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Blog: राजभाषा हिंदी

Blogger: मनोज कुमार
विंडोज आधारित सिस्‍टम में गुगल वाइस टाइपिंगहममें से अधिकांश लोगों को टंकण करना काफी श्रमसाध्‍य एवं उबाऊ कार्य लगता है और हम सभी यह सेाचते हैं कि व्‍यक्ति की आवाज सुन कर पाठ्य टाइप हो जाए तो कितना अच्‍छा होगा। गुगल कम्‍पनी यह सुविधा सभी के लिए निशुल्क प्रदान करती है। ... Read more
clicks 334 View   Vote 0 Like   5:20am 6 Dec 2015 #
Blogger: मनोज कुमार
गुगल वाइस टाइपिंग                                                              - संतोष कुमार गुप्‍ता हममें से अधिकांश लोगों को टंकण करना काफी श्रमसाध्‍य एवं उबाऊ कार्य लगता है। इस समस्‍या का समाधान विंडोज़, एंड्रायड तथा मैक आधारित विविध वा... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   12:30am 15 Oct 2015 #
Blogger: मनोज कुमार
डिजिटल लॉकर संतोष कुमार गुप्‍ता कनिष्‍ठ हिन्‍दी अनुवादकसूचना क्रॉंति के इस युग में दस्‍तावेजों को सुरक्षित रखना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। सुरक्षा एवं सुविधा,दोनों की दृष्टि से यह कार्य महत्‍वपूर्ण है। डिजिटल लॉकर में आवश्‍यक दस्‍तावेज संचित करने पर उप... Read more
clicks 301 View   Vote 0 Like   3:26pm 3 Jul 2015 #
Blogger: मनोज कुमार
'हाय, कर्ण, तू क्यों जन्मा था? जन्मा तो क्यों वीर हुआ?कवच और कुण्डल-भूषित भी तेरा अधम शरीर हुआ?धँस जाये वह देश अतल में, गुण की जहाँ नहीं पहचान?जाति-गोत्र के बल से ही आदर पाते हैं जहाँ सुजान?'नहीं पूछता है कोई तुम व्रती , वीर या दानी हो?सभी पूछते मात्र यही, तुम किस कुल के अभिमानी ... Read more
Blogger: मनोज कुमार
वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्‌ग उठाता है,मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।सीमित जो रख सके खड्‌ग को, पास उसी को आने दो,विप्रजाति के सिवा किसी को मत तलवार उठाने दो।'जब-जब मैं शर-चाप उठा कर करतब कुछ दिखलाता हूँ,सुनकर आशीर्वाद देव का, धन्य-धन्य हो जाता हूँ।'जियो, ज... Read more
Blogger: मनोज कुमार
वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्‌ग उठाता है,मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।सीमित जो रख सके खड्‌ग को, पास उसी को आने दो,विप्रजाति के सिवा किसी को मत तलवार उठाने दो।'जब-जब मैं शर-चाप उठा कर करतब कुछ दिखलाता हूँ,सुनकर आशीर्वाद देव का, धन्य-धन्य हो जाता हूँ।'जियो, ज... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   4:34am 22 Apr 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
वीर वही है जो कि शत्रु पर जब भी खड्‌ग उठाता है,मानवता के महागुणों की सत्ता भूल न जाता है।सीमित जो रख सके खड्‌ग को, पास उसी को आने दो,विप्रजाति के सिवा किसी को मत तलवार उठाने दो।'जब-जब मैं शर-चाप उठा कर करतब कुछ दिखलाता हूँ,सुनकर आशीर्वाद देव का, धन्य-धन्य हो जाता हूँ।'जियो, ज... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   4:34am 22 Apr 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
सिर था जो सारे समाज का, वही अनादर पाता है।जो भी खिलता फूल, भुजा के ऊपर चढ़ता जाता है।चारों ओर लोभ की ज्वाला, चारों ओर भोग की जय;पाप-भार से दबी-धँसी जा रही धरा पल-पल निश्चय।'जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जबतक पद पायेंगे।अशन-वसन स... Read more
Blogger: मनोज कुमार
सिर था जो सारे समाज का, वही अनादर पाता है।जो भी खिलता फूल, भुजा के ऊपर चढ़ता जाता है।चारों ओर लोभ की ज्वाला, चारों ओर भोग की जय;पाप-भार से दबी-धँसी जा रही धरा पल-पल निश्चय।'जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जबतक पद पायेंगे।अशन-वसन स... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   12:00am 15 Apr 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
