैमू... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   4:26am 17 Apr 2018 #
Blogger: Shah Nawaz
यह तो है कि मैं यहाँ तन्हा नहींतुझसे भी तो पर कोई रिश्ता नहींतिश्नगी तो है मयस्सर आपकीजुस्तजू दिल में मगर रखता नहींसाज़िशों से जिसकी हों ना यारियांआज कोई भी बशर मिलता नहींनफरतें इस दौर का तोहफा हुईंदिल किसी का भी यहाँ दुखता नहींबन गया है मुल्क का जो हुक्मरां ज़ालिमों... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   6:23am 20 Dec 2017 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz
मेरी यादों में आके क्या करोगे आस दिल में जगा के क्या करोगे ज़माने का बड़ा छोटा सा दिल है सबसे मिल के मिला के क्या करोगे अगर राहों में ही वीरानियाँ हों इतनी बातें बना के क्या करोगे नफरतें और बढ़ जाएंगी दिल में ऐसी बातों में आ के क्या करोगे जो दिल नाआशना ही हो चुके हों फ़क़त रिश... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   6:20am 15 Dec 2017 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz
आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहबकी कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें:आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहेअपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहेतालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहेआए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहेएक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिएचार छ: चमचे रहें मा... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   8:43am 12 Dec 2017 #
Blogger: Shah Nawaz
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है"इत्यादि-इत्यादि.... यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें ब... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   9:57am 16 Aug 2017 #
Blogger: Shah Nawaz
कट्टरता से नफ़रत, नफ़रत से हिंसा और हिंसा से बर्बादी आती है!किसी समुदाय के नाम, पहनावे या चेहरे-मोहरे को देखकर या फिर गौमाँस जैसे इल्जाम पर कट्टरपंथी तत्व लोगों को खुलेआम मार रहे हैं और ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, जबकि उनसे कहीं बड़ी भीड़ उन बाज़ारों में या फिर ट्रेनों में म... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   11:20am 11 Aug 2017 #Social
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