सिर था जो सारे समाज का, वही अनादर पाता है।जो भी खिलता फूल, भुजा के ऊपर चढ़ता जाता है।चारों ओर लोभ की ज्वाला, चारों ओर भोग की जय;पाप-भार से दबी-धँसी जा रही धरा पल-पल निश्चय।'जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जबतक पद पायेंगे।अशन-वसन स... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   12:00am 15 Apr 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
टैबलेट में हिन्‍दी गुगल इंस्‍टालेशनसूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही बाजार में दिन प्रतिदिन नए-नए इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट आ रहे हैं इनमें सर्वाधिक प्रचलित हैं टैबलेट्स तथा स्‍मार्ट फोन । इस अंक में टैबलेट्स में गुगल हिन्‍दी एप्पलिकेशन इंस्‍टॉल करने संबंधी जानका... Read more
clicks 485 View   Vote 0 Like   2:30am 13 Apr 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
खड्‌ग बड़ा उद्धत होता है, उद्धत होते हैं राजे,इसीलिए तो सदा बनाते रहते वे रण के बाजे।और करे ज्ञानी ब्राह्मण क्या? असि-विहीन मन डरता है,राजा देता मान, भूप का वह भी आदर करता है।'सुनता कौन यहाँ ब्राह्मण की, करते सब अपने मन की,डुबो रही शोणित में भू को भूपों की लिप्सा रण की।औ' रण ... Read more
Blogger: मनोज कुमार
कर्ण मुग्ध हो भक्ति-भाव में मग्न हुआ-सा जाता है,कभी जटा पर हाथ फेरता, पीठ कभी सहलाता है,चढें नहीं चीटियाँ बदन पर, पड़े नहीं तृण-पात कहीं,कर्ण सजग है, उचट जाय गुरुवर की कच्ची नींद नहीं।'वृद्ध देह, तप से कृश काया , उस पर आयुध-सञ्चालन,हाथ, पड़ा श्रम-भार देव पर असमय यह मेरे कारण।क... Read more
clicks 301 View   Vote 0 Like   11:30pm 24 Mar 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
श्रद्धा बढ़ती अजिन-दर्भ पर, परशु देख मन डरता है,युद्ध-शिविर या तपोभूमि यह, समझ नहीं कुछ पड़ता है।हवन-कुण्ड जिसका यह उसके ही क्या हैं ये धनुष-कुठार?जिस मुनि की यह स्रुवा, उसी की कैसे हो सकती तलवार?आयी है वीरता तपोवन में क्या पुण्य कमाने को?या संन्यास साधना में है दैहिक शक्... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   11:30pm 17 Mar 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
शीतल, विरल एक कानन शोभित अधित्यका के ऊपर,कहीं उत्स-प्रस्त्रवण चमकते, झरते कहीं शुभ निर्झर।जहाँ भूमि समतल, सुन्दर है, नहीं दीखते है पाहन,हरियाली के बीच खड़ा है, विस्तृत एक उटज पावन।आस-पास कुछ कटे हुए पीले धनखेत सुहाते हैं,शशक, मूस, गिलहरी, कबूतर घूम-घूम कण खाते हैं।कुछ तन्... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   11:30pm 10 Mar 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
जनमे नहीं जगत् में अर्जुन! कोई प्रतिबल तेरा,टँगा रहा है एक इसी पर ध्यान आज तक मेरा।एकलव्य से लिया अँगूठा, कढ़ी न मुख से आह,रखा चाहता हूँ निष्कंटक बेटा! तेरी राह।'मगर, आज जो कुछ देखा, उससे धीरज हिलता है,मुझे कर्ण में चरम वीरता का लक्षण मिलता है।बढ़ता गया अगर निष्कंटक यह उद्... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   11:30pm 3 Mar 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
'करना क्या अपमान ठीक है इस अनमोल रतन का,मानवता की इस विभूति का, धरती के इस धन का।बिना राज्य यदि नहीं वीरता का इसको अधिकार,तो मेरी यह खुली घोषणा सुने सकल संसार।'अंगदेश का मुकुट कर्ण के मस्तक पर धरता हूँ।एक राज्य इस महावीर के हित अर्पित करता हूँ।'रखा कर्ण के सिर पर उसने अपन... Read more
clicks 282 View   Vote 0 Like   11:30pm 24 Feb 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
फिरा कर्ण, त्यों 'साधु-साधु' कह उठे सकल नर-नारी,राजवंश के नेताओं पर पड़ी विपद् अति भारी।द्रोण, भीष्म, अर्जुन, सब फीके, सब हो रहे उदास,एक सुयोधन बढ़ा, बोलते हुए, 'वीर! शाबाश !'द्वन्द्व-युद्ध के लिए पार्थ को फिर उसने ललकारा,अर्जुन को चुप ही रहने का गुरु ने किया इशारा।कृपाचार... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   11:30pm 24 Feb 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
आज से प्रति सोमवार रामधारी दिनकर द्वारा रचित " रश्मिरथी " यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा .... आभार रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है । जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,जिस नर में भी बसे, हमारा न... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   11:30pm 17 Feb 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
आज से प्रति सोमवार रामधारी दिनकर द्वारा रचित " रश्मिरथी " यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा .... आभार रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है । जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,जिस नर में भी बसे, हमारा ... Read more
clicks 354 View   Vote 0 Like   11:30pm 17 Feb 2013 #रश्मिरथी / दिनकर
Blogger: मनोज कुमार
आज से प्रति सोमवार रामधारी दिनकर द्वारा रचित "रश्मिरथी "यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा .... आभार रश्मिरथी का अर्थ होता है वह व्यक्ति, जिसका रथ रश्मि अर्थात पुण्य का हो । इस काव्य में रश्मिरथी नाम कर्ण का है । जय हो'जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,जिस नर में भी बसे, हमारा नम... Read more
clicks 339 View   Vote 0 Like   11:30pm 17 Feb 2013 #
Blogger: मनोज कुमार
प्रेरक प्रसंग-40यह गाजा-बाजा किसलिए?1930 के अप्रैल के महीने की बात है। गांधी जी के नेतृत्व में दाण्डी कूच (नमक सत्याग्रह) पूरा हो चुका था और अब खजूर का पेड़ काटने का सत्याग्रह चल रहा था। कराडी नामक गांव में पड़ाव था। एक छोटी सी झोपड़ी में गांधी जी रहते थे। एक दिन सुबह-सुबह गांव व... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   12:30am 22 Jan 2013 #मनोज कुमार
Blogger: मनोज कुमार
जन्म -- 27 नवंबर 1907 निधन -- 18 जनवरी 2003 मधुशाला ..... भाग ---16मेरी हाला में सबने पाई अपनी-अपनी हाला,मेरे प्याले में सबने पाया अपना-अपना प्याला,मेरे साकी में सबने अपना प्यारा साकी देखा,जिसकी जैसी रुचि थी उसने वैसी देखी मधुशाला।।१३१।यह मदिरालय के आँसू हैं, नहीं-नहीं मादक हाला,यह मदि... Read more
Blogger: मनोज कुमार
जन्म -- 27 नवंबर 1907 निधन -- 18 जनवरी 2003 मधुशाला ..... भाग ---15वह हाला, कर शांत सके जो मेरे अंतर की ज्वाला, जिसमें मैं बिंबित - प्रतिबिम्बित  प्रतिपल, वह मेरा प्याला,मधुशाला वह नहीं जहाँ पर मदिरा बेची जाती है,भेंट जहाँ मस्ती की मिलती मेरी तो वह मधुशाला।।१२१।मतवालापन हाला से ले मैंने ... Read more
Blogger: मनोज कुमार
जन्म -- 27 नवंबर 1907 निधन -- 18 जनवरी 2003 मधुशाला ..... भाग ---14 जला हृदय की भट्टी खींची मैंने आँसू की हाला,छलछल छलका करता इससे पल पल पलकों का प्याला,आँखें आज बनी हैं साकी, गाल गुलाबी पी होते,कहो न विरही मुझको, मैं हूँ चलती फिरती मधुशाला!।१११।कितनी जल्दी रंग बदलती है अपना चंचल हाला,कित... Read more
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